‘चारों आतंकी अब भी फरार’ प्रियंका चतुर्वेदी ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता पर उठाए सवाल”

संसद में सोमवार जम्मू-कश्मीर में हुए पहलगाम आतंकी हमले और भारत के जवाबी सैन्य अभियान ऑपरेशन सिंदूर पर विशेष चर्चा होनी है. इस बीचशिवसेना (उद्धव गुट) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भारत की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि पाकिस्तान समर्थित आतंकियों के खिलाफ कीगई तमाम कार्रवाइयों के बावजूद पहलगाम हमले में शामिल चारों आतंकी अब भी फरार हैं. उन्होंने कहा कि हम सभी जानना चाहते हैं कि खुफिया तंत्रमें चूक कहां हुई. पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर का भाषण हमला होने से पहले ही हो चुका था, फिर हम सतर्क क्यों नहीं हुए? उन्होंने कहाकि हमले में लोगों को उनके धर्म पूछकर मारा गया ताकि देश में माहौल बिगाड़ा जा सके, लेकिन भारतीयों ने एकजुटता दिखाकर उस साजिश कोनाकाम कर दिया. बता दें कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर ने ओवरसीज पाकिस्तानिज सम्मेलन में कहा था कि पाकिस्तान और भारत हरमामले में अलग हैं। धर्म, परंपरा, सोच और महत्वाकांक्षाएं। उन्होंने 1947 की टू-नेशन थ्योरी का जिक्र करते हुए पाकिस्तानी नागरिकों से कहा था किवे अपने बच्चों को हिंदू-मुस्लिम के बीच अंतर सिखाएं. कई उठाए कदमप्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि भारत सरकार ने हमले के बाद कई कड़े कदम उठाए. इसके तहत सिंधु जल संधि को निलंबित किया गया, पाकिस्तानीमीडिया चैनलों, सोशल मीडिया अकाउंट्स और क्रिकेटरों पर प्रतिबंध लगाया गया. व्यापार और द्विपक्षीय वार्ताएं रोकी गईं और विभिन्न देशों मेंराजनीतिक दलों के प्रतिनिधिमंडल भेजे गए. लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि इतने कदमों के बावजूद चारों आतंकी अभी तक नहीं पकड़े गए हैं औरइससे ऑपरेशन सिंदूर की सफलता पर सवाल उठते हैं. ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कांग्रेस नेता पी चिदंबरम के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंनेकहा कि चिदंबरम जी कई मंत्रालयों में काम कर चुके हैं. गृहमंत्री भी रह चुके हैं भारत-पाकिस्तान के पिछले 70 वर्षों के इतिहास को देखें, तो हमें नयुद्ध का सबूत चाहिए, न आतंकवाद का सब पाकिस्तान के ही कारण हुआ है. पहलगाम आतंकी हमले को लेकर कांग्रेस नेता और पूर्व गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने कहा था कि कोई सबूत नहीं है कि हमलावर पाकिस्तान से आए थे। इस पर शिवसेना (उद्धव गुट) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने तीखीप्रतिक्रिया दी है. जोरदार बहस की है उम्मीदउन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच आगामी एशिया कप क्रिकेट मैच पर भी आपत्ति जताई और कहा कि अगर भारत और पाकिस्तान दुनिया में कहींभी क्रिकेट मैच खेलते हैं, तो यह देश के हित में नहीं होगा. प्रियंका चतुर्वेदी ने चेतावनी दी कि पाकिस्तान के साथ किसी भी प्रकार का सामान्य रिश्तादेश की सुरक्षा नीति के खिलाफ हो सकता है. गौरतलब है कि बीते 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोषनागरिक मारे गए थे. इसके बाद भारत ने पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (पीओजेके) में आतंकवादी ठिकानों पर सटीक हमले किए, जिसे’ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिया गया. अब संसद में इस पूरे मामले को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच जोरदार बहस की उम्मीद है.
भारत–ब्रिटेन व्यापार समझौते पर सरकार की बड़ी पहल 20 दिन में 1,000 से अधिक कार्यक्रम, उद्योगों और राज्यों को किया जाएगा जागरूक

सरकार भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते पर उद्योग और राज्यों को संवेदनशील बनाने की तैयारी कर रही है। अगले 20 दिनों में देशभर में हितधारकबैठकों, कार्यशालाओं और जागरूकता अभियान सहित 1,000 से अधिक कार्यक्रम आयोजित होगा. इसका उद्देश्य 24 जुलाई को हस्ताक्षरित व्यापकआर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना तथा इससे अधिकतम लाभ प्राप्त करना है. सूत्रों के मुताबिक, क्षेत्रवारकार्यक्रम आयोजित होंगे। टीमें विभिन्न राज्यों का दौरा करके उन्हें इस व्यापार समझौते के लाभों से अवगत कराएंगी. वस्त्र क्षेत्र के साथ करेंगें बैठकवाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल सोमवार को चमड़ा और वस्त्र क्षेत्र के साथ बैठक करेंगे. इस समझौते के लागू होने पर 99 प्रतिशत भारतीयनिर्यात ब्रिटेन में शुल्क मुक्त हो जाएगा. इससे कार, सौंदर्य प्रसाधन और व्हिस्की जैसे ब्रिटिश उत्पादों पर शुल्क भी कम हो जाएगा. इस समझौते कालक्ष्य 2030 तक विश्व की पांचवीं और छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच 56 अरब डॉलर के व्यापार को दोगुना करना है. भारत ने चॉकलेट, बिस्कुट और सौंदर्य प्रसाधनों सहित विभिन्न उपभोक्ता वस्तुओं के लिए अपना बाजार खोल दिया है. यूके में होगा 99% शुल्क मुक्त99% भारतीय निर्यात अब यूके में शुल्क मुक्त होगा, जिससे वस्त्र, चमड़ा, कृषि, आईटी सेवा, ऑटो कंपोनेंट और समुद्री उत्पादों को बड़ी बाजार पहुँचमिलेगी ब्रिटिश उत्पादों जैसे कार, व्हिस्की, सौंदर्य प्रसाधन पर शुल्क में कमी आएगी; कारों पर शुल्क धीरे-धीरे घटाकर 2031 तक 10% तक सीमितकिया जाएगा सेवाएँ और पेशेवर गतिशीलता: योगा प्रशिक्षक, कलाकार, डिज़ाइनर, इंजीनियर जैसे पेशेवरों के लिए यूके में अवसर बढ़ेंगे; सामाजिकसुरक्षा समझौते के तहत नेशनल इंश्योरेंस छूटें भी मिलेगी ब्रिटिश ऑटोमोटिव निर्माता कुछ क्षेत्रों में असंतुष्ट: पेट्रोल-डीज़ल वाहनों पर शुल्क अभी बनीरहेगी; क्वोटा सिस्टम (20,000 वाहन first year) लागू रहेगा 20 दिनों में 1,000 से अधिक जागरूकता कार्यक्रम: हितधारक बैठकों, फीडबैकसेशंस और सेक्टर-वाइज कार्यशालाएँ जारी रहेंगी. पीयूष गोयल सोमवार को चमड़ा एवं वस्त्र क्षेत्र के साथ विशेष बैठक करेंगेटीमें राज्यों का दौराकरेंगी और उद्योगों को समझौते से मिलने वाले लाभों से अवगत कराएंगी ब्रिटिश ऑटो निर्माता कुछ मामलों में असंतुष्ट: पेट्रोल-डिज़ल वाहनों परशुल्क अभी भी लागू रहेगा; पहले वर्ष में क्वोटा प्रणाली (20,000 वाहन) लागू होगी.
त्रिपुरा में ‘मन की बात’ के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमला, CM माणिक साहा ने सहयोगी टिपरा मोथा को ठहराया जिम्मेदार पार्टी ने किया इनकार

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने खोवाई जिले में भाजपा कार्यकर्ताओं पर हुए हमले के लिए सहयोगी तिपुरा मोथा को जिम्मेदार ठहराया है. सीएमने रविवार को कहा कि उन्होंने पुलिस को दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है. यह हमला रविवार सुबह चंपाहोवर थाना क्षेत्र केएक दूर-दराज के आदिवासी गांव आश्रमबाड़ी में हुआ. मुख्यमंत्री साहा हमले में घायल भाजपा कार्यकर्ताओं से मिलने के लिए रात को अगरतला केजीबी पंत अस्पताल पहुंचे. सीएम साहा ने फेसबुक पर पोस्ट में कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम के दौरान आश्रमबाड़ी में टिपरामोथा पार्टी के कार्यकर्ताओं ने हिंसक और अलोकतांत्रिक हमला किया, जिसकी मैं कड़ी निंदा करता हूं. उन्होंने आगे कहा कि कई भाजपा कार्यकर्ताघायल हुए हैं जिनमें से तीन का जीबी अस्पताल में इलाज चल रहा है. उन्होंने कहा कि मैंने अस्पताल का दौरा किया है. डॉक्टरों को सर्वोत्तम देखभालप्रदान करने के निर्देश दिए और पुलिस को अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि इस तरह के घृणित कृत्यबर्दाश्त नहीं किए जाएंगे. संलिप्तता से किया इन्कारहालांकि टिपरा मोथा पार्टी ने इस हमले में अपनी किसी भी तरह की भूमिका से इनकार किया है. यह पार्टी त्रिपुरा में भाजपा सरकार की सहयोगी हैऔर प्रद्योत देबबर्मा इसके नेता हैं. वन मंत्री और टिपरा मोथा के नेता अनिमेष देबबर्मा ने घटना में पार्टी की संलिप्तता से इनकार किया. उन्होंने दावाकिया, ‘मुझे नहीं पता कि भाजपा ने क्या कहा है. हम अपने सहयोगियों के नेताओं, कार्यकर्ताओं या समर्थकों पर हमला नहीं करते ऐसी स्थिति पैदाकरने की कोई साजिश हो सकती है. पार्टी किसी भी तरह से इस हमले में शामिल नहीं है. खोवाई कुडियारासु के उप-विभागीय पुलिस अधिकारी(एसडीपीओ) के मुताबिक, भाजपा कार्यकर्ता ‘मन की बात’ कार्यक्रम सुनने के लिए एक घर में इकट्ठा हुए थे, तभी कुछ उपद्रवियों ने उन पर हमला करदिया, जिसमें तीन लोग घायल हुए. उन्हें इलाज के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया. पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में यह बातसामने आई है कि हमला किसी आपसी रंजिश की वजह से हुआ था, न कि ‘मन की बात’ कार्यक्रम की वजह से एक प्राथमिकी दर्ज की गई है औरजांच जारी है. अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है.भाजपा जनजातीय मोर्चा के महासचिव बिपिन देबबर्मा ने दावा किया कि इस हमले में उनके सातकार्यकर्ता घायल हुए हैं. 10 मोटरसाइकिलों का गया है जलायापुलिस ने यह भी बताया कि हमलावरों ने भाजपा कार्यकर्ताओं की तीन गाड़ियां और 10 मोटरसाइकिलों को जला दिया. त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिकसाहा ने खोवाई जिले में भाजपा कार्यकर्ताओं पर हुए हमले के लिए सहयोगी तिपुरा मोथा को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने भरोसा दिया कि मामले मेंकड़ी कार्रवाई की जाएगी. वहीं, त्रिपुरा मोथा ने हमले में अपनी किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है. यह हमला उस समय हुआ जबभाजपा कार्यकर्ता प्रधानमंत्री मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम को सुनने के लिए एक घर में इकट्ठा थे इस घटना में 7–9 भाजपा कार्यकर्ता घायल हुएऔर उनकी कई गाड़ियाँ—लगभग 8 मोटरसाइकिल और 2 कारें—को भी आगिल वा भग करा दिया गया. विपक्षी भाजपा जनजातीय मोर्चा केमहासचिव बिपिन देबबर्मा ने कहा कि Tipra Motha कार्यकर्ता तेज-तर्रार हथियारों से लैस थे जैसे लाठी तेज़ हथियार आदि, और उन्होंने जानबूझकर हमला किया. घटना की प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि हिंसा राजनैतिक वजह से नहीं, बल्कि स्थानीय आपसी रंजिश की वजह से होसकती है. पुलिस ने इस बाबत एफआईआर दर्ज कर ली है, लेकिन अब तक किसी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है.
कांग्रेस ने संसद में पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर पर 3 दिन की बहस के लिए सांसदों को व्हिप जारी, हंगामे के भी आसार

कांग्रेस ने अपने लोकसभा सांसदों को सोमवार से अगले तीन दिनों तक संसद में मौजूद रहने का निर्देश दिया है. इस संबंध में पार्टी ने व्हिप जारी कियाहै इन तीन दोनों में संसद में पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर जैसे गंभीर मुद्दों पर बहस होनी है ऑपरेशन सिंदूर पर बहस के दौरान सदन मेंहंगामे के आसार हैं. सूत्रों के अनुसार, बहस के पहले दिन सदन में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई विपक्षी दल का नेतृत्व करेंगे. भाजपा के नेतृत्व वालेसत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और विपक्ष राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े इन दो मुद्दों पर आमने-सामने होंगे. एनडीए औरविपक्षी दलों द्वारा लोकसभा और राज्यसभा में चर्चा के दौरान अपने शीर्ष नेताओं को मैदान में उतारने की उम्मीद है.कांग्रेस ने अपने सांसदों को व्हिप जारी कर यह निर्देश इसलिए दिया है. ताकि कोई भी अहम मुद्दा बिना उनकी भागीदारी के न छूटे. सूत्रों के मुताबिक, सरकार की तरफ से गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर संसद में इन मुद्दों पर बोलेंगे। ऐसे संकेत हैं किप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आतंकवाद के खिलाफ अपनी सरकार के मजबूत रुख से अवगत कराने के लिए हस्तक्षेप कर सकते हैं. हंगामे के आसारगौरतलब है कि संसद के मानसून सत्र का पहला सप्ताह बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और अन्य मुद्दों पर विपक्ष केविरोध के कारण लगभग बेकार चला गया. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने 25 जुलाई को कहा कि विपक्ष सोमवार को लोकसभा में और मंगलवारको राज्यसभा में पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा शुरू करने पर सहमत हो गया है. दोनों पक्षों ने प्रत्येक सदन में 16 घंटे की मैराथन बहसके लिए सहमति व्यक्त की है. जो व्यवहार में हमेशा लंबी खिंचती है। कांग्रेस ने अपने लोकसभा सांसदों के लिए व्हिप जारी किया है. पार्टी ने सोमवारसे तीन दिनों तक उन्हें लोकसभा में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। इस दौरान संसद में पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर पर बहस होनीहै इस दौरान हंगामे के आसार हैं. रणनीति कहा है हिस्साकांग्रेस ने अपने सांसदों को व्हिप जारी कर सुनिश्चित किया है कि सभी प्रमुख सांसद मौजूद रहें और पूरी ताकत से बहस में हिस्सा लें. यह विपक्ष कीमजबूती और सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है कांग्रेस उपनेता गौरव गोगोई बहस के पहले दिन विपक्ष का नेतृत्व करेंगे और यह मानाजा रहा है कि वे सरकार की खुफिया विफलताओं और जवाबी कार्रवाई की सीमाओं पर सवाल उठाएंगे. ऑपरेशन सिंदूर और आतंकवाद जैसेसंवेदनशील मुद्दों पर बहस के दौरान सदन में भावुकता और तनाव बढ़ने की संभावना है. विपक्ष सरकार की सुरक्षा नीति को चुनौती दे सकता है, वहींसरकार अपनी कार्रवाई का बचाव करेगी.
मराठी मानुष और तीन भाषा नीति पर बनी सहमति, 20 साल बाद साझा मंच—गठबंधन की ओर बढ़ते कदम या सिर्फ राजनीतिक संकेत?

महाराष्ट्र की राजनीति में ठाकरे बंधुओं की नजदीकी लगातार बढ़ रही है इसकी बानगी रविवार को एक बार फिर देखने को मिली जब मनसे प्रमुख राजठाकरे, उद्धव ठाकरे को जन्मदिन की बधाई देने मातोश्री पहुंचे. गौरतलब है कि राज ठाकरे करीब 13 साल बाद मातोश्री पहुंचे. इससे पहले राज ठाकरेसाल 2012 में मातोश्री पहुंचे थे. उस वक्त उद्धव ठाकरे की एंजियोप्लास्टी हुई थी, तब राज ठाकरे ने मातोश्री पहुंचकर शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धवठाकरे का हालचाल जाना था. राज ठाकरे ने साल 2005 में शिवसेना छोड़ी थी और शिवसेना छोड़ने के बाद से आज से पहले तक राज ठाकरे सिर्फएक ही बार मातोश्री गए थे. यही वजह है कि जब रविवार को राज ठाकरे मातोश्री पहुंचे तो महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारे में इसकी खूब चर्चा हो रहीहै. दोनों भाइयों की इस मुलाकात को रिश्तों में जमी बर्फ के तेजी से पिघलने के तौर पर देखा जा रहा है. उद्दव के साथ जमीन पर आने की तैयारीमहाराष्ट्र में मराठी मानुष और तीन भाषा नीति के मुद्दे पर हुई राजनीति ने राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के साथ आने की जमीन तैयार की. एक इंटरव्यू मेंराज ठाकरे ने मराठी मानुष के मुद्दे पर उद्धव ठाकरे के साथ आने के संकेत दिए. जिस पर उद्धव ठाकरे ने भी सकारात्मक जवाब दिया. हालांकि इसकेबाद दोनों पार्टियों की तरफ से हुई बयानबाजी से थोड़ी संशय की स्थिति बनी, लेकिन जैसे ही सरकार ने तीन भाषा नीति के अपने स्टैंड से पीछे हटनेका एलान किया तो शिवसेना यूबीटी और मनसे ने इसे अपनी जीत के तौर पर पेश किया. इसके बाद मनसे और शिवसेना यूबीटी की संयुक्त रैली काएलान किया गया. 5 जुलाई को मुंबई में हुई इस रैली में 20 साल बाद दोनों भाई राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे एक मंच पर दिखाई दिए थे. संयुक्तरैली में साथ आने के बाद जब ऐसा लग रहा था कि दोनों भाई आगामी निकाय चुनाव में गठबंधन कर सकते हैं. तो तभी हाल ही में उद्धव ठाकरे ने एकबयान से चौंका दिया. फैसला किया जाएगा हालात देखकरदरअसल उन्होंने शिवसेना यूबीटी से गठबंधन के सवाल पर कोई टिप्पणी नहीं की उन्होंने कहा कि निकाय चुनाव में गठबंधन का फैसला हालातदेखकर किया जाएगा. अब राज ठाकरे के मातोश्री पहुंचने से दोनों पार्टियों के उन कार्यकर्ताओं और समर्थकों को काफी राहत पहुंची होगी, जो मनसेऔर शिवसेना के बीच गठबंधन चाहते हैं. रविवार को राज ठाकरे मातोश्री पहुंचे तो महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारे में इसकी खूब चर्चा शुरू हो गई. दोनों भाइयों की इस मुलाकात को रिश्तों में जमी बर्फ के तेजी से पिघलने और मनसे और शिवसेना यूबीटी के संभावित गठबंधन से जोड़कर देखा जारहा है. दो दशक बाद दोनों भाई एक मंच पर आए. यह न केवल प्रतीकात्मक था, बल्कि यह दर्शाता है कि दोनों दलों के बीच संवाद और सहमति बढ़रही है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या मनसे और शिवसेना यूबीटी आगामी लोकल बॉडी और विधानसभा चुनावों में कांग्रेस-एनसीपी गठबंधनका हिस्सा बनेंगे या एक स्वतंत्र मराठी राष्ट्रवादी मोर्चा बनाएंगे.
संसद में ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम हमले पर बहस से पहले कांग्रेस का सरकार पर हमला, ट्रंप के दावे और रणनीतिक चूकों को बनाया मुद्दा

संसद के मॉनसून सत्र में सोमवार को लोकसभा और मंगलवार को राज्यसभा में पहलगाम आतंकी हमले और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर खास बहस होने जारही है. इससे पहले कांग्रेस ने सरकार को घेरने की रणनीति बना ली है. पार्टी ने रविवार को ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े उन तमाम घटनाक्रमों को सामनेरखा, जो अब तक चर्चा में थे लेकिन औपचारिक बहस से बाहर रहे. खास बात यह रही कि कांग्रेस ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे कोभी मुद्दा बनाया है जिसमें उन्होंने कहा कि उन्होंने भारत पर व्यापार रोकने की धमकी देकर ऑपरेशन सिंदूर को रुकवाया. कांग्रेस नेता जयराम रमेश नेएक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद कांग्रेस ने तुरंत दो दिन का विशेष सत्र बुलाने की मांग की थी, लेकिन सरकार ने तब कोई सुनवाई नहीं की. रमेश ने कहा कि अभी जो 16 घंटे की बहस लोकसभा में और उसके बाद राज्यसभा में होने जा रही है, वहदेर से हो रही है लेकिन अच्छा है कि हो रही है. हुईं है रणनीतिक चूंकेंरमेश ने बताया कि 30 मई को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने सिंगापुर में स्वीकार किया था कि ऑपरेशन सिंदूर के पहले दो दिनरणनीतिक चूकें हुईं. इसके बाद 29 जून को इंडोनेशिया में भारतीय रक्षा अधिकारी ग्रुप कैप्टन शिव कुमार ने संकेत दिया कि राजनीतिक हस्तक्षेप केचलते ऑपरेशन प्रभावित हुआ और भारतीय वायुसेना को भी नुकसान उठाना पड़ा। जयराम रमेश ने आगे बताया कि चार जुलाई को डिप्टी चीफ ऑफआर्मी स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने खुलासा किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत को चीन से तकनीकी और सामरिक टकराव का सामनाकरना पड़ा. वहीं, 14 जुलाई को जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सार्वजनिक रूप से कहा कि पहलगाम आतंकी हमला सुरक्षा एजेंसियोंकी विफलता का नतीजा था. और वो इसकी जिम्मेदारी लेते हैं. कांग्रेस ने ट्रंप के बार-बार किए जा रहे उस दावे को भी मुद्दा बनाया जिसमें वे कहते रहेकि उन्होंने भारत को व्यापारिक धमकी देकर ऑपरेशन सिंदूर रुकवाया. सेना प्रमुख को बुलाया मंच पररमेश ने यह भी कहा कि ट्रंप ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख को लंच पर बुलाया, जो अभूतपूर्व है. अमेरिकी कमांड और विदेश मंत्री द्वारा पाकिस्तान कीआतंकवाद विरोधी भूमिका की तारीफ पर भी सवाल खड़े किए गए हैं. कांग्रेस ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय मीडिया के एक वर्ग पर भी निशानासाधा और कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय के मीडिया मैनेजर्स ने ‘मनगढ़ंत नैरेटिव’ गढ़वाया, जो केवल घरेलू दर्शकों के बीच ही चला. रमेश ने कहा किअब जबकि संसद में बहस हो रही है, विपक्ष पूरी तैयारी के साथ सरकार को कटघरे में खड़ा करेगा. संसद में ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम हमले परविशेष बहस से पहले कांग्रेस ने सरकार पर तीखे सवाल उठाए हैं. पार्टी ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के ऑपरेशन रुकवाने के 26 बार दावेदारी करने कोगंभीर बताया है. कांग्रेस ने सेना अधिकारियों और एलजी मनोज सिन्हा के बयानों का हवाला देकर रणनीतिक चूक, राजनीतिक हस्तक्षेप और सुरक्षाविफलता को मुद्दा बनाया है.
‘मन की बात’ में PM मोदी ने खुदीराम बोस को दी श्रद्धांजलि, कहा– 18 साल की उम्र में जो बलिदान दिया, आज भी है वह हमारे लिए प्रेरणा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के ताजा एपिसोड में रविवार को स्वतंत्रता संग्राम के वीर सपूत खुदीराम बोस कोयाद किया. उन्होंने कहा कि खुदीराम बोस ने बहुत ही कम उम्र में देश के लिए बलिदान दिया, जो आज भी हम सभी को प्रेरणा देता है. पीएम मोदी नेबताया कि यह घटना 11 अगस्त 1908 की है. उस दिन का सुबह का वक्त था और जगह थी बिहार का मुजफ्फरपुर शहर अंग्रेज सरकार ने खुदीरामबोस को फांसी देने की तैयारी कर ली थी. आज भी हमें है गर्वपीएम मोदी ने कहा कि जेल के अंदर अंग्रेज अफसर एक 18 साल के युवा को फांसी देने की तैयारी में थे. लेकिन उस युवा के चेहरे पर कोई डर नहींथा वहां सिर्फ और सिर्फ गर्व था, वही गर्व जो किसी को देश के लिए मर-मिटने पर होता है. उन्होंने बताया कि उस वक्त जेल के बाहर हजारों लोगजमा थे. हर गली, हर चौराहा शांत था, लोगों की आंखों में आंसू थे, लेकिन दिलों में गुस्सा और जोश था. वे सब एक ऐसे वीर को अंतिम विदाई देनेआए थे जिसने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी.प्रधानमंत्री ने कहा कि खुदीराम बोस ने ब्रिटिश अफसर किंग्सफोर्ड को लक्ष्यबनाकर ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ विद्रोह किया था. भले ही उनकी योजना पूरी तरह सफल नहीं हो सकी और वे पकड़े गए, लेकिन उन्होंने फांसी केफंदे को भी हंसते-हंसते गले लगा लिया. खुदीराम बोस को दी श्रद्धांजलिइस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता संग्राम के वीर सपूत खुदीराम बोस को श्रद्धांजलि दी. साथ ही कहा कि खुदीराम बोस का साहस और देशभक्तिआज भी हम सभी को प्रेरित करती है. हमें अपने ऐसे वीर सपूतों के बलिदान को याद रखना चाहिए और उनसे सीख लेनी चाहिए. बता दें कि खुदीरामबोस सिर्फ 18 साल की उम्र में देश के सबसे नौजवान स्वतंत्रता सेनानी बन गए जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ बगावत करते हुए बलिदान दिया. उन्होंनेब्रिटिश अफसरों को निशाना बनाने की कोशिश की, जिसमें अंग्रेज अफसर किंग्सफोर्ड को मारने की योजना थी. हालांकि योजना पूरी तरह सफल नहींहो पाई, लेकिन खुदीराम पकड़े गए और उन्हें फांसी की सजा हुई।प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के ताजा एपिसोजमें रविवार को स्वतंत्रता सेनानी खुदीराम बोस को श्रद्धांजलि दी. उन्होंने बताया कि 11 अगस्त 1908 को मुजफ्फरपुर में 18 वर्षीय खुदीराम बोस कोफांसी दी गई थी. उनका चेहरा गर्व से भरा था, डर का नामोनिशान नहीं था. जेल के बाहर हजारों लोग एक वीर को अंतिम विदाई देने जुटे थे. पीएममोदी ने कहा कि उनका बलिदान आज भी प्रेरणा देता है.
हिंदू धर्म में जब तक समानता नहीं आएगी, धर्मांतरण नहीं रुकेगा सपा सांसद रामजीलाल सुमन का बयान

समाजवादी पार्टी के सांसद रामजी लाल सुमन ने धर्मांतरण पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि जब तक हिंदू धर्म में समानता नहीं आएगी, तबतक देश में धर्मांतरण को कोई नहीं रोक सकता. सांसद फिरोजाबाद में समाजवादी पार्टी के कार्यक्रम में शामिल होने आए थे. यहां मीडिया से रूबरूहोते हुए उन्होंने धर्मांतरण के मुद्दे पर बयान दिया. सपा सांसद ने कहा कि ‘स्वामी विवेकानंद और महात्मा गांधी ने कहा था कि अगर हिंदू धर्म समानताका धर्म नहीं बन सकता तो हम ये चाहेंगे कि ये एकदम नष्ट हो जाए। धर्म परिवर्तन की पूरी जिम्मेदारी हिंदू धर्म के ठेकेदारों की है. जब तक हिंदू धर्म मेंविषमता रहेगी, समता का भाव नहीं होगा. इस देश में धर्म परिर्वतन होगा, कोई रोक नहीं सकता’ फिरोजाबाद में सपा जिला कार्यालय पर आरक्षणदिवस एवं संविधान स्तंभ स्थापना दिवस मनाया गया. संचालन किया शिवराज सिंह यादव नेसपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन ने कहा कि मनु महाराज का संविधान इस देश में नहीं चलेगा. यह देश बाबा साहबडॉ. भीमराव आंबेडकर के संविधान से चलेगा. जो सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की सीख देता है. सपा के राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन ने कहाकि हम जब भी किसी पीड़ित के पास जाने का प्रयास करते हैं तो भाजपा का प्रशासन हमें जाने नहीं देता है. क्या यह संविधान का अपमान नहीं है. कार्यक्रम में सपा सांसद अक्षय यादव ने कहा कि बूथ को बचाना है संविधान को बचाना है. वोटर लिस्ट को बचाने के साथ ही संविधान की जीत होगीउन्होंने कहा कि हम सदन में बहस करने को तैयार हैं. संचालन सपा के जिलाध्यक्ष शिवराज सिंह यादव ने किया. संविधान के प्रति की भेंटसपा विधायक डा.मुकेश वर्मा, विधायक इंजी. सचिन यादव,पूर्व जिलाध्यक्ष रमेशचंद्र चंचल आदि मौजूद रहे भारतीय हलधर किसान यूनियन केजिलाध्यक्ष ऋषभ यादव ने सपा जिला कार्यालय पर आरक्षण दिवस के मौके पर पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सपा के राष्ट्रीय महासचिव रामजीलाल सुमन एवंसांसद अक्षय यादव को बाबा साहब के संविधान की प्रति भेंट की. प्रदेश में धर्मांतरण के मामले सामने आने के बाद अब इस पर सियासी बयानबाजीभी शुरू हो गई है. सपा के राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन ने कहा कि धर्मांतरण की जिम्मेदार हिंदू धर्म के ठेकेदारों की है. उन्होंने प्रशासन पर भीसवाल उठाए और आरोप लगाया कि जब समाजवादी पार्टी के नेता किसी पीड़ित या वंचित वर्ग के लोगों से मिलने जाते हैं तो उन्हें भाजपा शासितप्रशासन द्वारा रोका जाता है. उन्होंने कहा कि यह संविधान का सीधा अपमान है. यह बयान आरक्षण दिवस और संविधान स्तंभ स्थापना दिवस केअवसर पर आयोजित कार्यक्रम में दिया गया. भारतीय हलधर किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष ऋषभ यादव ने इस मौके पर बाबा साहब के संविधान कीप्रति रामजीलाल सुमन और अक्षय यादव को भेंट की.
भारत-ब्रिटेन एफटीए व्यापार में क्रांति लाएगा नया समझौता, भारतीय किसानों और निर्यातकों को होगा बड़ा लाभ

भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। व्यापार एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस समझौतेको भारत के किसानों, व्यापारियों, एमएसएमई क्षेत्रों, युवाओं और मछुआरों के लिए परिवर्तनकारी बताया. गोयल ने इस बात पर जोर दिया कि अबतक हस्ताक्षरित सभी एफटीए में से भारत-ब्रिटेन एफटीए सबसे बड़ा, सबसे व्यापक और सबसे महत्वपूर्ण है. यह अब तक का व्यापक समझौता है, जिसमें 30 अध्याय शामिल हैं। मुझे याद नहीं आता कि किसी अन्य एफटीए में इतने सारे अध्याय हों. गोयल ने कहा, भारत में कैबिनेट की मंजूरी मिलचुकी है। अब इस समझौते को ब्रिटेन में संसदीय मंजूरी की प्रतीक्षा है. इसके लागू होने पर, 99% भारतीय निर्यात ब्रिटेन में शुल्क-मुक्त पहुंच सकेंगे, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को काफी बढ़ावा मिलेगा. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत की मजबूत और निर्णायक नेतृत्व क्षमता, तेजी से बढ़ता मध्यमवर्ग और लोगों की बढ़ती आय ने भारत को वैश्विक साझेदार के रूप में एक पसंदीदा देश बना दिया है. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने भी कहा है कि यह ब्रिटेनका ब्रेक्जिट के बाद का सबसे महत्वपूर्ण मुक्त व्यापार समझौता है. उन्होंने कहा, हमने लैंगिक, पर्यावरण, बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) जैसेमुद्दों पर भी सहमति बनाई है. सबसे व्यापक और महत्वपूर्णगोयल ने कहा, कुछ गलत धारणाएं फैली हैं, जिन्हें मैं स्पष्ट करना चाहता हूं. हमने भारत के सभी संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा की है. हर देश के कुछक्षेत्र होते हैं जो संवेदनशील होते हैं, और ‘वन साइज फिट्स ऑल’ का सिद्धांत यहां लागू नहीं होता. उदाहरण के तौर पर, हमने डेयरी, चावल और चीनीजैसे क्षेत्रों को ब्रिटेन के लिए नहीं खोला है. उन्होंने कहा, यह समझौता निवेश को भी प्रोत्साहित करेगा. भारत- ब्रिटेन के लिए टेक्नोलॉजी औरइनोवेशन में साझेदार बन सकता है. पीयूष गोयल ने इस बात पर जोर दिया कि अब तक हस्ताक्षरित सभी एफटीए में से भारत-ब्रिटेन एफटीए सबसेबड़ा, सबसे व्यापक और सबसे महत्वपूर्ण है. एफटीए में है अध्याययह अब तक का व्यापक समझौता है जिसमें 30 अध्याय शामिल हैं. मुझे याद नहीं आता कि किसी अन्य एफटीए में इतने सारे अध्याय हों. पीयूषगोयल ने कहा कि यह एफटीए अब तक भारत द्वारा हस्ताक्षरित सभी समझौतों में सबसे व्यापक और गहरा है. इस समझौते में 30 अध्याय शामिल हैंजो इसे अत्यधिक विस्तृत और व्यापक बनाते हैं. उन्होंने दावा किया कि उन्हें याद नहीं आता कि किसी अन्य एफटीए में इतने विषयों पर सहमति बनीहो. “यह अब तक का सबसे बड़ा और व्यापक एफटीए है। इसमें 30 अध्याय हैं जो व्यापार, निवेश, नवाचार, बौद्धिक संपदा, पर्यावरण और श्रमिकअधिकारों जैसे अनेक पहलुओं को समेटते हैं. “भारत के किसानों, उद्यमियों और युवाओं के लिए यह गेम-चेंजर साबित होगा. हमने अपने संवेदनशीलक्षेत्रों की पूरी सुरक्षा की है.
राहुल गांधी बने ‘दूसरे आंबेडकर’? – उदित राज की बड़ी टिप्पणी, ओबीसी सम्मेलन में राहुल की आत्मस्वीकृति चर्चा में

कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद उदित राज ने शनिवार को अपने एक बयान में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की तुलना संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकरसे की। उदित राज ने कहा कि अगर अन्य पिछड़ा वर्ग उस बात को सुनता है. जो राहुल गांधी ने भागीदारी न्याय सम्मेलन के दौरान कही, तो राहुल गांधीइस बात को साबित कर देंगे कि वे ओबीसी वर्ग के दूसरे आंबेडकर हैं. कांग्रेस नेता उदित राज ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा एक पोस्ट मेंलिखा कि ‘तेलंगाना में हुई जाति जनगणना समाज का एक्स-रे है. राहुल गांधी का उद्देश्य इसे देशभर में कराने का है. उनके विचार दूरदर्शी हैं. अगरदलित और पिछड़ा वर्ग के लोग आगे आएं तो हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। समाज में जो असमानता है, वह कम होगी. अगर पिछड़ा वर्ग के लोगउसे समझने की कोशिश करें, जो राहुल गांधी कह रहे हैं तो राहुल गांधी इस बात को साबित कर देंगे कि वे उनके लिए दूसरे आंबेडकर हैं. आदिवासियों के मुद्दे आते है आसानी से समझ‘उदित राज ने लिखा कि ‘पिछड़ा वर्ग को यह सोचना होगा कि इतिहास उन्हें विकास का मौका बार-बार नहीं देगा. उन्होंने उस बात को मानना चाहिएऔर इसका समर्थन करना चाहिए. जो राहुल गांधी ने तालकटोरा स्टेडियम में हुए सम्मेलन में कही अगर वे ऐसा करते हैं तो राहुल गांधी उनके लिए दूसरेआंबेडकर साबित होंगे. शुक्रवार को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में कांग्रेस ने ‘ओबीसी नेतृत्व भागीदारी न्याय सम्मेलन’ का आयोजन किया। इसकार्यक्रम को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि ‘मुझे राजनीति करते हुए 21 साल हो गए हैं. जब मैं पीछे देखता हूं और खुद काआत्मनिरिक्षण करता हूं. मैंने कहां-कहां सही काम किया और कहां कमी रही, तो दो तीन बड़े मुद्दे दिखते हैं। मैंने जमीन अधिग्रहण कानून बनाया मनरेगालेकर आया और नियमगिरी की लड़ाई लड़ी. ये काम मैंने ठीक किए. चाहे वह आदिवासियों, दलितों और अल्पसंख्यकों की बात हो तो मुझे अच्छेनंबर मिलने चाहिए, महिलाओं के मुद्दे पर सही नंबर मिले चाहिए।’राहुल गांधी ने पिछड़ा वर्ग को लेकर कहा कि ‘अगर मैं अपनी कमी की बात करता हूंतो मैंने एक गलती की है, जो ओबीसी वर्ग है उसकी जिस तरह से मुझे रक्षा करनी चाहिए थी. वह मैंने नहीं की। इसका कारण था. आपके जो मुद्दे थेउस समय, मुझे गहराई से समझ नहीं आए. 10-15 साल पहले जो दिक्कतें दलितों के सामने थी वह मुझे समझ आ गई. आदिवासियों के मुद्दे भीआसानी से समझ आ जाते हैं. पहले ही करवा देते जाति जनगणनालेकिन ओबीसी के मुद्दे आसानी से नहीं दिखते हैं वह छुपे रहते हैं. अगर मुझे आपकी दिक्कतों के बारे में थोड़ा सा भी पता होता तो मैं उसी समय जातिजनगणना करवा देता. यह कांग्रेस की गलती नहीं बल्कि मेरी गलती है। वो मेरी गलती है, जिसे मैं ठीक करने जा रहा हूं. ये एक तरह से अच्छा हीहुआ, क्योंकि अगर उस समय मैंने जातिगत जनगणना करवा दी होती, तो वो आज जैसी नहीं होती. राहुल गांधी ने कहा कि ‘देश में दलित, पिछड़ा, आदिवासी, अल्पसंख्यक वर्ग की आबादी कुल मिलाकर करीब 90 फीसदी है. लेकिन जब बजट बनने के बाद हलवा बांटा जा रहा था, तो वहां 90 फीसदी की आबादी का कोई नहीं था. देश की 90 फीसदी की आबादी ही प्रोडक्टिव फोर्स है। हलवा बनाने वाले लोग आप हैं लेकिन हलवा वो खारहे हैं। हम ये नहीं कह रहे कि वो हलवा न खाएं, लेकिन कम से कम आपको भी तो मिले.’ राहुल गांधी ने दिल्ली में आयोजित न्याय सम्मेलन मेंस्वीकार करते हुए कहा था कि ‘अगर मैं अपनी कमी की बात करता हूं तो मैंने एक गलती की है जो ओबीसी वर्ग है उसकी जिस तरह से मुझे रक्षा करनीचाहिए थी वह मैंने नहीं की. इसका कारण था आपके जो मुद्दे थे उस समय मुझे गहराई से समझ नहीं आए.