कर्नाटक कैबिनेट का ऐतिहासिक फैसला, अनुसूचित जातियों में होगा आंतरिक आरक्षण

कर्नाटक में अनुसूचित जातियों को आंतरिक आरक्षण दिया जाएगा. कर्नाटक मंत्रिमंडल ने इस फैसले पर मुहर लगा दी है. बताया जा रहा है कि कैबिनेटकी विशेष बैठक में मंत्रिमंडल ने आंतरिक आरक्षण से जुड़ी न्यायमूर्ति एचएन नागमोहन दास आयोग की रिपोर्ट की सिफारिशों पर चर्चा की. कैबिनेट नेआयोग की रिपोर्ट को स्वीकार करने का फैसला किया, लेकिन इसमें कुछ बदलाव भी किए गए. कर्नाटक के विधि एवं संसदीय कार्य मंत्री एचकेपाटिल ने कहा कि कैबिनेट की बैठक अच्छी रही और सभी अनुसूचित जाति समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाले मंत्री संतुष्ट हैं बैठक लगभग ढाई घंटेतक चली. हम सभी कैबिनेट हॉल से खुश और संतुष्ट होकर बाहर आए हैं राज्य विधानमंडल का सत्र चल रहा है और विवरण का खुलासा करने कीकोई गुंजाइश नहीं है मुख्यमंत्री सदन में सरकार की ओर से बयान देंगे. आतंरिक आरक्षण किया तयवहीं पिछड़ा वर्ग विकास मंत्री शिवराज तंगदागी ने कहा कि अनुसूचित जातियों के बीच तीन समूह बनाकर आंतरिक आरक्षण तय किया गया है. इसमेंदक्षिणपंथी, वामपंथी और अन्य शामिल हैं उन्होंने कैबिनेट के इस फैसले को ऐतिहासिक बताया. उन्होंने कहा कि इन तीन श्रेणियों के लिए क्रमशःछह, छह और पांच प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है विस्तृत चर्चा के बाद हम सभी ने इसे स्वीकार कर लिया.उन्होंने कहा कि आयोग ने समूह ए के अंतर्गत वर्गीकृत सबसे पिछड़े समुदायों को ‘स्पृश्य’ दलितों (भोवी, बंजारा, कोरमा और कोरचा) के समूह में जोड़ागया है. जबकि आयोग के समूह ई को समूह बी और सी में जोड़ा गया है. न्यायमूर्ति एचएन नागमोहन दास आयोग चार अगस्त को मुख्यमंत्रीसिद्धारमैया को अपनी 1,766 पृष्ठों की रिपोर्ट सौंपी थी और इसे सात अगस्त को मंत्रिमंडल के समक्ष रखा गया था. राज्य में आंतरिक आरक्षण काउद्देश्य 101 अनुसूचित जातियों को दिए गए 17 प्रतिशत आरक्षण मैट्रिक्स को कम करना है.समुदायों को मिलेगा 5 प्रतिशत आरक्षणआयोग ने कथित तौर पर पांच श्रेणियों में आंतरिक आरक्षण के लिए सिफारिश की थी. इसमें सबसे पिछड़े समुदाय (समूह ए) को एक प्रतिशत; एससी (वाम) / मडिगा समुदाय (समूह बी) में छह प्रतिशत; एससी (दक्षिणपंथी) / होलेया (समूह सी) पांच प्रतिशत; ‘स्पृश्य’ समुदाय (समूह डी) चारप्रतिशत, और आदि कर्नाटक, आदि द्रविड़ और आदि आंध्र समुदाय (समूह ई) को एक प्रतिशत आरक्षण देने की सिफारिश की गई. आयोग की रिपोर्टआधिकारिक तौर पर सार्वजनिक नहीं की गई. कैबिनेट ने सिफारिशों में कुछ बदलाव किया है. इसके तहत अनुसूचित जातियों को प्राप्त 17 प्रतिशतआरक्षण में से कैबिनेट द्वारा विकसित आंतरिक आरक्षण फार्मूले के अनुसार अनुसूचित जाति (दक्षिणपंथी) और अनुसूचित जाति (वामपंथी) को 6-6 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा, जबकि ‘स्पृश्य’ दलित समुदायों (लम्बानी, भोवी, कोरमा और कोरचा) और अति पिछड़े तथा खानाबदोश समुदायों को पांचप्रतिशत आरक्षण मिलेगा.
‘तीन तिगाड़ा’ पर अखिलेश का वार एफिडेविट विवाद में चुनाव आयोग, डीएम और सरकार कटघरे में

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि कासगंज, बाराबंकी और जौनपुर के जिलाधिकारी जिस तरह से हमारे एफिडेविट पर सक्रिय हो गए हैं. उससेयह तो साबित हो गया है कि चुनाव आयोग की एफिडेविट न मिलने की बात झूठी निकली. उन्होंने कहा कि अब जिलाधिकारी इन पर सतही जवाबदेकर खानापूर्ति कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि मामले में इन जिलाधिकारियों की संलिप्तता की जांच होनी चाहिए. जिस तरह कासगंज, बाराबंकी, जौनपुरके डीएम हमारे 18000 शपथपत्रों के बारे में अचानक अति सक्रिय हो गये हैं. उसने एक बात तो साबित कर दी है कि जो चुनाव आयोग कह रहा थाकि ‘एफिडेविट की बात गलत है’ मतलब एफिडेविट नहीं मिले, उनकी वो बात झूठी निकली. रत्ती भर नहीं है विश्वासअगर कोई एफिडेविट मिला ही नहीं, तो ये जिलाधिकारी लोग जवाब किस बात का दे रहे हैं. अब सतही जवाब देकर खानापूर्ति करेनवाले इनजिलाधिकारियों की संलिप्तता की भी जांच होनी चाहिए. कोर्ट संज्ञान ले, चुनाव आयोग या डीएम में से कोई एक तो गलत है ही ना? जो सीसीटीवीपर पकड़े गये हों उनके द्वारा अपने घपलों पर दी गई सफाई पर किसी को भी रत्ती भर विश्वास नहीं है. झूठ का गठजोड़ कितना भी ताकतवर दिखे परआखिरकार झूठ हारता ही है क्योंकि नकारात्मक लोगों का साझा-गोरखधंधा अपने-अपने स्वार्थों की पूर्ति करने के लिए होता है ऐसे भ्रष्ट लोग न तोअपने ईमान के सगे होते हैं न परिवार, न समाज के, तो फिर भला अपने साझेदारों के कैसे होंगे. संलिप्तता की होनी चाहिए जांचये बेईमान लोग देश और देशवासियों से ताउम्र दगा करते हैं और अंततः पकड़े जाने पर अपमान से भरी जिंदगी जीने की सजा काटते हैं. भाजपा सरकार, चुनाव आयोग और स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत वो ‘चुनावी तीन तिगाड़ा’ है, जिसने सारा काम बिगाड़ा है और देश के लोकतंत्र पर डाका डाला है. अब जनता इस ’त्रिगुट’ की अदालत लगाएगी… सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एफिडेविट पर जिलाधिकारियों के जवाब देने पर चुनाव आयोग परनिशाना साधा उन्होंने कहा कि इस मामले में जिलाधिकारियों की संलिप्तता की जांच होनी चाहिए.
उत्तराखंड समान नागरिक संहिता में बड़ा बदलाव, विवाह पंजीकरण की समय सीमा बढ़ी “सख्त हुए दंड प्रावधान”

उत्तराखंड में लागू समान नागरिक संहिता में कुछ बदलाव होंगे. इसके तहत अब सालभर तक विवाह पंजीकरण करा सकेंगे. कुछ धाराओं में दंड केप्रावधान भी सख्त किए गए हैं. मंगलवार को सरकार ने समान नागरिक संहिता उत्तराखंड संशोधन अधिनियम 2025 को सदन पटल पर रख दिया है, जो बुधवार को पारित हो जाएगा. 26 मार्च 2020 से अधिनियम लागू होने तक हुए विवाह पंजीकरण की समय सीमा को छह से बढ़ाकर एक सालकर दिया गया है. यह समय सीमा समाप्त होने के बाद इसमें दंड या जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है. इसके साथ ही सब-रजिस्ट्रार के समक्षअपील, शुल्क आदि का भी निर्धारण किया गया है. दिक्कतों को भी किया गया दूरसमान नागरिक संहिता समिति की ओर से गई संस्तुतियों के आधार पर एक्ट में प्रावधानों के चलते हो रही व्यावहारिक दिक्कतों को भी दूर किया गयाहै. इसके साथ ही लिपिकीय त्रुटियों जैसे दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के स्थान पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) किया गया है. कई स्थानों पर पैनल्टी को शुल्क लिखा गया है जिन्हें अब पैनल्टी लिखा जाएगा. समान नागरिक संहिता की धारा 387 में की उपधाराओं में संशोधनकरते हुए नए प्रावधान जोड़े गए हैं. इसके तहत अगर कोई व्यक्ति बल, दबाव या धोखाधड़ी से किसी व्यक्ति की सहमति प्राप्त कर सहवास संबंधस्थापित करता है तो उसे सात साल तक के कारावास और जुर्माने से दंडित किया जाएगा. समान नागरिक संहिता की धारा 380(2) के तहत अगरपहले से शादीशुदा कोई व्यक्ति धोखे से लिव-इन रिलेशनशिप में रहता है तो उसे भी सात साल की सजा और जुर्माना भुगतना होगा. जुर्माने की वसूली के लिए कटेगी आरसीलेकिन यह प्रावधान उन पर लागू नहीं होगा, जिन्होंने लिव-इन रिलेशन को समाप्त कर दिया हो या जिसके साथी का सात वर्ष या इससे अधिक अवधिसे कुछ पता न हो. पूर्ववर्ती विवाह को समाप्त किए बिना और सभी कानूनी कार्रवाई को पूरी किए बिना लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वालों कोभारतीय न्याय संहिता की धारा 82 के तहत दंडित किया जाएगा. इसके तहत सात साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है.समान नागरिक संहिता में दो नई धाराएं स्थापित की गई हैं. इसके तहत धारा 390-क में विवाह, तलाक, लिव-इन रिलेशनशिप या उत्तराधिकार सेसंबंधित किसी पंजीकरण को निरस्त करने की शक्ति धारा-12 के अंतर्गत रजिस्ट्रार जनरल को होगी दूसरी धारा 390-ख के तहत भू-राजस्व बकाए कीभांति यहां लगने वाले जुर्माने की वसूली के लिए भी आरसी कटेगी.
यूपी में खाद की कोई कमी नहीं, योगी सरकार ने किसानों से भंडारण न करने की अपील की “कालाबाजारी पर सख्त योगी सरकार”

योगी सरकार ने एक बार फिर साफ किया है कि प्रदेश में कहीं भी उर्वरकों की दिक्कत या कमी नहीं है. किसानों के लिए पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्धहै. सरकार ने खाद के अनावश्यक भंडारण न करने की अपील की है. कृषि विभाग ने सभी 18 मंडलों में खाद की उपलब्धता व बिक्री की जानकारीदी। खरीफ सत्र 2024 में इस अवधि (18 अगस्त) तक 36.76 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की बिक्री हुई थी, वहीं इस वर्ष अब तक 42.64 लाखमीट्रिक टन उर्वरक की बिक्री की जा चुकी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों से अपील की कि खाद का भंडारण न करें. जितनी आवश्यकताहै, उतना खाद लें, जब-जब आवश्यकता है, तब-तब खाद लें. हर जनपद में शिकायत प्रकोष्ठ है। किसी भी परेशानी की स्थिति में अवगत कराएं. मुख्यमंत्री ने उर्वरक की ओवररेटिंग, कालाबाजारी करने वालों को कड़ी चेतावनी भी दी है. उन्होंने जनपद में तैनात अधिकारियों को समय-समय परनिरीक्षण करने, किसानों से संवाद स्थापित करने और समस्याओं का निस्तारण करने का निर्देश दिया है. खाद किया जा चुका है वितरणकृषि विभाग ने बताया कि प्रदेश में खाद की कोई कमी नहीं है. प्रदेश में पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष अभी तक अधिक खाद वितरण किया जाचुका है. विगत वर्ष 27.25 लाख मीट्रिक टन यूरिया वितरण हुआ था इस वर्ष अभी तक 31.62 लाख मीट्रिक टन वितरण किया जा चुका है. डीएपी2024 में वितरण 5.28 लाख मीट्रिक टन का रहा, इस वर्ष यह बिक्री 5.38 लाख मीट्रिक टन हुई. एनपीके उर्वरक (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस वपोटेशियम मिश्रण) का वितरण विगत वर्ष 2.07 लाख मीट्रिक टन रहा, इस वर्ष 2.39 लाख मीट्रिक टन वितरण किया जा चुका है. एमओपी (म्यूरेटऑफ पोटाश) 0.25 लाख मीट्रिक टन के सापेक्ष इस वर्ष 0.46 लाख मीट्रिक टन वितरित हुआ. उपलब्धता की नहीं है कोई कमीवहीं एसएसपी (सिंगल सुपर फॉस्फेट) का वितरण 2024 में 1.91 लाख मीट्रिक टन रहा, इस वर्ष किसानों को 2.79 लाख मीट्रिक टन वितरण कियाजा चुका है. खरीफ फसलों की बुवाई का कार्य पूर्ण हो गया है मुख्य फसल धान में टॉप-ड्रेसिंग हेतु प्रतिदिन औसतन 49564 मी०टन यूरिया कीखपत/बिक्री हो रही है गतवर्ष की तुलना में इस वर्ष 16.04% (मात्रा 4.37 लाख मी०टन) अधिक यूरिया उर्वरक की बिक्री हुई है. मुख्यमंत्री योगीआदित्यनाथ ने अफसरों को निर्देश दिया है कि जिलों में लगातार मॉनिटरिंग करें जिससे कि किसानों को दिक्कत न होने पाए. वहीं, किसानों से भीअपील की है कि वो जरूरत से ज्यादा खाद का भंडारण न करें और जरूरत होने पर फिर ले लें खाद की उपलब्धता की कोई कमी नहीं है.
कानपुर में अखिलेश दुबे गिरोह पर बड़ा रंगदारी और फर्जी केस दर्ज करने का आरोप, पुलिस ने की 54 से अधिक मुकदमों में कार्रवाई

अखिलेश दुबे और लवी मिश्रा ने महिलाओं को बिहार, झारखंड और कानपुर के स्लम इलाकों से लाकर फर्जी रेप एफआईआर दर्ज करवाईं. इनमामलों के माध्यम से उन्होंने पीड़ितों से पैसे की मांग की और कई लोगों को फंसाया. एक प्रमुख मामला भाजपा नेता रवि सतीजा से जुड़ा है, जिसमेंदुबे ने उन्हें फर्जी रेप केस में फंसाकर ₹50 लाख की मांग की थी. हालांकि, जांच में कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले, फिर भी आरोपितों ने पैसे की मांगजारी रखी. दुबे ने कानपुर और आसपास के क्षेत्रों में बड़े बिल्डरों के साथ मिलकर जमीनों पर अवैध कब्जा किया. उन्होंने कई सरकारी और निजीसंपत्तियों पर फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से कब्जा किया और फिर उन पर वसूली की. आरोपियों के खिलाफ कार्रवाईजांच में यह सामने आया है कि दुबे और उनके सहयोगियों के साथ पुलिस, नगर निगम, केडीए और अन्य सरकारी विभागों के अधिकारियों कीमिलीभगत थी. कुछ पुलिसकर्मी उन्हें अपने कार्यालय तक ले जाते थे और उनके खिलाफ की गई शिकायतों को दबाने में मदद करते थे. अखिलेश दुबेऔर लवी मिश्रा को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है. उनके खिलाफ रंगदारी वसूलने, फर्जी मामले दर्ज करने और सरकारी संपत्ति परकब्जा करने के आरोप में 54 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं एसआईटी (विशेष जांच दल) ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है और अन्यआरोपितों की तलाश जारी है कानपुर पुलिस कमिश्नर ने नागरिकों से अपील की है कि यदि वे भी अखिलेश दुबे या उनके गिरोह के शिकार हुए हैं, तोवे पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं. इससे मामले की जांच में मदद मिलेगी और आरोपितों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी.
उपराष्ट्रपति चुनाव में बढ़ी हलचल सीपी राधाकृष्णन का नामांकन 20 अगस्त को, विपक्ष जल्द करेगा प्रत्याशी घोषित

एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन 20 अगस्त को नामांकन करेंगे. उम्मीद है कि शाम तक विपक्ष के साझा उम्मीदवार का नामसामने आ जाएगा। तिरुचि सिवा के मुताबिक, विपक्ष में उपराष्ट्रपति के चुनाव को लेकर कोई भ्रम नहीं है. कांग्रेस पार्टी के नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्रीकहते हैं कि बस दो दिन की बात है थोड़ा इंतजार कर लीजिए यह चुनाव बहुत रोचक होने जा रहा है. अभी विपक्ष को अपने उम्मीदवार की घोषणाकरनी है दूसरी तरफ सत्ता पक्ष ने प्रचार भी शुरू कर दिया है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मुहिम को आगे बढ़ाते हुए डीएमके के नेता और तमिलनाडु केमुख्यमंत्री एमके स्टालिन से फोन पर समर्थन के बाबत चर्चा की है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी चुनाव की सफल रणनीति बनाने में जुट गए हैं. इसके बाबत उन्होंने दोपहर डेढ़ बजे के करीब संसद भवन स्थित अपने कक्ष में भाजपा अध्यक्ष और केन्द्रीय मंत्री जेपी नड्डा, केंद्रीय मंत्री पीयुष गोयल, धमेंद्र प्रधान समेत अन्य के साथ रणनीतिक चर्चा की. केवल समझिए इशाराकुल मिलाकर सत्ता पक्ष कमर कसकर तैयार है और उसका इरादा पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ से अधिक वोट पाकर सीपी राधाकृष्णन को चुनावजितवाना है. जगदंबिका पाल भाजपा के सांसद हैं। पहले कांग्रेसी थे वह तपाक से कहते हैं कि सीपी राधाकृष्णन को अधिक वोट मिलना तय है. बंपरमतो से जीत होगी. सवाल दक्षिण के राधाकृष्णन का है। हालांकि, जगदंबिका पाल एक बात को सहसा मान लेते हैं. उन्हें पता है कि विपक्ष की भीएक राजनीतिक मजबूरी है. इसलिए संभव है कि उपचुनाव में सर्वसम्मति की स्थिति न बन पाए और विपक्ष उम्मीदवार उतारे? पाल कहते हैं कि लेकिनइससे फर्क नहीं पड़ता. अगला उपराष्ट्रपति हमारा ही होगा. जब जगदंबिका पाल यह आत्मविश्वास दिखा रहे थे तो थोड़ी दूर पर कांग्रेस के पूर्व मंत्री उन्हेंसुन रहे थे. पाल के जाते ही उन्होंने कहा कि बस दो दिन रुक जाइए. सूत्र का कहना है कि उम्मीदवार घोषित न होने के कारण अभी बोलना ठीक नहींहै. बस केवल एक इशारा समझ लीजिए. दोनों प्रत्याशी थे भाजपा केकांस्टीट्यूशन क्लब के सचिव का चुनाव हाल में संपन्न हुआ है इसमें गृहमंत्री और भाजपा अध्यक्ष भी वोसंसद के गलियारे में आज मीडिया भी तीनखबरें ढूंढ रही थी. इसमें पहली जानकारी विपक्ष के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को लेकर थी. दूसरी नजर भाजपा के संभावित राष्ट्रीय अध्यक्ष के नामपर टिकी थी। तीसरी सूचना में लोग जानना चाहते थे कि उ.प्र. के भाजपा अध्यक्ष कौन होंगे? इस खबर को टटोलने के लिए उ.प्र. से भी कई नेतासक्रिय थे. हालांकि, सबको पता है कि नई भाजपा में सही जानकारी समय से पहले मिल पाना बहुत मुश्किल है इन तीन सूचनाओं के लिए खोजबीनकरने वाले लोगों की निगाह में बिहार का चुनाव और राहुल गांधी की बिहार में चल रही यात्रा काफी महत्वपूर्ण रहा. डालने गए थे हालांकि, दोनों हीप्रत्याशी भाजपा के थे, लेकिन इसके आगे मुझे कुछ नहीं कहना है.
भारत-चीन रिश्तों को नई राह जयशंकर-वांग यी की मुलाकात में सीमा विवाद, व्यापार और वैश्विक अस्थिरता पर चर्चा

गलवां घाटी में भारत और चीन की सेनाओं के बीच टकराव को पांच वर्ष बीत चुके हैं और अब दोनों देश संबंधों को पटरी पर लाने की कोशिश कर रहेहैं. यह घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा है, जब अमेरिका ने भारत के सामानों पर 50 फीसदी टैरिफ लगाया है. इसी कड़ी में चीन के विदेश मंत्री वांग यीभारत आए और सोमवार को उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ वार्ता की उनका यह दौरा एशिया की इन दोनों ताकतों के बीच संबंध सुधारनेकी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है. दोनों देश अमेरिकी टैरिफ युद्ध से पैदा हुई वैश्विक अस्थिरता का मुकाबला करना चाहते हैं. बैठक मेंजयशंकर ने कहा कि वांग यी का यह दौरा द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करने का एक अच्छा अवसर है. विश्व व्यवस्था की कर रहे है बातउन्होंने कहा, हमारे संबंधों ने एक मुश्किल दौर देखा है, लेकिन अब हम आगे बढ़ना चाहते हैं. इसके लिए दोनों पक्षों की ओर से ईमानदार औररचनात्मक रुख जरूरी है. जयशंकर ने आगे कहा, हमें आपसी सम्मान, संवेदनशीलता और आपसी हितों के आधार पर आगे बढ़ना चाहिए. मतभेदों कोविवाद नहीं बनने देना चाहिए और प्रतिस्पर्धा को टकराव का रूप नहीं लेने देना चाहिए. बाद में उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच बातचीत मेंआर्थिक और व्यापारिक मुद्दे, धार्मिक यात्रा, लोगों के बीच संपर्क, नदी से जुड़ा डाटा साझा करना, सीमा व्यापार, संपर्क और द्विपक्षीय आदान-प्रदानजैसे विषय शामिल होंगे. जयशंकर ने कहा, हमारे संबंधों में कोई सकारात्मक प्रगति तभी संभव है जब हम मिलकर सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखें. सीमा से सैनिकों को हटाने (डी-एस्केलेशन) की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना भी जरूरी है. विदेश मंत्री ने कहा, जब दुनिया के दो सबसे बड़े देश मिलते हैंतो अंतरराष्ट्रीय परिदृष्य पर बात होना स्वाभाविक है। हम एक निष्पक्ष, संतुलित और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की बात करते हैं. गंभीर चुनौतियों का सामनाजिसमें एशिया भी बहुध्रुवीय हो इस समय वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनाए रखना बेहद जरूरी है,उन्होंने यह भी कहा कि भारत को उम्मीद है कियह चर्चा एक स्थिर, सहयोगात्मक और भविष्य की ओर देखती हुई भारत-चीन साझेदारी की ओर ले जाएगी, जो दोनों देशों की हितों की सेवा करे औरउनकी चिंताओं को संबोधित करे. सूत्रों के मुताबिक, चीन ने भारत की तीन मुख्य चिंताओं (खाद, दुर्लभ खनिज और टनल बोरिंग मशीन) को दूर करनेका भरोसा दिलाया है. इन सब में दुर्लभ खनिज सबसे महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इनका इस्तेमाल स्मार्टफोन और आधुनिक सैन्य उपकरणों के निर्माण मेंहोता है इनका अधिकांश उत्पादन चीन में होता है. बैठक के बाद चीन की ओर से जारी बयान में कहा गया कि वांग यी ने जयशंकर से कहा कि दुनियाइस समय ‘सदी में एक बार आने वाले बदलावों’ के दौर से गुजर रही है और वह भी बहुत तेजी से उन्होंने अमेरिका की ओर इशारा करते हुए कहा, एकतरफा दबदबा और जोर-जबरदस्ती बढ़ चुकी है और मुक्त व्यापार और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं.
भारत-चीन रिश्तों में नई गर्माहट चीन देगा उर्वरक, रेयर अर्थ और बोरिंग मशीनों की सप्लाई का भरोसा

भारत और चीन के रिश्तों में नया मोड़ आया है चीन ने भारत को भरोसा दिलाया है कि वह उर्वरक, रेयर अर्थ और टनल बोरिंग मशीनों की जरूरतों कोपूरा करने में मदद करेगा. यह आश्वासन चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को दिया। बता दें कि चीन के विदेशमंत्री सोमवार को दो दिन के दौरे पर भारत पहुंचे हैं. इस दौरान दोनों नेताओं की बातचीत में आर्थिक और व्यापारिक मुद्दे, धार्मिक यात्राएं, लोगों केबीच संपर्क, नदियों का डाटा साझा करना, सीमा व्यापार और आपसी सहयोग जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई. विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा किभारत-चीन जैसे बड़े पड़ोसी देशों के बीच रिश्ते कई पहलुओं वाले हैं. अर्थव्यवस्था में स्थिरताउन्होंने जोर देकर कहा कि व्यापार में रोड़े और प्रतिबंधात्मक नीतियों से बचना जरूरी है. जयशंकर ने यह भी कहा कि स्थिर और सकारात्मक रिश्ते दोनोंदेशों के साथ-साथ पूरी दुनिया के लिए फायदेमंद होंगे.विदेश मंत्री ने इस दौरान साफ कहा कि फर्क को विवाद नहीं बनने देना चाहिए और प्रतिस्पर्धा को संघर्ष में नहीं बदलना चाहिए. उन्होंने वांग यी कीयात्रा को रिश्तों की समीक्षा और वैश्विक हालात पर बातचीत का सही अवसर बताया. बता दें कि भारत-चीन संबंध 2020 में पूर्वी लद्दाख की एलएसीपर चीनी सेना की गतिविधियों से बिगड़ गए थे. हालांकि हाल के महीनों में दोनों देशों ने तनाव कम करने और गश्त को लेकर समझौता किया है. इसबीच दुनिया भर में बदलते हालात, यूक्रेन युद्ध और अमेरिकी व्यापार शुल्कों के बीच जयशंकर ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता बढ़ाने कीजरूरत है. शिखर सम्मेलन में लेंगें हिस्सावांग यी की यह यात्रा इसलिए भी अहम है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महीने के अंत में चीन के शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन मेंहिस्सा लेने जा सकते हैं. वहीं भारत ने साफ किया है कि ताइवान पर उसके रुख में कोई बदलाव नहीं आया है. भारत ने जोर देकर कहा कि दुनिया केबाकी देशों की तरह, भारत का भी ताइवान के साथ आर्थिक, तकनीकी और सांस्कृतिक संबंधों पर केंद्रित रिश्ता है हम इसे जारी रखने का इरादा रखतेहैं. चीन के विदेश मंत्री वांग यी और भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने एक दूसरे के साथ कई मुद्दों पर चर्चा की है. वहीं इस बैठक के बाद चीनने भारत को भरोसा दिलाया है कि वह उर्वरक, दुर्लब खनिज और टनल बोरिंग मशीनों की जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगा.
PM मोदी की चीन यात्रा पर गरमाई सियासत ओवैसी ने उठाए सवाल, सरकार से चीन पर रुख साफ करने की मांग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अगस्त से एक सितंबर के बीच शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन जाने वाले हैं. ऐसे में अब इस बात को लेकर भारत में सियासत तेज हो गई है पीएम मोदी की आगामी चीन यात्रा को लेकर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुलमुसलमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने पीएम मोदी के इस यात्रा से पहले केंद्र सरकार से चीन कोलेकर अपना रुख साफ करने की मांग की है. बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अगस्त से एक सितंबर के बीच शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भाग लेने चीन के तियानजिन जाने वाले हैं. सहयोग के विकास का है प्रतीकचीन ने इस यात्रा का स्वागत किया है और इसे सहयोग और विकास का प्रतीक बताया है. एआईएमआईएम प्रमुख ओवैसी ने सोशल मीडियाप्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि मोदी सरकार के चीन को लेकर रुख में जो यू-टर्न आया है, उस पर कई सवाल हैं. सरकार को चाहिए कि पीएम कीयात्रा से पहले देश को जवाब दे। उन्होंने कहा कि चीन ने पाकिस्तान को हथियार और फाइटर जेट दिए, जिनका इस्तेमाल ऑपरेशन सिंदूर के दौरानहमारे जवानों के खिलाफ हुआ. साथ ही चीन ने इंटेलिजेंस और सैटेलाइट डेटा भी पाकिस्तान को दिया. ओवैसी ने सवाल उठाते हुए कहा कि हम चीनको यह साफ क्यों नहीं कह रहे कि यह अस्वीकार्य है?ओवैसी ने आगे कहा कि जब पीएम मोदी ने दलाई लामा को 90वें जन्मदिन की बधाई दी, तब चीन ने कड़ी आपत्ति जताई, लेकिन भारत सरकार नेइस पर कोई जवाब नहीं दिया. आंतरिक मामलों में दखल नहींउन्होंने कहा कि चीन ने भारत से कहा कि वह तिब्बत जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सतर्क रहे और आंतरिक मामलों में दखल न दे. ओवैसी ने पूछा कि क्यायह हमारे राष्ट्रीय सम्मान का सवाल नहीं है? इसके साथ ही ओवैसी ने यह भी कहा कि भारत और चीन के बीच व्यापार असंतुलन 2020 से और बढ़ाहै, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदायक है लेकिन सरकार इस पर गंभीर नहीं दिख रही. इसी बीच चीन के विदेश मंत्री वांग यी भारत दौरे परहैं। वे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस जयशंकर से सीमा विवाद और द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं. इस दौरानजयशंकर ने बातचीत में कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनाए रखना आज की प्रमुख प्राथमिकताएं हैं. हमभारत-चीन संबंधों को संतुलित और आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
काशी में इतिहास रचेंगे पीएम मोदी और मॉरीशस के पीएम रामगुलाम, पहली बार काशी में होगी द्विपक्षीय बैठक

मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम 11 सितंबर को काशी पहुंचेंगे. यहां वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ पहली बार द्विपक्षीय बैठक करेंगे. व्यापार, प्रौद्योगिकी और पर्यटन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आपसी सहयोग पर बातचीत होगी. उप्र की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगीआदित्यनाथ की ओर से रात्रिभोज दिया जाएगा. इसमें केंद्र और उप्र सरकार के कुछ और मंत्री शामिल होंगे. मॉरीशस के प्रधानमंत्री की भारत में यात्रा9 सितंबर से 15 सितंबर तक रहेगी। इस यात्रा का मुख्य आयोजन काशी में होना तय हुआ है. बाबा कालभैरव का करेंगें पूजनमॉरीशस के प्रधानमंत्री का बाबतपुर एयरपोर्ट पर स्वागत किया जाएगा उन्हें यहां गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया जाएगा उनका यहां सांस्कृतिक स्वागत भीकिया जाएगा. इसके अलावा उप्र के सबसे बेहतर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति की जाएगी. वह श्रीकाशी विश्वनाथ और बाबा कालभैरव में पूजनकरेंगे. इसके साथ ही वह महत्वूपर्ण सांस्कृतिक स्थलों का दौरा भी करेंगे. वह सारनाथ और बीएचयू भारत कला भवन भी जाएंगे वह गंगा आरती भीदेखेंगे. इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे. यह पहली बार होगा जब मॉरीशस का कोई प्रधानमंत्री काशी में द्विपक्षीयबैठक करेगा. नोडल अधिकारी किया गया नामितइसमें महत्वपूर्ण औद्योगिक विकास और तकनीकी नवाचार पर आपसी सहयोग पर मुख्य रूप से बात होगी. पर्यटन के क्षेत्र में भी बात होगी. केंद्रसरकार की ओर से जारी पत्र में मंडलायुक्त एस राज लिंगम को को नोडल अधिकारी नामित किया गया है. उन्हें अतिथियों के स्वागत और प्रोटोकॉल केहिसाब से विस्तृत कार्यक्रम तैयार करने को कहा गया है. इसके अलावा होने वाले कार्यक्रमों के स्थल चयन की भी बात कही गई है प्रशासन अब स्थलऔर कार्यक्रमों का चयन करेगा. दो साल पहले 11 सितंबर 2023 को भी मॉरीशस के तत्कालीन प्रधानमंत्री प्रविंद जुगनाथ काशी पहुंचे थे. उन्होंनेदश्वामेध घाट पर अपने रिश्तेदार की अस्थि विसर्जित की थीं. मॉरीशस के पीएम नवीनचंद्र रामगुलाम नौ सितंबर से भारत यात्रा पर रहेंगे. इस बीच, वे11 सितंबर को वाराणसी भी आएंगे. यह पहली बार होगा, जब मॉरीशस का कोई प्रधानमंत्री काशी में द्विपक्षीय बैठक करेगा.