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शिक्षक दिवस पर शिक्षक महाकुंभ – शिक्षकों को मिला सम्मान

आयोजन का महत्वशिक्षक दिवस के अवसर पर दिल्ली सरकार ने एक बहुत ही भव्य और यादगार कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का नाम रखा गया – ‘शिक्षक महाकुंभ’। इस अवसर पर दिल्ली सरकार ने उन शिक्षकों को सम्मानित किया, जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में विशेष योगदान दिया है। इस समारोहमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री आशीष सूद सहित कई विधायक और अधिकारीमौजूद रहे। बच्चों ने अपने शिक्षकों के सम्मान में सुंदर नृत्य और गीत प्रस्तुत किए, जिससे पूरा माहौल भावनाओं और उत्साह से भर गया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का संदेशकेंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था सही दिशा में बढ़ रही है और सही नेतृत्व के हाथों में है। उन्होंने कहा कि भारत मेंगुरु-शिष्य परंपरा बहुत पुरानी और गौरवशाली रही है। शिक्षक केवल किताब का ज्ञान नहीं देते, बल्कि बच्चों को संस्कार और जीवन जीने की राह भीदिखाते हैं। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का उदाहरण देते हुए कहा कि शिक्षकों की भूमिका हमेशासे ही समाज और राष्ट्र को मजबूत करने वाली रही है। धर्मेंद्र प्रधान ने दिल्ली सरकार के प्रयासों की सराहना की और कहा कि सरकारी स्कूलों में सुधारऔर बच्चों को अच्छी शिक्षा देने की दिशा में काम सराहनीय है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का संबोधनमुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि शिक्षक जो काम कर रहे हैं वह केवल नौकरी नहीं, बल्कि ईश्वर का कार्य है। उन्होंने कहा कि शिक्षक बच्चों को पढ़ानेके साथ-साथ उनका चरित्र गढ़ते हैं और उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनाते हैं। उन्होंने माना कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाना एक कठिन काम है, क्योंकि वहांकई बार संसाधनों और सुविधाओं की कमी होती है। इसके बावजूद शिक्षक बच्चों को पूरे मन और समर्पण से पढ़ाते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्लीसरकार का सपना है कि सरकारी स्कूल इतने अच्छे बनाए जाएं कि वे निजी स्कूलों से भी बेहतर हों। रेखा गुप्ता ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीने शिक्षा सामग्री पर जीएसटी हटा कर बहुत बड़ा कदम उठाया है। इससे शिक्षा और भी सस्ती और सुलभ बनेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री का धन्यवाद कियाऔर कहा कि उनकी सरकार का लक्ष्य है कि हर बच्चा, चाहे उसके माता-पिता अमीर हों या गरीब, अच्छी शिक्षा पाए। मुख्यमंत्री ने हाल ही में बने उसकानून का भी उल्लेख किया, जिसके तहत निजी स्कूलों की फीस पर नियंत्रण लगाया गया है। उन्होंने कहा कि यह कदम अभिभावकों के लिए बड़ीराहत लेकर आया है। शिक्षा मंत्री आशीष सूद के विचारशिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि शिक्षक दिवस हमें यह याद दिलाता है कि शिक्षा केवल नौकरी नहीं, बल्कि एक मिशन है। उन्होंने कहा किप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी अक्सर कहते हैं कि मां जन्म देती है, लेकिन शिक्षक जीवन को गढ़ता है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 ने शिक्षा कोएक नई पहचान दी है। इसमें बच्चों को कई तरह की पढ़ाई के अवसर दिए जा रहे हैं – जैसे कि अलग-अलग विषयों का मिश्रण, व्यावसायिकप्रशिक्षण, प्रयोग आधारित शिक्षा और डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल। आशीष सूद ने बताया कि दिल्ली सरकार अगले तीन वर्षों में हर स्कूल औरहर बच्चे को ‘निपुण संकल्प मिशन’ से जोड़ेगी। इसके अलावा आने वाले चार वर्षों में कक्षा 9 से 12 तक हर कक्षा को स्मार्ट कक्षा में बदला जाएगा।उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से बच्चों की पढ़ाई को व्यक्तिगत बनाया जाएगा और यह देखा जाएगा कि हर बच्चा कैसा प्रदर्शन कर रहाहै। इस बार का शिक्षक दिवस दिल्ली के लिए खास रहा। ‘शिक्षक महाकुंभ’ में शिक्षकों को सम्मान देकर यह संदेश दिया गया कि शिक्षा सबसे बड़ाराष्ट्र निर्माण का काम है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री – सभी ने यह भरोसा दिलाया कि दिल्ली में शिक्षा व्यवस्था को और भीमजबूत किया जाएगा। यह आयोजन केवल एक सम्मान समारोह नहीं था, बल्कि यह एक वादा भी था कि आने वाले समय में दिल्ली के सरकारीस्कूल बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का सबसे बड़ा आधार बनेंगे।

जीएसटी सुधार मोदी सरकार का जनता को बड़ा तोहफ़ा – पीयूष गोयल

भाजपा मुख्यालय से बड़ी जानकारीभारतीय जनता पार्टी के मुख्यालय में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने पत्रकारों से बातचीत की और जीएसटी यानी वस्तु एवं सेवा कर में किए गए सुधारोंके बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह सिर्फ टैक्स का सुधार नहीं है, बल्कि पूरे देश की आर्थिक व्यवस्था को मज़बूत करने का बड़ाकदम है। इस फैसले से किसानों से लेकर मजदूर, छोटे व्यापारी से लेकर बड़े उद्योगपति और आम गृहणी तक – हर किसी को फायदा मिलेगा। प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शी सोचपीयूष गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने हमेशा देशहित को सबसे ऊपर रखा है। उन्होंने जनता की ज़रूरतों और भविष्य की चुनौतियों कोध्यान में रखकर यह बड़ा फैसला लिया। यह सुधार केवल आज के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक मज़बूत नींव है। यही कारणहै कि मोदी सरकार को जनता की सरकार कहा जाता है। कांग्रेस शासनकाल की कमजोरियांउन्होंने कांग्रेस के शासन की तुलना करते हुए कहा कि उस समय टैक्स व्यवस्था बेहद उलझी हुई थी। हर राज्य के अपने-अपने नियम थे, अलग-अलगटैक्स चुकाना पड़ता था। व्यापारी वर्ग को भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ता था और आम जनता को ज़्यादा कीमत चुकानी पड़ती थी। कांग्रेस सरकारमें विकास की जगह घोटाले और भ्रष्टाचार की ही चर्चा होती थी। इसलिए जनता ने कांग्रेस को नकार दिया। जीएसटी से आया बदलावमोदी सरकार ने जब जीएसटी लागू किया तो पूरा देश एक देश, एक टैक्स की व्यवस्था से जुड़ गया। अब देशभर में व्यापार करना आसान हो गया है।किसी व्यापारी को अलग-अलग राज्यों में अलग टैक्स नहीं देना पड़ता। इससे कारोबारियों को राहत मिली और उपभोक्ताओं को सामान सस्ते दामों परमिलने लगा। आम जनता को सीधा लाभपीयूष गोयल ने बताया कि जीएसटी सुधारों का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ा है। पहले जहां टैक्स की जटिलता और भ्रष्टाचार की वजह सेसामान महंगा हो जाता था, वहीं अब वही सामान किफ़ायती दामों पर उपलब्ध है। इससे आम लोगों की बचत बढ़ी है और यही बचत आगे चलकरनिवेश का रूप ले सकती है। व्यापारियों और उद्योगपतियों को राहतजीएसटी सुधारों से कारोबारियों के लिए कामकाज आसान हुआ है। अब उन्हें छोटे-छोटे कामों के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते और न हीभ्रष्टाचार का सामना करना पड़ता है। कारोबार आसान होने से निवेश बढ़ेगा, नए उद्योग खुलेंगे और युवाओं के लिए रोज़गार के अवसर पैदा होंगे। Ease of Doing Business में सुधारआज भारत दुनिया के उन देशों में गिना जा रहा है, जहाँ व्यापार करना पहले से कहीं आसान हो गया है। यह जीएसटी और अन्य आर्थिक सुधारों कीवजह से संभव हुआ है। जब कारोबार आसान होता है तो विदेशी निवेश भी बढ़ता है और इससे देश की अर्थव्यवस्था और मज़बूत होती है। स्वदेशी से विकसित भारत की ओरपीयूष गोयल ने कहा कि मोदी सरकार का सपना है कि भारत आत्मनिर्भर बने और आगे चलकर विकसित राष्ट्र की श्रेणी में पहुंचे। जीएसटी सुधार इसदिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है। इससे देश के छोटे-छोटे उद्योग भी आगे बढ़ेंगे और मेक इन इंडिया को मज़बूती मिलेगी। कांग्रेस पर सीधा हमलाउन्होंने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस के पास जनता के लिए कोई ठोस योजना नहीं थी। उनका ध्यान सिर्फ ऊँचे टैक्स लगाने औरभ्रष्टाचार करने पर रहता था। वहीं, मोदी सरकार ने जनता का बोझ कम किया और विकास की दिशा में ठोस कदम उठाए। जनता को सस्ता सामान, देश को मजबूत अर्थव्यवस्थाअंत में पीयूष गोयल ने कहा कि यह सुधार केवल टैक्स सुधार नहीं है, बल्कि यह जनता के जीवन में बदलाव लाने वाला फैसला है। अब सामान सस्ताहोगा, बचत बढ़ेगी, निवेश और रोज़गार के अवसर मिलेंगे। यह कदम भारत को एक मज़बूत, आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनाने में अहम भूमिकानिभाएगा।

बहुजनों के हक़ से मोदी सरकार की बेरुख़ी – अनिल जयहिंद

सुप्रीम कोर्ट का फैसला, लेकिन सरकार की चुप्पीकांग्रेस सरकार ने जब निजी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण देने के लिए कानून बनाया था, तो उसका मकसद यही था कि दलितों, पिछड़ों औरआदिवासियों को भी बराबरी का अवसर मिले। इस कानून को चुनौती दी गई, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कहा कि यह कानून पूरी तरह सही है औरइसे लागू होना चाहिए। इसके बावजूद मोदी सरकार ने पिछले 11 साल से इसपर कोई कदम नहीं उठाया। यानी अदालत की मुहर भी लगी औरसंविधान में संशोधन भी हुआ, लेकिन बहुजन समाज अब तक अपने अधिकार से वंचित है। मोदी जी OBC बताते हैं, लेकिन नुकसान भी OBC कोप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंच से बार-बार खुद को OBC बताते हैं। लेकिन असली सवाल यह है कि OBC समाज को फायदा मिला या नुकसान? सच्चाई यह है कि बीते 11 साल में OBC समाज को जितना नुकसान हुआ है, उतना पहले कभी नहीं हुआ। लाखों छात्रों को आरक्षण और अवसर कालाभ नहीं मिल पाया। 2017 से आज तक OBC की क्रीमी लेयर को भी रिवाइज नहीं किया गया। इसका सीधा असर गरीब और मेहनती बच्चों परपड़ा है, जो हक़दार होने के बावजूद अवसर से बाहर कर दिए गए। ‘NFS’ – नई चाल, पुराना भेदभावआजकल एक और नया तरीका निकाला गया है – NFS यानी Not Found Suitable। कई बार उम्मीदवार सारे मानक पूरे कर लेते हैं, परीक्षापास कर लेते हैं, मेरिट में आते हैं, लेकिन फिर भी उन्हें NFS कहकर बाहर कर दिया जाता है। यह तरीका बहुजन समाज को शिक्षा और नौकरियों सेबाहर रखने की एक और चाल है। जब सारी योग्यताएँ होने के बाद भी मौका नहीं मिलेगा तो मेहनत और सपनों का क्या होगा? जातिगत जनगणना की जरूरतअगर सच में समानता लानी है तो जातिगत जनगणना बेहद ज़रूरी है। इससे यह पता चलेगा कि किस वर्ग की असली स्थिति क्या है और किसे कितनीज़रूरत है। लेकिन मोदी सरकार इस पर कोई बात ही नहीं कर रही। न कोई योजना है, न कोई रोडमैप। उल्टा, जब भी कोई जातिगत जनगणना कीबात करता है, तो उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जाती है। कभी उन्हें अर्बन नक्सल कहा जाता है, कभी देश विरोधी कहा जाता है। असलियत यहहै कि सरकार इस सच्चाई को सामने ही नहीं आने देना चाहती। मंडल आयोग की अधूरी सिफारिशेंबहुजनों की तरक्की के लिए मंडल आयोग बनाया गया था। इसने 40 सिफारिशें दीं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि आज तक सिर्फ 2 सिफारिशेंलागू हुई हैं और बाकी 38 अब भी अधूरी हैं। अगर वे लागू कर दी जातीं तो आज बहुजन समाज की स्थिति कहीं बेहतर होती। लेकिन सरकार ने उन्हेंठंडे बस्ते में डाल दिया। यह साफ़ दिखाता है कि बहुजनों के सवाल और समस्याएँ सरकार की प्राथमिकता में नहीं हैं। शिक्षा और रोज़गार पर साजिशआज जो हालात हैं, वे किसी लापरवाही का नतीजा नहीं बल्कि एक सोची-समझी साजिश है। पहले सरकारी संस्थानों की संख्या कम की गई, फिरशिक्षा को निजी हाथों में सौंपा गया। निजी संस्थानों में आरक्षण लागू नहीं है, इसलिए बहुजन समाज के बच्चे बाहर रह गए। अब NFS जैसी चालेंचलकर रोज़गार से भी दूर किया जा रहा है। यह सब मिलकर बहुजनों को मुख्यधारा से बाहर करने का काम कर रहा है। हमारी मांगहमारी साफ़ मांग है कि मोदी सरकार तुरंत निजी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण लागू करे। OBC की क्रीमी लेयर को तुरंत रिवाइज किया जाए। NFS जैसी भेदभावपूर्ण व्यवस्था को खत्म किया जाए। जातिगत जनगणना पूरी की जाए और मंडल आयोग की बाकी सभी सिफारिशें लागू की जाएं। यहीअसली सामाजिक न्याय है। असली न्याय का रास्ताजब तक बहुजन समाज को शिक्षा और रोज़गार में बराबरी नहीं मिलेगी, तब तक लोकतंत्र अधूरा रहेगा। देश की 90% आबादी अगर हक़ से वंचितरहेगी तो भारत कैसे तरक्की करेगा? बाबा साहेब आंबेडकर ने कहा था कि सामाजिक समानता के लिए वोट का अधिकार और आरक्षण दोनों जरूरी हैं।आज दोनों पर हमला हो रहा है। इसलिए हमें आवाज़ उठानी होगी और बहुजनों का हक़ वापस लेना होगा। यही असली न्याय है और यही देश कोआगे बढ़ाने का रास्ता है।

निजी शिक्षा में बहुजनों का हक़ – विक्रांत भूरिया

बहुजन समाज की बड़ी आबादी, लेकिन शिक्षा में हिस्सेदारी कमहमारे देश की असली ताक़त बहुजन समाज है। दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग मिलाकर यह समाज लगभग 90% आबादी का हिस्सा है। लेकिनजब शिक्षा की बात आती है, खासकर निजी कॉलेज और विश्वविद्यालयों की, तो उनकी हिस्सेदारी सिर्फ़ 12% तक सीमित रह जाती है। यह स्थितिबहुत दुखद और अन्यायपूर्ण है। यह बताता है कि आज भी शिक्षा का दरवाज़ा बहुजनों के लिए पूरी तरह खुला नहीं है। संसदीय समिति की रिपोर्ट और सुझावइस विषय पर संसद की एक समिति ने गहराई से अध्ययन किया। रिपोर्ट में साफ़ कहा गया कि निजी उच्च शिक्षण संस्थानों में बहुजन समाज कीस्थिति बेहद खराब है। समिति ने सुझाव दिया कि आरक्षण के प्रावधान को लागू करना ज़रूरी है। समिति ने स्पष्ट सिफारिश की कि SC वर्ग को15%, ST वर्ग को 7.5% और OBC वर्ग को 27% प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। अगर ऐसा होता है तो ही असली समान अवसर मिलेगा औरशिक्षा का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँच पाएगा। कांग्रेस सरकार का ऐतिहासिक फैसलायूपीए सरकार के समय शिक्षा को सबके लिए सुलभ और न्यायपूर्ण बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया। संविधान में अनुच्छेद 15(5) जोड़ा गया, जिसके तहत निजी शिक्षण संस्थानों में भी SC, ST और OBC वर्ग के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया। यह फैसला केवल एकक़ानूनी बदलाव नहीं था, बल्कि यह सामाजिक न्याय की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल थी। इस कानून से बहुजन समाज के बच्चों को उम्मीद मिलीकि अब उन्हें भी आगे बढ़ने का सही अवसर मिलेगा। अदालत का समर्थनजब इस फैसले का विरोध हुआ और मामला अदालत तक गया, तब भी न्यायपालिका ने साफ़ कहा कि यह प्रावधान सही और संविधान के अनुरूप है।सुप्रीम कोर्ट ने भी इस फैसले को सही ठहराया। यानी न तो कानून में और न ही न्यायपालिका में कोई अड़चन थी। लेकिन इसके बावजूद इसे पूरी तरहलागू नहीं किया गया। मोदी सरकार की 11 साल की चुप्पीयहाँ सबसे बड़ी समस्या यह है कि पिछले 11 साल से मोदी सरकार इस कानून पर कोई कदम नहीं उठा रही। न तो निजी संस्थानों में आरक्षण लागूकिया गया और न ही बहुजन समाज को आगे बढ़ाने के लिए कोई ठोस योजना बनाई गई। मोदी जी मंचों से खुद को OBC बताते हैं, लेकिन हकीकतयह है कि OBC, SC और ST वर्ग को सबसे ज़्यादा नुकसान इन्हीं 11 सालों में हुआ है। शिक्षा पर बड़ा खेल और साजिशआज जो हालात हैं, वे किसी छोटी भूल का नतीजा नहीं हैं, बल्कि यह एक सोची-समझी साजिश है। पहले सरकारी शिक्षण संस्थानों की संख्या घटाईगई, उन्हें धीरे-धीरे कमजोर किया गया। फिर शिक्षा को निजी हाथों में सौंपा गया। अब जब शिक्षा पूरी तरह निजी संस्थानों के भरोसे हो जाएगी औरवहाँ आरक्षण भी लागू नहीं होगा, तो सबसे बड़ा नुकसान बहुजन समाज को ही उठाना पड़ेगा। यह लोकतंत्र और सामाजिक न्याय दोनों के लिए बहुतखतरनाक स्थिति है। बाबा साहेब का संदेश और आज की हकीकतबाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने साफ़ कहा था कि अगर समाज में समानता लानी है तो वोट का अधिकार और आरक्षण होना ज़रूरी है। लेकिनआज की भाजपा सरकार इन दोनों पर हमला कर रही है। कभी वोट के अधिकार को कमजोर करने की कोशिश होती है, तो कभी आरक्षण को कमजोरकिया जाता है। यह सब मिलकर बहुजनों को मुख्यधारा से बाहर करने की साजिश का हिस्सा है। हमारी माँग और अपीलहमारी साफ़ माँग है कि केंद्र सरकार तुरंत निजी उच्च शिक्षण संस्थानों में आरक्षण लागू करने की दिशा में कदम उठाए। संसद समिति की सिफारिशोंको मानकर SC को 15%, ST को 7.5% और OBC वर्ग को 27% प्रतिनिधित्व दिया जाए। इसके साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों केलिए मुफ्त कोचिंग और सहायता की व्यवस्था की जाए। असली समानता की राहजब तक शिक्षा में बराबरी नहीं होगी, तब तक समाज में समानता का सपना अधूरा रहेगा। बहुजन समाज की 90% आबादी अगर शिक्षा से वंचित रहीतो देश कैसे आगे बढ़ेगा? इसलिए ज़रूरी है कि आरक्षण को सही ढंग से लागू किया जाए और हर बच्चे को शिक्षा का अधिकार मिले। यही बाबासाहेब के सपनों का भारत होगा और यही असली सामाजिक न्याय है।

निजी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण क्यों ज़रूरी है? – राजेंद्र पाल गौतम

शिक्षा से ही समाज में बराबरी संभवडॉ. भीमराव आंबेडकर ने हमेशा कहा था कि अगर समाज में समानता लानी है तो शिक्षा सबसे बड़ा हथियार है। लेकिन शिक्षा तभी सार्थक होगी, जबहर वर्ग के बच्चों को समान अवसर मिलेगा। अगर समाज के गरीब, वंचित और पिछड़े वर्ग के बच्चे ही शिक्षा से वंचित रह जाएंगे तो समानता कासपना अधूरा ही रहेगा। बढ़ती आबादी और सरकारी संस्थानों की कमीआज देश की जनसंख्या लगातार बढ़ रही है। लाखों छात्र हर साल उच्च शिक्षा में दाख़िला लेना चाहते हैं। लेकिन सरकारी शिक्षण संस्थानों की संख्याउतनी नहीं बढ़ी, जितनी बढ़नी चाहिए थी। जगह कम पड़ गई और अधिकतर बच्चों को निजी कॉलेजों का सहारा लेना पड़ा। निजी शिक्षा और गरीब वर्ग की मुश्किलेंनिजी शिक्षण संस्थानों की फीस बहुत ज़्यादा होती है। वहां पर आरक्षण लागू नहीं होता, जिससे गरीब और पिछड़े वर्ग के छात्र बाहर रह जाते हैं। जोबच्चे पढ़ाई में अच्छे हैं, आगे बढ़ना चाहते हैं, लेकिन उनके पास पैसे नहीं हैं, उन्हें मजबूरी में अपनी पढ़ाई अधूरी छोड़नी पड़ती है। यही वजह है किSC, ST और OBC वर्ग शिक्षा की दौड़ में पीछे छूटते जा रहे हैं। कांग्रेस सरकार का ऐतिहासिक कानूनइन समस्याओं को देखते हुए कांग्रेस सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया। सरकार ने ऐसा कानून बनाया, जिसमें निजी उच्च शिक्षण संस्थानों में भी SC, ST और OBC वर्ग के लिए आरक्षण की सुविधा देने का प्रावधान किया गया। इसका उद्देश्य यही था कि दलितों, आदिवासियों और पिछड़े वर्ग केबच्चे भी मुख्यधारा में आ सकें और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर मिलें। अदालत का समर्थन और फैसलों की पुष्टिजब इस कानून को लागू करने की बात हुई तो कई लोगों ने इसका विरोध किया और मामला अदालत तक पहुँचा। लेकिन 2008 में अदालत ने इसेसही ठहराया। फिर 2011 और 2014 में भी उच्चतम न्यायालय ने इस कानून को पूरी तरह जायज़ और संवैधानिक माना। यानी अदालत ने भी साफ़कहा कि निजी संस्थानों में आरक्षण लागू होना चाहिए। रिपोर्ट में सामने आई सच्चाईबीते साल संसद की एक समिति ने इस विषय पर गहराई से अध्ययन किया। रिपोर्ट में सामने आया कि निजी संस्थानों में SC वर्ग के सिर्फ़ 0.89% छात्र, ST वर्ग के केवल 0.53% छात्र और OBC वर्ग के मात्र 11.16% छात्र ही पढ़ रहे हैं। ये आँकड़े साफ़ बताते हैं कि शिक्षा से वंचित वर्ग आजभी न्याय और बराबरी से दूर है। भाजपा सरकार की लापरवाही और 11 साल की चुप्पीकांग्रेस सरकार ने जो कानून बनाया था, उस पर अदालत की भी मुहर लग चुकी है। लेकिन भाजपा की सरकार ने पिछले 11 सालों में इस दिशा मेंकोई ठोस कदम नहीं उठाया। सरकार ने न तो इस कानून को लागू किया और न ही गरीब और पिछड़े वर्ग के बच्चों की मदद करने के लिए कोई नईयोजना बनाई। इस लापरवाही का सीधा नुकसान दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों को उठाना पड़ा है।मेरी अपील केंद्र सरकार सेमैं केंद्र सरकार से आग्रह करता हूँ कि निजी शिक्षण संस्थानों में SC, ST और OBC वर्ग के लिए आरक्षण जल्द से जल्द लागू किया जाए। इसकेअलावा समिति ने जो सुझाव दिए हैं, उनका पालन किया जाए। खासकर ऐसे छात्रों के लिए मुफ्त कोचिंग की व्यवस्था होनी चाहिए, जो मेहनती हैंलेकिन आर्थिक रूप से कमजोर हैं। शिक्षा में समान अवसर ही असली न्यायअगर समाज में असली बराबरी लानी है तो शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर देना ही होगा। निजी संस्थानों में आरक्षण लागू होने से गरीब, वंचित औरपिछड़े वर्ग के बच्चे भी आगे बढ़ पाएंगे। यही बाबा साहेब के सपनों का भारत होगा, जहां सबको बराबरी का अधिकार और सम्मान मिले।

GST Reform Reflects PM Modi’s Vision to Make India a Global Economic Leader, Delhi BJP Chief Virendra Sachdeva

GST reforms are part of Prime Minister Narendra Modi’s far-sighted vision. They will boost Indian industry and are a decisive step in the effort to make India the world’s leading economy. Delhi BJP President Shri Virendra Sachdeva has thanked Prime Minister Shri Narendra Modi’s government for reducing GST rate slabs and removing GST from life and health insurance. He stated that these GST reforms are part of the Prime Minister’s visionary approach, aimed at boosting Indian industry and taking a decisive step toward making India the world’s top economy. Virendra Sachdeva thanks the Centre for GST cuts on essentialsVirendra Sachdeva said that reducing GST rate slabs from the first day of Navratri (22nd September) will not only make goods more affordable for consumers but also help curb the issue of tax evasion.He added that the removal of GST from life and health insurance will provide significant relief to the middle class in Delhi. Similarly, the exemption of GST on educational materials related to primary education will benefit not only the poor but also the middle class.

From Vote Chori to Petrol Chori: E20 Policy Becomes a Goldmine for Gadkari Family, Burden for Common Man

The so-called FLAGBEARER of “Na Khaunga, Na Khane Doonga” – after implementing VOTE CHORI- the biggest fraud on the Indian people, implements PETROL CHORI. The latest being the E-20 Policy to Extort Money.There is now widespread outrage around the ethanol blending policy. Union Minister Shri Nitin Gadkari has been aggressively lobbying for ethanol production since he assumed office in 2014. In September 2018, Shri Gadkari said that the government is setting up five ethanol production plants, where ethanol would be made from wood-based products and segregated municipal waste. He also mentioned that this would help make diesel available at ₹50 per litre and a petrol alternative at ₹55 per litre. It turns out that this was a “JUMLA.”Promises of ₹55 petrol fall flat as ethanol-linkedDespite tall claims of achieving 20% ethanol blending five years ahead of schedule, the promises have fallen flat. Not a drop of ethanol has come from wood-based products or municipal waste as pledged, and petrol prices never touched the touted ₹55 per litre. Instead, the common man is left paying more—vehicles guzzle more fuel, break down sooner, and each litre of ethanol guzzles a staggering 3,000 litres of water. Petrol prices have soared from ₹71.41 in 2014 to ₹94.77 in 2025, and diesel from ₹55.49 to ₹87.67, while sugar mills tied to ethanol production laugh all the way to the bank with record profits. Firms tied to Union Minister’s sons seeConflict of Interest: Cian Agro Industries Infrastructure Ltd, owned by Nikhil Gadkari (son of Union Minister Nitin Gadkari), is a key ethanol supplier; another son, Sarang Gadkari, is director at Manas Agro Industries, also in ethanol. Financial Windfall: Cian Agro’s revenue jumped from ₹18 crore (June 2024) to ₹523 crore (June 2025); stock price surged 2184% from ₹37.45 (Jan 2025) to ₹638 (Aug 2025). While the common man’s wages have stagnated and declined, Cian Agro’s financial

कांग्रेस ने उठाए गंभीर सवाल, गडकरी परिवार की इथेनॉल नीति से जनता को नहीं, सिर्फ़ बेटों को हो रहा फायदा बोले कांग्रेस नेता पवन खेड़ा

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इथेनॉल को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा है। उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी पर टारगेट करते हुए कहा कि,उनके मंत्री नितिनगडकरी केंद्र सरकार में नीति बना रहे है, जबकि उनके बेटे इसी से पैसा बना रहे है. गुरुवार को कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस वार्ता करते हुए कांग्रेस प्रवक्तापवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी पर निशाना साधा हैं खेड़ा ने आरोप लगाते हुए कहा कि, एक तरफ पिता नितिनगडकरी केंद्र सरकार में बैठकर इथेनॉल को लेकर नीति बना रहे हैं. जबकि दूसरी तरफ उनका बेटे इसी नीति का फायदा उठाकर पैसा कमा रहे है साल2018 में नितिन गडकरी ने वादा किया था कि 5 इथेनॉल उत्पादक सेंटर तैयार किए जाएंगे. लेकिन, ये सेंटर तैयार नहीं हो पाए. कमाई हो रही बर्बादखेड़ा ने आरोप लगाते हुए कहा, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के दोनों बेटों की कंपनियां इथेनॉल प्रोड्यूस करती हैं बेटे निखिल गडकरी की कंपनीसियान एग्रो का जून 2024 में रेवेन्यू 18 करोड़ था। जो जून, 2025 में बढ़कर 523 करोड़ हो गया. इनकी शेयर की कीमत जनवरी 2025 में 37.45 पैसे थे। अभी 368 रुपए है खेड़ा ने कहा कि, पिछले 11 साल के इतिहास में कोई भी स्कीम समय से पूरी नहीं हुई लेकिन इथेनॉल से जुड़ी स्कीम2025 की समयसीमा से पहले पूरी हो गई है. हमने समय सीमा से पहले 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण हासिल कर लिया है. आज एक लीटर इथेनॉलबनाने में 3000 लीटर पानी खर्च होता है. इस इथेनॉल को तैयार करने में पर्यावरण को भी भारी नुकसान हो रहा है नीति आयोग ने भी कहा किइथेनॉल के चलते गाड़ियों की माइलेज की गिरावट हुई है 2023 से पहले जितने भी इंजन बने हैं, वो इथेनॉल के साथ मेल नहीं खाते हैं. इससे इंजनडैमेज हो रहे, लोगों की कमाई बर्बाद हो रही है. नहीं मिला कोई फायदाप्रवक्ता खेड़ा ने आरोप लगाते हुए कहा कि, रूस से कच्चा सस्ता तेल आता हैं, फिर वह पीएम मोदी के दोस्त की रिफाइनरी में जाता है इसके बादपीएम मोदी के कैबिनेट मंत्रियों के बेटों की फैक्ट्री में जाता है. वहां इसमें इथेनॉल मिक्स होता हैं। फिर दिल्ली में मोदी जी इसमें टैक्स मिक्स मिला देतेहै इस तरह से अर्थव्यवस्था की खिचड़ी बन जाती है। सरकार ने देश को बताया था गया कि इथेनॉल से किसानों को फायदा होगा लेकिन असल मेंउन्हें कोई फायदा नहीं मिल रहा, बल्कि फायदा गडकरी के बेटे जैसे लोग उठा रहे हैं. देश में जितनी भी इथेनॉल की डिस्टिलरीज हैं, वो रेड कैटेगरी मेंआती हैं, यानी पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है. ऐसे में सवाल है- इथेनॉल से देश के किस वर्ग को लाभ मिल रहा है?

महाराष्ट्र उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने मराठा आरक्षण आंदोलन पर विपक्ष पर निशाना साधा, जानें क्या कुछ कहा

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने बृहस्पतिवार को विपक्ष पर हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के कुछ सदस्यों ने हाल ही में हुएमराठा आरक्षण आंदोलन का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश की, लेकिन सरकार ने मामला सुलझा दिया तो उन्होंने चुप्पी साध ली., उपमुख्यमंत्री पवार पुणे में एक कार्यक्रम में बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि महायुति सरकार लोगों के कल्याण के लिए काम कर रही है. एक आदेश भी किया जारीदरअसल, मनोज जरांगे ने 29 अगस्त को मुंबई में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू की थी सीएम देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वालीसरकार ने जरांगे की अधिकांश मांगों को मान लिया, जिसके बाद उन्होंने मंगलवार को भूख हड़ताल वापस ले ली. सरकार ने मराठा समुदाय के सदस्योंको उनकी कुनबी विरासत के ऐतिहासिक साक्ष्यों के साथ कुनबी जाति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए एक समिति गठित करने की घोषणा करते हुएएक आदेश भी जारी किया. विचार किया व्यक्तउपमुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा कि लोगों ने हमें भारी बहुमत देकर सत्ता में बिठाया है. इसलिए हमारा निरंतर प्रयास है कि हम उन्हें सभी लाभ प्रदानकरके उनके लिए काम करें पवार ने कहा कि कभी-कभी समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं, लेकिन हम हमेशा उन्हें सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाने का प्रयासकरते हैं. उपमुख्यमंत्री पवार ने मराठा आरक्षण आंदोलन का हवाला देकर विपक्ष पर हमला बोला उन्होंने कहा कि विपक्ष हमेशा सरकार पर निशानासाधने का मौका तलाशता रहता है उन्होंने कहा कि विपक्ष के कुछ नेताओं ने पिछले तीन-चार दिनों में मुंबई में जो कुछ हुआ, उसका राजनीतिकफायदा उठाने की कोशिश की और प्रेस में जाकर अपने विचार व्यक्त किए.

बाराबंकी में एबीवीपी कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज से राजनीति गरमाई, सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने योगी सरकार पर कसा तंज

बाराबंकी में एबीवीपी कार्यकर्ताओं पर हुए लाठीचार्ज को लेकर सियासत तेज हो गई है अयोध्या से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने इसघटना पर योगी सरकार को घेरते हुए तीखा हमला बोला. सपा सांसद ने कहा कि यह लाठीचार्ज सरकार की हताशा और नाकामी का प्रतीक है औरसाफ संकेत है कि सत्ता से विदाई अब तय है। उन्होंने दावा किया कि जनता का भरोसा भाजपा और उसके कार्यकर्ताओं से उठ चुका है और अब प्रदेशकी जनता अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रही है. न्यायिक जांच की मांगअवधेश प्रसाद ने कहा कि सरकार जनहित के मुद्दों से पूरी तरह मुंह मोड़े हुए है। उन्होंने याद दिलाया कि 21 जुलाई से 21 अगस्त तक संसद का सत्रचला, लेकिन सरकार ने किसी भी लोकहित और जनहित के प्रश्नों पर जवाब नहीं दिया. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में लोकसभा सबसे बड़ा मंच है, लेकिन मौजूदा सरकार विपक्ष की आवाज दबाकर केवल मनमानी करना चाहती है सांसद ने छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लोकतंत्र पर हमला करार देतेहुए इसकी घोर निंदा की और न्यायिक जांच की मांग की बाराबंकी में एबीवीपी कार्यकर्ताओं पर हुए लाठीचार्ज को लेकर अयोध्या से सपा सांसदअवधेश प्रसाद ने इसे योगी सरकार की नाकामी बताया है उन्होंने इसे लोकतंत्र पर हमला बताते हुए न्यायिक जांच की मांग की है.