आप नेता संजय सिंह का मोदी सरकार पर बड़ा आरोप, ‘भारत को छुआछूत युग में वापस ले जाना चाहते “जानें क्या कुछ कहा”

आम आदमी पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रभारी और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई पर हुए हमले के पीछेभाजपा की नफ़रती फौज का हाथ बताया है। उन्होंने कहा कि अगर भारत को बचाना है तो भाजपा रूपी नफरती सांप को कुचलना होगा। सीजेआई परहुए हमले के विरोध में आम आदमी पार्टी 10 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में प्रदर्शन कर जूता फेंकने वाले पर कार्रवाई की मांग करेगी। यहहमला मोदी सरकार, भाजपा और आरएसएस की गहरी साज़िश का हिस्सा है। मुख्य न्यायाधीश की मां ने आरएसएस के कार्यक्रम में जाने से इन्कारकिया तो भाजपा और आरएसएस की गहरी साजिश से उन पर हमला हुआ। संजय सिंह ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश को गाली व मारने की धमकी देनेवाले और गले में हांडी बांधकर अपमान जनक वीडियो बनाने वाले, सब भाजपा की नफरती फ़ौज है। इसलिए इन पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।सीजेआई पर हमला संविधान की आत्मा पर हमला है। मोदी जी, भारत को “छूआछूत युग” में दोबारा वापस ले जाना चाहते हैं, जहां दलितों के गले मेंहांडी बांधी जाएगी। दलितों को अपमानित किया जाता थासंजय सिंह ने कहा कि भारत के मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंकने की कोशिश हुई और पूरी भाजपा सरकार खामोश है। कई घंटों बाद प्रधानमंत्री कोट्वीट करने की याद आई, फोन पर औपचारिकता हुई, लेकिन जिम्मेदार लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह कृत्य करने वाला वकील राकेश किशोरखुलेआम मीडिया में कह रहा है कि उसे कोई अफसोस नहीं है। वह खुश है कि उसने मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंकने की कोशिश की। यह सिर्फमुख्य न्यायाधीश पर हमला नहीं, बल्कि बाबा साहब के संविधान और भारत की आत्मा का अपमान है। संजय सिंह ने भाजपा-आरएसएस कीमानसिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा पूरी तरह खामोश है, क्योंकि उनकी सोच है कि दलितों को सम्मान नहीं मिलना चाहिए। उसकीमातृ संस्था आरएसएस ने 100 साल में एक भी दलित, पिछड़े या आदिवासी को सरसंघचालक नहीं बनाया। सोशल मीडिया पर मुख्य न्यायाधीश केगले में हांडी और पीछे झाड़ू बांधने के वीडियो वायरल हैं। यह वही युग याद दिलाने की कोशिश है, जब दलितों को अपमानित किया जाता था। दलितों को फिर से हांडी-झाड़ू बांधने वाले युग में धकेलनासंजय सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया ट्रोल्स मुख्य न्यायाधीश को गालियां दे रहे हैं। कोई कह रहा है, ‘सिर्फ जूता क्यों, गोली मारनी चाहिए।’ कोईकह रहा है, ‘मुख्य न्यायाधीश पर थूक देना चाहिए।’ अजीत भारती जैसे लोग, जिन्हें नोएडा पुलिस ने पूछताछ के लिए बुलाया, बाहर निकलकर ट्वीटकरते हैं, ‘सरकार भी हमारी, सिस्टम भी हमारा।’ यह भाजपा की नफरत की राजनीति का नतीजा है। केंद्र सरकार इन जहरीले ट्रोल्स को संरक्षण दे रहीहै।संजय सिंह ने केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय से सवाल किया कि मुख्य न्यायाधीश के ऊपर अपनमजनक पोस्ट करने वाले कितने एक्स हैंडल्स अभीतक बैन हुए? कितनी गिरफ्तारियां हुईं? कोई कार्रवाई क्यों नहीं? यह साफ है कि भाजपा इनका साथ दे रही है। यह अपमान सिर्फ मुख्य न्यायाधीशका नहीं है, बल्कि बाबा साहब के संविधान का भी है, जिसने एक दलित बेटे को मुख्य न्यायाधीश की कुर्सी तक पहुंचाया। भाजपा इसे बर्दाश्त नहींकर सकती। वे दलितों को फिर से हांडी-झाड़ू बांधने वाले युग में धकेलना चाहते हैं। भाजपा के इस सपने को पूरा नहीं होने देना है। यह लोग किसी केसगे नहीं
माइक छोड़ मंच पर? मैथिली ठाकुर के ‘मधुर सुर’ अब होंगे चुनावी रण का शंखनाद

बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ी हुई है। चुनावों के लिए कौन सी पार्टी किस दावेदार के साथ उतरेगी ये तमाम अटकलेंलगाई जा रही हैं। ऐसे ही एक दावे की चर्चा लोकप्रिय गायिका मैथिली ठाकुर को लेकर भी चल रही है। दावा किया जा रहा है कि मैथिली ठाकुर2025 का विधानसभा चुनाव लड़ सकती हैं। मैथिली की बीजेपी के नेताओं से मुलाकात के बाद इस तरह की चर्चा होने लगी है। बताया जा रहा हैकि इस मुलाकात के दौरान उनके पिता भी साथ में थे।वहीं, जबलपुर पहुंची भक्ति गायिका मैथिली ठाकुर ने अपने चुनाव लड़ने की खबरों पर कहा, “मैं भी टीवी पर ये सब देख रही हूं। हाल ही में मैं बिहार गई थी और मुझे नित्यानंद राय और विनोद तावड़े से मिलने का मौका मिला। हमने बिहार केभविष्य पर चर्चा की। अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। देखते हैं क्या होता है। मैं अपने गांव के निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ना चाहूंगी, क्योंकि मुझे उससे लगाव है”बिहार चुनाव में वह किसे समर्थन दे रही हैं, इस पर उन्होंने कहा, “मैं अभी इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहती। मैं देशके विकास में हर संभव योगदान देने के लिए पूरी ताकत से खड़ी हूं” बीजेपी नेता विनोद तावड़े से मुलाकात कीदरअसल, विनोद तावड़े ने बीते रविवार को अपने एक्स हैंडल से तस्वीरें शेयर कर लिखा था, “वर्ष 1995 में बिहार में लालू राज आने पर जो परिवारबिहार छोड़कर चले गए, उस परिवार की बिटिया सुप्रसिद्ध गायिका मैथिली ठाकुर जी बदलते बिहार की रफ्तार को देखकर फिर से बिहार आना चाहतीहैं। आज गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय जी और मैंने उनसे आग्रह किया कि बिहार की जनता के लिए और बिहार के विकास के लिए उनका योगदानबिहार का सामान्य आदमी अपेक्षित करता है और वे उनकी अपेक्षाओं को पूरा करें। बिहार की बिटिया मैथिली ठाकुर जी को अनंत शुभकामनाएं!” बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले लोकप्रिय भक्ति गायिका मैथिली ठाकुर के राजनीति में आने की चर्चा तेज हो गई है। हाल ही में उन्होंने गृहराज्यमंत्री नित्यानंद राय और बीजेपी नेता विनोद तावड़े से मुलाकात की, जिसके बाद उनके चुनाव लड़ने के कयास लगाए जा रहे हैं।
25 से 30, हमारे दो भाई बिहार में फिर नीतीश पर बीजेपी का भरोसा, 14 नवंबर को NDA की वापसी का दावा

2020 के विधानसभा चुनाव में भाजपा सीएम नीतीश कुमार को बड़ा भाई बनाकर उनके चेहरे पर चुनाव लड़ी थी। जनता दल यूनाईटेड को 43 सीटआने पर भी भाजपा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ही बनाया था। इस बार चुनाव से पहले विपक्ष लगातार यह कह रहा है कि चुनाव के बाद भाजपानीतीश कुमार को मुख्यमंत्री नहीं बनाएगी। लेकिन, भाजपा के वरिष्ठ नेता हमेशा कहते हैं ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सीएम नीतीश कुमार के नेतृत्वमें ही इस बार भी चुनाव लड़ेगी। इस बात को भाजपा ने और पुख्ता कर दिया। एक नया नारा देकर। बिहार चुनाव की घोषणा होते ही भारतीय जनतापार्टी ने नया 25 से 30, हमारे दो भाई नरेंद्र और नीतीश। यानी 2025 से 2030 तक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही होंगे। 14 नवंबर को फिर आ रही प्रचंड बहुमतभाजपा ने सोशल मीडिया पर भी कुछ ऐसे ही नारे लिखे। जैसे, “बिहार में जारी रहेगी विकास की तेज रफ्तार, 14 नवंबर को फिर एक बार एनडीएसरकार”। इसके अलावा भाजपा ने लिखा कि “जनता का विश्वास, फिर से NDA सरकार! बस 38 दिन का है इंतज़ार, थमेगी नहीं विकास कीरफ्तार।” वहीं एक अन्य पोस्ट में भाजपा ने लिखा कि “बिहार की जनता का मूड, मन-मिजाज सिर्फ एनडीए के साथ, 160 से अधिक सीटों परजीतकर 14 नवंबर को फिर आ रही प्रचंड बहुमत की सरकार!” प्रचंड मतों से समर्थन प्रदान करेगीवहीं केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने लिखा कि भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा आज बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा का मैं स्वागत करता हूं। चुनावलोकतंत्र का सबसे बड़ा उत्सव है। यह देश व प्रदेश को विकास और सुशासन के पथ पर अग्रसर रखने का प्रमुख माध्यम है। पीएम मोदी के नेतृत्व मेंबिहार में NDA सरकार जनकल्याण और सुशासन का पर्याय बनी है। बिहार का यह चुनाव प्रदेश को विकास के रास्ते पर अनवरत ले जाने, घुसपैठियामुक्त करने और जंगलराज को फिर से आने से रोकने का चुनाव है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि लोकतंत्र की जननी बिहार की पुण्यधरा की जनता इनविधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी एवं NDA को अपना आशीर्वाद और प्रचंड मतों से समर्थन प्रदान करेगी।
CJI पर जूता फेंकने वाले वकील की सफाई’सनातन धर्म का किया अपमान, मुझे कोई पछतावा नहीं

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई पर जूता उछालने वाले वकील राकेश किशोर ने कहा है कि वह सीजेआई की टिप्पणी से आहत हैं और उन्हेंअपने किए पर कोई अफसोस या पछतावा नहीं है। वकील राकेश किशोर ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जब भी सनातन धर्म से जुड़े मामले आते हैंतो सुप्रीम कोर्ट ऐसे ही आदेश देता है। सीजेआई पर जूता उछालने की कोशिश के बाद आरोपी वकील राकेश किशोर को निलंबित कर दिया गया है।वकील राकेश किशोर ने कहा ‘मैं आहत था…मैं कोई नशे में नहीं था। ये उनकी कार्रवाई पर मेरी प्रतिक्रिया थी। न तो मैं डरा हुआ हूं और न ही मुझेअपने किए पर कोई अफसोस है। 16 सितंबर को मुख्य न्यायाधीश की अदालत में एक जनहित याचिका दायर की गई थी। मुख्य न्यायाधीश नेइसका मजाक उड़ाते हुए कहा – जाओ और मूर्ति से प्रार्थना करो और उससे ही अपना सिर वापस लगाने के लिए कहो….। जब हमारे सनातन धर्म सेजुड़ा कोई मामला आता है, तो सर्वोच्च न्यायालय ऐसे आदेश देता है। याचिकाकर्ता को राहत नहीं देनी मत दीजिए, लेकिन उसका मजाक भी नउड़ाएं।’ बौद्ध धर्म का पालन करने लगेन्यायपालिका के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ अपनी कार्रवाई को लेकर निलंबित वकील ने कहा कि ‘इतने उच्च संवैधानिक पद पर बैठनेवाले सीजेआई को भी सोचना चाहिए। उन्हें ‘माई लॉर्ड’ शब्द के मतलब को समझना चाहिए और इसकी गरिमा को बनाए रखना चाहिए। आपमॉरीशस जाते हैं तो वहां कहते हैं कि देश बुलडोजर से नहीं चलेगा। मैं सीजेआई से पूछना चाहता हूं कि सरकारी संपत्ति पर अतिक्रमण करने वालों केखिलाफ योगी जी की कार्रवाई गलत है? मैं आहत हूं और आगे भी आहत ही रहूंगा।’ वकील राकेश किशोर ने दलित सीजेआई पर जूता उछालने कोलेकर हो रही आलोचनाओं पर कहा कि ‘मेरा नाम राकेश किशोर है, क्या कोई मेरी जाति बता सकता है? हो सकता है कि मैं भी दलित हूं। सीजेआईबीआर गवई एक दलित हैं और यह एक पक्ष है और इसका फायदा लेने की कोशिश हो रही है। लेकिन वे दलित नहीं हैं। वे पहले सनातनी हिंदू थे, बाद में उन्होंने अपनी आस्था बदल ली और बौद्ध धर्म का पालन करने लगे। अब वे दलित कैसे हैं? ये सिर्फ सोच की बात है।’ उनकी टिप्पणी से आहत हूंवकील राकेश किशोर ने कहा कि ‘न्यायाधीशों को अपनी संवेदनशीलता पर काम करने की जरूरत है। लाखों मामले लंबित हैं। मैं किसी से माफी नहींमांगने वाला और न ही मुझे अफसोस है। मैंने ऐसा कुछ नहीं किया। आप मुझसे सवाल कर रहे हैं, लेकिन ये सब ऊपर वाले ने मुझसे कराया।’ सीजेआई पर सुनवाई के दौरान जूता उछालने वाले वकील राकेश किशोर ने कहा है कि उन्हें अपने किए पर कोई अफसोस नहीं है। उन्होंने कहा कि’सीजेआई ने अपनी टिप्पणी से सनातन धर्म का मजाक उड़ाया। मैं उनकी टिप्पणी से आहत हूं।’
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा भारत AI के क्षेत्र में विश्व के लिए प्रेरणा स्रोत, जिम्मेदार और संतुलित नियमन होगा सफलता की कुंजी

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि ‘भारत पर एक विशेष जिम्मेदारी है, क्योंकि वैश्विक दक्षिण के कई देश हमसे प्रेरणा लेते हैं।’ उन्होंने यह बातमंगलवार को आयोजित ‘ट्रस्ट एंड सेफ्टी इंडिया फेस्टिवल 2025’ में कही। यह आयोजन फरवरी 2026 में होने वाले एआई इम्पैक्ट समिट की तैयारीका हिस्सा है, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के भविष्य पर वैश्विक चर्चा होगी। उन्होंने जयशंकर ने कहा कि भारत आज दुनिया में डिजिटलपब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर का एक प्रेरणास्रोत बन चुका है, चाहे बात आधार, यूपीआई, या डिजिटल गवर्नेंस की हो। उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले दसवर्षों में जिस पैमाने पर जनता तक सेवाएं पहुंचाई हैं और शासन में पारदर्शिता व दक्षता लाई है, वह दुनिया के लिए एक मिसाल बन गई है। उन्होंनेकहा, ‘जब मैं विदेश जाता हूं, तो वहां के नेता मुझसे भारत की डिजिटल सफलताओं की चर्चा करते हैं। अब यह चर्चा एआई के क्षेत्र तक पहुंच चुकीहै।’ विदेश मंत्री ने कहा कि भारत जैसे विशाल समाज के लिए ‘जिम्मेदार एआई’ की दिशा में काम करना बेहद जरूरी है। इसके लिए उन्होंने तीन प्रमुखकदम बताए। जिसमें स्वदेशी उपकरण और ढांचे तैयार करना, इन नवाचारों के लिए आत्म-मूल्यांकन प्रणाली बनाना. और ठोस दिशा-निर्देश तैयारकरना शामिल है। उन्होंने कहा कि केवल इन कदमों के बाद ही यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि एआई का विकास, उसका उपयोग और शासन, सभी सुरक्षित और सभी के लिए सुलभ हों। इसका संतुलित और जिम्मेदार नियमन करेंविदेश मंत्री ने कहा कि दुनिया इस समय एक ‘महान परिवर्तन के मोड़’ पर खड़ी है। जो फैसले आज लिए जाएंगे, वही आने वाले दशकों की दिशा तयकरेंगे। उन्होंने कहा कि जो लोग एआई को अभी भी एक दूर की बात मानते हैं, उन्हें जल्द ही एहसास होगा कि आने वाले कुछ वर्षों में एआई हमारीअर्थव्यवस्थाओं, काम करने के तरीकों, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और जीवनशैली. सब कुछ बदल देगा। उन्होंने कहा, ‘एआई नए अवसर तो लाएगा ही, लेकिन इसके साथ नए खिलाड़ी और नई ताकतें भी उभरेंगी। इसलिए जरूरी है कि हम इसका संतुलित और जिम्मेदार नियमन करें।’ पुरजोर आग्रह कियाउन्होंने कहा कि एआई का असर हर नागरिक तक पहुंचेगा, इसलिए डिजिटल नागरिकों की सुरक्षा के लिए ‘गार्डरेल्स’ यानी सुरक्षा सीमाएं तय करनाबहुत जरूरी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्दों का हवाला देते हुए कहा, ‘टेक्नोलॉजी तभी भलाई की ताकत बनती है, जब मानवता उसे सहीदिशा देती है।’ इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने भी यह माना कि भारत न केवल एआई के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है, बल्किविकासशील देशों के लिए एक ‘नीति मार्गदर्शक’ बन चुका है। भारत का दृष्टिकोण है, टेक्नोलॉजी सबके लिए, जिम्मेदारी के साथ। ट्रस्ट एंड सेफ्टीइंडिया फेस्टिवल 2025 के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा, ‘हम भारत में लगातार वैश्विक एआई शासनऔर एक अंतरराष्ट्रीय एजेंडा तैयार करने की वकालत करते रहे हैं। हमने अपने G-20 प्रेसीडेंसी के दौरान इसका प्रदर्शन किया है और विश्वास, सुरक्षा, निष्पक्षता और जवाबदेही को सुरक्षित रखते हुए सतत विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए इसके उपयोग पर पुरजोर आग्रह किया है।’
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बोले 2025 में भारत करेगा 1.20 लाख करोड़ की स्वदेशी सैन्य खरीद, आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है देश

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि भारत वित्तीय वर्ष 2024-25 में 1.20 लाख करोड़ रुपये मूल्य के घरेलू सैन्य उपकरण और हथियारखरीद रहा है। उन्होंने कहा कि देश सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए तेजी से आत्मनिर्भरता की तरफ ध्यान लगा रहा है। एक कार्यक्रम कोसंबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार, युद्ध क्षेत्र के बदलते स्वरूप, खासकर ड्रोन आदि के इस्तेमाल की अहमियत से पूरी तरहवाकिफ है और उसके अनुसार ही अपनी सैन्य तैयारी कर रही है। राजनाथ सिंह ने बताया कि ‘2021-22 में, घरेलू स्रोतों से हमने करीब 74 हजारकरोड़ रुपये के घरेलू सैन्य उपकरण खरीदे, लेकिन 2024-25 के अंत तक, घरेलू स्रोतों से सैन्य खरीद बढ़कर करीब 1.20 लाख करोड़ रुपये हो गईहै। यह बदलाव केवल आंकड़ों का नहीं, बल्कि मानसिकता का भी है।’ रक्षा मंत्री ने कहा कि ‘मोदी सरकार ने पिछले 10 वर्षों में देश में रक्षा उपकरणोंके स्वदेशी डिजाइन, विकास और निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए कई नीतिगत पहल की हैं और इन पहलों के तहत, अब सैन्य उपकरणों कीखरीद में घरेलू स्रोतों को प्राथमिकता दी जा रही है।’ ऑपरेशन सिंदूर में भी इसका प्रदर्शन देखारक्षा मंत्री ने कहा, ‘भारत सरकार युद्ध के बदलते स्वरूप से पूरी तरह वाकिफ है। आज का युद्ध पूरी तरह से तकनीक आधारित हो गया है। हमनेऑपरेशन सिंदूर में भी इसका प्रदर्शन देखा। इसमें हमने पाया कि ड्रोन, ड्रोन-रोधी युद्ध और वायु-रक्षा प्रणालियों जैसे गैर-संपर्क युद्धों का महत्व काफीबढ़ गया है।’ राजनाथ सिंह ने कहा कि 2047 तक भारत को एक विकसित देश बनाने में रक्षा क्षेत्र की भूमिका अहम है।रक्षा मंत्री ने कहा, ‘हमें महत्वपूर्ण रक्षा क्षमताओं में आत्मनिर्भरता हासिल करनी होगी। साथ ही हमें रक्षा क्षेत्र में एक प्रमुख वैश्विक निर्यातक बननाहोगा। तीसरा, भारत को अत्याधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में आगे ले जाने के लिए, हमें कुछ खास तकनीकों और प्रौद्योगिकी में प्रगति करनी होगी।’ रक्षामंत्री ने कहा, ‘भारत सरकार युद्ध के बदलते स्वरूप से पूरी तरह वाकिफ है। आज का युद्ध पूरी तरह से तकनीक आधारित हो गया है। हमने ऑपरेशनसिंदूर में भी इसका प्रदर्शन देखा।’
कांग्रेस का चुनाव आयोग पर हमला, बिहार में गैर नागरिकों को मतदाता सूची से हटाने का डेटा छुपा रहा आयोग, पारदर्शिता की ज़रूरत

कांग्रेस ने मंगलवार को चुनाव आयोग पर फिर से हमला बोलते हुए कहा कि मतदाता सूची से गैर नागरिकों को हटाने के लिए मतदाता सूची गहनपुनरीक्षण की जरूरत पर बल दिया गया, लेकिन चुनाव आयोग में इतनी हिम्मत नहीं है कि वह देशवासियों को बता सके कि बिहार में कितने गैरनागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए। कांग्रेस महासचिव और पार्टी के संचार प्रभारी जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया मेंसमानता और पारदर्शिता की कमी है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि अगर चुनाव आयोग ने यह जानकारी दी होती कि बिहार में कितनेगैर-नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए, तो उसकी पोल और भी ज्यादा खुल जाती। जयराम रमेश ने बताया कि बिहार विशेष गहन पुनरीक्षण(एसआईआर) पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई मंगलवार से फिर शुरू हो रही है। उन्होंने एक समाचार पत्र में प्रकाशित एक लेख की तस्वीर भी सोशलमीडिया पोस्ट में साझा की, जिसमें एसआईआर प्रक्रिया का विश्लेषण किया गया है। विश्लेषण में दावा किया गया है कि सर्वोच्च न्यायालय केहस्तक्षेप ने बड़े पैमाने पर लोगों के मताधिकार से वंचित होने की आशंकाओं को कम किया है, लेकिन एसआईआर की पूरी प्रक्रिया में सटीकता, समानता, पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। दावे को सिरे से खारिज कर दियाविपक्ष बिहार में एसआईआर प्रक्रिया का तीखा विरोध कर रहा है। विपक्ष ने चुनाव आयोग पर सत्तारूढ़ भाजपा के इशारे पर काम करने का आरोपलगाया। हालांकि चुनाव आयोग ने विपक्ष के दावे को सिरे से खारिज कर दिया। आयोग ने साफ किया कि किसी भी पात्र नागरिक को मतदाता सूचीसे बाहर नहीं रहने दिया जाएगा और किसी भी अपात्र व्यक्ति को मतदाता सूची में शामिल नहीं होने दिया जाएगा। चुनाव आयोग ने सोमवार को बिहारमें विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान कर दिया। इस एलान के तहत 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में बिहार विधानसभा चुनाव के लिएमतदान होगा और 14 नवंबर को मतगणना होगी। विपक्ष बिहार में एसआईआर प्रक्रिया का तीखा विरोध कर रहा है। विपक्ष ने चुनाव आयोग परसत्तारूढ़ भाजपा के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया। हालांकि चुनाव आयोग ने विपक्ष के दावे को सिरे से खारिज कर दिया।
कर्नाटक में लिंगायतों की अलग धर्म की मांग पर सियासी घमासान, CM सिद्धारमैया का ‘कोई रुख नहीं’ बयान और BJP का तीखा आरोप

कर्नाटक में लिंगायत समुदाय द्वारा अलग धर्म का दर्जा देने की मांग की जा रही है। इसे लेकर सोमवार को लिंगायत मठाधीश्वर ओक्कुटा (लिंगायतसंतों का संघ) ने एक कार्यक्रम बसवा संस्कृति अभियान-2025 का आयोजन किया। इस आयोजन में लिंगायतों को अलग धर्म का दर्जा देने की मांगकी गई। जब इसे लेकर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने उनका पक्ष जाना गया तो उन्होंने कहा कि उनका इस मुद्दे पर अपना कोई रुख नहीं है। वहीं विपक्षीभाजपा ने आरोप लगाया है कि हिंदू धर्म और समाज को बांटने की कोशिश की जा रही है। कोप्पल में मीडिया से बात करते हुए सीएम सिद्धारमैया नेकहा, ‘मेरा कोई रुख नहीं है। लोगों का रुख ही मेरा रुख है। जाति जनगणना का काम चल रहा है, हम देखेंगे कि जाति जनगणना के दौरान वे(लिंगायत समुदाय के लोग) अपना धर्म क्या बताते हैं।’ लिंगायत मुद्दे के फिर से उभरने के बारे में पूछे गए एक सवाल पर उन्होंने कहा, ‘यह मुद्दा हमेशासे रहा है। कुछ विरक्त मठ स्वामी इसकी मांग कर रहे हैं।’ मुख्यमंत्री इतनी जल्दी में क्योंकर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बी वाई विजयेंद्र ने किसी का नाम लिए बिना कहा कि लिंगायतों के लिए अलग धर्म का दर्जा देने की मांग फिर से उठी हैऔर लोग जानते हैं कि इसके पीछे कौन है। उन्होंने कहा, ‘हमें हिंदू धर्म को बांटने की कोशिशों के बीच इसकी रक्षा करनी होगी। हमें समाज कोएकजुट करना होगा और सभी समुदायों के साथ न्याय करना होगा। मुझे समझ नहीं आता कि मुख्यमंत्री इतनी जल्दी में क्यों हैं? कुछ ताकतें समाजऔर हिंदू धर्म को बांटनें की कोशिश कर रही हैं। पहले भी ऐसी कोशिशें हुई थीं, लेकिन वे सफल नहीं हुईं और भविष्य में भी सफल नहीं होंगी।’ लिंगायत को कर्नाटक की अगड़ी जातियों में गिना जाता है। यहां के 18 फीसदी लोग लिंगायत समाज से आते हैं। 12वीं सदी में समाज सुधारकबासवन्ना ने हिंदुओं में जाति व्यवस्था में दमन के खिलाफ आंदोलन छेड़ा था। बासवन्ना मूर्ति पूजा नहीं मानते थे और वेदों में लिखी बातों को भीखारिज करते थे। लिंगायत समुदाय के लोग भी शिव की पूजा भी नहीं करते बल्कि अपने शरीर पर ही इष्टलिंग धारण करते हैं जोकि एक गेंद कीआकृति के समान होती है। कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि ‘हमें हिंदू धर्म को बांटने की कोशिशों के बीच इसकी रक्षा करनी होगी। हमें समाज कोएकजुट करना होगा और सभी समुदायों के साथ न्याय करना होगा। मुझे समझ नहीं आता कि मुख्यमंत्री इतनी जल्दी में क्यों हैं?’
गाजा युद्ध में अमेरिका ने दी 21.7 अरब डॉलर की सैन्य सहायता, रिपोर्ट में हुई खुलासा

मंगलवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गाजा में युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका, बीते दो साल में इस्राइल को करीब 21.7 अरब डॉलर की सैन्य सहायता दे चुका है। इसमें बाइडन प्रशासन और ट्रंप प्रशासन द्वारा दी गई मदद शामिल है। हमास के इस्राइल पर हमले औरगाजा में इस्राइल की जवाबी कार्रवाई को दो साल पूरे हो चुके हैं। हमास ने 7 अक्तूबर 2023 को इस्राइल पर हमला किया था। जिसके बाद संघर्षकी शुरुआत हुई और यह अभी भी जारी है। ब्राउन विश्वविद्यालय के वाटसन स्कूल ऑफ इंटरनेशनल एंड पब्लिक अफेयर्स द्वारा प्रकाशित ‘कॉस्ट्सऑफ वॉर’ (युद्ध की लागत) नामक एक अध्ययन में ये भी कहा गया है कि अमेरिका ने पिछले दो वर्षों में पश्चिम एशिया में सुरक्षा सहायता और विभिन्नअभियानों पर करीब 10 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक रकम खर्च की है। यह रिपोर्ट सार्वजनिक तौर पर मौजूद तथ्यों और रिपोर्ट्स पर आधारित है।अमेरिका के विदेश विभाग ने इस रिपोर्ट पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। वहीं व्हाइट हाउस ने पेंटागन से इस संबंध में सवाल करनेको कहा है। संस्थान ने इन आरोपों से इनकार कियायह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा गाजा में युद्ध को समाप्त करने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए इस्राइलऔर हमास के प्रतिनिधि मिस्त्र में बातचीत कर रहे हैं। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि अमेरिकी मदद के बिना इस्राइल, गाजा में अपने अभियान कोजारी नहीं रख पाता। रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न द्विपक्षीय समझौते के तहत अमेरिका भविष्य में भी इस्राइल को अरबों डॉलर की वित्तीय मदद देगा।रिपोर्ट में बताया गया है गाजा युद्ध के पहले वर्ष में, जब पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन सत्ता में थे, अमेरिका ने इस्राइल को 17.9 अरब डॉलर की सैन्य मदददी। वहीं गाजा युद्ध के दूसरे वर्ष में 3.8 अरब डॉलर की मदद दी गई है। यह रिपोर्ट वॉशिंगटन स्थित क्विसी इंस्टीट्यूट फॉर रिस्पॉन्सिबल स्टेटक्राफ्ट केसाथ मिलकर तैयार की गई है। हालांकि कुछ इस्राइल समर्थक समूह क्विसी इंस्टीट्यूट पर अलगाववादी और इस्राइल विरोधी होने का आरोप लगातेहैं। वहीं संस्थान ने इन आरोपों से इनकार किया है। इस्राइल को अरबों डॉलर की वित्तीय मदद देगारिपोर्ट में बताया गया है कि यमन में हूती विद्रोहियों पर हमले, ईरान में परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले और पश्चिम एशिया में अन्य व्यापक गतिविधियों परअमेरिका ने गाजा युद्ध शुरू होने के बाद से 9.65 अरब डॉलर से लेकर 12 अरब डॉलर तक खर्च किए हैं। ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले के लिएअमेरिका ने करीब 2 अरब अमेरिकी डॉलर से लेकर 2.25 अरब अमेरिकी डॉलर के बीच खर्च किए। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि अमेरिकी मदद केबिना इस्राइल, गाजा में अपने अभियान को जारी नहीं रख पाता। रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न द्विपक्षीय समझौते के तहत अमेरिका भविष्य में भीइस्राइल को अरबों डॉलर की वित्तीय मदद देगा।
दिल्ली सरकार सुप्रीम कोर्ट से मांगेगी दीपावली पर ग्रीन पटाखों की अनुमति, प्रदूषण और उत्सव में संतुलन जरूरी

प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट से दीपावली पर राजधानी में ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति मांगेगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि जनभावनाओंऔर पर्यावरण संरक्षण, दोनों में संतुलन जरूरी है। दीपावली को लेकर दिल्लीवालों में अलग उत्साह रहता है। यह पर्व धार्मिक के साथ दिल्ली कीआर्थिक और सांस्कृतिक मजबूती का प्रतीक भी है। दिल्ली के लोग आतिशबाजी के शौकीन हैं, लेकिन प्रदूषण के कारण इस पर रोक लग गई है।सीएम ने कहा है कि दिल्ली सरकार सुप्रीम कोर्ट से अपील करेगी कि दीपावली पर प्रमाणित ग्रीन पटाखों के उपयोग की अनुमति मिले। दिल्लीसरकार पर्यावरण सुरक्षा और प्रदूषण नियंत्रण के लिए पूरी निष्ठा से काम कर रही। सरकार कोर्ट को आश्वस्त करेगी कि न्यायालय के सभी दिशा-निर्देशों और मानकों का पालन होगा। सुनिश्चित करेंगे कि सभी ग्रीन पटाखे अधिकृत संस्थाओं से निर्मित, सरकार की संस्थाओं से प्रमाणित हों। सरकारचाहती है कि दिल्लीवासी साफ, सुरक्षित वातावरण में दीपावली मनाएं। उपयोग पर अस्थायी रोक लगा दीमुख्यमंत्री ने कहा, पिछले अनुभवों से पता चलता है कि पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध से अनुकूल परिणाम नहीं मिले हैं। रोक के आदेश के बावजूदचोरी-छिपे प्रदूषण फैलाने वाले पटाखे प्रयोग में लाए जाते हैं। इससे दिल्ली में प्रदूषण का स्तर गंभीर हो जाता है। इसलिए सरकार चाहती है किदिल्ली में ग्रीन पटाखे चलाने की अनुमति प्रदान की जाए। दिल्ली में हर साल दीपावली के समय वायु गुणवत्ता सूचकांक गंभीर श्रेणी में पहुंच जाताहै। प्रदूषण नियंत्रण के लिए एनजीटी, पिछली दिल्ली सरकार और सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया। 2017 में सुप्रीम कोर्टने दिल्ली एनसीआर में पटाखों की बिक्री और उपयोग पर अस्थायी रोक लगा दी। न्यायालय के सभी दिशा–निर्देशों और मानकों का पालन होगाअक्तूबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखों के सीमित उपयोग की सशर्त अनुमति दी, जिन्हें दीपावली की रात 8 से 10 बजे तक जलाने की अनुमतिमिली। पिछली सरकार ने इस आदेश के बाद कहा कि राजधानी में ग्रीन पटाखों की पहचान, प्रमाणन और वितरण की स्पष्ट व्यवस्था नहीं है। इसकेबाद दिल्ली में पटाखों पर प्रतिबंध जारी रहा। इसके बावजूद साल 2019 और 2020 में प्रदूषण स्तर गंभीर श्रेणी में रहा।नवंबर 2020 में एनजीटी ने आदेश पारित किया कि जिन क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता सूचकांक खराब या उससे ऊपर है, वहां किसी भी प्रकार के पटाखों काउपयोग नहीं किया जा सकता। साल 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने ग्रीन पटाखों पर कोई सर्वमान्य रोक नहीं लगाई है। राज्यों कोस्थानीय प्रदूषण स्थिति के आधार पर प्रतिबंध लगाने की स्वतंत्रता दी है। पिछली सरकार ने प्रदूषण की गंभीर स्थिति का हवाला देते हुए ग्रीन पटाखोंपर प्रतिबंध को उचित ठहराया था। सीएम ने कहा है कि दिल्ली सरकार सुप्रीम कोर्ट से अपील करेगी कि दीपावली पर प्रमाणित ग्रीन पटाखों केउपयोग की अनुमति मिले। दिल्ली सरकार पर्यावरण सुरक्षा और प्रदूषण नियंत्रण के लिए पूरी निष्ठा से काम कर रही। सरकार कोर्ट को आश्वस्त करेगीकि न्यायालय के सभी दिशा-निर्देशों और मानकों का पालन होगा।