All India Mahila Congress Hails Karnataka Govt’s Historic Move on Menstrual Leave, Urges Nationwide Adoption

The All India Mahila Congress warmly welcomes and applauds the Karnataka Government’s progressive decision to grant one paid leave per month to menstruating employees. This landmark move reflects a sensitive and inclusive approach towards women’s health and workplace equity. Menstrual health has long been an ignored aspect of gender-sensitive policymaking. By acknowledging the l. biological realities faced by women, the Karnataka Government has set apowerful precedent for gender justice and workplace dignity. This initiative goes beyond welfare, it is a recognition of rights, compassion, and equality. The All India Mahila Congress firmly believes that true empowerment begins when policy reflects empathy. Ensuring that every working womanWe appeal to all other State Governments and Hon’ble Chief Ministers across the country to adopt similar measures, ensuring that every working woman, across public and private sectors, is treated with fairness and respect. This decision resonates deeply with our continued efforts under the leadership of the IndianNational Congress to promote women’s health, dignity, and economic independence. It is our hope that this step will open the doors for broader discussions on gender equity, healthaccess, and workplace inclusion across India.
In 11 years of BJP rule, country has been dragged into swamp of hatred that will take decades to recover from says Saurabh Bharadwaj

Aam Aadmi Party (AAP) National Convenor Arvind Kejriwal on Thursday expressed deep concern over the rising tide of caste hatred engulfing India, following two deeply disturbing incidents — the shoe attack on Chief Justice of India (CJI) B.R. Gavai, a Dalit, in Delhi, and the suicide of Dalit IPS officer Puran Kumar in Haryana after alleged caste-based harassment.In a post on X, Arvind Kejriwal stated: “Dalit IPS officer Puran Kumar faced such unbearable caste discrimination that he ended his life. The culprits must face the strictest punishment. When the Chief Justice of India is attacked with a shoe, BJP trolls on social media abuse Dalits and even insult Babasaheb Ambedkar. What have they turned India into?” On the other hand, addressing a press conference at the AAP headquarters on Friday, Delhi State President Saurabh Bharadwaj said that in the case of the Dalit IPS officer’s suicide in Haryana, the Chief Secretary of Haryana and the head of the police force are themselves accused. “How can a fair investigation take place when the very heads of the state bureaucracy and police are the accused?” he asked.The AAP Delhi unit chief said that most of the mainstream media, dominated by the upper-caste establishment, is deliberately ignoring this issue, while platforms like Facebook, X, and YouTube—run by more socially diverse groups—are giving it voice. “For the last three days, the Dalit community, the CJI, and Babasaheb B.R. Ambedkar have been openly abused in the most vile manner on social media. Yet, there are attempts to deny the existence of casteism online—often by the same people who are themselves spreading casteist hatred. These are the same individuals who proudly identify as Brahmins, claim superiority, and simultaneously try to deny the reality of caste discrimination,” he said. First, a shoe was hurled at CJI B.R. GavaiCiting two recent incidents against Dalits, Saurabh Bharadwaj said, “First, a shoe was hurled at CJI B.R. Gavai, who belongs to a Dalit community. Following this, social media was flooded with poisonous content against him. The second case is from Haryana, where Dalit IPS officer Y. Puran Kumar, after years of caste-based harassment and humiliation, died by suicide on October 7. People often speak about the misuse of the SC/ST Act, but no one dies by suicide because of false complaints. This tragic incident exposes the bitter truth of casteism that even the most casteist people must acknowledge—those who spend their days and nights abusing Babasaheb Ambedkar.”Saurabh Bharadwaj stated that hatred is being spread across the country in the name of religion, language, state, colour, and caste. “Some social media handles are being paid to spread hate. That is their livelihood. But those who retweet, like, and share such hateful posts must introspect—what have they turned this nation into?” he said. Allowed to enter a temple located inside the Ambala police stationDetailing the circumstances leading to the IPS officer’s death, Saurabh Bharadwaj said, “Puran Kumar was a senior IPS officer of the Haryana cadre. His wife is also an IAS officer. He was not allowed to enter a temple located inside the Ambala police station. When the IPS officer entered the temple, his persecution began. He was harassed to the extent that he repeatedly complained to the Haryana Chief Secretary, DGP, and other senior officials—but no action was taken. Instead, a conspiracy was hatched to implicate him in a false case. Eventually, he shot himself. Before his death, he left behind an eight-page suicide note, naming 15 senior officers from various castes. These are the very castes that control the nation’s resources and the media. There is no hope of justice from them. But the people on social media must ask themselves—when will this cycle of hate stop?”
मराठा आरक्षण पर सियासी घमासान, राधाकृष्ण विखे पाटिल का शरद पवार पर सीधा वार 1994 की गलती से खड़ा हुआ आज का विवाद

मराठा आरक्षण को लेकर महाराष्ट्र भर में सियासी गर्माहट तेज हो गई है। इसी बीच राज्य के मंत्री और राज्य मंत्रिमंडल की मराठा आरक्षण पर बनी उप-समिति के प्रमुख राधाकृष्ण विखे पाटिल ने एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि 1994 में मंडल आयोगकी सिफारिशों को लागू करते समय पवार ने अगर मराठा समुदाय को ओबीसी में शामिल किया होता, तो आज यह आरक्षण विवाद खड़ा ही नहींहोता।ये बात मंत्री पाटिल ने जलगांव के अंतरवाली सराटी गांव में मराठा आरक्षण आंदोलनकारी मनोज जरांगे से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बात करते हुएकहा। इस दौरान विखे पाटिल ने कहा कि यह एक निजी भेंट थी। मैं सिर्फ उनकी तबीयत जानने आया था। हमने कुछ सामान्य मुद्दों पर चर्चा की।सभी को कोर्ट का निर्णय स्वीकार करना चाहिएविखे पाटिल ने आगे कहा कि शरद पवार को अब सामने आकर अपने रुख को स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने मराठाओं को ओबीसी में शामिल न करकेसामाजिक असमानता की नींव रखी। आज की स्थिति के लिए वही जिम्मेदार हैं। उन्होंने ओबीसी नेताओं से अपील की कि वे मराठा आरक्षण काविरोध न करें, क्योंकि हाईकोर्ट ने फिलहाल इस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। उन्होंने मंत्री छगन भुजबळ से भी आरक्षण का विरोध न करनेकी अपील की। इस दौरान विखे पाटिल ने कहा कि दो सितंबर को सरकार द्वारा जारी किया गया जीआर (सरकारी आदेश), जिसमें मराठा समुदाय केउन सदस्यों को कुंभी जाति प्रमाणपत्र देने की बात है जो अपने ओबीसी मूल को साबित कर सकते हैं, फिलहाल बॉम्बे हाईकोर्ट में विचाराधीन है।उन्होंने कहा कि जब तक कोर्ट का फैसला नहीं आता, मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा, लेकिन सभी को कोर्ट का निर्णय स्वीकार करना चाहिए। उनसे अपना रुख स्पष्ट करने की मांगमराठा आरक्षण को लेकर महाराष्ट्र में सियासी घमासान तेज है। मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने शरद पवार पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर1994 में मंडल आयोग लागू करते वक्त मराठा समाज को ओबीसी में शामिल किया गया होता, तो आज का विवाद नहीं होता। उन्होंने पवार परसामाजिक असमानता की नींव रखने का आरोप लगाया और उनसे अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की।
मणिपुर हिंसा पर गरमाई सियासत कोनराड संगमा ने की राज्यपाल से मुलाकात, कांग्रेस ने बोला तीखा हमला

मणिपुर में जातीय हिंसा को दो साल से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक उत्तर पूर्वी राज्य में पूरी तरह से शांति नहीं आ सकी है। शांतिस्थापित करने के लिए सरकार की तरफ से कई कोशिशें की गईं, लेकिन कई संगठन राज्य का बंटवारा करने की सलाह दे रहे हैं। इस बीच राज्य मेंशांति के प्रयासों पर चर्चा के लिए गुरुवार को मेघालय के सीएम और एनपीपी अध्यक्ष कोनराड संगमा ने मणिपुर के गवर्नर अजय कुमार भल्ला सेमुलाकात की। गवर्नर से मुलाकात के बाद शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए कोनराड संगमा ने कहा कि ‘हम इस बात को लेकर पूरी तरह से स्पष्टहैं कि मणिपुर की क्षेत्रीय एकता को बनाए रखा जाना चाहिए और हमारी पार्टी मणिपुर का बंटवारा करने के पक्ष में नहीं है। हमारा मानना है किसहमति बन सकती है और ये बातचीत से ही संभव है। मणिपुर में जातीय हिंसा को लंबा समय बीत चुका है और ये सभी नेताओं की जिम्मेदारी है किआगे बढ़ने के लिए कोई रास्ता निकाला जाए।’ भारत सरकार सामान्य स्थिति बहालसंगमा ने कहा कि ‘मैंने कल मणिपुर के राज्यपाल से मुलाकात की। हमने विभिन्न संगठनों से मिले सुझावों पर चर्चा की। इस बात पर भी चर्चा हुई किमणिपुर सरकार और भारत सरकार सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए क्या कर सकती हैं। सकारात्मक चर्चा हुई। नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) द्वारा दिए गए सुझावों का स्वागत किया गया।’ कोनराड संगमा ने मणिपुर का दो दिवसीय दौरा किया और अपने दौरे पर विभिन्न संगठनों के लोगों औरविस्थापितों और पीड़ित परिजनों से मुलाकात की। संगमा के मणिपुर दौरे पर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि एनपीपीमणिपुर में राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता को बढ़ा रही है। संगमा के मणिपुर दौरे पर निशाना साधते हुए कांग्रेस ने आरोप लगाया कि संगमाराज्य में एनडीए के प्रभाव को बढ़ाने में जुटे हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा और एनपीपी राज्य में शांति और एकता रखने में नाकाम रहीं।मणिपुर में मई 2023 में शुरू हुई जातीय हिंसा में 260 से ज्यादा लोग मारे गए हैं और हजारों लोगों को विस्थापित होना पड़ा था। हिंसा के चलतेसीएम एन बीरेन सिंह को इस्तीफा देना पड़ा था और फिलहाल राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू है। संगमा के मणिपुर दौरे पर कांग्रेस ने तीखा हमलाबोला। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि एनपीपी मणिपुर में राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता को बढ़ा रही है।
Suniel Shetty पहुंचे हाईकोर्ट बिना इजाज़त तस्वीरों के इस्तेमाल पर जताई नाराज़गी, पर्सनैलिटी राइट्स का मामला गरमाया

बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता सुनील शेट्टी ने हाल ही में बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, क्योंकि सोशल मीडिया और कुछ वेबसाइट्स परउनकी तस्वीरों का अनधिकृत इस्तेमाल किया जा रहा है। अभिनेता का कहना है कि बिना अनुमति उनकी छवि और फोटोज का इस्तेमाल व्यावसायिकलाभ के लिए किया जा रहा है, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच रहा है।कई वेबसाइट्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स ने सुनील शेट्टी की तस्वीरोंका इस्तेमाल अपने प्रमोशनल कंटेंट में किया है। इनमें से कुछ रियल एस्टेट एजेंसियों और ऑनलाइन जुआ साइटों ने उनके चेहरे और तस्वीरों काउपयोग किया, जबकि अभिनेता का इन ब्रांड्स या कंपनियों से कोई संबंध नहीं है। अभिनेता की ओर से पेश हुए वकील बीरेंद्र सराफ ने अदालत कोबताया कि यह न केवल उनके क्लाइंट की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है बल्कि यह एक तरह का पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन भी है। अधिकृत और वैधानिक रूप से अनुबंधितमामले की सुनवाई जस्टिस आरिफ डॉक्टर की पीठ के सामने हुई। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया है। सुनील शेट्टीने अपनी याचिका में मांग की है कि कोर्ट तुरंत सभी वेबसाइट्स और सोशल मीडिया अकाउंट्स को आदेश दे कि वो उनकी तस्वीरें हटाएं और भविष्य मेंबिना अनुमति उनका उपयोग न करें। याचिका में यह भी बताया गया है कि कुछ वेबसाइट्स ने न सिर्फ सुनील शेट्टी की बल्कि उनके पोते की फर्जीतस्वीरें भी प्रसारित कीं। इस तरह की सामग्री उनके पारिवारिक जीवन और निजी छवि पर भी असर डाल रही है। अभिनेता ने कहा कि वह किसी भीव्यावसायिक ब्रांड से तभी जुड़ते हैं जब यह पूरी तरह अधिकृत और वैधानिक रूप से अनुबंधित हो। ऐसे में उनकी इमेज का फर्जी इस्तेमाल उनकेकरियर और पब्लिक इमेज दोनों के लिए हानिकारक है। प्रचार अधिकार से जोड़कर सुरक्षा प्रदान करतीयह पहली बार नहीं है जब किसी मशहूर कलाकार को अपनी पहचान की सुरक्षा के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा हो। पहले भी कई सितारेअपनी तस्वीरों या नाम के दुरुपयोग को लेकर नाराजगी जता चुके हैं। ऐश्वर्या राय बच्चन, अमिताभ बच्चन, रणवीर सिंह, करीना कपूर, अनुष्का शर्माजैसे सितारों ने भी इससे पहले अपने नाम या तस्वीरों के गलत उपयोग पर आपत्ति जताई थी। पर्सनैलिटी राइट्स यानी व्यक्तिगत पहचान केअधिकार- ये ऐसे अधिकार हैं जो किसी व्यक्ति की तस्वीर, नाम, आवाज, हस्ताक्षर, पहनावे, बोलने के अंदाज़ या किसी विशेष स्टाइल को बिनाअनुमति इस्तेमाल होने से बचाते हैं। सरल शब्दों में कहें तो ये अधिकार किसी इंसान की पहचान और छवि की कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं, ताकिकोई भी व्यक्ति या संस्था उनकी पहचान का गलत या व्यावसायिक उपयोग न कर सके। हालांकि भारतीय कानून में ‘पर्सनैलिटी राइट्स’ नाम से कोईअलग प्रावधान नहीं है, लेकिन अदालतें इन्हें गोपनीयता, मानहानि और प्रचार अधिकार से जोड़कर सुरक्षा प्रदान करती हैं। भारत में ऐसे कई कानून हैंजो इन अधिकारों को अप्रत्यक्ष रूप से संरक्षित करते हैं-
हिमाचल सचिवालय में सख्त निर्देश, अफसरों की रोजाना हाजिरी और पंचायत चुनाव स्थगित CM सुक्खू ने बिजली खरीद व हरित ऊर्जा पर खास फोकस

हिमाचल प्रदेश सचिवालय शिमला में सभी अफसरों की हाजिरी लगेगी। सुबह 10:00 बजे कार्यालय पहुंचना होगा। हर विभाग में मुख्यमंत्री कीघोषणाओं की समीक्षा के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त होंगे। मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव व प्रधान सलाहकार आईटी को हर 15 दिन में रिपोर्ट देनीहोगी। ये सख्त निर्देश मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शुक्रवार को सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की बैठक की अध्यक्षता करते हुए दिए। सीएम सुक्खू नेसचिवालय में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में कहा कि पंचायत चुनाव रद्द नहीं किए गए हैं। कहा कि भाजपा हर बात को तूल देती है। भाजपाकी एक नीति बन गई है कि हर बात का विरोध करना है। 2023 में जब आपदा आई तो भाजपा ने विशेष सत्र बुलाने की मांग रखी। जब हमने सत्रबुलाया तो भाजपा ने वाकआउट किया, आपदा प्रभावितों के साथ खड़े नहीं हुए। इस बार की आपदा 2023 से कहीं अधिक थी, पिछले दिनोंघुमारवीं में भी बड़ा हादसा हुआ। पंचायत चुनावों को लेकर सभी जिलों के डीसी से बात की गई, कुछ उपायुक्तों ने कहा कि अभी पूरी तरह सेपंचायतों की सड़कें जुड़ी नहीं है, अभी सिर्फ चुनावों को स्थगित करने की बात हुई है, रद्द नहीं किए गए हैं, सभी सड़कें खुलने पर ही चुनाव होंगे। कहाकि 23 जनवरी तक चुनाव करवाने का समय है। 23 जनवरी तक चुनाव हो सकते हैं। प्रभावितों को राहत पहुंचाना सरकार की पहली प्राथमिकता औरकर्तव्य है। कहा कि भाजपा पांच गुटों में बंटी हुई है। एचपी एनर्जी मैनेजमेंट सेंटर ऊर्जा व्यापार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगावहीं मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने अधिकारियों को सर्दी के माैसम के मद्देनजर बिजली खरीद के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।गुरुवार को सचिवालय में एचपी एनर्जी मैनेजमेंट सेंटर की बैठक की अध्यक्षता करते हुए सीएम ने कहा कि सर्दियों में ऊंचे क्षेत्रों में बर्फबारी होने केकारण नदियों में पानी का बहाव कम हो जाता है, जिससे बिजली उत्पादन घट जाता है। ऐसे में पहले से योजना बनाकर किफायती दरों पर बिजलीकी उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एचपी एनर्जी मैनेजमेंट सेंटर ऊर्जा व्यापार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा औरराज्य को अधिकतम आर्थिक लाभ दिलवाने में सहायक सिद्ध होगा। बिजली खरीद लागत कम करने के उद्देश्यउन्होंने कहा कि सेंटर को पूरी पेशेवर दक्षता के साथ काम करना होगा। सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार इस केंद्र को और सशक्त बनाने समेत इसकी कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी। राज्य सरकार ने अपने पहले ही बजट में प्रदेश को 31 मार्च 2026 तक हरित ऊर्जा राज्य बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया था, जिसे हासिल करने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार ने बिजली की खरीद और बिक्री कोसुचारु रूप से प्रबंधित करने और राज्य का राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ बिजली खरीद लागत कम करने के उद्देश्य से ही हिमाचल प्रदेश ऊर्जा प्रबंधनकेंद्र (एचपीईएमसी) की स्थापना की है।
इंडियन मोबाइल कांग्रेस 2025 में भारत का पहला AI-आधारित स्ट्रेस मॉनिटर ‘स्ट्रेफी’ लॉन्च, मानसिक स्वास्थ्य में तकनीकी क्रांति

दिल्ली में हो रहे इंडियन मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2025 में कई तरह के इनोवेशन देखने को मिले, किसी ने पूरी तरीके से एआई पर फोकस किया तोकिसी ने इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) पर, किसी ने 5G और 6G टेक्नोलॉजी पर फोकस किया तो किसी ने रोबोटिक्स पर। इन सब के बीच में एकटेक्नोलॉजी ऐसी भी थी जिसने उस मुद्दे पर फोकस किया जिसके बारें में ज्यादा बात नहीं होती और जिसकी समाज को सख्त जरूरत है। सोल वेलनेसने इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2025 के मंच से देश का पहला एआई-आधारित स्ट्रेस मॉनिटरिंग डिवाइस ‘स्ट्रेफी’ लॉन्च किया। यह डिवाइसआर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से व्यक्ति के तनाव स्तर (stress level) को रियल टाइम में मापने में सक्षम है। माधान मिलकर व्यक्तियों और संस्थाओं को स्ट्रेस‘स्ट्रेफी’ एक स्मार्ट एआई-से चलने वाला कियोस्क है जो व्यक्ति के चेहरे के 68 माइक्रो एक्सप्रेशन्स और पॉइंट्स की जांच करके स्ट्रेस लेवल कोपहचानता है। यह तकनीक चेहरे की छोटी-छोटी हरकतों को ट्रैक कर उन्हें डेटा इनसाइट्स में बदल देती है, जिससे व्यक्ति, संस्थान या संगठन तनावको पहचान, ट्रैक और मैनेज कर सकते हैं। सोल वेलनेस के प्रवक्ता ने लॉन्च के दौरान कहा, “स्ट्रेफी तकनीक और भावनाओं का संगम है। इसके जरिएहम तनाव को ‘दिखने लायक’, ‘मापने लायक’ और ‘काबू में लाने लायक’ बना रहे हैं।” ये सभी समाधान मिलकर व्यक्तियों और संस्थाओं को स्ट्रेस कीशुरुआती पहचान, रोकथाम और समाधान में मदद करते हैं। मानसिक स्वास्थ्य अब तकनीकी रूप से और भी सशक्तसोल वेलनेस के सीईओ और सह-संस्थापक कपिल गुप्ता ने कहा, “एआई हमें तनाव और मानसिक दबाव के शुरुआती संकेत देखने में मदद करता हैजो अब तक अदृश्य थे लेकिन केवल डेटा पर्याप्त नहीं है। असली बदलाव तब आता है जब एआई के साथ दया का जुड़ाव होता है। वहीं से असलीट्रांसफॉर्मेशन शुरू होता है।” उन्होंने बताया कि सोल का उद्देश्य एआई को एम्पथी (सहानुभूति) के साथ जोड़कर समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रतिजागरूकता बढ़ाना है। सोल वेलनेस ने आईएमसी 2025 में भारत का पहला एआई-सक्षम स्ट्रेस मॉनिटर ‘स्ट्रेफी’ लॉन्च किया। यह चेहरे के माइक्रोएक्सप्रेशंस से रियल टाइम में तनाव का स्तर मापता है, जिससे मानसिक स्वास्थ्य अब तकनीकी रूप से और भी सशक्त हो गया है।
सीएम योगी का स्वदेशी मेला में संदेश “भारत का पैसा भारत में ही रहे, तभी बनेगा आत्मनिर्भर

गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को चंपा देवी पार्क में आयोजित यूपी ट्रेड शो स्वदेशी मेला के शुभारंभ के बाद उपस्थित जनसमूह कोसंबोधित किए। इस दौरान सीएम योगी ने कहा कि, हर सेक्टर में हमें आगे बढ़ना होगा। दीपावली के अवसर पर हर हिंदू परिवार लक्ष्मी गणेश जी कीप्रतिमा को घर में रखता है। मूर्ति को चीन बनाता था जो देवी देवता पर विश्वास नहीं करता। वो मार्केट को भुना करके पैसे को हमारे खिलाफ इस्तेमालकरता था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत का पैसा भारत के अंदर रहेगा तभी आत्मनिर्भर बनेगा। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा किदीपावली के पहले जब बाजार में चहल पहल है। पर्व से पहले हर भारतीय के मन में यह भाव रहता है कि वह कुछ न कुछ खरीदारी करेगा। इसी सेजोड़ते हुए पूरे प्रदेश में ट्रेड फेयर लगाने का निर्णय लिया गया। 25 से 29 सितंबर के बीच ग्रेटर नोएडा में यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो का आयोजन हुआथा। इसमें यूपी में बने उत्पादों को एक मंच मिला। 500 से अधिक विदेशी खरीदार आए थे। पर्यावरण प्रदूषण को भी कम करने में सफलता मिलेगीमुख्यमंत्री ने कहा कि आज यूपी बीमारी प्रदेश की जगह उद्यम प्रदेश बन रहा है। उद्यम के साथ तकनीक भी आएगी। उसके लिए स्थानीय स्तर परसर्विस सेंटर भी होंगें। पिछले 8.5 साल में बीमारू राज्य से बदलकर ग्रोथ इंजन बना है। 2017 से पहले यूपी में उद्योग लगाना कितना कठिन था।अराजकता की वजह से उद्यमी यहां से भागने की फिराक में थे। सुरक्षा का माहौल मिला, नियमों में सरलीकरण किया, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस कोआसान किया गया। यही प्रदेश में आज 96 लाख एमएसएमई पुनर्जीवित हुए। इसमें 2 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिला। कृषि के बाद यहीसबसे ज्यादा पैमाने पर रोजगार दे रहा है। कोरोना में जब 40 लाख श्रमिक वापस आए तो एमएसएमई ने कम से कम एक कारीगर को रखा। यूपीआत्मनिर्भरता का मॉडल बन रहा है। कानून व्यवस्था के साथ ही आधुनिकता में भी प्रदेश ने लंबी छलांग लगाई है। 2017 के पहले प्रदेश में केवल 2 एयरपोर्ट क्रियाशील थे। वाराणसी और लखनऊ। आज यूपी में 16 एयरपोर्ट कार्य कर रहे हैं। इसमें चार इंटरनेशनल है। देश का सबसे बड़ा एयरपोर्टजेवर में बन रहा है। मेट्रो आज प्रदेश के छह शहरों में चल रही है। अब उत्तर प्रदेश में ही इलेक्ट्रिक बस बनेगी। जल्द ही यह यूनिट शुरू होने वाली है।पर्यावरण प्रदूषण को भी कम करने में सफलता मिलेगी। देश के अंदर 55 फीसदी मोबाइल फोन का उत्पादन यूपी कर रहासीएम ने कहा कि देश का पहला इन्लेंड वाटरवे यूपी में है। हर बॉर्डर और जिला मुख्यालय को फोरलेन से जोड़ा है। इन्फ्रास्ट्रक्चर स्ट्रक्चर हो, सुरक्षाका माहौल हो और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को सरल करने से हर तरफ से निवेश आने लगा। लोकल मार्केट में हमारे व्यापारी का उत्पाद बिके। देश केअंदर सबसे अधिक जीआई टैग उत्तर प्रदेश को मिले हैं। उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक आइटम बनाने का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। मोबाइल फोन बनानेमें यूपी सबसे आगे है। देश के अंदर 55 फीसदी मोबाइल फोन का उत्पादन यूपी कर रहा है। प्रदेशवासियों से अपील करते हुए सीएम योगी ने कहाकि जो भी खरीदें स्वदेशी खरीदें। आने वाले समय में इससे भी बड़ा प्लेटफॉर्म उपलब्ध करवाएंगे। गाय के गोबर से मां लक्ष्मी का आगमन होता है।उगोरखपुर की ही एक बेटी मसाले बना रही है। ऐसा न हो कि रविकिशन स्वदेशी की बात करे और घड़ी विदेशी पहनें। हम जो भी गिफ्ट दे वो स्वदेशीदें। अगली बार इससे भी बड़ा आयोजन होगा। सीएम ने सूक्ष्म एवं लघु उद्योग विभाग द्वारा स्वदेशी उत्पादों पर बनाई शॉर्ट फिल्म देखी।
बेल शांति पुरस्कार 2025 ट्रंप की राह मुश्किल, युद्ध प्रभावित क्षेत्रों के योद्धाओं पर नजर “इस बार युद्ध क्षेत्र के रक्षक मजबूत दावेदार”

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस साल नोबेल शांति पुरस्कार मिलेगा या नहीं? इस बात को लेकर दुनियाभर में चर्चा तेज है। हालांकि इसबात में भी कोई दोहराई नहीं है कि ट्रंप भले ही खुद को शांति का मसीहा बताएं, लगता हो कि उन्होंने दुनिया में शांति स्थापित की है। इन सबकेबावजूद नोबेल शांति पुरस्कार की दौड़ में वे इस बार भी दौड़ में हैं। कारण है कि वैश्विक मंचों पर सैंकड़ों बार ट्रंप ने कई बड़े संघर्ष को खत्म करने कादावा किया है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि उन्हें इस साल नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलेगा। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि नोबेल शांतिपुरस्कार की सूची में कौन आगे है या फिर इस बार ये किसे मिलने जा रहा है?उप्साला यूनिवर्सिटी के डेटा से पता चलताबता दें कि ट्रंप ने हजारों बार अपने कार्यकाल के दौरान आठ प्रमुख संघर्षों को खत्म कराने का दावा किया है। हद तो तब हो गई जब भारत औरपाकिस्तान के बीच हालिया संघर्ष को खत्म कराने का ट्रंप ने 50 से ज्यादा बार दावा किया। हालांकि ये अलग बात है कि भारत सरकार ने हमेशा सेही इन दावों का खंडन किया है। इसी सिलसिले में जब स्वीडन के अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार प्रोफेसर पीटर वॉलेनस्टीन से सवाल पूछा गया।इसपर उन्होंने एक समाचार एजेंसी से कहा कि नहीं, इस साल ट्रंप को पुरस्कार नहीं मिलेगा। लेकिन शायद अगले साल? तब तक उनकी पहलों परफैली धूल साफ हो जाएगी, जैसे गाजा संकट। दूसरी ओर इस बार विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार विजेता के नाम का चयन थोड़ा मुश्किल भी होसकता है। कारण है कि इस साल की स्थिति बेहद गंभीर है, क्योंकि दुनिया भर में संघर्ष चरम पर हैं। इस्राइल और ईरान की सीधी भिड़ंत, गाजा मेंसंघर्ष, भारत-पाकिस्तान के बीच ड्रोन और मिसाइल हमले, थाईलैंड-कंबोडिया सीमा विवाद जैसी घटनाओं ने माहौल तनावपूर्ण बना दिया है। 2024 में रिकॉर्ड संख्या में राज्य-स्तरीय युद्ध भी हुए थे, जैसा कि स्वीडन की उप्साला यूनिवर्सिटी के डेटा से पता चलता है। लोकतंत्र की रक्षा में सक्रिय भूमिका निभा रहाजब ये बात लगभग-लगभग तय मानी जा रही है कि ट्रंप को इस बार नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलने जा रहा है। तो ये सवाल भी लगातार सामने आरहा है कि अगर ट्रंप नहीं तो कौन? ध्यान रहे कि नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा आज दोपहर 2:30 बजे (भारतीय समयानुसार) ओस्लो में कीजाएगी। ऐसे में इस पुरस्कार के लिए इस बार 338 व्यक्ति और संस्थाओं को नामांकित किया गया है। हालांकि, नामों की आधिकारिक सूची 50 वर्षों तक गोपनीय रखी जाती है। 2024 में यह पुरस्कार जापान के निहोन हिदानक्यो को मिला था, जो परमाणु हमलों के जीवित बचे लोगों कासंगठन है। 2025 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए कई प्रभावशाली नाम चर्चा में हैं। सूडान की इमरजेंसी रिस्पॉन्स रूम्स, जो युद्ध प्रभावित इलाकों मेंलोगों की जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं, एक मजबूत दावेदार मानी जा रही है। वहीं रूस के विपक्षी नेता एलेक्सी नवलनी कीविधवा यूलिया नवलनाया भी इस सूची में शामिल हैं, जो अपने पति की विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर आगे बढ़ा रही हैं। इसके अलावा, ऑफिसफॉर डेमोक्रेटिक इंस्टीट्यूशंस एंड ह्यूमन राइट्स (ODIHR), जो चुनाव निगरानी और लोकतंत्र की रक्षा में सक्रिय भूमिका निभा रहा है, भी एक प्रमुखउम्मीदवार है।
ADGP वाई. पूरन कुमार की आत्महत्या और हरिओम वाल्मिकी की हत्या, मनुवादी मानसिकता के खिलाफ दलित आक्रोश का उभरता स्वर

हरियाणा के वरिष्ठ दलित IPS अधिकारी, ADGP, श्री वाई. पूरन कुमार की मजबूरन आत्महत्या की खबर न केवल स्तब्ध करने वाली है, बल्किसामाजिक अन्याय, अमानवीयता और संवेदनहीनता का भयावह प्रमाण है। परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। पिछले 11 वर्षों में इस देश में भाजपाने मनुवादी मानसिकता इतनी गहरी कर दी है कि ADGP रैंक के दलित अधिकारी को भी न्याय और सुनवाई नहीं मिलती है। जब सुप्रीम कोर्ट मेंसरेआम माननीय मुख्य न्यायाधीश (CJI) पर हमला हो सकता है और उसे भाजपा का Ecosystem जातिवाद और धर्म का हवाला देकर defend कर सकता है, तो हमें ये समझ लेना चाहिए कि “सबका साथ” का नारा एक भद्दा मज़ाक़ था। हरिओम वाल्मिकी जैसे निहत्थे दलित की मॉब लिंचिंगहज़ारों वर्षों से मनुवादी मानसिकता की शोषण करने की आदत इतनी जल्दी तो नहीं बदल सकती। तभी हरिओम वाल्मिकी जैसे निहत्थे दलित कीमॉब लिंचिंग से नृशंस हत्या हो जाती है और प्रधानमंत्री मोदी जी निंदा के दो शब्द भी नहीं बोलते!यह सिर्फ कुछ व्यक्तियों की त्रासदी नहीं यह उसभाजपा और संघ द्वारा पोषित अन्यायपूर्ण व्यवस्था का आईना है, जो दलित, आदिवासी, पिछड़े व अल्पसंख्यक वर्गों के आत्मसम्मान को बार-बारकुचलती रही है। ये संविधान और लोकतंत्र के लिए घातक है।