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कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कथित जातिवादी टिप्पणी करने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। जयपुर में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणियां प्रधानमंत्री की जाति के लिए नहीं, बल्कि उनके चरित्र के लिए थीं। अय्यर ने अपने पुराने विवादित बयान पर सफाई देते हुए कहा, उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया। अय्यर के अनुसार, प्रधानमंत्री ने इस बयान को जाति से इसलिए जोड़ा क्योंकि अय्यर खुद एक ब्राह्मण हैं। उन्होंने ‘चाय बेचने वाला प्रधानमंत्री नहीं बन सकता’ वाले बयान पर भी अपनी बात रखी। अय्यर ने कहा कि उन्होंने ऐसा कभी नहीं कहा। उन्होंने बताया कि उनकी आलोचना मोदी के ‘इतिहास के कम ज्ञान’ को लेकर थी। अय्यर के अनुसार, उन्होंने यह सवाल उठाया था कि कोई ऐसा व्यक्ति, जिसे उनकी नजर में कुछ ऐतिहासिक तथ्यों की जानकारी नहीं है, वह उस भूमिका (प्रधानमंत्री की) में कैसे हो सकता है, जिसमें जवाहरलाल नेहरू थे।

देश में सांप्रदायिक बंटवारे को बढ़ावा दिया
अय्यर ने बताया कि उन्होंने मजाक में कहा था कि अगर मोदी चुनाव हार जाते हैं, तो उनके लिए चाय बांटने का इंतजाम किया जा सकता है। उन्होंने मोदी के वडनगर रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने के दावे पर भी सवाल उठाए। अय्यर ने दावा किया कि 1973 तक वडनगर में कोई रेलवे प्लेटफॉर्म ही नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे भ्रामक दावों ने मोदी को प्रधानमंत्री बनने में मदद की। अंग्रेजी बोलने पर खुद को ‘मैकाले की संतान’ कहे जाने पर भी अय्यर ने पलटवार किया। उन्होंने सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री मोदी को तमिल भाषा आती है? इसके अलावा, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुस्लिमों के बारे में की गई टिप्पणियों ने देश में सांप्रदायिक बंटवारे को बढ़ावा दिया है।

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