सीएम योगी का स्वदेशी मेला में संदेश “भारत का पैसा भारत में ही रहे, तभी बनेगा आत्मनिर्भर

गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को चंपा देवी पार्क में आयोजित यूपी ट्रेड शो स्वदेशी मेला के शुभारंभ के बाद उपस्थित जनसमूह कोसंबोधित किए। इस दौरान सीएम योगी ने कहा कि, हर सेक्टर में हमें आगे बढ़ना होगा। दीपावली के अवसर पर हर हिंदू परिवार लक्ष्मी गणेश जी कीप्रतिमा को घर में रखता है। मूर्ति को चीन बनाता था जो देवी देवता पर विश्वास नहीं करता। वो मार्केट को भुना करके पैसे को हमारे खिलाफ इस्तेमालकरता था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत का पैसा भारत के अंदर रहेगा तभी आत्मनिर्भर बनेगा। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा किदीपावली के पहले जब बाजार में चहल पहल है। पर्व से पहले हर भारतीय के मन में यह भाव रहता है कि वह कुछ न कुछ खरीदारी करेगा। इसी सेजोड़ते हुए पूरे प्रदेश में ट्रेड फेयर लगाने का निर्णय लिया गया। 25 से 29 सितंबर के बीच ग्रेटर नोएडा में यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो का आयोजन हुआथा। इसमें यूपी में बने उत्पादों को एक मंच मिला। 500 से अधिक विदेशी खरीदार आए थे। पर्यावरण प्रदूषण को भी कम करने में सफलता मिलेगीमुख्यमंत्री ने कहा कि आज यूपी बीमारी प्रदेश की जगह उद्यम प्रदेश बन रहा है। उद्यम के साथ तकनीक भी आएगी। उसके लिए स्थानीय स्तर परसर्विस सेंटर भी होंगें। पिछले 8.5 साल में बीमारू राज्य से बदलकर ग्रोथ इंजन बना है। 2017 से पहले यूपी में उद्योग लगाना कितना कठिन था।अराजकता की वजह से उद्यमी यहां से भागने की फिराक में थे। सुरक्षा का माहौल मिला, नियमों में सरलीकरण किया, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस कोआसान किया गया। यही प्रदेश में आज 96 लाख एमएसएमई पुनर्जीवित हुए। इसमें 2 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिला। कृषि के बाद यहीसबसे ज्यादा पैमाने पर रोजगार दे रहा है। कोरोना में जब 40 लाख श्रमिक वापस आए तो एमएसएमई ने कम से कम एक कारीगर को रखा। यूपीआत्मनिर्भरता का मॉडल बन रहा है। कानून व्यवस्था के साथ ही आधुनिकता में भी प्रदेश ने लंबी छलांग लगाई है। 2017 के पहले प्रदेश में केवल 2 एयरपोर्ट क्रियाशील थे। वाराणसी और लखनऊ। आज यूपी में 16 एयरपोर्ट कार्य कर रहे हैं। इसमें चार इंटरनेशनल है। देश का सबसे बड़ा एयरपोर्टजेवर में बन रहा है। मेट्रो आज प्रदेश के छह शहरों में चल रही है। अब उत्तर प्रदेश में ही इलेक्ट्रिक बस बनेगी। जल्द ही यह यूनिट शुरू होने वाली है।पर्यावरण प्रदूषण को भी कम करने में सफलता मिलेगी। देश के अंदर 55 फीसदी मोबाइल फोन का उत्पादन यूपी कर रहासीएम ने कहा कि देश का पहला इन्लेंड वाटरवे यूपी में है। हर बॉर्डर और जिला मुख्यालय को फोरलेन से जोड़ा है। इन्फ्रास्ट्रक्चर स्ट्रक्चर हो, सुरक्षाका माहौल हो और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को सरल करने से हर तरफ से निवेश आने लगा। लोकल मार्केट में हमारे व्यापारी का उत्पाद बिके। देश केअंदर सबसे अधिक जीआई टैग उत्तर प्रदेश को मिले हैं। उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक आइटम बनाने का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। मोबाइल फोन बनानेमें यूपी सबसे आगे है। देश के अंदर 55 फीसदी मोबाइल फोन का उत्पादन यूपी कर रहा है। प्रदेशवासियों से अपील करते हुए सीएम योगी ने कहाकि जो भी खरीदें स्वदेशी खरीदें। आने वाले समय में इससे भी बड़ा प्लेटफॉर्म उपलब्ध करवाएंगे। गाय के गोबर से मां लक्ष्मी का आगमन होता है।उगोरखपुर की ही एक बेटी मसाले बना रही है। ऐसा न हो कि रविकिशन स्वदेशी की बात करे और घड़ी विदेशी पहनें। हम जो भी गिफ्ट दे वो स्वदेशीदें। अगली बार इससे भी बड़ा आयोजन होगा। सीएम ने सूक्ष्म एवं लघु उद्योग विभाग द्वारा स्वदेशी उत्पादों पर बनाई शॉर्ट फिल्म देखी।
बेल शांति पुरस्कार 2025 ट्रंप की राह मुश्किल, युद्ध प्रभावित क्षेत्रों के योद्धाओं पर नजर “इस बार युद्ध क्षेत्र के रक्षक मजबूत दावेदार”

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस साल नोबेल शांति पुरस्कार मिलेगा या नहीं? इस बात को लेकर दुनियाभर में चर्चा तेज है। हालांकि इसबात में भी कोई दोहराई नहीं है कि ट्रंप भले ही खुद को शांति का मसीहा बताएं, लगता हो कि उन्होंने दुनिया में शांति स्थापित की है। इन सबकेबावजूद नोबेल शांति पुरस्कार की दौड़ में वे इस बार भी दौड़ में हैं। कारण है कि वैश्विक मंचों पर सैंकड़ों बार ट्रंप ने कई बड़े संघर्ष को खत्म करने कादावा किया है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि उन्हें इस साल नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलेगा। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि नोबेल शांतिपुरस्कार की सूची में कौन आगे है या फिर इस बार ये किसे मिलने जा रहा है?उप्साला यूनिवर्सिटी के डेटा से पता चलताबता दें कि ट्रंप ने हजारों बार अपने कार्यकाल के दौरान आठ प्रमुख संघर्षों को खत्म कराने का दावा किया है। हद तो तब हो गई जब भारत औरपाकिस्तान के बीच हालिया संघर्ष को खत्म कराने का ट्रंप ने 50 से ज्यादा बार दावा किया। हालांकि ये अलग बात है कि भारत सरकार ने हमेशा सेही इन दावों का खंडन किया है। इसी सिलसिले में जब स्वीडन के अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार प्रोफेसर पीटर वॉलेनस्टीन से सवाल पूछा गया।इसपर उन्होंने एक समाचार एजेंसी से कहा कि नहीं, इस साल ट्रंप को पुरस्कार नहीं मिलेगा। लेकिन शायद अगले साल? तब तक उनकी पहलों परफैली धूल साफ हो जाएगी, जैसे गाजा संकट। दूसरी ओर इस बार विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार विजेता के नाम का चयन थोड़ा मुश्किल भी होसकता है। कारण है कि इस साल की स्थिति बेहद गंभीर है, क्योंकि दुनिया भर में संघर्ष चरम पर हैं। इस्राइल और ईरान की सीधी भिड़ंत, गाजा मेंसंघर्ष, भारत-पाकिस्तान के बीच ड्रोन और मिसाइल हमले, थाईलैंड-कंबोडिया सीमा विवाद जैसी घटनाओं ने माहौल तनावपूर्ण बना दिया है। 2024 में रिकॉर्ड संख्या में राज्य-स्तरीय युद्ध भी हुए थे, जैसा कि स्वीडन की उप्साला यूनिवर्सिटी के डेटा से पता चलता है। लोकतंत्र की रक्षा में सक्रिय भूमिका निभा रहाजब ये बात लगभग-लगभग तय मानी जा रही है कि ट्रंप को इस बार नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलने जा रहा है। तो ये सवाल भी लगातार सामने आरहा है कि अगर ट्रंप नहीं तो कौन? ध्यान रहे कि नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा आज दोपहर 2:30 बजे (भारतीय समयानुसार) ओस्लो में कीजाएगी। ऐसे में इस पुरस्कार के लिए इस बार 338 व्यक्ति और संस्थाओं को नामांकित किया गया है। हालांकि, नामों की आधिकारिक सूची 50 वर्षों तक गोपनीय रखी जाती है। 2024 में यह पुरस्कार जापान के निहोन हिदानक्यो को मिला था, जो परमाणु हमलों के जीवित बचे लोगों कासंगठन है। 2025 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए कई प्रभावशाली नाम चर्चा में हैं। सूडान की इमरजेंसी रिस्पॉन्स रूम्स, जो युद्ध प्रभावित इलाकों मेंलोगों की जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं, एक मजबूत दावेदार मानी जा रही है। वहीं रूस के विपक्षी नेता एलेक्सी नवलनी कीविधवा यूलिया नवलनाया भी इस सूची में शामिल हैं, जो अपने पति की विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर आगे बढ़ा रही हैं। इसके अलावा, ऑफिसफॉर डेमोक्रेटिक इंस्टीट्यूशंस एंड ह्यूमन राइट्स (ODIHR), जो चुनाव निगरानी और लोकतंत्र की रक्षा में सक्रिय भूमिका निभा रहा है, भी एक प्रमुखउम्मीदवार है।