AAP की पटाखा राजनीति उजागर, हिन्दू त्योहारों पर रोक और अल्पसंख्यक तुष्टीकरण का आरोप, भाजपा के अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने साधा निशाना

दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा है की आम आदमी पार्टी ने विगत 7 से 8 साल एक अल्पसंख्यक समुदाय को खुश करने के लिएन्यायालयों में ऐसी पर्यावरण रिपोर्ट दर्ज करवाईं जिनके चलते माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने दशहरा, दुर्गा पूजा, दिवाली जैसे पर्वों पर दिल्ली मेंपटाखे जलाने पर रोक लगाई।भाजपा लगातार कहती रही की दशहरे की शाम आधा घंटे और दिवाली पर एक दिन रात में जलने वाले पटाखे दिल्लीमें सर्दियों में प्रदूषण का मुख्य कारण नही है अतः इनकी अनुमति दी जाये पर क्योंकि तत्कालीन मुख्य मंत्री अरविंद केजरीवाल एवं पर्यावरण मंत्रीगोपाल राय अल्पसंख्यक समुदाय को खुश करना चाहते थे अतः उन्होने खुद ऐसा वातावरण बनाया की पटाखों पर प्रतिबंध लगे। आम आदमी पार्टी आज भी नही चाहतीकेजरीवाल सरकार खुद ग्रीन पटाखे लेकर आई और खुद ही उनके विरूद्ध भी वातावरण बनवा कर रोक लगवा दी। वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा है आमआदमी पार्टी आज भी नही चाहती की सर्वोच्च न्यायालय पटाखे ख़ासकर ग्रीन पटाखे चलाने की छूट दे और भारद्वाज का आज की प्रेस वार्ता में दियाब्यान की “अगर कोर्ट कहेगा कि कितना भी प्रदूषण हो, लेकिन दिवालीपर पटाखे चलने चाहिए तो हम भी उसे मान लेंगे” साफ दर्शाता है की सौरभभारद्वाज एवं अन्य “आप” नेता आज भी मानते हैं की प्रदूषण अत्याधिक है और ग्रीन पटाखों को जलाने की छूट नही मिलनी चाहिए। केजरीवाल सरकार ने 7/8 वर्ष पटाखों पर रोक लगवाईदिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा है की काश सौरभ भारद्वाज यह समझ पाते की उनकी केजरीवाल सरकार ने 7/8 वर्ष पटाखों पर रोक लगवाई परदिल्ली वालों ने उस रोक के विरूद्ध जा कर हर वर्ष दिवाली की रात को जम कर आतिशबाज़ी की। बेहतर होगा की “आप” नेता नकारत्मक भाषा मेंप्रेस कांफ्रेंस करके हिन्दुओं की दिवाली की रात पटाखे चलाने की धार्मिक आस्था को और ठेस पहुंचाने की जगह ग्रीन पटाखों पर से रोक हटाने केदिल्ली सरकार के प्रस्ताव का समर्थन करें।
Overwhelming people’s support to Delhi Congress’ signature campaign against Vote Chori by the BJP says Devender Yadav

Under the leadership of Delhi Pradesh Congress Committee (DPCC) President Shri. Devender Yadav, a signature campaign was held at the Karawal Nagar District Congress Committee and Tilak Nagar District Congress Committee today against Vote Chori by the BJP in collusion with the Election Commission, which received overwhelming support from the people. Congress workers went door-to-door to meet the people and discuss with the public about BJP’s conspiracy of stealing votes in connivance with the Election Commission and get their signatures. Office-bearers and workers of frontal organizations, Youth Congress, Mahila Congress, Seva Dal and NSUI, cells and departments also joined signature campaign and raised slogans “Vote Chor Gaddi Chhod”. Delhi are openly supporting the signature campaign against voteDevender Yadav said that people of Delhi are openly supporting the signature campaign against vote theft, to boost the morale of the Congress workers. During the signature campaign led by Shri Devender Yadav, shopkeepers in markets, public on roads, red lights, street vendors, those who earn their livelihood on the roadside etc. joined the signature campaign to register their protest against vote theft by the BJP. Devender Yadav said that it seems as if people were waiting to join the signature campaign started by the Congress in every district to free the country from the vote theft. Responsibility of conducting electionsApart from DPCC president Shri Devender Yadav, district presidents Aadesh Bhardwaj and Dharampal Chandela, former MLA Bhisham Sharma, observers C..P. Mittal, Ramesh Sabbarwal, Kamal Kant Sharma, Tasvir Solanki, Ishwar Bagri, Dr. P.K. Mishra, J.P. Panwar, Rajesh Yadav, Laxman Rawat, Rajiv Verma, Lokendra Chaudhary, Mangesh Tyagi, Zeba Khan, woman district president Priya Jayant and Farid Shah, Pramod Jayant, Deepak Vashisth, Prem Kumar, Sureshwati Chauhan were present. Devender Yadav said that Leader of the Opposition in the Lok Sabha Shri Rahul Gandhi had exposed BJP’s conspiracy with the Election Commission to indulge in vote theft before the country and the signature campaign was started to take BJP’s vote theft to the people across the country. He said that the responsibility of conducting elections in a fair and transparent manner rested with the Election Commission, which had been given Constitutional status by the makers of the Constitution but the ruling BJP indulged in a conspiracy to steal votes by misusing the Election Commission.
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह का LNJP अस्पताल का औचक निरीक्षण, कहा– “सभी वेंटिलेटर कार्यशील, MRI-CT मशीनें जनवरी2026 तक सभी अस्पतालों में”

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर पंकज कुमार सिंह ने आज लोक नायक अस्पताल (LNJP) का औचक निरीक्षण कर जमीनी हालात का जायजालिया। मंत्री महोदय ने अस्पताल में मौजूद मेडिकल सुविधाओं और मेडिकल उपकरणों का बारीकी से निरीक्षण किया। स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर पंकजकुमार सिंह ने कहा कि LNJP अस्पताल में मौजूद सभी 80 वेंटिलेटर पूरी तरह से काम कर रहे हैं। साथ ही आपातकालीन मरीजों के उपयोग के लिएअलग से 18 वेंटिलेटर आरक्षित हैं। स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर पंकज कुमार ने LNJP अस्पताल के इमरजेंसी विभाग, ओपीडी, ओटी समेत सभी वार्डों कामौके पर जाकर निरीक्षण करने के साथ डॉक्टरों, मेडिकल स्टाफ, मरीजों और उनके परिजनों को भरोसा दिया कि दिल्ली के नागरिकों को गुणवत्तापूर्णऔर विश्व स्तरीय मेडिकल सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है। अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को किसी भी तरह की कोईपरेशानी नहीं हो, इसके लिए हमारी सरकार ने समस्याओं के तत्काल समाधान के लिए सभी अस्पताल प्रबंधन को सख्त निर्देश दिए हैं।प्रत्येक नागरिकों के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं और मजबूतस्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर पंकज कुमार सिंह ने कहा कि दिल्ली की माननीय मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के कुशल नेतृत्व में हमारी सरकार राजधानी के प्रत्येकनागरिकों के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं और मजबूत मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर पंकजकुमार सिंह ने नॉन-फंक्शनल वेंटिलेटर के मुद्दे पर हो रही राजनीति पर निशाना साधते हुए कहा कि लोक नायक अस्पताल (LNJP) जैसे राजधानी केप्रतिष्ठित और व्यस्त अस्पताल में इतनी बड़ी संख्या में वेंटिलेटर खराब होना किसी भी सूरत में संभव नहीं है। हमारी सरकार की तरफ से मेडिकलउपकरणों की कार्यशीलता की जांच और कार्यशील होने की पुष्टि करने के लिए पिछले कई महीनों की आधिकारिक रिपोर्ट भी संकलित की गई है।दिल्ली सरकार की प्राथमिकता राजधानी के सभी नागरिकों के लिए उच्च गुणवत्ता और राष्ट्रीय मानक के अनुरूप स्वास्थ्य सुविधाएं और मजबूतमेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराना है। 222 अतिरिक्त वेंटिलेटर उपलब्धस्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर पंकज कुमार सिंह ने बताया कि कि सेंट्रल प्रोक्योरमेंट के तहत हमारे पास 222 अतिरिक्त वेंटिलेटर उपलब्ध हैं। अगर किसी भीसरकारी अस्पताल को अतिरिक्त वेंटिलेटर की आवश्यकता होगी तो वह इस आरक्षित कोटा से वेंटिलेटर को ले सकते हैं। मंत्री महोदय ने कहा कि कहानॉन-फंक्शनल वेंटिलेटर के बारे में गलत और भ्रामक जानकारी प्रस्तुत की गई जो तथ्यात्मक रूप से पूरी तरह से गलत है। स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर पंकजकुमार सिंह ने यह भी कहा कि सरकारी अस्पतालों के लिए MRI और CT स्कैन मशीनों के प्रोक्योरमेंट की प्रक्रिया प्रगति पर है। जनवरी 2026 तकदिल्ली के सभी सरकारी अस्पतालों में MRI और CT स्कैन मशीनों की सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाएंगी। स्वास्थ्य मंत्री ने जोर देते हुए कहा किहमारी सरकार का यह कदम दिल्ली की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को देश में सर्वश्रेष्ठ बनाने की व्यापक सोच का हिस्सा हैं।
All India Mahila Congress Hails Karnataka Govt’s Historic Move on Menstrual Leave, Urges Nationwide Adoption

The All India Mahila Congress warmly welcomes and applauds the Karnataka Government’s progressive decision to grant one paid leave per month to menstruating employees. This landmark move reflects a sensitive and inclusive approach towards women’s health and workplace equity. Menstrual health has long been an ignored aspect of gender-sensitive policymaking. By acknowledging the l. biological realities faced by women, the Karnataka Government has set apowerful precedent for gender justice and workplace dignity. This initiative goes beyond welfare, it is a recognition of rights, compassion, and equality. The All India Mahila Congress firmly believes that true empowerment begins when policy reflects empathy. Ensuring that every working womanWe appeal to all other State Governments and Hon’ble Chief Ministers across the country to adopt similar measures, ensuring that every working woman, across public and private sectors, is treated with fairness and respect. This decision resonates deeply with our continued efforts under the leadership of the IndianNational Congress to promote women’s health, dignity, and economic independence. It is our hope that this step will open the doors for broader discussions on gender equity, healthaccess, and workplace inclusion across India.
In 11 years of BJP rule, country has been dragged into swamp of hatred that will take decades to recover from says Saurabh Bharadwaj

Aam Aadmi Party (AAP) National Convenor Arvind Kejriwal on Thursday expressed deep concern over the rising tide of caste hatred engulfing India, following two deeply disturbing incidents — the shoe attack on Chief Justice of India (CJI) B.R. Gavai, a Dalit, in Delhi, and the suicide of Dalit IPS officer Puran Kumar in Haryana after alleged caste-based harassment.In a post on X, Arvind Kejriwal stated: “Dalit IPS officer Puran Kumar faced such unbearable caste discrimination that he ended his life. The culprits must face the strictest punishment. When the Chief Justice of India is attacked with a shoe, BJP trolls on social media abuse Dalits and even insult Babasaheb Ambedkar. What have they turned India into?” On the other hand, addressing a press conference at the AAP headquarters on Friday, Delhi State President Saurabh Bharadwaj said that in the case of the Dalit IPS officer’s suicide in Haryana, the Chief Secretary of Haryana and the head of the police force are themselves accused. “How can a fair investigation take place when the very heads of the state bureaucracy and police are the accused?” he asked.The AAP Delhi unit chief said that most of the mainstream media, dominated by the upper-caste establishment, is deliberately ignoring this issue, while platforms like Facebook, X, and YouTube—run by more socially diverse groups—are giving it voice. “For the last three days, the Dalit community, the CJI, and Babasaheb B.R. Ambedkar have been openly abused in the most vile manner on social media. Yet, there are attempts to deny the existence of casteism online—often by the same people who are themselves spreading casteist hatred. These are the same individuals who proudly identify as Brahmins, claim superiority, and simultaneously try to deny the reality of caste discrimination,” he said. First, a shoe was hurled at CJI B.R. GavaiCiting two recent incidents against Dalits, Saurabh Bharadwaj said, “First, a shoe was hurled at CJI B.R. Gavai, who belongs to a Dalit community. Following this, social media was flooded with poisonous content against him. The second case is from Haryana, where Dalit IPS officer Y. Puran Kumar, after years of caste-based harassment and humiliation, died by suicide on October 7. People often speak about the misuse of the SC/ST Act, but no one dies by suicide because of false complaints. This tragic incident exposes the bitter truth of casteism that even the most casteist people must acknowledge—those who spend their days and nights abusing Babasaheb Ambedkar.”Saurabh Bharadwaj stated that hatred is being spread across the country in the name of religion, language, state, colour, and caste. “Some social media handles are being paid to spread hate. That is their livelihood. But those who retweet, like, and share such hateful posts must introspect—what have they turned this nation into?” he said. Allowed to enter a temple located inside the Ambala police stationDetailing the circumstances leading to the IPS officer’s death, Saurabh Bharadwaj said, “Puran Kumar was a senior IPS officer of the Haryana cadre. His wife is also an IAS officer. He was not allowed to enter a temple located inside the Ambala police station. When the IPS officer entered the temple, his persecution began. He was harassed to the extent that he repeatedly complained to the Haryana Chief Secretary, DGP, and other senior officials—but no action was taken. Instead, a conspiracy was hatched to implicate him in a false case. Eventually, he shot himself. Before his death, he left behind an eight-page suicide note, naming 15 senior officers from various castes. These are the very castes that control the nation’s resources and the media. There is no hope of justice from them. But the people on social media must ask themselves—when will this cycle of hate stop?”
मराठा आरक्षण पर सियासी घमासान, राधाकृष्ण विखे पाटिल का शरद पवार पर सीधा वार 1994 की गलती से खड़ा हुआ आज का विवाद

मराठा आरक्षण को लेकर महाराष्ट्र भर में सियासी गर्माहट तेज हो गई है। इसी बीच राज्य के मंत्री और राज्य मंत्रिमंडल की मराठा आरक्षण पर बनी उप-समिति के प्रमुख राधाकृष्ण विखे पाटिल ने एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि 1994 में मंडल आयोगकी सिफारिशों को लागू करते समय पवार ने अगर मराठा समुदाय को ओबीसी में शामिल किया होता, तो आज यह आरक्षण विवाद खड़ा ही नहींहोता।ये बात मंत्री पाटिल ने जलगांव के अंतरवाली सराटी गांव में मराठा आरक्षण आंदोलनकारी मनोज जरांगे से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बात करते हुएकहा। इस दौरान विखे पाटिल ने कहा कि यह एक निजी भेंट थी। मैं सिर्फ उनकी तबीयत जानने आया था। हमने कुछ सामान्य मुद्दों पर चर्चा की।सभी को कोर्ट का निर्णय स्वीकार करना चाहिएविखे पाटिल ने आगे कहा कि शरद पवार को अब सामने आकर अपने रुख को स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने मराठाओं को ओबीसी में शामिल न करकेसामाजिक असमानता की नींव रखी। आज की स्थिति के लिए वही जिम्मेदार हैं। उन्होंने ओबीसी नेताओं से अपील की कि वे मराठा आरक्षण काविरोध न करें, क्योंकि हाईकोर्ट ने फिलहाल इस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। उन्होंने मंत्री छगन भुजबळ से भी आरक्षण का विरोध न करनेकी अपील की। इस दौरान विखे पाटिल ने कहा कि दो सितंबर को सरकार द्वारा जारी किया गया जीआर (सरकारी आदेश), जिसमें मराठा समुदाय केउन सदस्यों को कुंभी जाति प्रमाणपत्र देने की बात है जो अपने ओबीसी मूल को साबित कर सकते हैं, फिलहाल बॉम्बे हाईकोर्ट में विचाराधीन है।उन्होंने कहा कि जब तक कोर्ट का फैसला नहीं आता, मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा, लेकिन सभी को कोर्ट का निर्णय स्वीकार करना चाहिए। उनसे अपना रुख स्पष्ट करने की मांगमराठा आरक्षण को लेकर महाराष्ट्र में सियासी घमासान तेज है। मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने शरद पवार पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर1994 में मंडल आयोग लागू करते वक्त मराठा समाज को ओबीसी में शामिल किया गया होता, तो आज का विवाद नहीं होता। उन्होंने पवार परसामाजिक असमानता की नींव रखने का आरोप लगाया और उनसे अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की।
मणिपुर हिंसा पर गरमाई सियासत कोनराड संगमा ने की राज्यपाल से मुलाकात, कांग्रेस ने बोला तीखा हमला

मणिपुर में जातीय हिंसा को दो साल से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक उत्तर पूर्वी राज्य में पूरी तरह से शांति नहीं आ सकी है। शांतिस्थापित करने के लिए सरकार की तरफ से कई कोशिशें की गईं, लेकिन कई संगठन राज्य का बंटवारा करने की सलाह दे रहे हैं। इस बीच राज्य मेंशांति के प्रयासों पर चर्चा के लिए गुरुवार को मेघालय के सीएम और एनपीपी अध्यक्ष कोनराड संगमा ने मणिपुर के गवर्नर अजय कुमार भल्ला सेमुलाकात की। गवर्नर से मुलाकात के बाद शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए कोनराड संगमा ने कहा कि ‘हम इस बात को लेकर पूरी तरह से स्पष्टहैं कि मणिपुर की क्षेत्रीय एकता को बनाए रखा जाना चाहिए और हमारी पार्टी मणिपुर का बंटवारा करने के पक्ष में नहीं है। हमारा मानना है किसहमति बन सकती है और ये बातचीत से ही संभव है। मणिपुर में जातीय हिंसा को लंबा समय बीत चुका है और ये सभी नेताओं की जिम्मेदारी है किआगे बढ़ने के लिए कोई रास्ता निकाला जाए।’ भारत सरकार सामान्य स्थिति बहालसंगमा ने कहा कि ‘मैंने कल मणिपुर के राज्यपाल से मुलाकात की। हमने विभिन्न संगठनों से मिले सुझावों पर चर्चा की। इस बात पर भी चर्चा हुई किमणिपुर सरकार और भारत सरकार सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए क्या कर सकती हैं। सकारात्मक चर्चा हुई। नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) द्वारा दिए गए सुझावों का स्वागत किया गया।’ कोनराड संगमा ने मणिपुर का दो दिवसीय दौरा किया और अपने दौरे पर विभिन्न संगठनों के लोगों औरविस्थापितों और पीड़ित परिजनों से मुलाकात की। संगमा के मणिपुर दौरे पर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि एनपीपीमणिपुर में राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता को बढ़ा रही है। संगमा के मणिपुर दौरे पर निशाना साधते हुए कांग्रेस ने आरोप लगाया कि संगमाराज्य में एनडीए के प्रभाव को बढ़ाने में जुटे हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा और एनपीपी राज्य में शांति और एकता रखने में नाकाम रहीं।मणिपुर में मई 2023 में शुरू हुई जातीय हिंसा में 260 से ज्यादा लोग मारे गए हैं और हजारों लोगों को विस्थापित होना पड़ा था। हिंसा के चलतेसीएम एन बीरेन सिंह को इस्तीफा देना पड़ा था और फिलहाल राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू है। संगमा के मणिपुर दौरे पर कांग्रेस ने तीखा हमलाबोला। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि एनपीपी मणिपुर में राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता को बढ़ा रही है।
Suniel Shetty पहुंचे हाईकोर्ट बिना इजाज़त तस्वीरों के इस्तेमाल पर जताई नाराज़गी, पर्सनैलिटी राइट्स का मामला गरमाया

बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता सुनील शेट्टी ने हाल ही में बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, क्योंकि सोशल मीडिया और कुछ वेबसाइट्स परउनकी तस्वीरों का अनधिकृत इस्तेमाल किया जा रहा है। अभिनेता का कहना है कि बिना अनुमति उनकी छवि और फोटोज का इस्तेमाल व्यावसायिकलाभ के लिए किया जा रहा है, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच रहा है।कई वेबसाइट्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स ने सुनील शेट्टी की तस्वीरोंका इस्तेमाल अपने प्रमोशनल कंटेंट में किया है। इनमें से कुछ रियल एस्टेट एजेंसियों और ऑनलाइन जुआ साइटों ने उनके चेहरे और तस्वीरों काउपयोग किया, जबकि अभिनेता का इन ब्रांड्स या कंपनियों से कोई संबंध नहीं है। अभिनेता की ओर से पेश हुए वकील बीरेंद्र सराफ ने अदालत कोबताया कि यह न केवल उनके क्लाइंट की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है बल्कि यह एक तरह का पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन भी है। अधिकृत और वैधानिक रूप से अनुबंधितमामले की सुनवाई जस्टिस आरिफ डॉक्टर की पीठ के सामने हुई। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया है। सुनील शेट्टीने अपनी याचिका में मांग की है कि कोर्ट तुरंत सभी वेबसाइट्स और सोशल मीडिया अकाउंट्स को आदेश दे कि वो उनकी तस्वीरें हटाएं और भविष्य मेंबिना अनुमति उनका उपयोग न करें। याचिका में यह भी बताया गया है कि कुछ वेबसाइट्स ने न सिर्फ सुनील शेट्टी की बल्कि उनके पोते की फर्जीतस्वीरें भी प्रसारित कीं। इस तरह की सामग्री उनके पारिवारिक जीवन और निजी छवि पर भी असर डाल रही है। अभिनेता ने कहा कि वह किसी भीव्यावसायिक ब्रांड से तभी जुड़ते हैं जब यह पूरी तरह अधिकृत और वैधानिक रूप से अनुबंधित हो। ऐसे में उनकी इमेज का फर्जी इस्तेमाल उनकेकरियर और पब्लिक इमेज दोनों के लिए हानिकारक है। प्रचार अधिकार से जोड़कर सुरक्षा प्रदान करतीयह पहली बार नहीं है जब किसी मशहूर कलाकार को अपनी पहचान की सुरक्षा के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा हो। पहले भी कई सितारेअपनी तस्वीरों या नाम के दुरुपयोग को लेकर नाराजगी जता चुके हैं। ऐश्वर्या राय बच्चन, अमिताभ बच्चन, रणवीर सिंह, करीना कपूर, अनुष्का शर्माजैसे सितारों ने भी इससे पहले अपने नाम या तस्वीरों के गलत उपयोग पर आपत्ति जताई थी। पर्सनैलिटी राइट्स यानी व्यक्तिगत पहचान केअधिकार- ये ऐसे अधिकार हैं जो किसी व्यक्ति की तस्वीर, नाम, आवाज, हस्ताक्षर, पहनावे, बोलने के अंदाज़ या किसी विशेष स्टाइल को बिनाअनुमति इस्तेमाल होने से बचाते हैं। सरल शब्दों में कहें तो ये अधिकार किसी इंसान की पहचान और छवि की कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं, ताकिकोई भी व्यक्ति या संस्था उनकी पहचान का गलत या व्यावसायिक उपयोग न कर सके। हालांकि भारतीय कानून में ‘पर्सनैलिटी राइट्स’ नाम से कोईअलग प्रावधान नहीं है, लेकिन अदालतें इन्हें गोपनीयता, मानहानि और प्रचार अधिकार से जोड़कर सुरक्षा प्रदान करती हैं। भारत में ऐसे कई कानून हैंजो इन अधिकारों को अप्रत्यक्ष रूप से संरक्षित करते हैं-
हिमाचल सचिवालय में सख्त निर्देश, अफसरों की रोजाना हाजिरी और पंचायत चुनाव स्थगित CM सुक्खू ने बिजली खरीद व हरित ऊर्जा पर खास फोकस

हिमाचल प्रदेश सचिवालय शिमला में सभी अफसरों की हाजिरी लगेगी। सुबह 10:00 बजे कार्यालय पहुंचना होगा। हर विभाग में मुख्यमंत्री कीघोषणाओं की समीक्षा के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त होंगे। मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव व प्रधान सलाहकार आईटी को हर 15 दिन में रिपोर्ट देनीहोगी। ये सख्त निर्देश मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शुक्रवार को सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की बैठक की अध्यक्षता करते हुए दिए। सीएम सुक्खू नेसचिवालय में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में कहा कि पंचायत चुनाव रद्द नहीं किए गए हैं। कहा कि भाजपा हर बात को तूल देती है। भाजपाकी एक नीति बन गई है कि हर बात का विरोध करना है। 2023 में जब आपदा आई तो भाजपा ने विशेष सत्र बुलाने की मांग रखी। जब हमने सत्रबुलाया तो भाजपा ने वाकआउट किया, आपदा प्रभावितों के साथ खड़े नहीं हुए। इस बार की आपदा 2023 से कहीं अधिक थी, पिछले दिनोंघुमारवीं में भी बड़ा हादसा हुआ। पंचायत चुनावों को लेकर सभी जिलों के डीसी से बात की गई, कुछ उपायुक्तों ने कहा कि अभी पूरी तरह सेपंचायतों की सड़कें जुड़ी नहीं है, अभी सिर्फ चुनावों को स्थगित करने की बात हुई है, रद्द नहीं किए गए हैं, सभी सड़कें खुलने पर ही चुनाव होंगे। कहाकि 23 जनवरी तक चुनाव करवाने का समय है। 23 जनवरी तक चुनाव हो सकते हैं। प्रभावितों को राहत पहुंचाना सरकार की पहली प्राथमिकता औरकर्तव्य है। कहा कि भाजपा पांच गुटों में बंटी हुई है। एचपी एनर्जी मैनेजमेंट सेंटर ऊर्जा व्यापार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगावहीं मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने अधिकारियों को सर्दी के माैसम के मद्देनजर बिजली खरीद के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।गुरुवार को सचिवालय में एचपी एनर्जी मैनेजमेंट सेंटर की बैठक की अध्यक्षता करते हुए सीएम ने कहा कि सर्दियों में ऊंचे क्षेत्रों में बर्फबारी होने केकारण नदियों में पानी का बहाव कम हो जाता है, जिससे बिजली उत्पादन घट जाता है। ऐसे में पहले से योजना बनाकर किफायती दरों पर बिजलीकी उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एचपी एनर्जी मैनेजमेंट सेंटर ऊर्जा व्यापार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा औरराज्य को अधिकतम आर्थिक लाभ दिलवाने में सहायक सिद्ध होगा। बिजली खरीद लागत कम करने के उद्देश्यउन्होंने कहा कि सेंटर को पूरी पेशेवर दक्षता के साथ काम करना होगा। सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार इस केंद्र को और सशक्त बनाने समेत इसकी कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी। राज्य सरकार ने अपने पहले ही बजट में प्रदेश को 31 मार्च 2026 तक हरित ऊर्जा राज्य बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया था, जिसे हासिल करने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार ने बिजली की खरीद और बिक्री कोसुचारु रूप से प्रबंधित करने और राज्य का राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ बिजली खरीद लागत कम करने के उद्देश्य से ही हिमाचल प्रदेश ऊर्जा प्रबंधनकेंद्र (एचपीईएमसी) की स्थापना की है।
इंडियन मोबाइल कांग्रेस 2025 में भारत का पहला AI-आधारित स्ट्रेस मॉनिटर ‘स्ट्रेफी’ लॉन्च, मानसिक स्वास्थ्य में तकनीकी क्रांति

दिल्ली में हो रहे इंडियन मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2025 में कई तरह के इनोवेशन देखने को मिले, किसी ने पूरी तरीके से एआई पर फोकस किया तोकिसी ने इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) पर, किसी ने 5G और 6G टेक्नोलॉजी पर फोकस किया तो किसी ने रोबोटिक्स पर। इन सब के बीच में एकटेक्नोलॉजी ऐसी भी थी जिसने उस मुद्दे पर फोकस किया जिसके बारें में ज्यादा बात नहीं होती और जिसकी समाज को सख्त जरूरत है। सोल वेलनेसने इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2025 के मंच से देश का पहला एआई-आधारित स्ट्रेस मॉनिटरिंग डिवाइस ‘स्ट्रेफी’ लॉन्च किया। यह डिवाइसआर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से व्यक्ति के तनाव स्तर (stress level) को रियल टाइम में मापने में सक्षम है। माधान मिलकर व्यक्तियों और संस्थाओं को स्ट्रेस‘स्ट्रेफी’ एक स्मार्ट एआई-से चलने वाला कियोस्क है जो व्यक्ति के चेहरे के 68 माइक्रो एक्सप्रेशन्स और पॉइंट्स की जांच करके स्ट्रेस लेवल कोपहचानता है। यह तकनीक चेहरे की छोटी-छोटी हरकतों को ट्रैक कर उन्हें डेटा इनसाइट्स में बदल देती है, जिससे व्यक्ति, संस्थान या संगठन तनावको पहचान, ट्रैक और मैनेज कर सकते हैं। सोल वेलनेस के प्रवक्ता ने लॉन्च के दौरान कहा, “स्ट्रेफी तकनीक और भावनाओं का संगम है। इसके जरिएहम तनाव को ‘दिखने लायक’, ‘मापने लायक’ और ‘काबू में लाने लायक’ बना रहे हैं।” ये सभी समाधान मिलकर व्यक्तियों और संस्थाओं को स्ट्रेस कीशुरुआती पहचान, रोकथाम और समाधान में मदद करते हैं। मानसिक स्वास्थ्य अब तकनीकी रूप से और भी सशक्तसोल वेलनेस के सीईओ और सह-संस्थापक कपिल गुप्ता ने कहा, “एआई हमें तनाव और मानसिक दबाव के शुरुआती संकेत देखने में मदद करता हैजो अब तक अदृश्य थे लेकिन केवल डेटा पर्याप्त नहीं है। असली बदलाव तब आता है जब एआई के साथ दया का जुड़ाव होता है। वहीं से असलीट्रांसफॉर्मेशन शुरू होता है।” उन्होंने बताया कि सोल का उद्देश्य एआई को एम्पथी (सहानुभूति) के साथ जोड़कर समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रतिजागरूकता बढ़ाना है। सोल वेलनेस ने आईएमसी 2025 में भारत का पहला एआई-सक्षम स्ट्रेस मॉनिटर ‘स्ट्रेफी’ लॉन्च किया। यह चेहरे के माइक्रोएक्सप्रेशंस से रियल टाइम में तनाव का स्तर मापता है, जिससे मानसिक स्वास्थ्य अब तकनीकी रूप से और भी सशक्त हो गया है।