अंतर-सेवा संगठन अधिनियम 2023, थियेटर कमांड को मिली कानूनी शक्ति, अनुशासनिक अधिकार मजबूत

भारत सरकार ने अंतर-सेवा संगठन (कमांड, नियंत्रण और अनुशासन) अधिनियम 2023 के नियमों को अधिसूचित कर दिया है। इस अधिनियम केप्रभावी हो जाने से थियेटर कमांड के अंतर्गत काम करने वाले कमांडरों को अपने अधीनस्थ सेवा कर्मियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का विधिकअधिकार मिल गया है। यह कदम सशस्त्र बलों के भीतर बेहतर समन्वय और संचालन सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम सुधार माना जा रहा है।अधिनियम की पारदर्शी रूपरेखा और प्रभावी कार्यान्वयनयह अधिनियम सेवा शर्तों में किसी बदलाव के बिना अंतर-सेवा संगठनों (ISO) में आदेशों की स्पष्टता और अनुशासन लागू करता है। इसके तहतकमांडर-इन-चीफ और ऑफिसर-इन-कमांड को कानूनी रूप से यह अधिकार प्राप्त हो गया है कि वे सभी संबंधित सेवाओं के कर्मियों पर नियंत्रण औरअनुशासन कायम रखें। धारा 11 के तहत बनाए गए नए नियमों का उद्देश्य है कि इस अधिनियम को व्यावहारिक और सुसंगत तरीके से लागू किया जासके। सेनाओं के समन्वय की दिशा में बड़ा सुधारचीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) की नियुक्ति के बाद से ही तीनों सेनाओं के बीच प्रभावी समन्वय की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। थियेटरकमांड की स्थापना इसी दिशा में एक निर्णायक कदम है, जिसके अंतर्गत एक अधिकारी थल, जल और वायु सेना की संयुक्त कमांड की जिम्मेदारीसंभालेगा। यह न सिर्फ निर्णय प्रक्रिया को तेज बनाएगा बल्कि संचालन में तालमेल भी बेहतर करेगा। समय की मांग के अनुरूप बदलावयह अधिनियम लंबे समय से लंबित एक ढांचागत सुधार की पूर्ति करता है। मौजूदा समय में तीनों सेनाओं के लिए अलग-अलग कानूनी व्यवस्थाएं हैं, जिससे संयुक्त अभियानों में बाधा आ सकती थी। नई व्यवस्था इन अड़चनों को दूर कर एक統ीकृत और केंद्रीकृत कमांड संरचना स्थापित करने कामार्ग प्रशस्त करेगी। अंडमान-निकोबार मॉडल से प्रेरित नई दिशायह सुधार उस दिशा में अगला बड़ा कदम है, जिसकी शुरुआत 24 वर्ष पहले अंडमान-निकोबार कमांड के निर्माण से हुई थी। थियेटर कमांड कीऔपचारिक घोषणा जल्द होने की संभावना है, जो भारत की रक्षा तैयारियों को एक नई गति देगा।
कांग्रेस बनाम शशि थरूर, सर्जिकल स्ट्राइक पर बयान से बढ़ा विवाद

कांग्रेस पार्टी और उसके वरिष्ठ नेता शशि थरूर के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। विवाद की जड़ थरूर का वह बयान है जो उन्होंने पनामा में एकबहुपक्षीय प्रतिनिधिमंडल के कार्यक्रम के दौरान दिया। थरूर ने कहा कि पहली बार सीमा पार सर्जिकल स्ट्राइक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकारके दौरान हुई थी। यह बयान कांग्रेस नेतृत्व को रास नहीं आया है क्योंकि पार्टी का आधिकारिक दावा है कि यूपीए शासनकाल में भी छह सर्जिकलस्ट्राइक की गई थीं, लेकिन उन्हें प्रचारित नहीं किया गया था। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर भाजपा को थरूर से मिला समर्थन?कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि शशि थरूर के बयान से ऐसा संदेश जा रहा है मानो वह प्रधानमंत्री मोदी सरकार को सर्जिकल स्ट्राइक और हालिया”ऑपरेशन सिंदूर” जैसे सैन्य अभियानों पर राजनीतिक संरक्षण दे रहे हों। इस ऑपरेशन में भारत ने पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों पर करारा प्रहारकिया था। सीजफायर पर कांग्रेस का तीखा हमलाकांग्रेस पार्टी ने सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि उसने अचानक सीजफायर की घोषणा करके अपनी पिछली आक्रामक रणनीति से पीछे हटने कासंकेत दिया है। पार्टी का मानना है कि इस समय विपक्ष को सरकार पर सवाल खड़े करने चाहिए, न कि समर्थन देना चाहिए। उदित राज का तंज – ‘थरूर बने भाजपा के सुपर प्रवक्ता’कांग्रेस नेता उदित राज ने शशि थरूर पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें “भाजपा का सुपर प्रवक्ता” बताया। उनका कहना है कि थरूर प्रधानमंत्री मोदीकी तारीफ में भाजपा नेताओं से भी दो कदम आगे हैं। उदित राज ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार सेना की उपलब्धियों का श्रेय लेती है, जबकिपूर्व सरकारें ऐसी राजनीति से दूर रहती थीं।थरूर का बयान – 2016 और 2019 की स्ट्राइक का समर्थनशशि थरूर ने अपने बयान में 2016 में उरी आतंकी हमले के बाद की गई सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 में पुलवामा हमले के बाद बालाकोट एयरस्ट्राइक का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि इन कार्रवाइयों ने आतंकवादियों को स्पष्ट संदेश दे दिया कि उन्हें इसका गंभीर मूल्य चुकाना होगा। थरूर ने दी ऐतिहासिक तुलनाथरूर ने कहा कि कारगिल युद्ध के दौरान भारत ने एलओसी पार नहीं की थी, लेकिन पुलवामा हमले के बाद भारत ने न केवल नियंत्रण रेखा बल्किअंतरराष्ट्रीय सीमा भी पार की थी। उन्होंने यह टिप्पणी पनामा में चल रहे तीन दिवसीय राज्य दौरे के दौरान की, जहां वे भारतीय बहुपक्षीयप्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। इस दल में अन्य सांसदों के अलावा अमेरिका में भारत के पूर्व राजदूत तरनजीत सिंह संधू भी शामिल हैं।
कोरोना के मामलों में फिर इजाफा, JN.1 वेरिएंट पर विशेषज्ञों की नजर

देश में कोविड-19 के मामलों में एक बार फिर वृद्धि देखी जा रही है। सक्रिय मामलों की संख्या अब 1200 के पार पहुंच चुकी है। सबसे ज्यादा केसकेरल में दर्ज किए गए हैं, जहां 430 संक्रमित पाए गए हैं। महाराष्ट्र में 208, जबकि दिल्ली और कर्नाटक जैसे राज्यों में 100 से अधिक मामले सामनेआए हैं। बीते 24 घंटों के भीतर बिहार में 6 और अरुणाचल प्रदेश में 1 नया संक्रमित मरीज मिला है। इस तेजी से फैलते संक्रमण के पीछे JN.1 वेरिएंट को मुख्य कारण माना जा रहा है, जो ओमिक्रॉन का एक उप-स्वरूप है। चंडीगढ़ में कोरोना से पहली मौत का मामलापंजाब के चंडीगढ़ शहर में कोविड संक्रमण से इस साल की पहली मौत की पुष्टि हुई है। लुधियाना के रहने वाले 40 वर्षीय व्यक्ति की जानGMCH-32 अस्पताल में चली गई। उन्हें सांस लेने में तकलीफ के चलते अस्पताल में भर्ती किया गया था। जांच में वह कोरोना पॉजिटिव पाए गएऔर इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। AIIMS के पूर्व निदेशक की चेतावनीएम्स के पूर्व निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया का कहना है कि JN.1 वेरिएंट ओमिक्रॉन का एक ऐसा प्रकार है जिसमें लगभग 30 प्रकार के म्यूटेशन पाएगए हैं। यह वेरिएंट शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करता है और तेजी से फैलता है। उन्होंने बताया कि हालांकि पहले भी बड़ी संख्या मेंलोग ओमिक्रॉन से संक्रमित हो चुके हैं और कुछ हद तक प्रतिरक्षा विकसित हुई है, लेकिन वायरस के लगातार बदलते स्वरूप के कारण नए संक्रमणकी आशंका बनी रहती है। ICMR का क्या कहना है?भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने स्पष्ट किया कि देश में संक्रमण के नए मामलों में गंभीर लक्षणदेखने को नहीं मिले हैं। उन्होंने कहा कि कोविड की स्थिति पर सतत निगरानी रखी जा रही है और मौजूदा हालात घबराने योग्य नहीं हैं। क्या JN.1 वेरिएंट से घबराने की जरूरत है?विशेषज्ञों के अनुसार, JN.1 की सबसे बड़ी समस्या इसकी तेज़ी से फैलने की क्षमता है। इसमें कुछ ऐसे अतिरिक्त म्यूटेशन हैं, जो वायरस को अधिकसंक्रामक बनाते हैं। हालांकि डॉक्टरों का मानना है कि यह वेरिएंट फिलहाल जानलेवा नहीं है और लोगों को घबराने की बजाय सतर्क रहने कीआवश्यकता है।
मणिपुर में भाजपा ने पेश किया सरकार बनाने का दावा, 44 विधायकों का समर्थन

मणिपुर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एक बार फिर सरकार गठन का दावा पेश किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता थोकचोम राधेश्याम सिंह ने बुधवारको राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मुलाकात कर 44 विधायकों का समर्थन हासिल होने की जानकारी दी। राधेश्याम सिंह ने नौ अन्य विधायकों केसाथ राजभवन जाकर राज्यपाल को इस संबंध में औपचारिक जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह सरकार जनता की इच्छा के अनुरूप गठित की जाएगीऔर राज्य में स्थिरता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।राज्यपाल ने भरोसा दिलाया, केंद्रीय नेतृत्व लेगा अंतिम निर्णयराज्यपाल के साथ हुई बैठक में राधेश्याम सिंह ने सरकार गठन को लेकर विचार-विमर्श किया और राज्य की वर्तमान स्थिति को देखते हुए शीघ्र निर्णयकी अपील की। उन्होंने बताया कि राज्यपाल ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना है और आम जनहित में आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार बनाने को लेकर अंतिम फैसला भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा। स्पीकर से 44 विधायकों की व्यक्तिगत और सामूहिक बातचीतभाजपा नेता ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष सत्यव्रत ने सभी 44 विधायकों से व्यक्तिगत और संयुक्त रूप से चर्चा की है और कोई भी विधायकसरकार गठन का विरोध नहीं कर रहा है। राधेश्याम ने यह भी जोड़ा कि मणिपुर की जनता बीते कुछ वर्षों से अनेक संकटों का सामना कर रही है — पहले कोविड महामारी और फिर हालिया जातीय हिंसा के चलते राज्य का विकास रुका हुआ है। जातीय संघर्ष के बाद लगा राष्ट्रपति शासनगौरतलब है कि मई 2023 में मैतेई और कुकी-ज़ो समुदायों के बीच भड़की हिंसा के बाद राज्य में स्थिति अस्थिर हो गई थी। मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंहने भारी आलोचनाओं के बीच पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद फरवरी 2024 से मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू है। विधानसभा की वर्तमान स्थितिमणिपुर विधानसभा में कुल 60 सीटें हैं, लेकिन एक विधायक की मृत्यु के कारण वर्तमान में केवल 59 सदस्य हैं। भाजपा गठबंधन के पास 32 मैतेई, 3 मणिपुरी मुस्लिम और 9 नागा विधायकों सहित कुल 44 विधायक हैं। कांग्रेस के पास पांच विधायक हैं, जो सभी मैतेई समुदाय से हैं। शेष 10 विधायक कुकी समुदाय से आते हैं, जिनमें से सात ने पिछला चुनाव भाजपा के टिकट पर लड़ा था, दो कुकी पीपुल्स अलायंस से और एक निर्दलीयहैं।
किसानों के लिए बड़ी राहत: MSP पर ₹2.07 लाख करोड़ की मंजूरी, किफायती कृषि ऋण और तीन बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को हरी झंडी

केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में मंगलवार को किसानों और बुनियादी ढांचे से जुड़े पांच महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णवने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को स्वीकृति दी गई है, जिसकी अनुमानितलागत 2.07 लाख करोड़ रुपये होगी। यह मूल्य निर्धारण कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों के आधार पर किया गया है, ताकिकिसानों को उनकी उत्पादन लागत पर कम से कम 50 प्रतिशत का लाभ मिल सके। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों, फसलों के बीचसंतुलन और कृषि एवं गैर-कृषि क्षेत्र के बीच व्यापार संतुलन जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखा गया है। इसके अतिरिक्त, किसानों को सस्ती दरों पर ऋण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ब्याज सहायता योजना को भी स्वीकृति दी गई है। इस योजना पर15,642 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इसके तहत किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के माध्यम से किसानों को खेती, बागवानी, पशुपालन और मत्स्य पालनजैसे कार्यों के लिए रियायती ब्याज दर पर ऋण मिलेगा। किसानों को 3 लाख रुपये तक का लोन 7% वार्षिक ब्याज पर मिलेगा, जिसमें समय परभुगतान करने पर 3% अतिरिक्त छूट दी जाएगी, जिससे प्रभावी ब्याज दर केवल 4% रह जाएगी। इसके अलावा, 2 लाख रुपये तक के लोन पर कोईगारंटी नहीं ली जाएगी। देशभर के 449 बैंकों को एक एकीकृत पोर्टल से जोड़ा गया है, जिससे ऋण वितरण और भी आसान हो गया है। इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में भी कैबिनेट ने तीन बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। इनमें आंध्र प्रदेश के बदवेल से नेल्लोर तक 108 किलोमीटर लंबे चार-लेनहाईवे के निर्माण को 3,653 करोड़ रुपये की लागत से BOT (Build-Operate-Transfer) टोल मोड पर मंजूरी दी गई है। यह मार्ग कृष्णपट्टनमपोर्ट से सीधे संपर्क देगा और विशाखापत्तनम-चेन्नई, हैदराबाद-बेंगलुरु और चेन्नई-बेंगलुरु जैसे औद्योगिक कॉरिडोर से जुड़कर आंध्र प्रदेश के कईआर्थिक केंद्रों को लाभ पहुंचाएगा। वहीं, महाराष्ट्र में 135 किलोमीटर लंबी वर्धा-बल्लारशाह रेलवे लाइन और मध्य प्रदेश में 41 किलोमीटर लंबीरतलाम-नागदा रेललाइन को चौड़ा करने की योजनाओं को भी स्वीकृति दी गई है। इन परियोजनाओं से यातायात क्षमता बढ़ेगी और क्षेत्रीय संपर्क मेंसुधार होगा। कुल मिलाकर, ये फैसले किसानों की आय बढ़ाने, कृषि वित्तीय सहायता को मजबूत करने और देश के इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क को आधुनिक बनाने कीदिशा में सरकार के ठोस प्रयासों को दर्शाते हैं।
समय से पहले मॉनसून की दस्तक से तबाही, कई राज्यों में रेड अलर्ट

दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की समय से पहले शुरुआत ने देश के कई राज्यों में भारी बारिश और आंधी के कारण जनजीवन को प्रभावित किया है।महाराष्ट्र, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु समेत कई हिस्सों में मूसलधार बारिश से बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है, जिससे जान-माल का नुकसान हुआ हैऔर सामान्य गतिविधियाँ बाधित हुई हैं। मुंबई में रिकॉर्ड तोड़ बारिश, 200 मिमी से अधिक वर्षामुंबई में 26 मई को भारी बारिश और तेज़ आंधी ने पिछले 19 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। शहर के कई क्षेत्रों में 200 मिमी से अधिक वर्षा दर्ज कीगई, जिससे जलभराव, यातायात बाधा और रेल सेवाएं प्रभावित हुईं। मौसम विभाग ने महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक के लिए रेड अलर्ट घोषित कियाहै। कर्नाटक में रेड अलर्ट, राहत कार्य जारीकर्नाटक के तटीय जिलों में लगातार भारी बारिश ने हालात बिगाड़ दिए हैं। दक्षिण कन्नड़ जिले में सामान्य जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है।भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने तटीय कर्नाटक में अगले पांच दिनों तक रेड अलर्ट जारी किया है। प्रशासन ने एनडीआरएफ और एसडीआरएफ कीटीमें तैनात कर दी हैं और कई राहत शिविर भी शुरू किए गए हैं। केरल में भारी नुकसान, चार मौतें और सैकड़ों घर क्षतिग्रस्तकेरल में मूसलधार बारिश और तेज़ हवाओं के चलते अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है। वायनाड, इडुक्की और कोझिकोड जिलों में भारी तबाहीके बाद 29 मकान पूरी तरह ध्वस्त हो गए और 868 घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। प्रशासन ने प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविर शुरू किएहैं और एनडीआरएफ की टीमों को तैनात किया गया है। महाराष्ट्र के पुणे जिले में तीन मौतें, ट्रेन सेवाएं प्रभावितपुणे जिले में पिछले दो दिनों में वर्षा से जुड़ी घटनाओं में तीन लोगों की जान चली गई। पिंपरी चिंचवाड़ क्षेत्र में एक व्यक्ति मछली पकड़ते समयबिजली की चपेट में आ गया। कई रेल मार्गों पर पेड़ों के गिरने और जलभराव के कारण यातायात प्रभावित हुआ है। अधिकारी लगातार अवरोधों कोहटाकर सेवाओं को बहाल करने में जुटे हैं। हिमाचल प्रदेश में भी बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनीउत्तर भारत में भी मौसम ने करवट ली है। मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश के शिमला, कुल्लू, मंडी, कांगड़ा, सोलन और सिरमौर जिलों में 27 और 28 मई को बारिश, आंधी और ओलावृष्टि को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। राज्य के कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना भी जताई गई है। मछुआरों को चेतावनी, समुद्री गतिविधियां रोकने के निर्देश मौसम विभाग ने पश्चिमी और पूर्वी तटीय क्षेत्रों में खराब मौसम को देखते हुए मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी है। केरल, कर्नाटक और गोवाजैसे राज्यों में मछली पकड़ने की गतिविधियां रोक दी गई हैं। न्यू मैंगलोर बंदरगाह पर कई नावें प्रतिकूल समुद्री स्थितियों के कारण वापस लौट आईहैं। सड़कों पर जलभराव, प्रशासन हाई अलर्ट परकई शहरों में सड़कों पर भारी जलभराव के कारण यातायात जाम और आवागमन में बाधा आई है। दक्षिण कन्नड़ जिले के मालेमार, महावीर सर्कल, कोट्टारा जंक्शन और बंटवाल जैसे क्षेत्रों में भारी जलभराव की खबरें हैं। भूस्खलन की घटनाएं भी सामने आई हैं, विशेषकर कुमटा और बेलथांगडी क्षेत्रोंमें। विभागों को त्वरित कार्रवाई के निर्देशकर्नाटक सरकार के मंत्री दिनेश गुंडू राव ने स्थानीय अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे बारिश से उत्पन्न संकट की स्थिति से निपटने के लिए तत्कालकदम उठाएं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के समय सभी विभागों के बीच समन्वय अत्यंत आवश्यक है।
भारत-पाक तनाव के बीच सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल की तैयारी, सीमावर्ती राज्यों में सुरक्षा अभ्यास

भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम की स्थिति बनी हुई है, लेकिन वास्तविक तनाव अभी भी बरकरार है। इस पृष्ठभूमि में, सीमावर्ती भारतीयराज्यों में गुरुवार को एक व्यापक सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी, जिसका उद्देश्य युद्ध जैसी आपात परिस्थितियों में नागरिकों कीतैयारी और जागरूकता को मजबूत करना है। छह राज्यों में होगा युद्ध जैसी स्थिति का अभ्याससरकारी सूत्रों के अनुसार, 29 मई को हरियाणा, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान और गुजरात में बड़े पैमाने पर यह अभ्यास किया जाएगा।इस अभ्यास में आम नागरिकों को युद्धकालीन सुरक्षा उपायों से अवगत कराया जाएगा। लोगों को दिए जाएंगे जरूरी दिशा-निर्देशड्रिल के दौरान आम जनता को सिखाया जाएगा कि युद्ध या हमले की स्थिति में कैसे सुरक्षित रहें, ब्लैकआउट के दौरान क्या सावधानियाँ बरतनीचाहिए और सायरनों के संकेतों का क्या मतलब होता है। इसके साथ ही लोगों को यह भी बताया जाएगा कि अफवाहों से कैसे बचा जाए और दुश्मनदेश के दुष्प्रचार से कैसे सावधान रहा जाए। रात 8 बजे होगा सीमित ब्लैकआउटसंबंधित राज्यों में गुरुवार रात 8 बजे से 15 मिनट तक एक नियोजित ब्लैकआउट किया जाएगा। हालांकि, इस दौरान अस्पतालों, अग्निशमन केंद्रोंऔर पुलिस थानों जैसी आवश्यक सेवाओं को इससे मुक्त रखा जाएगा। इस ब्लैकआउट का उद्देश्य नागरिकों को वास्तविक आपात स्थिति के लिएमानसिक रूप से तैयार करना है।ऑपरेशन शील्ड: हरियाणा में विशेष अभ्यासहरियाणा सरकार ने “ऑपरेशन शील्ड” नाम से एक राज्यव्यापी अभ्यास की भी घोषणा की है, जो गुरुवार शाम 5 बजे से सभी 22 जिलों में एकसाथशुरू होगा। इस अभ्यास का उद्देश्य राज्य के आपातकालीन तंत्र की मजबूती और प्रशासन, सुरक्षाबलों तथा आम जनता के बीच समन्वय को बेहतरबनाना है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद सख्ती बढ़ीगौरतलब है कि यह अभ्यास उस समय हो रहा है जब भारत ने हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान-प्रशासित कश्मीर मेंस्थित आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था। हालांकि दोनों देशों ने फिलहाल किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई और गोलीबारी रोकने के लिएसहमति जताई है, लेकिन जमीन पर तनाव अब भी स्पष्ट रूप से महसूस किया जा सकता है।