आप PAC की बैठक खत्म, केजरीवाल ने दिल्ली का प्रदेश अध्यक्ष बदला, गोपाल राय को हटाकर इस नेता को दी जिम्मेदारी

दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP) से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। पार्टी की प्रदेश कार्यकारिणी समिति (PAC) की बैठक के बादकई अहम फैसले लिए गए हैं। इस बैठक में दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष के पद में भी बदलाव किया गया है। अब सौरभ भारद्वाज को दिल्ली का नया प्रदेशअध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि पहले इस पद पर गोपाल राय थे। इसके अलावा, जम्मू कश्मीर में महराज मालिक को प्रदेश अध्यक्ष बनायागया है, और पंजाब में मनीष सिसोदिया को प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। गोपाल राय को गुजरात का प्रभारी नियुक्त किया गया है। इन बदलावोंके जरिए पार्टी ने अपनी प्रदेश और राज्य स्तर पर संगठनात्मक संरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। PAC की बैठक में विभिन्न राज्यों के प्रभारी और प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा, बैठक में कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर भीविचार किया गया। संदीप पाठक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि दिल्ली विधानसभा चुनावों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिन वादों की घोषणा कीथी, खासकर 2500 रुपये देने के वादे को लेकर भी बैठक में बात हुई। साथ ही, पीएम मोदी द्वारा होली और दीपावली के दौरान फ्री सिलेंडर देने केवादे पर भी चर्चा की गई। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री के वादे अक्सर अधूरे होते हैं, जबकि आम आदमी पार्टी अपने किए गए वादोंको पूरा करती है। आपने जो संगठनात्मक बदलाव किए हैं, उनमें कई राज्यों के प्रभारी और सह प्रभारी भी शामिल हैं। गुजरात में गोपाल राय को प्रभारी और दुर्गेश पाठकको सह प्रभारी बनाया गया है। वहीं, गोवा में पंकज गुप्ता को प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पंजाब में मनीष सिसोदिया को प्रभारी और सतेंद्र जैनको सह प्रभारी नियुक्त किया गया है। इसके अलावा, छत्तीसगढ़ में संदीप पाठक को प्रभारी बनाया गया है। इन बदलावों से पार्टी ने अपने संगठन कोऔर मजबूत करने की कोशिश की है, ताकि आगामी चुनावों में बेहतर प्रदर्शन किया जा सके। दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था, और उसके बाद से पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवालसार्वजनिक जीवन में कम दिखाई दे रहे थे। हालांकि, इस बैठक के बाद केजरीवाल ने अपनी उपस्थिति से यह स्पष्ट कर दिया कि वे पार्टी के फैसलोंऔर भविष्य की दिशा में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। यह बैठक केजरीवाल के घर पर ही हुई थी, और बैठक से पहले ही यह कयास लगाए जा रहे थेकि पार्टी कोई बड़ा फैसला लेने वाली है। दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष का बदलाव इस फैसले का हिस्सा था, और इसके बाद से एक बार फिर पार्टी केसंगठनात्मक बदलावों पर चर्चा हो रही है। दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद आम आदमी पार्टी के कई वरिष्ठ नेता नजरों से ओझल हो गए थे, लेकिन इस महत्वपूर्ण बैठक केमाध्यम से पार्टी ने अपना नेतृत्व और भविष्य के कार्यकलापों पर फोकस किया है। आम आदमी पार्टी ने अपनी कार्यशैली और वादों को लेकर जनता मेंएक स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है। इस बैठक के बाद, पार्टी ने यह भी साफ किया है कि वे दिल्ली के साथ-साथ देशभर में अपने संगठन को औरसशक्त बनाने की दिशा में काम करेंगे, ताकि आने वाले चुनावों में उनकी जीत सुनिश्चित हो सके।
लोकदल का बीजेपी पर आरोप: अफसर मुख्यमंत्री को अंधेरे में रखते हैं

लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह ने हाल ही में उत्तर प्रदेश के अफसरों द्वारा कमीशन और दलाली में लिप्त होने के मुद्दे पर कड़ीप्रतिक्रिया व्यक्त की। उनका कहना है कि भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद से अफसरों ने मनमानी करना शुरू कर दिया है, और सरकार अब इनअफसरों के खिलाफ कार्रवाई करने का ढोंग कर रही है। चौधरी सुनील सिंह ने कहा, “जबसे भाजपा की सरकार बनी है, अफसरों की तानाशाही बढ़गई है, और यह अब सरकार को समझ आ रहा है। भाजपा हमेशा अफसरों की तरफदारी करती थी, तो अब यह अचानक इन अफसरों के खिलाफसस्पेंशन की कार्रवाई क्यों की जा रही है?” उन्होंने सवाल उठाया कि इसके पीछे असली कारण क्या है, और मुख्यमंत्री क्यों इन अफसरों को कर्तव्यका पाठ पढ़ा रहे हैं। लोकदल के अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि भले ही मुख्यमंत्री अपने अफसरों की एक टीम बनाते हैं, परंतु प्रशासनिक कामकाज की जिम्मेदारी पूरीतरह से अफसरों पर होती है। शासन के सभी काम और कानून-व्यवस्था का संचालन अफसरों द्वारा ही होता है। ऐसे में, सरकार ने जिन अफसरों परपारदर्शिता की जिम्मेदारी सौंपी थी, वे खुद ही कमीशन और दलाली में लिप्त हो गए हैं। सुनील सिंह ने यह भी कहा कि केवल अभिषेक प्रकाश जैसेअधिकारी ही इस तरह की नकारात्मक गतिविधियों में संलिप्त नहीं हैं। उनके अनुसार, ऐसे अधिकारियों की एक लंबी लिस्ट है, जो सरकार को अंधेरे मेंरखते हुए अपनी गलतियों को छिपाते हैं और अपनी अनियमितताओं को बढ़ावा देते हैं।लोकदल ने सरकार से इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है और कहा है कि इन अफसरों को न केवल सस्पेंड किया जाना चाहिए, बल्कि इनकेखिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि राज्य में प्रशासनिक कार्यों में सुधार हो सके। चौधरी सुनील सिंह ने अंत में यह भी कहा कि यह सिर्फएक अफसर का मामला नहीं है, बल्कि कई ऐसे अधिकारी हैं जो भ्रष्टाचार और लूट में लिप्त हैं। सरकार को चाहिए कि वह इन अधिकारियों केखिलाफ कठोर कदम उठाए और प्रदेश में पारदर्शिता और ईमानदारी को सुनिश्चित करे।