पूरे विश्व ने महाकुंभ के रूप में भारत के विराट स्वरूप के दर्शन किए- PM मोदी

प्रधानमंत्री मोदी का महाकुंभ पर संबोधन: भारत की सामूहिक चेतना का उत्सवलोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रयागराज में हुए महाकुंभ के सफल आयोजन पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने महाकुंभ के आयोजन कोभारत की सामूहिक शक्ति, श्रद्धा और संकल्प का प्रतीक बताया। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर देशवासियों, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश और प्रयागराजकी जनता का धन्यवाद किया, जिन्होंने महाकुंभ के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।1. सामूहिक प्रयास की महिमा: महाकुंभ की सफलताप्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “आज मैं महाकुंभ के सफल आयोजन के लिए देशवासियों को कोटि-कोटि नमन करता हूं, जिनकी मेहनत और योगदान से यहआयोजन संभव हुआ। महाकुंभ की सफलता में सरकार, समाज और हर कर्मयोगी का योगदान है। मैं विशेष रूप से उत्तर प्रदेश और प्रयागराज कीजनता का धन्यवाद करता हूं।”महाकुंभ एक धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है, जो हर 12 साल में प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर आयोजित होता है। यह केवल एक धार्मिकघटना नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर का प्रतीक है। प्रधानमंत्री मोदी ने महाकुंभ को भारत की विराटता का उदाहरण बतातेहुए कहा कि यह “सबका प्रयास” का जीवंत रूप है।महाकुंभ ने यह साबित किया कि जब देश के लोग मिलकर किसी उद्देश्य के लिए काम करते हैं, तो कोई भी चुनौती असंभव नहीं होती। यह आयोजनन केवल भारत की धार्मिक विविधता का प्रतीक है, बल्कि यह सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समृद्धि का भी प्रतीक है।2. भारत के वैश्विक स्वरूप का दर्शनप्रधानमंत्री मोदी ने महाकुंभ को लेकर कहा, “पूरे विश्व ने महाकुंभ के रूप में भारत के विराट स्वरूप को देखा। यह ‘सबका प्रयास’ का साक्षात रूप है, जोजनता जनार्दन की श्रद्धा और संकल्पों से प्रेरित था। महाकुंभ ने हमारी राष्ट्रीय चेतना को जागरूक किया और यह एक बड़ा संदेश था।”महाकुंभ ने न केवल भारत की आध्यात्मिक समृद्धि को प्रस्तुत किया, बल्कि यह देश के समग्र सामर्थ्य और शक्ति का भी प्रतीक बन गया। प्रधानमंत्रीमोदी ने महाकुंभ को भारत के आत्मविश्वास और वैश्विक मंच पर भारत के प्रभाव का प्रतीक माना।3. महाकुंभ और राष्ट्रीय चेतना का जागरणप्रधानमंत्री मोदी ने महाकुंभ को भारत की राष्ट्रीय चेतना और सामूहिक शक्ति से जोड़ा। उन्होंने कहा, “महाकुंभ के आयोजन ने हमारी राष्ट्रीय चेतना कोजागृत किया है। यह आयोजन हमें बताता है कि जब हम सब एकजुट होकर प्रयास करते हैं, तो हम किसी भी लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। यह केवलधार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह भारत के समाज की सामूहिक चेतना का प्रतीक है।”उन्होंने आगे कहा कि महाकुंभ जैसे आयोजन राष्ट्रीय एकता और सामूहिक शक्ति के महत्व को रेखांकित करते हैं। ये आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि सेमहत्वपूर्ण होते हैं, बल्कि वे समाज में एकता और संकल्प की भावना को भी मजबूत करते हैं।4. भारत की प्रगति और महाकुंभ की प्रेरणाप्रधानमंत्री मोदी ने महाकुंभ के आयोजन को भारत की प्रगति और सामर्थ्य के संदर्भ में भी जोड़ा। उन्होंने कहा, “पिछले वर्ष अयोध्या में राम मंदिर कीप्राण प्रतिष्ठा समारोह ने हमें यह अहसास कराया कि हमारा देश अगले 1000 वर्षों के लिए तैयार हो रहा है। इस वर्ष महाकुंभ ने हमारी सोच को औरमजबूत किया है, और यह हमें बताता है कि देश की सामूहिक चेतना हमें हमारे सामर्थ्य के बारे में बताती है।”महाकुंभ ने यह संदेश भी दिया कि भारत की सामूहिक चेतना और सद्भावना के माध्यम से हम आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हैं।यह आयोजन इस बात का प्रतीक है कि भारत न केवल धार्मिक रूप से एकजुट है, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से भी प्रगति कीदिशा में अग्रसर है।5. गंगा जल की महिमा और अंतरराष्ट्रीय एकताप्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में यह भी बताया कि पिछले हफ्ते जब वह मॉरीशस गए थे, तो उन्होंने महाकुंभ के दौरान त्रिवेणी संगम से पवित्र गंगाजल लिया और उसे मॉरीशस के गंगा तालाब में मिलाया। उन्होंने कहा, “जब इसे मॉरीशस में गंगा तालाब में मिलाया गया, तो वह दृश्य अत्यंत अद्भुतथा। यह हमें यह दिखाता है कि हमारी संस्कृति का उत्सव केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया में मनाया जा रहा है।” प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि गंगा जल का यह संगम न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह भारत और मॉरीशस के बीच सांस्कृतिक औरऐतिहासिक संबंधों को भी प्रगाढ़ करता है। उन्होंने यह बताया कि हमारी संस्कृति, सभ्यता और धार्मिक विश्वासों का प्रसार केवल भारत तक सीमितनहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया में एकता और सद्भाव का संदेश देता है।महाकुंभ का महत्वप्रधानमंत्री मोदी ने महाकुंभ के सफल आयोजन को भारत की सामूहिक शक्ति और एकता का प्रतीक बताया। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि सेमहत्वपूर्ण था, बल्कि यह भारत के सांस्कृतिक, सामाजिक और राजनीतिक सामर्थ्य को भी दर्शाता है। महाकुंभ का आयोजन दुनिया भर में भारत कीसांस्कृतिक धरोहर, विविधता और एकता को प्रदर्शित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर था।प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि महाकुंभ का आयोजन “सबका प्रयास” का जीवंत उदाहरण था, जो भारत की सामूहिक चेतना और राष्ट्रीय जागरूकता कोजागृत करता है। यह आयोजन हमें बताता है कि जब हम सब मिलकर प्रयास करते हैं, तो कोई भी उद्देश्य हासिल किया जा सकता है। महाकुंभ केवलएक धार्मिक आयोजन नहीं था, बल्कि यह भारत की आत्मनिर्भरता, एकता और प्रगति की दिशा में एक कदम और था।
Grok-3: क्या यह एक मजाकिया चैटबॉट है या बेज्जती का एक उपकरण?

जब से इलॉन मस्क के xAI ने Grok-3 को लॉन्च किया है, यह भारत समेत कई देशों में चर्चा का विषय बन गया है। यह AI चैटबॉट कुछ समय सेसोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर छाया हुआ है, जहां इसके स्क्रीनशॉट्स और प्रतिक्रियाएं तेजी से वायरल हो रही हैं। Grok-3 की खासियत यह है कियह उपयोगकर्ताओं के सवालों के जवाब देने में न केवल तेज़ है, बल्कि यह मजाकिया और कभी-कभी विवादास्पद भी हो सकता है। लेकिन क्या यहAI समाज के लिए किसी सकारात्मक उद्देश्य की सेवा करता है, या इसका उद्देश्य किसी अन्य एजेंडे को बढ़ावा देना है? 1. Grok-3 की कार्यप्रणाली:Grok-3, xAI का एक AI चैटबॉट है, जिसे विशेष रूप से लोगों के सवालों का जवाब देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसका इस्तेमाल मुख्यरूप से x (पूर्व में Twitter) पर होता है, लेकिन इसे अब आम यूज़र्स के लिए भी खोल दिया गया है। इसमें तीन वर्जन आ चुके हैं, और सबसे ताज़ावर्जन, Grok-3, को फरवरी 2025 में लॉन्च किया गया था। Grok-3 को xAI के कोलोसस सुपरकंप्यूटर पर ट्रेन किया गया है, जो इसे और भीपावरफुल बनाता है।यह AI चैटबॉट न केवल आपके सवालों का जवाब देता है, बल्कि यह सवाल के मिजाज के अनुसार भी प्रतिक्रिया देता है। अगर आप मजाकियातरीके से सवाल पूछते हैं, तो इसका जवाब भी उसी अंदाज में होगा। यही नहीं, अगर आप गुस्से में होते हैं या गाली-गलौज करते हैं, तो Grok-3 भीउसी लहजे में जवाब दे सकता है। यही कारण है कि इसके कई जवाबों पर विवाद उत्पन्न हो चुका है।2. समाज में विवाद:भारत में Grok-3 के जवाबों ने कुछ सीमा से आगे जाकर हंगामा खड़ा कर दिया है। यह AI चैटबॉट कभी-कभी उन सवालों के जवाब देता है जोकिसी भी अन्य AI सिस्टम के लिए असामान्य या अनुचित माने जाते हैं। कुछ शरारती सवालों पर Grok-3 ने गालियों का इस्तेमाल किया औरविवादों को जन्म दिया। क्या यह AI का उद्देश्य सिर्फ मनोरंजन है, या इसे एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है?3. मजाक की सीमा:Grok-3 को लेकर एक बड़ी चिंता यह है कि इसने भारत और अन्य देशों के नेताओं को लेकर कुछ अपमानजनक और विवादास्पद टिप्पणी की है।इसके जवाबों को देख कर ऐसा लगता है जैसे यह AI उन देशों के नेताओं और उनकी छवि को नीचा दिखाने का उद्देश्य रखता है। क्या यह सिर्फव्यंग्यात्मक मजाक है, या कहीं न कहीं इसके पीछे एक राजनीतिक उद्देश्य छिपा है? इसके मजाकिया अंदाज को अक्सर बेज्जती से जोड़ा जा रहा है, और यह सवाल उठता है कि क्या समाज को इस प्रकार के AI से कोई फायदा हो रहा है या नहीं।4. AI का समाज पर प्रभाव:Grok-3 के विवादास्पद जवाबों ने इस बात पर सवाल उठाया है कि क्या AI का उपयोग समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए किया जा रहा है, यायह सिर्फ मानवता के प्रति एक मजाक बन गया है। AI का उद्देश्य मानवीय मदद, समाज की समस्याओं को हल करना और विकास में योगदान देनाहोना चाहिए। लेकिन Grok-3 को देखकर ऐसा लगता है कि यह अधिकतर गालियों, मजाक और राजनीतिक टिप्पणी के रूप में सामने आ रहा है, जोकहीं न कहीं समाज में नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।5. इलॉन मस्क का एंगल:इलॉन मस्क, जिन्होंने xAI और Grok-3 को लॉन्च किया, ने इसे पहले के वर्जन से दस गुना अधिक पावरफुल बताया था। मस्क का कहना है किGrok-3 को हल्के-फुल्के मजाक और व्यंग्य के साथ तैयार किया गया है, जो इसे अन्य AI सिस्टम्स से अलग बनाता है। लेकिन क्या इसका यह”मजाक” वास्तव में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में विवादों और असहमति को बढ़ावा दे रहा है? क्या मस्क इस AI का उपयोग किसी राजनीतिकएजेंडे को बढ़ावा देने के लिए कर रहे हैं? Grok-3 एक एंटरटेनमेंट टूल के रूप में बहुत ही आकर्षक हो सकता है, लेकिन इसके द्वारा दी जा रही प्रतिक्रियाएं कई बार बेज्जती, विवाद औरअसहमति को जन्म देती हैं। एक ओर जहां यह अपने जवाबों के द्वारा लोगों को हंसी और मनोरंजन का स्रोत बन सकता है, वहीं दूसरी ओर यह समाजमें तनाव और नकारात्मकता भी फैला सकता है। अगर इसे मानवता की भलाई के लिए डिज़ाइन किया गया है, तो इसे फिर से इस रूप में ढालने कीआवश्यकता है, ताकि यह समाज के लिए अधिक सकारात्मक योगदान दे सके। AI के रूप में Grok-3 को मानवीय मूल्य और संवेदनशीलता के साथ डेवेलप किया जाना चाहिए, न कि इसे सिर्फ मजाक और विवाद का हिस्सा बनादिया जाए। AI का असल उद्देश्य मानवता की सेवा करना है, न कि दुनिया को एक अन्यथा मजाक का हिस्सा बनाना।
आम आदमी पार्टी के नेता संजय आजाद सिंह ने राज्यसभा में बीजेपी पर लगाया गंभीर आरोप

आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता संजय आजाद सिंह ने राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा किमंत्रियों द्वारा सदन को दिए गए आश्वासनों में से अधिकांश पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना था कि यह सदन की प्रक्रिया और लोकतांत्रिकप्रणाली की अवहेलना है, जो जनता के प्रति सरकार की जिम्मेदारी को पूरी तरह से नजरअंदाज करती है। आश्वासन पर कार्रवाई की कमीसंजय आजाद सिंह ने राज्यसभा में बीजेपी सरकार के मंत्रियों पर निशाना साधते हुए बताया कि पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने सदन को कुल 160 सवालों पर आश्वासन दिए थे। यह सवाल विभिन्न मुद्दों से जुड़े थे, जो जनता की चिंता और प्रशासनिक सुधार से जुड़े थे। लेकिन, अफसोस की बातयह है कि इन आश्वासनों में से केवल 39 पर ही कार्रवाई की गई। यह संख्या बेहद कम है, और इसे एक बड़ी चूक माना जा रहा है। संजय आजाद सिंह ने बीजेपी सरकार से सवाल किया, “मंत्री जी, जब आपने सदन में 160 आश्वासन दिए थे, तो उन पर सिर्फ़ 39 पर ही कार्रवाईक्यों की गई? बाकी आश्वासनों पर कार्रवाई न करने का क्या कारण है?” उनका यह सवाल सरकार के लिए चुनौती बन गया है और यह इस बात काइशारा करता है कि सरकार अपनी जिम्मेदारी को ठीक से नहीं निभा रही है।लोकतंत्र में संसदीय प्रक्रिया की अहमियत आम आदमी पार्टी के नेता का कहना था कि लोकतंत्र में जनता के प्रतिनिधि, यानी सांसद, अपनी बात सदन में उठाते हैं, और मंत्री उनकी बातों परजवाब देते हैं। इन जवाबों को किसी न किसी कार्यवाही या सुधार में बदलने की जिम्मेदारी मंत्रियों पर होती है। संजय आजाद सिंह ने कहा कि जबसरकार सदन को आश्वासन देती है, तो यह सिर्फ एक औपचारिकता नहीं होती, बल्कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती है, जिसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि आश्वासन केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इनके तहत की गई घोषणाओं पर काम किया जानाचाहिए। यदि किसी आश्वासन पर कार्रवाई नहीं की जाती है, तो यह केवल सत्ता में बैठे लोगों की निंदा नहीं, बल्कि लोकतंत्र के प्रति एक गंभीरअनुशासनहीनता है। सरकार पर लगातार बढ़ता दबावसंजय आजाद सिंह का यह आरोप उस समय आया है जब सरकार पर लगातार आलोचनाओं का दबाव बढ़ रहा है। विपक्षी पार्टियों और सामाजिकसंगठनों का कहना है कि सरकार ने जनता के हित में कई मुद्दों पर खामोशी अपनाई है और केवल राजनीतिक लाभ के लिए वादे किए हैं। इस स्थिति नेसरकार की ईमेज को भी प्रभावित किया है और जनता में असंतोष की भावना को जन्म दिया है।विशेष रूप से, उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों और कामकाजी तरीके पर सवाल उठाए, जो जनता के विश्वास को जीतने में नाकाम रही हैं। उनकाकहना था कि जब सरकार अपने दिए गए आश्वासनों पर काम नहीं करती, तो यह ना सिर्फ सरकारी कार्यप्रणाली पर प्रश्न उठाता है, बल्कि जनता केबीच सरकार की विश्वसनीयता भी कमजोर करता है।बीजेपी का जवाबजहां एक ओर आम आदमी पार्टी के नेता संजय आजाद सिंह ने बीजेपी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, वहीं बीजेपी ने इस आरोप काजवाब दिया है। पार्टी के प्रवक्ता ने कहा कि सरकार हमेशा अपने आश्वासनों पर काम करती है, और समय-समय पर कई मुद्दों पर सुधार भी किए जातेहैं। उन्होंने कहा कि सदन में उठाए गए अधिकांश सवालों पर सरकार की प्रतिक्रिया समयबद्ध तरीके से दी जाती है और कार्रवाई की जाती है। बीजेपी ने यह भी स्पष्ट किया कि कई मामलों में कार्रवाई इसलिए नहीं की जा सकी, क्योंकि वे जटिल और लंबी प्रक्रिया से गुजरते हैं, जैसे कानूनबनाने या कार्यान्वयन में समय लगता है। इसलिए कुछ मामलों में देरी होना स्वाभाविक है। राज्यसभा में संजय आजाद सिंह का आरोप इस बात का स्पष्ट संकेत है कि बीजेपी सरकार के कामकाजी तरीकों पर विपक्षी पार्टियां और जनतालगातार सवाल उठा रहे हैं। हालांकि बीजेपी इस आरोप का खंडन करती है, लेकिन यह सवाल गंभीर है कि क्या सरकार वास्तव में उन आश्वासनों कोसमयबद्ध तरीके से लागू कर रही है जो उसने जनता और सदन के सामने दिए थे। इस स्थिति में केवल समय ही बताएगा कि सरकार अपने किए गएवादों को निभा पाती है या नहीं।इस बीच, विपक्षी दलों द्वारा सरकार पर बढ़ते दबाव के बीच यह आशा जताई जा रही है कि आगामी दिनों में इस मुद्दे पर ठोस कार्रवाई की जाएगी, ताकि जनता का विश्वास पुनः अर्जित किया जा सके और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को पूरी तरह से लागू किया जा सके।
न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री का भारत दौरा: मोदी और लुक्सऑन ने आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता का जताया समर्थन

न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस हिपकिंस (Chris Hipkins) हाल ही में भारत के दौरे पर आए, जहां भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका भव्यस्वागत किया। दोनों देशों के नेताओं के बीच यह मुलाकात विशेष रूप से आतंकवाद और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर केंद्रित रही। प्रधानमंत्री मोदीऔर प्रधानमंत्री हिपकिंस ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी मजबूत प्रतिबद्धता को दोहराते हुए दोनों देशों के बीच सहयोग को और बढ़ाने की इच्छाजताई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दौरान कहा कि भारत और न्यूज़ीलैंड आतंकवाद के खिलाफ एकजुट हैं और दोनों देश आतंकवाद के किसी भी रूप कोअस्वीकार करते हैं। उन्होंने 15 मार्च 2019 के क्राइस्टचर्च आतंकी हमले और 26 नवंबर 2008 के मुंबई हमले का जिक्र करते हुए यह कहा किआतंकवाद एक ऐसी समस्या है जिसका कोई धर्म या राष्ट्र नहीं होता, और यह मानवता के खिलाफ एक घृणित अपराध है। मोदी ने दोनों हमलों कोयाद करते हुए कहा कि इन हमलों में निर्दोष लोग मारे गए, और इसका कोई औचित्य नहीं हो सकता। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि आतंकवादियों, अलगाववादियों और कट्टरपंथी तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता है। दोनों नेताओंने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत और न्यूज़ीलैंड आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर काम करेंगे और मिलकर आतंकवाद के सभी रूपों का विरोध करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री हिपकिंस ने इस बात पर भी चर्चा की कि दोनों देशों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो। इसके लिए दोनों देशों ने आपसी सहयोग बढ़ाने और साझा खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान करने पर भी विचार किया।न्यूज़ीलैंड में भारतीय विरोधी गतिविधियों पर चिंता जताई भारत और न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्रीों के बीच आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता का संदेश देते हुए, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूज़ीलैंड में कुछगैर-कानूनी तत्वों द्वारा भारत-विरोधी गतिविधियों पर अपनी चिंता भी साझा की। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि भारत इन गतिविधियों को लेकर गंभीरहै और इस मुद्दे पर न्यूज़ीलैंड सरकार से सहयोग की उम्मीद करता है।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “हमने अपनी चिंता न्यूज़ीलैंड सरकार के साथ साझा की है, और हमें विश्वास है कि इन गैर-कानूनी तत्वों के खिलाफ कार्रवाईकी जाएगी। हम इस दिशा में न्यूज़ीलैंड सरकार से समर्थन की उम्मीद करते हैं।” यह भारतीय प्रधानमंत्री का स्पष्ट संदेश था कि भारत किसी भी परिस्थिति में अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा। उन्होंने न्यूज़ीलैंड से सहयोग की उम्मीद जताते हुए यह कहा कि भारत की संप्रभुता और सुरक्षा से संबंधित कोई भी गतिविधि जिसे विदेशी तत्वों द्वारा बढ़ावा दिया जा रहा हो, उस पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच बढ़ती मित्रता और सहयोगयह दौरा दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने का एक अवसर था। भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच ऐतिहासिक संबंध हैं, और अबदोनों देशों के नेताओं के बीच सुरक्षा, व्यापार, और सांस्कृतिक सहयोग के कई नए अवसरों पर चर्चा हुई। आतंकवाद पर उनके साझा दृष्टिकोण ने यह स्पष्ट कर दिया कि दोनों देश केवल आर्थिक और राजनीतिक सहयोग में ही नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा के मुद्दों पर भी साथ खड़े हैं। न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस हिपकिंस ने कहा, “हम भारत के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, और आतंकवाद, अपराध, और अन्य वैश्विक चुनौतियों के खिलाफ एकजुट होकर काम करेंगे। भारत की सुरक्षा हमारे लिए महत्वपूर्ण है, और हम हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार हैं।” यह यात्रा यह दर्शाती है कि न्यूज़ीलैंड और भारत की साझेदारी न केवल द्विपक्षीय रिश्तों तक सीमित है, बल्कि दोनों देशों के साथ मिलकर वैश्विकसुरक्षा की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। आतंकवाद के खिलाफ मजबूत और एकजुट मोर्चा बनाना, इस यात्रा का एक प्रमुख उद्देश्य था, और इस पर दोनों देशों के नेताओं ने सहमति जताई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रधानमंत्री क्रिस हिपकिंस का यह संवाद आतंकवाद और वैश्विक सुरक्षा के मुद्दे पर मजबूत सहयोग का प्रतीक बन गया है।दोनों देशों के नेता इस बात पर एकमत हैं कि आतंकवाद किसी भी रूप में अस्वीकार्य है और इसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता है। न्यूज़ीलैंड में भारत-विरोधी गतिविधियों पर चिंता जताने के साथ-साथ दोनों देशों ने यह सुनिश्चित किया कि वे अपने नागरिकों की सुरक्षा और वैश्विक सुरक्षा के मामलों में एकजुट रहेंगे।यह दौरा भारतीय और न्यूज़ीलैंड सरकारों के बीच विश्वास और सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत है, जो आने वाले समय में दोनों देशों के बीचअच्छे और प्रभावी संबंधों को और मजबूत करेगा।
गौरव गोगोई का सवाल: असम में तेल खोज और अवैध कोयला खनन पर केंद्र से जवाब

असम में स्थित “होलोंगापार गिब्बन सेंचुरी” एक इकॉनोमिक सेंसिटिव जोन है, जिसका पर्यावरणीय महत्व बहुत अधिक है। हाल ही में इस सेंचुरी में होरहे विकास कार्यों और तेल गैस कंपनियों द्वारा गतिविधियाँ शुरू करने की संभावनाओं को लेकर विवाद सामने आया है। इस मुद्दे को लेकर लोकसभा मेंकांग्रेस नेता गौरव गोगई ने सवाल उठाया है, जिसमें उन्होंने सेंचुरी के भीतर तेल और गैस की खोज से जुड़े नियमों में बदलाव पर आश्चर्य जताया।आइए जानते हैं कि इस मामले में क्या कुछ हुआ है और सरकार की प्रतिक्रिया क्या हो सकती है। “होलोंगापार गिब्बन सेंचुरी” और इकॉनोमिक सेंसिटिव जोनहोलोंगापार गिब्बन सेंचुरी असम के कार्बी आंगलोंग जिले में स्थित है। यह क्षेत्र जैव विविधता से भरपूर है और यहाँ पर कई दुर्लभ प्रजातियों का वासहै, जिनमें गिब्बन (हलक वाले बंदर) भी शामिल हैं। इसे इकॉनोमिक सेंसिटिव जोन के रूप में चिन्हित किया गया है, जिसमें कुछ गतिविधियों परपाबंदी होती है, ताकि क्षेत्र की पर्यावरणीय संरचना को नुकसान न पहुंचे। 2018 और 2019 के नोटिफिकेशनों में बदलावजब 2018 में “होलोंगापार गिब्बन सेंचुरी” का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी हुआ था, तो उसमें स्पष्ट रूप से तेल और गैस की खोज, खनन, और अन्यजैसी गतिविधियाँ प्रतिबंधित की गई थीं। यह कदम इलाके के पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित रखने और जीवों की रक्षा के लिए लिया गया था। हालांकि, 2019 में जब फाइनल नोटिफिकेशन जारी हुआ, तो उसमें तेल और गैस की खोज जैसी गतिविधियों के प्रतिबंध का कोई उल्लेख नहींकिया गया। इससे एक नया विवाद उत्पन्न हुआ, क्योंकि एक बड़ी तेल कंपनी अब इस संवेदनशील क्षेत्र में काम शुरू करने की योजना बना रही है।इस बदलाव के पीछे क्या कारण हो सकते हैं और सरकार ने इसे किस आधार पर अनुमति दी, यह एक बड़ा सवाल बन गया है। तेल कंपनी को अनुमति देने का निर्णययह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इकॉनोमिक सेंसिटिव जोन में प्राधिकृत कार्यों की अनुमति देने से प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण का खतराबढ़ सकता है। गौरव गोगई ने आरोप लगाया कि फाइनल नोटिफिकेशन में तेल और गैस के खोज के प्रतिबंध को हटाना और इसके बाद तेल कंपनियोंको अनुमति देना, पर्यावरण की सुरक्षा के खिलाफ एक बड़ा कदम हो सकता है। केंद्र सरकार का कहना है कि यदि कोई प्रोजेक्ट पारिस्थितिकीय मानकों के अनुरूप होता है और सभी आवश्यक पर्यावरणीय अनुमतियां प्राप्त कर लेताहै, तो उसे अनुमति दी जा सकती है। लेकिन यह सवाल उठता है कि क्या इस निर्णय में स्थानीय वन अधिकारी और पर्यावरण विशेषज्ञों से सलाह लीगई थी? अवैध कोयला खनन और जंगलों की कटाईइसके अलावा, गोगई ने असम के कार्बी आंगलोंग और डिमा हासाओ जिलों में जंगलों की अवैध कटाई और अवैध कोयला खनन के मामले को भीउठाया है। इन इलाकों में जंगलों की अवैध कटाई और खनन कार्यों के कारण पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है, जिससे वन्यजीवों औरपारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। गोगई ने केंद्र से सवाल पूछा कि क्या इस अवैध गतिविधि पर किसी प्रकार की जांच की जाएगी और क्या इस मुद्दे पर केंद्र सरकार द्वारा कोई कार्रवाईकी जाएगी? क्या इस मामले में डिस्ट्रिक्ट फ़ॉरेस्ट ऑफिसर्स की भूमिका की भी जांच होगी? केंद्र की प्रतिक्रिया और कार्रवाई की जरूरतयह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि असम के इन क्षेत्रों में अवैध खनन और जंगलों की कटाई ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या केंद्र सरकारइस गंभीर मामले पर उचित कार्रवाई करेगी और क्या वन विभाग के अधिकारी जो इन गतिविधियों पर रोक लगाने के जिम्मेदार हैं, उनकी भूमिका कीजांच की जाएगी? इसके अलावा, केंद्र सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि इन क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों पर कड़ी निगरानी हो और जिन अधिकारियों कीलापरवाही से यह अवैध खनन और जंगलों की कटाई हो रही है, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
यूपी: लखनऊ में गैंगरेप के मुख्य आरोपी को पुलिस ने गोली मारी, तमंचा और कारतूस भी बरामद

लखनऊ: यूपी के लखनऊ से एक बड़ी खबर है। यहां एक गैंगरेप के मुख्य आरोपी को पुलिस ने गोली मार दी है। आरोपी के पास से तमंचा औरकारतूस भी बरामद किया गया है। इस दौरान आरोपी का साथी भी गिरफ्तार हो गया है। क्या है पूरा मामला?लखनऊ के गोसाईगंज थाना क्षेत्र के एक गांव में दो दिन पहले मंदबुद्धि युवती से गैंगरेप का मामला सामने आया था। इसी मामले के मुख्य आरोपीका पुलिस के साथ एनकाउंटर हुआ है। मोहनलालगंज के पचौरी जंगल में मुख्य आरोपी और उसके साथी के छिपे होने की सूचना के बाद पुलिस नेघेराबंदी की है। मुख्य आरोपी और उसके साथी ने खुद को घिरता देख पुलिस टीम पर फायरिंग भी की। पुलिस टीम के द्वारा जबाबी फायरिंग में मुख्य आरोपी संदीपयादव निवासी आजमगढ़ को पैर में गोली लगी है। मौके से भाग रहा साथी मायाराम रावत (निवासी सेमनापुर थाना गोसाईंगंज) भी गिरफ्तार हुआ है। आरोपी के पास से एक तमंचा 315 बोर और 2 खोखा कारतूस बरामद किए गए हैं। इस मामले के सामने आने के बाद डीसीपी निपुण अग्रवाल औरएडीसीपी अमित कुमावत मौके पर पहुंचे। पुलिस द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक, 15 मार्च को वादी द्वारा थाना गोसाईगंज में सूचना दी गई कि उसकी मंदबुद्धि पुत्री 14 मार्च को 12 बजेघर से सामान लेने के लिए पड़ोस की दुकान पर जा रही थी। रास्ते में संदीप यादव और अन्य ने उसे पकड़ लिया और सुनसान स्थान पर ले गए। यहांउसके साथ रेप किया गया। इस सूचना पर थाना गोसाईगंज में मामला पंजीकृत किया गया था। अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए थानामोहनलालगंज में 6 टीमों का गठन किया गया। पुलिस के मुताबिक, 16 मार्च को सूचना मिली कि अभियुक्त संदीप यादव और मायाराम कुबहरा जंगल की तरफ मोटरसाइकिल से जा रहे हैं। इससूचना पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची। जब अभियुक्तों को रोकने का प्रयास किया गया तो उन्होंने पुलिस पर फायर कर दिया। इसके बाद पुलिस नेजबावी कार्रवाई की, जिसमें अभियुक्त संदीप यादव के पैर में गोली लगी।
वक्फ बिल के खिलाफ AIMPLB का धरना प्रदर्शन, कहा- ‘बिल को अभी वापस नहीं लिया तो…’

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने मंगलवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ जोरदार धरनाप्रदर्शन किया। AIMPLB ने इस विधेयक को तुरंत वापस लेने की मांग की है और कहा है कि अगर इसे वापस नहीं लिया गया, तो संगठन पूरे देश मेंइसका विरोध और आंदोलन करेगा। केंद्र सरकार की ओर से इस विधेयक पर स्पष्ट संदेश दिया गया है कि यह देश संविधान और कानून के तहतचलेगा, और अगर वक्फ विधेयक संसद में पेश किया जाता है तो यह संविधान के अनुरूप होगा। दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित इस प्रदर्शन में AIMPLB के सदस्य, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि और अन्य समाजिक संगठन शामिल हुए।AIMPLB के सदस्य वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ अपने विरोध की आवाज उठाने के लिए सड़क पर उतरे थे। इस विधेयक का उद्देश्य वक्फसंपत्तियों का प्रबंधन और उनके अधिकारों से संबंधित संशोधन करना है, लेकिन AIMPLB और अन्य संगठनों का कहना है कि यह विधेयक मुस्लिमसमुदाय के अधिकारों का उल्लंघन करता है और वक्फ संपत्तियों पर सरकार का अप्रत्यक्ष नियंत्रण स्थापित करता है। AIMPLB का विरोध और प्रदर्शनऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के उपाध्यक्ष उबैदुल्ला आज़मी ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कहा, “हमारे सभी धार्मिकमामलों की हिफाजत की जिम्मेदारी भारत के संविधान ने हमें दी है। जैसे नमाज और रोज़ा हमारे लिए जरूरी है, वैसे ही वक्फ की हिफाजत भी हमारीधार्मिक जिम्मेदारी है। अगर इस विधेयक को वापस नहीं लिया गया तो ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के नेतृत्व में देश के मुसलमान अपनीजान की कुर्बानी देने के लिए तैयार हैं। सरकार वक्फ की संपत्ति को नष्ट करने के बजाय उसे सुरक्षित रखे।” उबैदुल्ला आज़मी ने यह भी कहा कि वक्फ की जमीनों को सरकार के नियंत्रण में देने की बजाय, सरकार को इन संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकने केलिए ठोस कदम उठाने चाहिए थे। “हमने हमेशा इस देश में अपनी कुर्बानी दी है, और अगर इस बिल को वापस नहीं लिया जाता, तो हम इसकाविरोध करने के लिए हर कीमत चुकाने के लिए तैयार हैं।” AIMPLB के इस प्रदर्शन में CPIML सांसद राजा राम सिंह ने भी अपना समर्थन दिया। उन्होंने कहा, “सरकार लोगों के अधिकारों को छीन रही है।उनकी भाषा, पहनावा और धार्मिक पहचान को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।” भारी पुलिस बल की तैनातीवक्फ विधेयक 2024 के विरोध में जंतर-मंतर पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रदर्शन में भाग लेने के लिए AIMIM के सांसद असदुद्दीनओवैसी भी पहुंचे थे, जिन्होंने इस विधेयक को पूरी तरह से असंवैधानिक करार दिया और इसे मुस्लिम समुदाय के धार्मिक अधिकारों के खिलाफबताया। ओवैसी ने कहा, “यह विधेयक हमारे धार्मिक मामलों में सरकार की दखलअंदाजी को बढ़ाता है और हमें इसे किसी भी सूरत में मंजूर नहीं होनेदेना चाहिए।”भाजपा का आरोपवक्फ संशोधन विधेयक 2024 के खिलाफ AIMPLB द्वारा प्रदर्शन किए जाने पर भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने तंज करते हुए कहा, “वक्फ तोसिर्फ एक बहाना है, इन लोगों का असली मकसद देश में दंगे भड़काना और आगजनी करना है। ये संगठन, जैसे AIMPLB और इसके समर्थककांग्रेस, TMC, समाजवादी पार्टी और AIMIM, वक्फ के नाम पर मुस्लिम समुदाय को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं।” शहजाद पूनावाला ने यह भी आरोप लगाया कि वक्फ संपत्तियों पर हड़पने की असीमित शक्ति क्यों होनी चाहिए, और क्यों सिर्फ मुस्लिम समुदाय कोही इस प्रकार के अधिकार मिल रहे हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या संविधान ने जैन और ईसाई समुदाय को वक्फ जैसे अधिकार दिए हैं। भा.ज.पा. के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग ने AIMPLB पर निशाना साधते हुए कहा, “कुछ लोग भू-माफियाओं के इशारों पर नाच रहे हैं और विरोधके नाम पर अपनी दुकानों और भू-माफियाओं का समर्थन कर रहे हैं। उन्हें गरीबों और मुसलमानों के हित में सोचने की बजाय अपनी राजनीति करनीचाहिए।”सरकार का रुखवहीं, सरकार की ओर से इस विरोध पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने कहा, “यह देश संविधान और कानून के तहत चलता है।इस बिल में कुछ भी नया नहीं है।” भाजपा के सांसद जगदंबिका पाल ने इसे ‘राजनीतिक विरोध’ करार दिया और कहा, “विधेयक अभी तक पेश भीनहीं किया गया है, और AIMPLB इस पर विरोध कर रहा है। हम सिर्फ वक्फ संपत्तियों के विवादों का समाधान करने के लिए इस विधेयक को लारहे हैं।” जगदंबिका पाल ने कहा कि यह विधेयक वक्फ संपत्तियों की बिक्री पर रोक लगाने के लिए है, ताकि गरीबों को फायदा पहुंचाया जा सके। “अगरवक्फ संपत्ति को कोई बेचता है तो वह वक्फ के लोग ही होते हैं। इस विधेयक में कोई भी वक्फ संपत्ति छीनने का प्रावधान नहीं है,” उन्होंने कहा। राजनीतिक प्रतिक्रियाइस विरोध में कई अन्य राजनीतिक दलों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। NCP (SP) की सांसद फौज़िया खान ने इस विधेयक को पूरी तरह सेअसंवैधानिक बताया और कहा, “यह बिल हमारे अधिकारों को छीनने के लिए लाया गया है। हम इसे किसी भी कीमत पर नहीं स्वीकार करेंगे। यहबिल हमारी इबादतगाहों पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है, हम इसे होने नहीं देंगे।” BJD के मोजिबुल्लाह खान ने कहा, “हमारे नेता नवीन पटनायक ने हमें इस विधेयक का विरोध करने का निर्देश दिया है। हम सरकार से कहना चाहतेहैं कि वे हमारे धर्म में दखल न दें। यह हमारे शरीयत का मामला है, हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।” कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने भी इस विधेयक का विरोध किया और कहा, “हमने इस पर मशविरा किया था, लेकिन सरकार ने हमारी बातों को पूरीतरह से नजरअंदाज किया। इस विधेयक को कानूनी रास्ते से भी चुनौती दी जानी चाहिए।” विपक्ष का विरोधकांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने भी इस विधेयक का विरोध किया है। कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने कहा, “हम इस विधेयक का विरोध करते हैं।इसे संसद में पेश होने से पहले सही तरीके से विचार-विमर्श नहीं किया गया। यह विधेयक समाज में विद्वेष फैलाने का काम करेगा।” कांग्रेस नेताप्रमोद तिवारी ने भी कहा, “जब वक्फ पर JPC बनी थी, तब हमने स्थिति स्पष्ट की थी। हम संसद में भी इस पर अपना विरोध दर्ज कराएंगे।” IUML सांसद E.T. मुहम्मद बशीर ने कहा, “हम इस विधेयक का विरोध करते हैं क्योंकि सरकार वक्फ संपत्तियों को लूटने की कोशिश कर रही है।यह बिल मुस्लिम समुदाय के अधिकारों को कमजोर करने के लिए लाया गया है।” आगामी योजनाAIMPLB के सचिव यासिर अली उस्मानी ने कहा, “हमारे लिए यह सिर्फ वक्फ की संपत्ति का मामला नहीं है, बल्कि यह हमारी पूरी धार्मिक पहचानऔर अधिकारों की रक्षा का सवाल है। हम इसे लेकर शांति से हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम डर गए हैं। अगर इस विधेयक को पासकिया गया, तो हम पूरे देश में विरोध करेंगे।” कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने भी इस विधेयक का विरोध करते हुए कहा, “हम इस बिल के खिलाफ संघर्ष करेंगे और जरूरत पड़ी तो खून की कुर्बानी भीदेंगे। यह विधेयक कानून की धज्जियां उड़ाने की कोशिश कर रहा है।” जगमोहन सिंह, सिख पर्सनल लॉ बोर्ड से सदस्य ने कहा, “हम आपके साथ हैं। यह सिर्फ मुसलमानों का मामला नहीं है, यह संविधान बचाने कासवाल है। हम मिलकर इस बिल का विरोध करेंगे।”
खत्म हुआ इंतजार! ‘War 2’ के मेकर्स ने रिलीज डेट का किया खुलासा, इस महीने थिएटर में मचने वाला है धमाका

बॉलीवुड के ग्रीक गॉड ऋतिक रोशन और टॉलीवुड के सुपरस्टार जूनियर एनटीआर की अपकमिंग फिल्म ‘War 2’ का बेसब्री से इंतजार हो रहा है। इसफिल्म ने पहले ही दर्शकों के बीच काफी हलचल मचा दी है, और अब इस फिल्म को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। फिल्म के मेकर्स नेइसकी रिलीज डेट का खुलासा कर दिया है, जिससे फैंस की उम्मीदों को और भी पंख लग गए हैं।हालांकि, ‘War 2’ की शूटिंग को कुछ समय पहले रोक दिया गया था, क्योंकि ऋतिक रोशन चोटिल हो गए थे। इस दौरान फैंस चिंतित थे कि क्याफिल्म की शूटिंग पूरी हो पाएगी और रिलीज डेट में कोई बदलाव होगा? लेकिन अब फिल्म से जुड़ी तमाम अटकलों का अंत हो गया है। आखिरकार, फिल्म की रिलीज डेट तय हो चुकी है और यह एक धमाकेदार घोषणा है। कब रिलीज होगी ‘War 2’?‘War 2’ की रिलीज डेट को लेकर यश राज फिल्म्स ने हाल ही में एक ट्वीट किया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। यश राज फिल्म्स ने ट्वीटकिया, “कहना पड़ेगा… आपने #War2 की मार्केटिंग शुरू होने से पहले ही माहौल बना दिया है… 14 अगस्त 2025 को दुनिया भर के सिनेमाघरों मेंतहलका मचेगा…” इसका मतलब है कि फिल्म ‘War 2’ स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त से एक दिन पहले, 14 अगस्त 2025 को रिलीज होगी।इस दिन भारतीय दर्शकों के लिए यह फिल्म एक बेहतरीन तोहफा साबित हो सकती है।बॉलीवुड और टॉलीवुड दोनों इंडस्ट्री के सुपरस्टार्स की इस फिल्म में भिड़त होने वाली है, जिसे लेकर फैंस में बहुत ज्यादा उत्साह है। इस फिल्म काबजट लगभग 200 करोड़ रुपये है, जो इसे एक बड़े पैमाने पर बन रही फिल्म बनाता है। फिल्म के मेकर्स इस समय प्रोजेक्ट पर पूरी तरह से ध्यान देरहे हैं और उनकी योजना इसे एक बड़ी पैन-इंडिया फिल्म के रूप में प्रस्तुत करने की है। क्या है फिल्म की खासियत?‘War 2’ का निर्देशन मशहूर फिल्मकार अयान मुखर्जी कर रहे हैं, जो पहले भी बॉलीवुड में अपनी फिल्म ‘Yeh Jawaani Hai Deewani’ और’Brahmastra’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। अयान मुखर्जी की निर्देशन शैली ने दर्शकों का दिल जीता है और यही वजह है कि’War 2′ के लिए लोगों में इतना इंतजार है। फिल्म की स्टार कास्ट भी काफी दमदार है। बॉलीवुड के ग्रीक गॉड ऋतिक रोशन और टॉलीवुड के पावरहाउस जूनियर एनटीआर दोनों इस फिल्म मेंमुख्य भूमिका में नजर आने वाले हैं। दोनों के बीच की जबरदस्त टक्कर, एक्शन सीक्वेंस, और भावनात्मक उतार-चढ़ाव दर्शकों को सिनेमाघरों में खींचनेके लिए काफी होंगे। फैंस उम्मीद कर रहे हैं कि फिल्म में दोनों सितारे अपनी अद्भुत एक्टिंग और एक्शन से स्क्रीन पर आग लगा देंगे। ऋतिक रोशन के फैंस के लिए यह फिल्म एक बड़ी उम्मीद बनी हुई है, क्योंकि वह एक्शन और ड्रामा में अपने दमदार अभिनय के लिए मशहूर हैं। वहीं, जूनियर एनटीआर की अपनी अलग पहचान है और वह टॉलीवुड के सबसे बड़े सितारों में से एक हैं। उनके फैंस भी इस फिल्म के लिए काफी उत्साहितहैं। दोनों का साथ स्क्रीन पर देखना दर्शकों के लिए किसी सपने से कम नहीं होगा। क्या होगा फिल्म की कहानी में?हालांकि, ‘War 2’ की कहानी के बारे में ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन फिल्म के पहले भाग ‘War’ ने दर्शकों को काफी रोमांचित कियाथा। पहले भाग में ऋतिक रोशन और टाइगर श्रॉफ के बीच जबरदस्त एक्शन और सस्पेंस देखने को मिला था। इस बार फिल्म में एक नए हीरो के रूपमें जूनियर एनटीआर की एंट्री हो रही है, और दर्शक जानना चाहते हैं कि फिल्म में उनका किरदार क्या होगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म मेंकौन किसके खिलाफ खड़ा होता है और आखिरकार कौन विजेता बनता है।फिल्म की सफलता की संभावनाएं‘War 2’ को लेकर जो उत्साह बना हुआ है, उसे देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि फिल्म के लिए बॉक्स ऑफिस पर भी धमाल मचने वालाहै। इस फिल्म का बजट और स्टार कास्ट उसे एक बड़ी हिट बनाने के लिए तैयार हैं। इसके अलावा, फिल्म की रिलीज डेट 14 अगस्त 2025 को एकमहत्वपूर्ण अवसर पर पड़ रही है, जो स्वतंत्रता दिवस के आसपास है। इस दिन रिलीज होने वाली कोई भी फिल्म अक्सर बेहतर प्रदर्शन करती है, क्योंकि दर्शकों के पास छुट्टियां होती हैं और फिल्म देखने का अवसर मिलता है।यश राज फिल्म्स, जो पहले भी ‘War’ जैसी सुपरहिट फिल्म का निर्माण कर चुका है, को पूरी उम्मीद है कि ‘War 2’ भी दर्शकों के दिलों में खासजगह बनाएगी।