युजवेंद्र चहल और धनश्री वर्मा के तलाक पर कोर्ट में होगी सुनवाई, इस दिन होगा फैसला

भारतीय क्रिकेटर युजवेंद्र चहल और उनकी पत्नी, कोरियोग्राफर धनश्री वर्मा के तलाक का मामला अब कोर्ट में पहुंच चुका है। दोनों ने तलाक के लिएअर्जी दायर की थी और चाहते हैं कि इसे जल्द से जल्द निपटाया जाए। इस पर फैमिली कोर्ट ने पहले ही हिंदू मैरिज एक्ट के तहत तलाक के लिएवैधानिक कूलिंग-ऑफ पीरियड को पूरा करने की बात की थी, लेकिन अब बॉम्बे हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के इस फैसले को पलटते हुए, मामले परगुरुवार को सुनवाई का आदेश दिया है। पूरा मामलाहिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक के लिए एक निर्धारित कूलिंग-ऑफ पीरियड होता है। युजवेंद्र चहल और धनश्री वर्मा ने फैमिली कोर्ट से इसपीरियड को माफ करने की मांग की थी, लेकिन फैमिली कोर्ट ने इसे अस्वीकार कर दिया। इसके बाद मामला बॉम्बे हाई कोर्ट में गया, जहां जस्टिसमाधव जामदार की पीठ ने फैमिली कोर्ट को चहल की आगामी आईपीएल में भागीदारी को ध्यान में रखते हुए तलाक के मामले पर जल्द फैसलासुनाने का निर्देश दिया है। दोनों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और जस्टिस जामदार ने निर्देश पारित करने से पहले उनके वकीलों की बातें भीसुनीं। कब होगी सुनवाई?युजवेंद्र चहल और धनश्री वर्मा की शादी दिसंबर 2020 में हुई थी। हालांकि, पिछले कुछ महीनों से दोनों अलग-अलग रह रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स केमुताबिक, दोनों ने इस साल की शुरुआत में आपसी सहमति से तलाक की अर्जी दायर की थी और साथ ही उन्होंने छह महीने के अनिवार्य कूलिंग-ऑफपीरियड से छूट की भी मांग की थी। अब हाई कोर्ट ने इस फैसले को पलटते हुए तलाक की प्रक्रिया को जल्द पूरा करने का रास्ता खोल दिया है। इसमामले की सुनवाई 20 मार्च 2025 को होगी। उम्मीद की जा रही है कि इसी दिन दोनों के रिश्ते पर अंतिम फैसला सुनाया जाएगा।तलाक की खबरों के बीच चर्चातलाक की खबरों के बीच युजवेंद्र चहल का नाम आरजे महविश से भी जुड़ने लगा है। कई रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि चहल और महविश केबीच नए रिश्ते की शुरुआत हो रही है। दोनों को कई बार एक साथ स्पॉट किया गया है। इस साल की शुरुआत में दोनों को एक साथ एक होटल केबाहर देखा गया था, और तब से उनके रिश्ते को लेकर चर्चा तेज हो गई थी। इसके बाद, दोनों ने क्रिसमस भी साथ मनाया था और हाल ही मेंचैम्पियन्स ट्रॉफी फाइनल मैच में भी एक साथ नजर आए थे, जहां दोनों ने एक-दूसरे को चीयर किया।तलाक का भविष्यअब देखना यह होगा कि 20 मार्च को कोर्ट का फैसला क्या आता है, और क्या युजवेंद्र चहल और धनश्री वर्मा का तलाक की प्रक्रिया जल्द पूरी होतीहै। दोनों की शादी में आई खटास के बाद, उनकी व्यक्तिगत जिंदगी को लेकर मीडिया में लगातार चर्चा हो रही है। दोनों के तलाक को लेकर फैन्स मेंभी कई तरह की बातें हो रही हैं
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में विपक्ष पर साधा निशाना, ‘मेक इन इंडिया’ और यूपीए की नीति में अंतर बताया

राज्यसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कांग्रेस और उसके सहयोगियों की सरकार के दौरान की गई नीतियोंपर सवाल उठाए। उन्होंने खासतौर पर यूपीए सरकार द्वारा 2011 में पेश की गई ‘नेशनल मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी’ का जिक्र किया और यह बताते हुएकहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी 2004 से 2014 तक सत्ता में थे, लेकिन उन्हें एक नीति तैयार करने में सात साल का समय लगा, और वह नीतिलागू नहीं हो पाई। सीतारमण ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि यह नीति केवल कागज पर ही रह गई, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार ने ‘मेक इनइंडिया’ जैसे बड़े कदम को न सिर्फ योजना के रूप में पेश किया बल्कि उसे पूरी तरह से लागू भी किया। उन्होंने कहा कि यूपीए के नेतृत्व में जो कार्यकेवल कागजी स्तर पर रहा, हमनें उसे धरातल पर उतारा। कांग्रेस की ‘नेशनल मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी’ का विश्लेषणसीतारमण ने कांग्रेस की ‘नेशनल मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी’ की आलोचना करते हुए कहा कि 2011 में इस नीति को पेश करने में कांग्रेस को 7 साल कासमय लगा, लेकिन इसे लागू करने में वह पूरी तरह से असफल रहे। यह नीति सिर्फ एक दस्तावेज़ बनकर रह गई, जिसे समय-समय पर चर्चा में लायागया लेकिन वास्तविक कार्यान्वयन में कोई सफलता नहीं मिल पाई। उन्होंने कहा कि सरकार ने “मेक इन इंडिया” का अभियान शुरू किया और इसे लागू करके हम उत्पादन क्षेत्र को बढ़ावा देने में कामयाब हुए। ‘मेक इनइंडिया’ पहल ने न केवल भारत के उत्पादन क्षेत्र में गति दी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारतीय उद्योगों की छवि को भी मजबूत किया। ‘मेक इन इंडिया’ और पीएम गति शक्ति का योगदानसीतारमण ने बताया कि ‘मेक इन इंडिया’ को एक मजबूत और प्रभावी कार्यक्रम बनाने के लिए पीएम गति शक्ति (PM Gati Shakti) को भी इसकेसाथ जोड़ा गया है। पीएम गति शक्ति का उद्देश्य पूरे देश में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है, ताकि माल और सेवाओं का आवागमन सुचारू औरतेज हो सके। यह पहल ना केवल भारतीय उद्योगों के लिए लाभकारी रही है, बल्कि इसके जरिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं। उन्होंने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ के तहत हम न केवल भारत में उत्पादन को बढ़ावा दे रहे हैं, बल्कि इसमें कई क्षेत्रों में सुधार करने की दिशा में कामकर रहे हैं, जैसे की इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स और नई तकनीकों का प्रयोग। इसके अलावा, पीएम गति शक्ति के साथ इस पहल को एकीकृत करहम इसे और अधिक प्रभावी बनाने में सफल रहे हैं, जो कि अब सकारात्मक परिणाम भी दे रहे हैं। यूपीए की सरकार की असफलतावित्त मंत्री ने कांग्रेस की आलोचना करते हुए यह भी कहा कि जबकि यूपीए सरकार की ‘नेशनल मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी’ केवल एक नीति कागज पर हीरह गई, हमनें उसे कामयाबी से लागू किया। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार के शासनकाल में जो काम कागज पर हुआ था, उसे बीजेपी सरकार नेसाकार किया। उनका कहना था कि बीजेपी ने न केवल नीति बनाई बल्कि उसे सही तरीके से लागू करके उद्योगों को प्रोत्साहन दिया। सीतारमण ने यह भी कहा कि यदि यूपीए सरकार की नीति को सही तरीके से लागू किया गया होता, तो आज भारत की मैन्युफैक्चरिंग और उत्पादनक्षेत्र का चेहरा कुछ और होता। लेकिन कांग्रेस सरकार का ध्यान हमेशा राजनीतिक फायदे और चुनावी वादों पर था, जबकि अर्थव्यवस्था और उद्योगोंके विकास के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए थे। भारतीय उद्योगों को बढ़ावासीतारमण ने आगे कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ ने भारतीय उद्योगों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरकार ने घरेलू उद्योगों के लिए कईप्रोत्साहन योजनाएं बनाई, जिनसे उत्पादन, रोजगार और निर्यात में वृद्धि हुई। ‘मेक इन इंडिया’ ने न केवल छोटे और मझोले उद्योगों के लिए अवसरपैदा किए, बल्कि बड़े औद्योगिक घरानों को भी नई दिशा दी। सीतारमण ने यह भी बताया कि ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारतीय उद्योगों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक मजबूत स्थान बनाने के लिए प्रोत्साहितकिया गया। इससे न केवल घरेलू बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ी, बल्कि विदेशी निवेशकों का भी ध्यान आकर्षित हुआ।
AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने बीजेपी सरकार पर उठाए सवाल, दिल्ली में बढ़ते अपराधों पर चिंता व्यक्त की

आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता सौरभ भारद्वाज ने हाल ही में एक प्रेस वार्ता के दौरान बीजेपी सरकार को आड़े हाथों लिया और दिल्ली में बढ़तेअपराधों पर गहरी चिंता जताई। भारद्वाज ने कहा कि बीजेपी सरकार के तहत दिल्ली में जनता दहशत में है और अपराधी बिना डर के सड़कों पर घूमरहे हैं। उन्होंने दिल्ली में हाल ही में घटित कई अपराधों का जिक्र करते हुए इस बढ़ती असुरक्षा की स्थिति पर सवाल उठाए। बढ़ते अपराध और जनता में डरसौरभ भारद्वाज ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा, “बीजेपी सरकार में जनता दहशत में है और अपराधी सड़कों पर बेख़ौफ़ घूम रहे हैं।” उन्होंने हाल ही मेंफतेहपुरी में एक व्यापारी से ₹80 लाख की लूट की घटना का जिक्र किया। भारद्वाज ने यह भी बताया कि यह लूट सिर्फ एक उदाहरण है, और ऐसेअपराध दिल्ली में आम हो गए हैं। इस बयान के जरिए उन्होंने यह दिखाने की कोशिश की कि दिल्ली में कानून व्यवस्था पूरी तरह से विफल हो चुकीहै और सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही। बुजुर्गों पर बढ़ते अपराधभारद्वाज ने विशेष रूप से दिल्ली में बुजुर्गों के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि हाल ही में पंचशील पार्क में एकबुजुर्ग की बेरहमी से हत्या कर उन्हें लूटा गया। इस घटना ने शहर में बुजुर्गों के प्रति बढ़ती हिंसा को उजागर किया। भारद्वाज ने कहा, “पंचशील पार्क मेंबुजुर्ग की बेरहमी से हत्या कर, उन्हें लूटा गया था। यह घटना दिल्ली में बुजुर्गों के खिलाफ बढ़ते अपराधों का हिस्सा है।” इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली के अन्य इलाकों का भी जिक्र किया, जैसे कोहाट एंक्लेव में एक बुजुर्ग दंपत्ति की हत्या और न्यू अशोक विहार में एकबुजुर्ग से लूट की घटना। इन घटनाओं ने दिल्ली के बुजुर्गों में डर पैदा कर दिया है और उन्हें यह महसूस कराया है कि वे अब सुरक्षित नहीं हैं। NCRB रिपोर्ट से अपराधों का खुलासासौरभ भारद्वाज ने केंद्र सरकार की NCRB (नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो) रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि दिल्ली में बुजुर्गों के खिलाफ होने वालेअपराधों की संख्या पूरे देश में सबसे अधिक है। उन्होंने कहा, “NCRB रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में बुजुर्गों के खिलाफ जितने अपराध होते हैं, उनमें से27% अपराध केवल दिल्ली में होते हैं।” इस रिपोर्ट का हवाला देकर भारद्वाज ने बताया कि दिल्ली में बुजुर्गों के खिलाफ हिंसा का स्तर कितनाअधिक बढ़ चुका है, और यह सरकार की असफलता को दर्शाता है। डबल इंजन सरकार और अपराधों की बढ़ती संख्याभारद्वाज ने बीजेपी की “डबल इंजन” सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि दिल्ली में अपराधों की बढ़ती संख्या इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। उन्होंनेतंज कसते हुए कहा, “एक महीने में ही दिल्ली ने डबल इंजन से डबल मर्डर का सफ़र तय कर लिया।” इस बयान के जरिए उन्होंने बीजेपी सरकार कीनीतियों और उनके दावों पर सवाल उठाया। “डबल इंजन” का दावा, जो केंद्र और राज्य सरकार के मिलकर काम करने की बात करता है, पर उन्होंनेयह सवाल उठाया कि अगर यह सच होता, तो दिल्ली में अपराधों की इतनी बुरी स्थिति नहीं होती। दिल्ली में क़ानून व्यवस्था पर सवालभारद्वाज ने कहा कि दिल्ली में कानून व्यवस्था 11 साल से केंद्र सरकार के अधीन है, लेकिन अपराधी इतने बेख़ौफ़ हो गए हैं कि वे किसी से भी डरतेनहीं हैं। उन्होंने कहा, “केंद्र सरकार के तहत दिल्ली में अपराधी बेख़ौफ़ हैं।” इस टिप्पणी से उन्होंने केंद्र सरकार की क़ानून व्यवस्था पर गंभीर सवालउठाए और बताया कि लंबे समय से दिल्ली की कानून व्यवस्था केंद्र के नियंत्रण में होने के बावजूद अपराधियों का मनोबल बढ़ा हुआ है। दिल्ली की जनता की सुरक्षा के लिए कार्रवाई की मांगसौरभ भारद्वाज ने यह भी कहा कि दिल्ली की जनता अब असुरक्षित महसूस कर रही है और सरकार को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने मांग की किपुलिस को अधिक सख्त और प्रभावी बनाना होगा, साथ ही बुजुर्गों और अन्य कमजोर वर्गों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा, “दिल्ली की जनता को बिना डर के जीने का हक है। सरकार को तुरंत क़ानून व्यवस्था को सुधारने और अपराधों पर नियंत्रण पाने के लिए कदम उठानेचाहिए।”
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राज्य सभा में बीजेपी पर साधा निशाना, कर्नाटक में फोर लेन रोड परियोजना पर सवाल उठाए

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राज्यसभा में एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और केंद्र सरकार पर निशाना साधा।उन्होंने कर्नाटक में चल रही फोरलेन रोड परियोजना के संबंध में सरकार की नीयत और योजनाओं पर सवाल उठाए। खरगे ने कहा कि कर्नाटक केप्रमुख शहरों को जोड़ने वाली फोरलेन रोड परियोजना पर सरकार का काम धीमा है और इस पर कोई ठोस प्रगति नहीं हो रही है। कर्नाटक में फोरलेन रोड परियोजना की धीमी प्रगतिखरगे ने राज्यसभा में बोलते हुए कहा कि कर्नाटक में जो फोरलेन रोड परियोजना है, जिसमें गुलबर्गा से बेंगलुरु, सोलापुर से बेंगलुरु और बीदर सेबेंगलुरु को जोड़ने वाली प्रमुख सड़कें शामिल हैं, उन पर काम बहुत धीमा हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन परियोजनाओं का काम लगातारपीछे जा रहा है और इसकी वजह केंद्र सरकार की नीतियां और योजनाएं हैं।कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, “कर्नाटक में जो फोरलेन रोड है – गुलबर्गा से बेंगलुरु, सोलापुर से बेंगलुरु और बीदर से बेंगलुरु को जाती है, इस पर काम आगेनहीं बढ़ रहा है।” उनका यह बयान उस समय आया है जब कर्नाटक राज्य में सड़कों और बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर जनता में असंतोष बढ़ताजा रहा है। पीएमओ से नेशनल हाइवे का नंबर लेने की प्रक्रियामल्लिकार्जुन खरगे ने आगे कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि नेशनल हाइवे का नंबर लेने के लिए पीएमओ (प्रधानमंत्री कार्यालय) तक जाना पड़ताहै। उन्होंने कहा, “मुझे जानकारी मिली है कि नेशनल हाइवे का नंबर लेने के लिए भी PMO जाना पड़ता है- अगर ये बात सही नहीं है तो मंत्री जीइसका खंडन कर सकते हैं।”इस बयान में खरगे ने केंद्र सरकार के कामकाज की गति और पारदर्शिता पर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि सरकार का केंद्रीयकरण इतना ज्यादाहो चुका है कि महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए भी स्थानीय प्रशासन को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से मंजूरी की जरूरत होती है। खरगे ने यह भीकहा कि अगर यह जानकारी गलत है, तो संबंधित मंत्री इसे खंडन कर सकते हैं, लेकिन उन्होंने इसे गंभीरता से उठाया। फंड की कमी और जमीन के मुद्दे पर टिप्पणीइसके बाद खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार के पास फंड की कमी है, और अंत में यह बहाना बनाकर काम में विलंब किया जा रहा है कि जमीन दीजाए तो काम शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा, “सच्चाई ये है कि इनके पास फंड नहीं है और फिर आखिर में बहाना बनाते हैं कि आप हमें जमीन दो, हम काम करेंगे।”कांग्रेस अध्यक्ष ने यह बयान सरकार के उस तर्क पर भी चोट की, जिसमें कहा गया था कि यदि उन्हें परियोजनाओं के लिए जमीन मिलती है, तो वेकाम शुरू कर सकते हैं। खरगे ने यह दावा किया कि जमीन मिलना एक जटिल और लंबी प्रक्रिया है, लेकिन इस समस्या को पूरी तरह से नजरअंदाजकिया जा रहा है। केंद्र सरकार की नीति पर सवालखरगे ने केंद्र सरकार की नीति और नीतिगत दिशा पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि सरकार को यह पता है कि जमीन मिलना आसान कामनहीं है, और जब जमीन मिलती है तो वह भी उस पर काम शुरू नहीं किया जा रहा है। उनका यह बयान कर्नाटक में बुनियादी ढांचे के विकास में हो रहीदेरी को लेकर था। खरगे ने केंद्र सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि सरकार को एक ठोस योजना बनाने और उन योजनाओं को जमीन पर उतारने कीबजाय वे सिर्फ वादे करती रहती है। कर्नाटक में कांग्रेस का रुखकर्नाटक में कांग्रेस पार्टी की सरकार बनने के बाद से यह मुद्दा प्रमुख चर्चा का विषय बन चुका है। राज्य में बीजेपी की सरकार के कार्यकाल में कईप्रमुख बुनियादी ढांचे के प्रोजेक्ट धीमी गति से चल रहे थे, और कांग्रेस ने इस मुद्दे को अपनी चुनावी रणनीति का हिस्सा बनाया था। मल्लिकार्जुनखरगे का यह बयान उसी क्रम में आता है, जब कर्नाटक में सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचों को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्र सरकार की कार्यशैली पर यह आरोप भी लगाया कि सरकारी योजनाओं की समय सीमा और परिणामों के बारे में कोई स्पष्टतानहीं है। उनकी ओर से यह भी स्पष्ट संदेश था कि सरकार के पास न तो पैसा है, न योजना और न ही राजनीतिक इच्छाशक्ति, जिससे राज्य के विकासकार्यों में गति लाई जा सके। बीजेपी का जवाबहालांकि मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद बीजेपी की ओर से भी जवाब आने की संभावना है। बीजेपी ने पहले भी कांग्रेस द्वारालगाए गए आरोपों का खंडन किया है और कहा है कि केंद्र सरकार कर्नाटक सहित पूरे देश में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। बीजेपीका यह भी कहना है कि केंद्रीय योजनाओं के तहत कर्नाटक को पर्याप्त राशि दी जा रही है, और कोई भी मुद्दा जमीन से जुड़ा हो, तो उसे स्थानीयप्रशासन और राज्य सरकार के साथ मिलकर हल किया जा रहा है।
नागपुर हिंसा मामले में पुलिस को बड़ी सफलता: मास्टरमाइंड फहीम खान की गिरफ्तारी

नागपुर में हाल ही में हुई हिंसा के मामले में पुलिस ने एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। इस हिंसा के मुख्य आरोपी और मास्टरमाइंड फहीमशमीम खान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में फहीम की भूमिका अहम रही थी, क्योंकि वह ही था जिसने हिंसा को बढ़ावा देने केलिए विरोध प्रदर्शन में भाग लिया था। यह हिंसा तब हुई थी जब विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने एक बड़ा आंदोलन किया था और उसके बाद मुस्लिम संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। पुलिसने फहीम खान के खिलाफ आरोप दर्ज किए हैं और उसके खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार किया है। वह माइनॉरिटी डेमोक्रेटिक पार्टी केनागपुर जिला अध्यक्ष हैं और 2024 विधानसभा चुनाव में भी नागपुर से उम्मीदवार के रूप में उतरे थे। हालांकि, उस चुनाव में उन्हें हार का सामनाकरना पड़ा था और उनकी जमानत भी जब्त हो गई थी। हिंसा की घटनाएं और उसके बाद की स्थितिनागपुर में यह हिंसा एक बड़े विरोध प्रदर्शन के कारण भड़क उठी। विश्व हिंदू परिषद (VHP) द्वारा आयोजित एक आंदोलन के बाद मुस्लिम संगठनों नेविरोध प्रदर्शन किया था। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ अप्रिय घटनाएं घटित हुईं, जिससे स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई। फहीम शमीम खान, जो माइनॉरिटी डेमोक्रेटिक पार्टी के नागपुर जिला अध्यक्ष हैं, उस दिन दोपहर के समय प्रदर्शन में शामिल हुआ था। प्रदर्शनकारियोंने थाने के पास इकट्ठा होकर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की और विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान फहीम ने 50 से 60 लोगों की एक भीड़ इकट्ठाकर ली थी। पुलिस ने फहीम खान के खिलाफ आरोप दर्ज किए हैं और उसे इस हिंसा में मुख्य आरोपी मानते हुए गिरफ्तार किया। फहीम खान की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने यह दावा किया कि वह हिंसा के आयोजन और उसे बढ़ावा देने में शामिल था। उसकी गिरफ्तारी पुलिसके लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है क्योंकि इससे अन्य आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है और पुलिस को हिंसा के पीछे केकारणों और योजनाओं को समझने में मदद मिल सकती है। फहीम खान का राजनीतिक और सामाजिक इतिहासफहीम शमीम खान माइनॉरिटी डेमोक्रेटिक पार्टी का एक महत्वपूर्ण नेता है। वह नागपुर जिले में पार्टी के जिला अध्यक्ष के रूप में काम कर रहा था औरराजनीति में सक्रिय रूप से भाग लेता था। 2024 विधानसभा चुनाव में उसने नागपुर से चुनावी मैदान में भाग लिया था, लेकिन वह चुनाव हार गयाथा। इसके साथ ही उसकी जमानत भी जब्त हो गई थी। इसके बावजूद, वह अपने समर्थकों के बीच एक प्रभावशाली व्यक्ति बना हुआ था औरउसकी राजनीतिक स्थिति ने उसे अपने समर्थकों के बीच एक प्रकार की अहमियत दिलाई थी। फहीम के खिलाफ अब तक दर्ज आरोपों में उसकी भूमिका मुख्य रही है। उसे हिंसा को भड़काने और विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय भागीदार के रूप में देखाजा रहा है। इसके अलावा, फहीम का नाम उन 51 लोगों में शामिल है जिनके खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया है। हालांकि, पुलिस ने यह भीस्पष्ट किया है कि फहीम के खिलाफ कार्रवाई केवल उसके कार्यों के आधार पर की जा रही है, और इसमें किसी प्रकार की राजनीतिक पहचान यादबाव का प्रभाव नहीं है। पुलिस की कार्रवाई और घटनाओं का विश्लेषणफहीम शमीम खान की गिरफ्तारी से पुलिस ने यह साबित किया है कि वह हिंसा के मुख्य आरोपी थे। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान कुछ तत्वोंने कानून-व्यवस्था को चुनौती दी और हिंसा को भड़काया। जब फहीम शमीम खान ने अपने समर्थकों को इकठ्ठा किया और थाने के पास प्रदर्शन किया, तो स्थिति और भी गंभीर हो गई। पुलिस को इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कठिन संघर्ष करना पड़ा। फहीम की गिरफ्तारी से यह भी संकेत मिलता है कि पुलिस अब किसी भी प्रकार की हिंसा को लेकर कठोर कदम उठा रही है और जो लोग इस तरहकी घटनाओं में शामिल होंगे, उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि वे इस मामले में पूरी गंभीरता से कार्रवाई करेंगे औरकिसी भी आरोपी को नहीं बख्शेंगे, चाहे वह किसी भी जाति या समुदाय से संबंध रखता हो। सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएंफहीम खान की गिरफ्तारी के बाद विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों से प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। एक ओर जहां कुछ राजनीतिक दलों नेपुलिस की कार्रवाई का समर्थन किया और इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम बताया, वहीं कुछ अन्य दलों ने इसे राजनीति से प्रेरितकदम बताया। कई नेताओं ने यह भी कहा कि हिंसा और विरोध प्रदर्शन का कोई स्थान नहीं होना चाहिए, और इस तरह की घटनाओं से समाज में केवल तनाव औरअव्यवस्था ही फैलती है। वहीं, कुछ अन्य नेताओं ने फहीम खान के गिरफ्तार होने को न्याय की जीत बताया और कहा कि हर किसी को कानून केसामने बराबरी से जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। वहीं, मुस्लिम समुदाय में फहीम खान की गिरफ्तारी को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं आईं। कुछ समुदायों ने इसे एक राजनीतिक कदम करार दिया, जबकि कुछ ने इसे कानून-व्यवस्था की ओर से उठाया गया जरूरी कदम माना।
सुनीता विलियम्स की अंतरिक्ष से सुरक्षित वापसी: स्पेसएक्स क्रू ड्रैगन के साथ धरती पर लौटीं नासा की अंतरिक्ष यात्री

नासा की प्रतिष्ठित अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और उनके सहयात्री बुच विल्मोर, कुल 286 दिन (करीब 9 महीने) के बाद पृथ्वी पर सुरक्षित लौटआए हैं। यह पल न केवल अंतरिक्ष यात्रा के लिहाज से ऐतिहासिक था, बल्कि इसके साथ ही नासा के सफल मिशन की भी पुष्टि हुई। फ्लोरिडा केतट पर भारतीय समयानुसार तड़के करीब 3:30 बजे, स्पेसएक्स का क्रू ड्रैगन कैप्सूल समुद्र में उतरते हुए सुरक्षित रूप से लैंड कर गया, और इस लैंडिंगने एक महत्वपूर्ण अंतरिक्ष यात्रा के समापन का संकेत दिया। यह अंतरिक्ष मिशन 8 दिनों का होना था, लेकिन तकनीकी और अन्य कारणों के चलते इस मिशन में कुल 9 महीने का वक्त लगा। इस मिशन केअंतर्गत चार अंतरिक्ष यात्री, जिनमें सुनीता विलियम्स भी शामिल थीं, अंतरिक्ष स्टेशन से पृथ्वी लौटने के लिए एक लंबी और कठिन यात्रा पर थे। इसलंबी यात्रा की समाप्ति के बाद, उन्होंने एक ऐतिहासिक पल का अनुभव किया, जब वे सुरक्षित रूप से धरती पर लौटे। अंतरिक्ष यात्रा की शुरुआत और मिशन की प्रक्रियाइस मिशन की शुरुआत में अंतरिक्ष यात्री निक हेग और अलेक्जेंडर गोरबुनोव, 29 सितंबर 2024 को अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंचे थे। ये दोनों स्पेसएक्सके ड्रैगन फ्रीडम अंतरिक्ष यान पर सवार होकर अंतरिक्ष में गए थे। इसे सितंबर में अंतरिक्ष स्टेशन से डॉक किया गया था और अब यह स्पेसएक्स काड्रैगन यान क्रू-9 के वापस लौटने का समय आ गया था। यह महत्वपूर्ण पल कैमरों में रिकॉर्ड हुआ, जब कैप्सूल ने समुद्र में सफलतापूर्वक लैंड किया। अंतरिक्ष यात्रा में इस तरह की सफल वापसी हमेशा एक चुनौतीपूर्ण कार्य होती है। स्पेसएक्स के रिकवरी अभियान को नियंत्रण केंद्र द्वारा सीधाप्रसारण किया गया था, जिससे दुनियाभर में फैले हुए लोग इस ऐतिहासिक पल को देख सके। इस पल को देखते हुए अंतरिक्ष यात्रियों के सुरक्षितपृथ्वी पर लौटने की कामना करने वाले लोग उनके लिए दुआ कर रहे थे। स्पलैशडाउन की प्रक्रियास्पेसएक्स क्रू ड्रैगन कैप्सूल की समुद्र में सफल लैंडिंग के लिए बहुत सारी तैयारियां की गई थीं। जैसे ही यह यान समुद्र के ऊपर कुछ दूरी पर पहुंचा, चार पैराशूटों ने उसे धीमा करना शुरू कर दिया। सबसे पहले दो पैराशूट खोले गए, इसके कुछ सेकंड बाद बाकी के दो पैराशूट भी खुल गए। इससेकैप्सूल के उतरने की गति को नियंत्रण में किया गया और यह धीरे-धीरे समुद्र में सुरक्षित रूप से लैंड कर गया। समुद्र में सफल स्पलैशडाउन के बाद, रिकवरी टीम ने कैप्सूल के पास पहुंचकर उसे वापस लाने के लिए रस्सियों और हार्नेस का इस्तेमाल किया। इसके बाद, रिकवरी वेसल ने कैप्सूल कोसुरक्षित तरीके से खींच लिया और उसे अपने पास लाकर धोया। रिकवरी वेसल का नाम मेगन रखा गया था, जो नासा की एक और अंतरिक्ष यात्रीमेगन मैकआर्थर के नाम पर रखा गया। अंतरिक्ष यात्रियों का स्वागतजब स्पेसएक्स क्रू ड्रैगन कैप्सूल ने समुद्र में लैंड किया, तो तुरंत अंतरिक्ष यात्रियों का स्वागत किया गया। इस दौरान समुद्र में कुछ डॉल्फिनों का झुंड भीनजर आया, जो कैप्सूल के आसपास तैरते हुए दिखे। नासा के कमेंटेटर ने मजाक करते हुए कहा कि डॉल्फिन रिकवरी टीम का मानद हिस्सा हैं। इसकेबाद रिकवरी टीम ने कैप्सूल को खोला और अंतरिक्ष यात्रियों को बाहर निकाला। सबसे पहले क्रू-9 के कमांडर निक हेग ने कैप्सूल से बाहर कदम रखा। इसके बाद अलेक्जेंडर गोरबुनोव बाहर आए और फिर सुनीता विलियम्स औरअंत में बुच विल्मोर बाहर आए। सभी ने मुस्कान के साथ और हाथ हिलाते हुए एक-दूसरे को अभिवादन किया। रिकवरी टीम ने इन्हें एक रोलिंग स्ट्रेचरपर बैठाकर सुरक्षित स्थान पर ले जाया। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मौसम ने साथ दिया और समुद्र की लहरें शांत रही। भारत में सुनीता विलियम्स की वापसी पर उत्सवसुनीता विलियम्स की सुरक्षित वापसी को लेकर भारत में खास उत्सव का माहौल था। गुजरात में उनके परिवार के लोग उनकी सलामत वापसी केलिए प्रार्थनाएं कर रहे थे। उनके चचेरे भाई दिनेश रावल ने अहमदाबाद में ‘यज्ञ’ का आयोजन किया, जहां परिवार के सदस्य और आसपास के लोगसुनीता के सुरक्षित आगमन के लिए दुआ कर रहे थे। दिनेश रावल ने कहा, “हमारे गांव में महिला मंडल की ओर से एक बड़ा प्रार्थना समारोह और भजनशुरू किया गया है, जो कल सुबह तक चलेगा। भगवान हमारी सभी मनोकामनाएं पूरी करें।” सुनीता विलियम्स के पैतृक गांव झूलासन में भी इस अवसर पर हवन और पूजा का आयोजन किया गया। यहां के लोग नासा की इस अंतरिक्ष यात्रीकी सुरक्षित वापसी की कामना कर रहे थे। झूलासन के डोला माता मंदिर में विशेष पूजा की गई, क्योंकि सुनीता ने अपनी पहली अंतरिक्ष यात्रा केदौरान डोला माता की तस्वीर साथ ले जाई थी। मंदिर के पुजारी दिनेश पंड्या ने कहा, “हम सभी बहुत खुश हैं और हम पिछले नौ महीनों से उनके(सुनीता विलियम्स) लिए प्रार्थना कर रहे थे।” अंतरिक्ष यात्रा के ऐतिहासिक पहलूसुनीता विलियम्स की वापसी न केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि थी, बल्कि यह नासा के लिए भी एक बड़ा क्षण था। उनके साथ अंतरिक्ष से लौटेअन्य अंतरिक्ष यात्री, निक हेग और अलेक्जेंडर गोरबुनोव, भी इस यात्रा का हिस्सा थे, और उनके साथ वापसी ने इस मिशन को और भी ऐतिहासिकबना दिया। इस अंतरिक्ष यात्रा की सफलता ने यह साबित कर दिया कि अंतरिक्ष यात्रा के दौरान तकनीकी और मानवीय सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों कोदूर किया जा सकता है। स्पेसएक्स के क्रू ड्रैगन के सफल स्पलैशडाउन के साथ ही यह साबित हुआ कि निजी अंतरिक्ष कंपनी भी नासा के मिशनों में समान रूप से सक्षम है।अंतरिक्ष यात्री की सुरक्षित वापसी ने अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में विश्वास को और बढ़ाया है, और भविष्य में इस तरह के मिशनों को और भी अधिकचुनौतीपूर्ण बनाने की दिशा में मार्गदर्शन किया है।
सुनीता विलियम्स की वापसी पर प्रधानमंत्री मोदी का पत्र: “1.4 बिलियन भारतीयों को आप पर गर्व है”

नासा की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और उनके साथी बुच विल्मोर की वापसी की खबर ने पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है। लगभग नौमहीने से अधिक समय तक अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर बिताने के बाद ये दोनों एस्ट्रोनॉट्स अब धरती पर लौटने के लिए रवाना हो चुके हैं।इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक विशेष पत्र लिखकर सुनीता विलियम्स को शुभकामनाएं दीं। उनके पत्र मेंभारतवासियों की ओर से उनके कार्य की सराहना की गई और उनके योगदान को लेकर गर्व की भावना व्यक्त की गई। पीएम मोदी ने सुनीता विलियम्स को दी शुभकामनाएंप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पत्र में लिखा, “मैं आपको भारत के लोगों की ओर से शुभकामनाएं देता हूं।” उन्होंने आगे बताया कि हाल ही में उन्हेंप्रसिद्ध अंतरिक्ष यात्री माइक मैसिमिनो से मिलने का अवसर मिला, और उस दौरान उन्होंने सुनीता विलियम्स के कार्य की चर्चा की। पीएम मोदी नेबताया कि माइक मैसिमिनो के साथ उनकी बातचीत में सुनीता विलियम्स के अद्वितीय कार्य और उनके योगदान की बहुत सराहना की गई। यह चर्चाकरने के बाद प्रधानमंत्री ने महसूस किया कि उन्हें सुनीता को पत्र लिखना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी उल्लेख किया कि जब उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और बाद में राष्ट्रपति जो बाइडन से मुलाकातकी, तब उन्होंने सुनीता विलियम्स का कुशलक्षेम पूछा। पीएम मोदी ने कहा कि 1.4 बिलियन भारतीय हमेशा उनकी उपलब्धियों पर गर्व महसूस करतेहैं और हालिया घटनाओं ने एक बार फिर उनकी प्रेरणादायक दृढ़ता को सबके सामने लाया है। सुनीता विलियम्स और भारतीयों का भावनात्मक संबंधपीएम मोदी ने अपने पत्र में यह भी लिखा, “भले ही आप हजारों मील दूर हैं, लेकिन आप हमारे दिल के करीब हैं।” यह शब्द भारत और सुनीताविलियम्स के बीच गहरे भावनात्मक संबंध को दर्शाते हैं। पीएम मोदी ने आगे कहा कि भारत के लोग उनके अच्छे स्वास्थ्य और उनके मिशन कीसफलता के लिए निरंतर प्रार्थना कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने सुनीता विलियम्स के परिवार के बारे में भी विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने लिखा कि “बोनी पंड्या आपकी वापसी का बेसब्री सेइंतजार कर रही होंगी, और मुझे यकीन है कि स्वर्गीय दीपकभाई का आशीर्वाद भी हमेशा आपके साथ है।” यहां प्रधानमंत्री ने सुनीता विलियम्स केपरिवार की अहमियत को भी स्वीकार किया, जो उनके इस मुश्किल और प्रेरणादायक यात्रा के दौरान उनके साथ रहे हैं। 2016 की यात्रा की यादेंप्रधानमंत्री ने अपनी 2016 में संयुक्त राज्य अमेरिका की यात्रा के दौरान सुनीता विलियम्स से मुलाकात की बात भी साझा की। इस दौरान उन्होंनेउनके साथ दीपकभाई के बारे में भी चर्चा की थी। पीएम मोदी ने लिखा कि “मुझे 2016 में संयुक्त राज्य अमेरिका की अपनी यात्रा के दौरान आपकेसाथ उनसे मुलाकात की याद आती है।” यह विचारपूर्ण टिप्पणी उस समय के व्यक्तिगत और भावनात्मक कनेक्शन को दिखाती है, जो प्रधानमंत्रीमोदी और सुनीता विलियम्स के बीच है। भारत में सुनीता विलियम्स का स्वागतप्रधानमंत्री ने अपने पत्र में आगे लिखा, “आपकी वापसी के बाद, हम भारत में आपसे मिलने के लिए उत्सुक हैं। भारत के लिए अपनी सबसे शानदारबेटियों में से एक की मेजबानी करना हमारे लिए गर्व की बात होगी।” उन्होंने यह स्पष्ट किया कि भारत में सुनीता विलियम्स का स्वागत एक बड़े सम्मानकी बात होगी। उनके योगदान और मेहनत ने उन्हें सिर्फ भारत में नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में एक आदर्श बना दिया है। नासा के अन्य एस्ट्रोनॉट्स को शुभकामनाएंप्रधानमंत्री मोदी ने पत्र में सुनीता विलियम्स के साथ उनके साथी एस्ट्रोनॉट बैरी विल्मोर और माइकल विलियम्स को भी शुभकामनाएं दीं। उन्होंने इनसभी को सुरक्षित वापसी की शुभकामनाएं दीं। पीएम मोदी ने यह कहा कि वह सुनीता विलियम्स के परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं भेजते हैं औरउनकी सुरक्षित वापसी की कामना करते हैं। सुनीता विलियम्स की सफलता की कहानीसुनीता विलियम्स ने नासा के अंतरिक्ष कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण मिशनों में भाग लिया है। वह अंतरिक्ष में सबसे अधिक समय बिताने वाली महिलाएस्ट्रोनॉट्स में से एक हैं। उनके योगदान और उपलब्धियों ने भारतीयों को गर्व महसूस कराया है, और वह भारतीय युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोतबनी हैं। उनका समर्पण, दृढ़ता, और साहस न केवल अंतरिक्ष क्षेत्र में बल्कि जीवन के हर पहलू में उत्कृष्टता की मिसाल है। सुनीता की वापसी न केवल उनके लिए बल्कि पूरे भारत के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है। उनकी उपलब्धियां न केवल भारतीय महिलाओं के लिएप्रेरणा देती हैं, बल्कि उन्होंने भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में भी एक नई ऊंचाई को छुआ है।
नागपुर में तनाव: औरंगजेब की कब्र को हटाने को लेकर विरोध प्रदर्शन और हिंसा

महाराष्ट्र के नागपुर शहर में सोमवार को एक गंभीर घटनाक्रम हुआ, जब दक्षिणपंथी संगठन के प्रदर्शन के दौरान औरंगजेब की कब्र को हटाने को लेकरअफवाहों ने पूरे इलाके में तनाव पैदा कर दिया। इस अफवाह के अनुसार, मुस्लिम समुदाय के पवित्र ग्रंथ, कुरान को जलाया गया था, जिससे दोनोंसमुदायों के बीच हिंसक झड़पें शुरू हो गईं। इस दौरान दो गुटों के बीच पथराव हुआ और पुलिस पर भी हमले हुए। अधिकारीयों के अनुसार, इस हिंसामें चार लोग घायल हो गए, और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज किया।हिंसा का आगाज: बजरंग दल का प्रदर्शनइस घटना की शुरुआत बजरंग दल के प्रदर्शन से हुई, जो महल इलाके में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा के पास हुआ। प्रदर्शन के दौरानअफवाह फैल गई कि प्रदर्शनकारियों ने कुरान को जलाया है, जिससे मुस्लिम समुदाय में आक्रोश फैल गया। इस घटना के बाद वीडियो सोशलमीडिया पर वायरल हो गए और इसने दोनों समुदायों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया। पुलिस के अनुसार, बजरंग दल के प्रदर्शन का उद्देश्य औरंगजेब की कब्र को हटाने का था, लेकिन इस प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर कुरान जलानेकी अफवाह फैल गई। सोशल मीडिया पर वीडियो के प्रसार ने और भी विवाद को जन्म दिया और लोग विभिन्न इलाकों में एकत्रित होने लगे, जिससेहिंसा का माहौल बन गया। हिंसा फैलने का कारण: अफवाहें और झड़पेंअधिकारियों ने बताया कि हिंसा सबसे पहले चिटनिस पार्क और महल इलाकों में शुरू हुई, जहां दंगाइयों ने कुछ चार पहिया वाहनों में आग लगा दी।इन इलाकों में पथराव भी हुआ और पुलिस पर भी हमले किए गए। इसके बाद, हिंसा धीरे-धीरे शहर के अन्य हिस्सों जैसे कोतवाली और गणेशपेठतक फैल गई। पुलिस ने स्थिति को काबू करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज किया। पुलिस ने बताया कि चिटनिस पार्क से शुक्रवारी तालाओ रोड क्षेत्र हिंसा से सबसे अधिक प्रभावित हुआ। इस दौरान कई घरों और दुकानों पर भीपथराव किया गया। साथ ही, कई वाहनों में आग लगाई गई। पुलिस ने उपद्रवियों को तितर-बितर करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया। बजरंग दल का बयानवहीं, बजरंग दल के पदाधिकारियों ने आरोपों का खंडन किया और कहा कि उनके प्रदर्शन के दौरान उन्होंने केवल औरंगजेब का पुतला जलाया था, नकि पवित्र कुरान को। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल औरंगजेब की कब्र को हटाने के लिए प्रदर्शन करना था और उन्होंने किसीधार्मिक ग्रंथ का अपमान नहीं किया। हालांकि, इस बयान के बावजूद, सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों और हिंसा ने स्थिति को और भीसंवेदनशील बना दिया। पुलिस का हस्तक्षेप और कार्रवाईपुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए कई कदम उठाए। अधिकारियों ने कहा कि संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कियागया है। त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT), दंगा नियंत्रण पुलिस और राज्य रिजर्व पुलिस बल (SRPF) को तैनात किया गया ताकि वे उपद्रवियों परकड़ी नजर रख सकें और किसी भी प्रकार की हिंसा को रोका जा सके। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए विभिन्न थानों से अतिरिक्त पुलिस कर्मियों को बुलाया गया और गश्त तेज कर दी गई। पुलिस ने नागरिकों सेशांति बनाए रखने की अपील की और उन्हें अफवाहों पर विश्वास न करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अपीलराज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस हिंसक घटनाक्रम के बाद शांति की अपील की। उन्होंने नागरिकों से कहा कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें औरकिसी भी प्रकार की हिंसा में शामिल न हों। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने पुलिस के साथ संपर्क बनाए रखा है और स्थिति को संभालने के लिए हरसंभव कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, “नागपुर एक शांतिपूर्ण शहर है, जहां लोग एक-दूसरे के सुख-दुख में शामिल होते हैं। हमेशा से नागपुरकी यह परंपरा रही है। हम किसी भी अफवाह पर विश्वास नहीं करेंगे और शांति बनाए रखेंगे।” फडणवीस ने यह भी बताया कि पुलिस ने महल इलाके में पथराव के बाद स्थिति को नियंत्रित कर लिया है और उन्होंने नागरिकों से प्रशासन के साथसहयोग करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने यह सुनिश्चित करने का वादा किया कि राज्य सरकार इस घटना की पूरी जांच करेगी और दोषियों केखिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।स्थिति की गंभीरता और प्रशासन की भूमिकाइस घटनाक्रम ने पूरे नागपुर शहर में तनाव का माहौल पैदा कर दिया। हालांकि, पुलिस की तत्परता और मुख्यमंत्री की अपील ने स्थिति को नियंत्रितकरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया और इलाके में गश्त बढ़ा दी।पुलिस और प्रशासन ने समय रहते अपनी कार्रवाई की और दंगाइयों को काबू में किया। इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल उठाया कि सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों और झूठी खबरों के कारण समाज में कैसे तनाव बढ़ सकता है। इसप्रकार के घटनाक्रम से यह साफ हो गया कि अफवाहों को फैलने से पहले नियंत्रण में लाना और पुलिस की तत्परता बेहद जरूरी है।भविष्य में ऐसे घटनाक्रमों से निपटने के उपायइस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन को और भी अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। सोशल मीडिया के माध्यम से फैली अफवाहोंपर कड़ी निगरानी रखनी चाहिए और ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही, धार्मिक भावनाओं से जुड़ी अफवाहों को रोकने के लिएआम जनता को जागरूक करने की आवश्यकता है। पुलिस प्रशासन को और भी सक्रिय रहते हुए नागरिकों को यह विश्वास दिलाना चाहिए कि उनके बीच शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए सभीआवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। इसके अलावा, धार्मिक और सांप्रदायिक मामलों में संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई करनी चाहिएताकि भविष्य में ऐसे तनावपूर्ण घटनाक्रमों से बचा जा सके।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने नशे के खिलाफ छेड़ा युद्ध: पंजाब को नशामुक्त बनाने की योजना

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्य में नशे के खिलाफ एक निर्णायक युद्ध छेड़ने का ऐलान किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार कालक्ष्य पंजाब को नशामुक्त बनाना है और इसके लिए उनके पास दो साल की एक ठोस योजना है। भगवंत मान ने यह भी बताया कि वह नशे कीगिरफ्त में आए युवाओं को अपराधी मानने की बजाय उन्हें मरीज समझते हैं, लेकिन नशे का व्यापार करने वाले नशा तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्रवाईकी जाएगी। नशे के खिलाफ शुरू किया गया युद्धपंजाब में नशे की समस्या एक गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है। राज्य के कई हिस्सों में नशे का कारोबार तेजी से फैल रहा है और इसका सबसे बड़ाशिकार राज्य के युवा वर्ग हो रहे हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस मुद्दे को लेकर अपनी सरकार की गंभीरता दिखाई है और कहा है कि यह युद्ध पंजाबको नशामुक्त बनाने के लिए है। भगवंत मान ने यह भी कहा कि उनकी सरकार नशे के मामले में कोई समझौता नहीं करेगी और राज्य में नशा करने वाले युवाओं को इलाज की सुविधाप्रदान करेगी, न कि उन्हें अपराधी मानकर दंडित करेगी। उनके अनुसार, यह जरूरी है कि नशे में लिप्त युवाओं का इलाज किया जाए, ताकि वे अपनीजिंदगी को बेहतर बना सकें। नशा तस्करों पर सख्त कार्रवाईहालांकि, मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि नशे के व्यापार में शामिल लोग, यानी नशा तस्कर, राज्य की सुरक्षा और समाज के लिए खतरा हैं। उनकेखिलाफ सरकार कड़ी कार्रवाई करेगी। भगवंत मान ने कहा कि “पीला पंजा” यानी बुलडोजर तस्करों के खिलाफ चलेगा, और उन्हें अपने अपराधों कापरिणाम भुगतना होगा। यह बयान उस समय दिया गया जब पंजाब सरकार ने नशा तस्करों और उनके नेटवर्क को तोड़ने के लिए पुलिस और अन्यएजेंसियों को सक्रिय किया है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आने वाले समय में नशे के कारोबार में शामिल बड़े अपराधियों के खिलाफ और सख्त कदम उठाए जाएंगे। उनकी सरकारन केवल छोटे तस्करों, बल्कि बड़े पैमाने पर नशे का व्यापार करने वाले लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई करेगी। इसके लिए राज्य सरकार ने सुरक्षा बलोंको और अधिक अधिकार दिए हैं ताकि तस्करों का पीछा किया जा सके और उन्हें पकड़ा जा सके। युवाओं को इलाज की सुविधाभगवंत मान ने यह भी बताया कि राज्य सरकार का उद्देश्य नशे में लिप्त युवाओं को सुधारना है, न कि उन्हें दंडित करना। उनके अनुसार, नशा करने वालेलोग अपराधी नहीं होते, बल्कि उन्हें मदद की आवश्यकता होती है। इस दिशा में सरकार ने युवाओं को नशे से छुटकारा दिलाने के लिए विशेष इलाजऔर पुनर्वास केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई है। इन केंद्रों में युवाओं को काउंसलिंग, चिकित्सा सहायता और मानसिक उपचार दिया जाएगाताकि वे नशे की आदत को छोड़ सकें और अपने जीवन को एक नई दिशा दे सकें। पंजाब में बढ़ते नशे के मामलेपंजाब में नशे की समस्या पिछले कुछ दशकों से बढ़ती जा रही है। राज्य के कई हिस्सों में ड्रग्स, शराब और अन्य मादक पदार्थों की बिक्री खुलेआम होरही है। नशे के प्रभाव से राज्य के युवा पीढ़ी का भविष्य प्रभावित हो रहा है, और इसका असर समाज के हर वर्ग पर पड़ रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत मानने इस समस्या को गंभीरता से लिया है और इसे राज्य की सबसे बड़ी प्राथमिकता बनाने का वादा किया है। सरकार का दो साल का रोडमैपभगवंत मान ने बताया कि उनकी सरकार के पास नशे के खिलाफ एक ठोस योजना है, जो अगले दो सालों में पूरी की जाएगी। इस योजना में न केवलनशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई शामिल होगी, बल्कि नशे के शिकार युवाओं के लिए पुनर्वास और चिकित्सा कार्यक्रम भी होंगे। इसके साथ ही, समाज में नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए अभियान चलाए जाएंगे ताकि लोग इस मुद्दे की गंभीरता को समझें और इससे बचने के उपायोंपर ध्यान केंद्रित करें।
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का बीजेपी पर हमला: NCLT और हेयरकट के मुद्दे पर सवाल उठाए

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधते हुए NCLT (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) के मामलों औरऋण समाधान में ‘हेयरकट’ की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए। सिंह ने इस मुद्दे पर भाजपा की नीतियों पर आलोचना की और बताया कि कैसेNCLT मामले में क्रेडिटर्स (ऋणदाता) की समिति (CoC) तब तक आदेश जारी नहीं करती जब तक हेयरकट की मंजूरी नहीं मिल जाती है। “हेयरकट” क्या है और यह कैसे काम करता है?“हेयरकट” एक वित्तीय शब्द है, जो तब प्रयोग में आता है जब किसी ऋण का एक हिस्सा माफ किया जाता है। यह तब होता है जब एक ऋणदातापूरी ऋण राशि वसूलने में सक्षम नहीं होता और वह ऋण के एक हिस्से को छोड़ने के लिए सहमति देता है। सामान्यत: यह स्थिति उस समय आती हैजब ऋण लेने वाली कंपनी वित्तीय संकट में होती है और पूरी राशि चुकता करने में असमर्थ होती है।NCLT मामलों में “हेयरकट” तब होता है जबऋणदाता (जैसे बैंक) यह मान लेते हैं कि वे पूरी राशि वापस नहीं पा सकते, और ऋण में कटौती करने का निर्णय लेते हैं। यह स्थिति आमतौर परकंपनियों के दिवालिया होने या ऋण न चुका पाने की स्थिति में उत्पन्न होती है। NCLT और क्रेडिटर्स की समिति (CoC) का रोलदिग्विजय सिंह ने अपने बयान में यह सवाल उठाया कि NCLT मामलों में क्रेडिटर्स की समिति (CoC) के पास एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है।उन्होंने कहा कि जब तक CoC हेयरकट को मंजूरी नहीं देता, तब तक NCLT कोई आदेश नहीं जारी कर सकता। इसका मतलब यह है कि CoC हीयह तय करता है कि ऋणदाता को कितनी राशि वसूल होगी और कितनी राशि माफ की जाएगी।सिंह ने यह भी कहा कि NCLT तब ही आदेश जारीकरता है जब क्रेडिटर्स की समिति हेयरकट पर सहमति दे देती है। इसका सीधा मतलब यह है कि इन मामलों में क्रेडिटर्स की समिति की मंजूरी के बिनाकोई भी निर्णय नहीं हो सकता। SBI को हुए नुकसान का उल्लेखदिग्विजय सिंह ने यह भी बताया कि भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को 65% लोन मामलों में हेयरकट के कारण नुकसान उठाना पड़ा है। उनका कहना थाकि इन मामलों में बैंक ने ऋण में कटौती स्वीकार की, जिसके परिणामस्वरूप बैंक को भारी नुकसान हुआ। सिंह ने यह भी उदाहरण दिया कि दो प्रमुखप्रकरणों में 96% हेयरकट हुआ है। इनमें एक मामला रेडियस एस्टेट्स का था और दूसरा वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज का। इन दोनों मामलों में लाभार्थीअडानी गुड होम्स थे। क्या हेयरकट की मंजूरी NCLT द्वारा दी जाती है?सिंह ने इस पूरे मुद्दे पर यह सवाल उठाया है कि क्या जितने लोन राइट ऑफ हुए हैं, उनमें हेयरकट भी शामिल है और क्या उन्हें NCLT ने मंजूरी दी है? यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इस प्रकार के मामलों में बैंक और अन्य ऋणदाता अपनी राशि की कटौती करने के बाद एक नए समझौते परसहमति बनाते हैं। उनका यह सवाल सीधे तौर पर NCLT की प्रक्रिया पर सवाल उठाता है। उनका कहना है कि क्या सभी हेयरकट मामलों की पूरी पारदर्शिता के साथजांच हो रही है और क्या ये निर्णय सही तरीके से लिए जा रहे हैं? दिग्विजय सिंह ने यह मामला उठाकर भाजपा की नीतियों और NCLT के कामकाज पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि सरकार और NCLT केनिर्णयों के परिणामस्वरूप कुछ बड़े उद्योगपतियों को फायदा पहुंचा है, जबकि बैंक और अन्य ऋणदाता भारी नुकसान उठाते हैं। उनका यह भी कहना हैकि सरकार को इन मामलों में पारदर्शिता और स्पष्टता लानी चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हेयरकट और लोन राइट ऑफ के निर्णयपूरी तरह से उचित और सही तरीके से किए गए हैं।यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे देश के आर्थिक तंत्र और बैंकिंग सिस्टम पर प्रभावपड़ता है। इस प्रकार के मामलों में पारदर्शिता, निष्पक्षता और स्पष्टता की आवश्यकता है, ताकि कोई भी बैंक और उसके ग्राहक इस प्रक्रिया सेप्रभावित न हों। सिंह का यह बयान भाजपा और NCLT के निर्णयों पर और भी सवाल खड़ा करता है, जो आने वाले समय में और भी बहस का कारणबन सकता है।