
नई दिल्ली, 1 नवंबर।
भारतीय जनता पार्टी ने सिख संगठनों के साथ मिलकर 1984 के सिख नरसंहार के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने और उन्हें न्याय दिलाने की मांग को लेकर हरि नगर में मौन विरोध मार्च निकाला। इसमें केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा, मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा, एच.एस. फुल्का, सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी, मंत्री आशीष सूद, अरविंदर सिंह लवली और विधायक श्याम शर्मा सहित भाजपा के वरिष्ठ नेता और हजारों की संख्या में सिख समाज के लोग शामिल हुए।
हरदीप सिंह पुरी ने कहा – 1984 में दिल्ली में 2,733 और देशभर में लगभग 3,325 लोगों की हत्या हुई
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि 1984 की हिंसा में दिल्ली में 2,733 और पूरे देश में लगभग 3,325 लोगों की जान गई थी। ये सरकारी आंकड़े हैं, जिन्हें सिख समाज हमेशा अधूरा मानता रहा है। उन्होंने कहा कि सिख परिवारों के घरों की पहचान पहले से की जा रही थी, जिससे साफ होता है कि यह अचानक हुई हिंसा नहीं थी। उन्होंने कहा कि 1984 की घटना को सामान्य दंगा कहना सही नहीं है, क्योंकि इसमें एकतरफा तरीके से सिख समाज को निशाना बनाया गया था। यह बेहद गंभीर नरसंहार और मानवता के विरुद्ध अपराध था। उन्होंने कहा कि 42 साल बाद भी पीड़ित परिवार न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं और इस घटना को कभी भुलाया नहीं जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा – क्या 1984 में लोकतंत्र की हत्या नहीं हुई थी?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि आज लोकतंत्र और संविधान की बात करने वालों से सिख समाज पूछ रहा है कि नवंबर 1984 में जो हुआ, क्या वह लोकतंत्र की हत्या नहीं थी? हजारों सिख परिवारों ने अपने परिजनों को खोया और आज भी अनेक परिवार न्याय का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और गांधी परिवार 1984 की घटनाओं की जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। इतने वर्षों बाद भी पीड़ित परिवारों को पूरा न्याय नहीं मिलना बेहद दुखद है। हरि नगर की यह पदयात्रा पीड़ित परिवारों की आवाज उठाने और उन्हें न्याय दिलाने के संकल्प का प्रतीक है।
हर्ष मल्होत्रा ने कहा – 1984 का नरसंहार कांग्रेस की सुनियोजित साजिश थी
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि 1984 में सिख समाज के साथ जो हुआ, वह कांग्रेस के शासनकाल में हुआ एक बेहद गंभीर नरसंहार था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कई नेताओं की भूमिका इस हिंसा में सामने आई थी और लगातार कई दिनों तक सिख परिवारों को निशाना बनाया गया। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि 1984 की बरसी पर राजनीतिक कार्यक्रम करके कांग्रेस पीड़ित परिवारों के पुराने जख्मों को फिर से हरा कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गठित एसआईटी के कारण कई दोषियों को सजा मिल सकी। दिल्ली सरकार ने भी पीड़ित परिवारों के लगभग 250 सदस्यों को नौकरी दी है और अब तीसरी पीढ़ी को भी नौकरी देने का निर्णय लिया है।
मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा – कांग्रेस ने दोषियों को सजा देने के बजाय बड़े पदों पर बैठाया
दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि 1984 में हजारों निर्दोष सिखों को उनके घरों से निकालकर बेरहमी से मार दिया गया। कांग्रेस ने जिन नेताओं पर इस नरसंहार में शामिल होने के आरोप लगे, उन्हें सजा दिलाने के बजाय बड़े राजनीतिक पदों पर बैठाया। उन्होंने सज्जन कुमार, जगदीश टाइटलर, एच.के.एल. भगत और धर्मदास शास्त्री जैसे नामों का उल्लेख करते हुए राहुल गांधी से सवाल किया कि कांग्रेस आज किस मुंह से न्याय की बात कर रही है? उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एसआईटी के माध्यम से पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की।
एच.एस. फुल्का ने कहा – 1984 की हिंसा के पीछे पहले से सुनियोजित साजिश थी
वरिष्ठ अधिवक्ता एच.एस. फुल्का ने कहा कि 1984 में सेवानिवृत्त सैनिकों और 51 सेवारत सैनिकों की बेरहमी से हत्या किया जाना बेहद गंभीर और दुखद था। उन्होंने कहा कि यह हिंसा अचानक नहीं हुई थी, बल्कि इसके पीछे पहले से तैयारी की गई थी और सिख परिवारों के घरों की सूचियां तैयार थीं। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए अभी और प्रयास करने की जरूरत है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि पीड़ित परिवारों की बाकी मांगों को भी पूरा किया जाए।
विक्रमजीत सिंह साहनी ने कहा – सिख पुनर्वास कॉलोनियों में रहने वाले गरीब परिवारों को मिले पूरा न्याय
राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ने कहा कि उनके अपने परिवार ने भी 1984 की हिंसा में कई सदस्यों को खोने का दर्द सहा है। उन्होंने कहा कि इतने वर्षों बाद भी पीड़ित परिवारों की समस्याएं पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से अपील की कि सिख पुनर्वास कॉलोनियों में रहने वाले आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को पूरा न्याय और जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।
आशीष सूद ने कहा – अराजकता फैलाने वाली सोच के खिलाफ एकजुट होना जरूरी
दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद ने कहा कि 1984 में जिस तरह अराजकता फैलाकर सिख समाज को निशाना बनाया गया, वह देश के इतिहास की बेहद दुखद घटना है। उन्होंने कहा कि ऐसी मानसिकता समाज और देश की एकता के लिए खतरनाक है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा और देश में शांति बनाए रखने के लिए सभी लोगों को एकजुट होना चाहिए। किसी भी तरह की हिंसा और अराजकता का विरोध करना जरूरी है।
अरविंदर सिंह लवली ने कहा – सिख समाज पर हमला पूरे देश पर हमला था
यमुना विकास बोर्ड के अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली ने कहा कि 1 नवंबर 1984 को दिल्ली सहित पूरे देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब हो गई थी। उस समय सिख समाज को निशाना बनाया गया और लोकतंत्र की मर्यादाओं को तार-तार किया गया। उन्होंने कहा कि देश की एकता और अखंडता में सिख समाज का बहुत बड़ा योगदान है। सिख समाज पर हुआ हमला केवल एक समुदाय पर हमला नहीं था, बल्कि पूरे देश पर हमला था। ऐसी घटनाओं को हमेशा याद रखना चाहिए।
श्याम शर्मा ने कहा – मौन विरोध मार्च के माध्यम से 1984 के पीड़ितों को दी सच्ची श्रद्धांजलि
हरि नगर के विधायक श्याम शर्मा ने कहा कि आज कांग्रेस ने राजनीतिक रैली करके सिख समाज के पुराने जख्मों को फिर से हरा किया है, जबकि भाजपा ने मौन विरोध मार्च निकालकर 1984 के पीड़ितों और शहीदों को श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने कहा कि भाजपा हमेशा पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है और उन्हें न्याय दिलाने के लिए लगातार आवाज उठाती रहेगी।