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नई दिल्ली, 8 अगस्त 2026।

दिल्ली में साइकिल खरीद को लेकर आम आदमी पार्टी ने रेखा गुप्ता सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने दावा किया है कि करीब 90 करोड़ रुपये की साइकिल खरीद में बड़े स्तर पर गड़बड़ी की गई है। उन्होंने कहा कि जिस कंपनी को साइकिल खरीद का टेंडर दिया गया है, वह खुद साइकिल नहीं बनाती है। इसके बावजूद उसे इतनी बड़ी संख्या में साइकिल खरीदने का काम दिया गया। सौरभ भारद्वाज ने इस पूरे मामले में सरकार से कई सवाल पूछे हैं और कहा है कि जनता के पैसे से होने वाली इतनी बड़ी खरीद में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए।

सौरभ भारद्वाज का आरोप- साइकिल बनाने वाली कंपनी को नहीं मिला टेंडर
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि साइकिल खरीद के टेंडर में हीरो और एवन जैसी बड़ी साइकिल निर्माता कंपनियों ने हिस्सा लिया था। ये कंपनियां लंबे समय से साइकिल बनाती और बेचती हैं। उनके मुताबिक, इसके अलावा माटा स्पोर्ट्स नाम की कंपनी ने भी टेंडर में हिस्सा लिया। सौरभ भारद्वाज का दावा है कि माटा स्पोर्ट्स खुद साइकिल नहीं बनाती है और इसके पास साइकिल बनाने वाली बड़ी कंपनियों जैसा अनुभव भी नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब साइकिल बनाने वाली बड़ी कंपनियां टेंडर में मौजूद थीं, तो ऐसी कंपनी को इतनी बड़ी खरीद का काम क्यों दिया गया?

1 लाख 30 हजार साइकिलों की खरीद का मामला
सौरभ भारद्वाज ने बताया कि यह मामला करीब 1 लाख 30 हजार साइकिलों की खरीद से जुड़ा है। इतनी बड़ी संख्या में साइकिलों की खरीद में सरकार के करोड़ों रुपये खर्च होने हैं। उन्होंने कहा कि जब सरकारी पैसे से इतनी बड़ी खरीद की जाती है, तो साइकिल का मॉडल, उसकी कीमत, गुणवत्ता और कंपनी की क्षमता की पूरी जांच होनी चाहिए। सौरभ भारद्वाज का आरोप है कि इस मामले में इन सवालों पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया।

7 हजार रुपये की साइकिल पर उठे सवाल
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि टेंडर में माटा स्पोर्ट्स ने हीरो स्काइलर 26टी मॉडल की साइकिल करीब 7 हजार रुपये में देने की बात कही थी। उन्होंने दावा किया कि बाद में इस मॉडल को लेकर ही सवाल खड़े हो गए। सौरभ भारद्वाज के अनुसार, हीरो कंपनी ने स्काइलर 26टी मॉडल का उत्पादन पहले ही बंद कर दिया था। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जब किसी मॉडल का उत्पादन बंद हो चुका था, तो उसी मॉडल के नाम पर साइकिल खरीदने का फैसला कैसे किया गया।

4 हजार की साइकिल को 7 हजार में देने का आरोप
सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि स्काइलर 26टी मॉडल की जगह हीरो बोनफायर मॉडल की साइकिल दी जा रही है। उनका दावा है कि बोनफायर मॉडल की कीमत बाजार में करीब 4 हजार रुपये है, जबकि सरकार को इसे करीब 7 हजार रुपये की कीमत पर दिया जा रहा है। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि अगर यह अंतर सही है, तो एक साइकिल पर करीब 3 हजार रुपये का अंतर बनता है। 1 लाख 30 हजार साइकिलों की खरीद में यह अंतर बहुत बड़ी रकम बन सकता है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि वह बताए कि आखिर साइकिल का वास्तविक मॉडल और उसकी वास्तविक कीमत क्या है।

हीरो और एवन जैसी कंपनियों को लेकर सवाल
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि टेंडर में हीरो और एवन जैसी कंपनियां शामिल थीं। दोनों कंपनियां साइकिल बनाने के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने सवाल किया कि जो कंपनी खुद साइकिल बनाती है, उसकी तुलना में एक छोटी कंपनी कम कीमत में वही साइकिल देने का दावा कैसे कर सकती है। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि सरकार को टेंडर की पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक करनी चाहिए और यह बताना चाहिए कि किस आधार पर माटा स्पोर्ट्स को सबसे योग्य कंपनी माना गया।

वर्क ऑर्डर में भी गड़बड़ी का आरोप
सौरभ भारद्वाज ने वर्क ऑर्डर को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि माटा स्पोर्ट्स को दिए गए वर्क ऑर्डर में हीरो स्काइलर 26टी मॉडल की साइकिल देने की बात लिखी गई है। लेकिन उनके अनुसार, बाजार में उपलब्ध साइकिल और वर्क ऑर्डर में बताए गए मॉडल को लेकर अंतर दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह साफ करना चाहिए कि टेंडर में जिस मॉडल को तय किया गया था, क्या वास्तव में वही साइकिल सरकार को दी जा रही है।

HSN कोड नहीं होने पर भी सवाल
सौरभ भारद्वाज ने वर्क ऑर्डर में HSN कोड नहीं होने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि सामान की पहचान और खरीद से जुड़े दस्तावेजों में HSN कोड महत्वपूर्ण होता है। उनका आरोप है कि इस वर्क ऑर्डर में HSN कोड से जुड़ी जानकारी स्पष्ट नहीं है। सौरभ भारद्वाज ने सवाल किया कि अगर यह सरकारी खरीद है, तो सभी जरूरी जानकारियां दस्तावेजों में साफ-साफ क्यों नहीं दी गईं।

सरकारी पैसे के इस्तेमाल पर उठाए सवाल
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि यह पूरा मामला सरकारी पैसे से जुड़ा हुआ है। अगर साइकिल की कीमत में बड़ा अंतर है, तो इसका सीधा असर जनता के पैसों पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि एक साइकिल की वास्तविक कीमत कितनी है और सरकार इसके लिए कितनी रकम दे रही है। सौरभ भारद्वाज ने इस मामले की जांच की मांग करते हुए कहा कि खरीद प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और मंत्री आशीष सूद से जवाब की मांग
सौरभ भारद्वाज ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और मंत्री आशीष सूद से भी इस मामले पर जवाब देने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को चुप रहने के बजाय जनता के सामने पूरी जानकारी रखनी चाहिए। सौरभ भारद्वाज के मुताबिक, इतने बड़े टेंडर से जुड़े सवालों का जवाब देना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जनता जानना चाहती है कि टेंडर किस आधार पर दिया गया और साइकिलों की कीमत कैसे तय की गई।

आम आदमी पार्टी ने मामला आगे भी उठाने की बात कही
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को आगे भी लगातार उठाएगी। उन्होंने कहा कि पार्टी दिल्ली की जनता के सामने इस खरीद से जुड़े सभी सवाल रखेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के करोड़ों रुपये की खरीद में पारदर्शिता जरूरी है और किसी भी तरह की गड़बड़ी को छिपाया नहीं जाना चाहिए।

सरकार के जवाब से साफ होगी पूरी तस्वीर
साइकिल खरीद को लेकर आम आदमी पार्टी की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद अब दिल्ली सरकार और संबंधित कंपनी के जवाब का इंतजार है। सरकार की ओर से टेंडर, वर्क ऑर्डर, साइकिल के मॉडल और कीमत से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, 1 लाख 30 हजार साइकिलों की खरीद और करीब 90 करोड़ रुपये के खर्च को लेकर सौरभ भारद्वाज के आरोपों ने दिल्ली की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। आम आदमी पार्टी इसे सरकारी खरीद में कथित गड़बड़ी का मामला बता रही है, जबकि मामले में सरकार का पक्ष सामने आना बाकी है।

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