
नई दिल्ली, 2 अगस्त 2026।
दिल्ली में छात्राओं को बांटी गई साइकिलों की खरीद को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। आम आदमी पार्टी (आप) ने दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार पर साइकिल खरीद में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाया है। पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने प्रेस वार्ता में कहा कि दवा खरीद के बाद अब साइकिल खरीद में भी सरकार ने करोड़ों रुपये का घोटाला किया है। उन्होंने दावा किया कि पूरी टेंडर प्रक्रिया पहले से तय थी और नियम इस तरह बनाए गए कि केवल कुछ चुनिंदा कंपनियों को ही फायदा मिल सके।
सौरभ भारद्वाज ने कहा- साइकिल खरीद में हुआ 90 करोड़ रुपये का घोटाला
प्रेस वार्ता के दौरान सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली सरकार ने लगभग 1 लाख 30 हजार साइकिलें खरीदने के लिए टेंडर जारी किया। उनका आरोप है कि जिस साइकिल की बाजार में कीमत करीब 4,100 रुपये है, उसी साइकिल की कीमत टेंडर में 6,923 रुपये तय की गई। उन्होंने कहा कि इससे सरकार ने जरूरत से कहीं ज्यादा पैसे खर्च किए और सरकारी धन का सही उपयोग नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार बाजार कीमत पर साइकिल खरीदती तो करोड़ों रुपये की बचत हो सकती थी। लेकिन ऐसा नहीं किया गया और अधिक कीमत पर खरीदारी की गई।
दवा खरीद की तरह पहले से तय किया गया टेंडर- सौरभ भारद्वाज
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि जिस तरह पहले दवा खरीद के मामले में टेंडर को लेकर सवाल उठे थे, उसी तरह इस मामले में भी पहले से तय कर लिया गया था कि टेंडर किस कंपनी को दिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि उसी के अनुसार टेंडर की शर्तें तैयार की गईं। उन्होंने कहा कि सरकार ने ऐसे नियम बनाए जिनके कारण कई अच्छी और अनुभवी कंपनियां टेंडर में हिस्सा ही नहीं ले सकीं। इससे प्रतिस्पर्धा कम हो गई और कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाने का रास्ता तैयार किया गया।
360 करोड़ रुपये का टर्नओवर मांगने पर उठाए सवाल
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि सरकार ने टेंडर में भाग लेने वाली कंपनियों के लिए 360 करोड़ रुपये का टर्नओवर अनिवार्य कर दिया। उनका कहना है कि 1.30 लाख साइकिलों की खरीद के लिए इतनी बड़ी शर्त की कोई जरूरत नहीं थी। उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार इस तरह के टेंडर में लगभग 180 करोड़ रुपये का टर्नओवर पर्याप्त माना जाता है। लेकिन जानबूझकर इसे दोगुना कर दिया गया ताकि केवल कुछ बड़ी कंपनियां ही टेंडर में शामिल हो सकें।
सबसे नए वित्तीय वर्ष को टेंडर से बाहर रखा गया
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि किसी भी सरकारी टेंडर में सामान्य रूप से पिछले तीन वित्तीय वर्षों का रिकॉर्ड देखा जाता है। लेकिन इस टेंडर में सबसे हाल का वित्तीय वर्ष शामिल नहीं किया गया। उनका आरोप है कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि वे कंपनियां बाहर हो जाएं जो कम कीमत पर अच्छी गुणवत्ता वाली साइकिलें उपलब्ध कराने के लिए तैयार थीं।
प्री-बिड मीटिंग नहीं कराई गई
सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि सरकार ने इस टेंडर में प्री-बिड मीटिंग भी नहीं कराई। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े सरकारी टेंडर में यह बैठक बहुत महत्वपूर्ण होती है क्योंकि इसमें कंपनियां अपनी आपत्तियां और सुझाव सरकार के सामने रखती हैं। उन्होंने कहा कि कई कंपनियां 4,100 रुपये में साइकिल देने के लिए तैयार थीं, लेकिन सरकार ने उन्हें न तो बैठक में बुलाया और न ही उनकी बात सुनी।
कई कंपनियों ने की शिकायत
सौरभ भारद्वाज ने बताया कि एसके बाइक्स सहित कई साइकिल बनाने और बेचने वाली कंपनियों ने इस मामले की शिकायत उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री, विजिलेंस और अन्य संबंधित विभागों से की है। उन्होंने कहा कि इन शिकायतों में साफ लिखा गया है कि टेंडर की शर्तें निष्पक्ष नहीं थीं और कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई गई थीं। लेकिन अब तक किसी भी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
दूसरे राज्यों के टेंडर का भी दिया उदाहरण
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि शिकायत करने वाली कंपनियों ने राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और असम जैसे राज्यों के टेंडरों का भी उदाहरण दिया है।
उन्होंने बताया कि राजस्थान में लाखों साइकिलों की खरीद के बावजूद टर्नओवर की शर्त कम रखी गई। छत्तीसगढ़ में भी कम टर्नओवर वाली कंपनियों को मौका दिया गया। लेकिन दिल्ली सरकार ने कम संख्या में साइकिल खरीदने के बावजूद टर्नओवर की सीमा बहुत ज्यादा रखी। उनका कहना है कि इससे साफ दिखाई देता है कि नियम सामान्य प्रक्रिया के अनुसार नहीं बनाए गए।
36 करोड़ रुपये की कमीशनखोरी का भी आरोप
सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि उन्हें जानकारी मिली है कि सरकार ने साइकिलों की खरीद लगभग 6,957 रुपये प्रति साइकिल की दर से की है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति दिल्ली के होलसेल बाजार में जाए तो इसी तरह की साइकिल करीब 4,500 रुपये में मिल सकती है। शिकायत करने वाली कंपनियों का दावा है कि पूरे टेंडर में लगभग 36 करोड़ रुपये की कमीशनखोरी हुई है।
सरकार से पूछे कई सवाल
सौरभ भारद्वाज ने सरकार से पूछा कि यदि बाजार में सस्ती कीमत पर अच्छी गुणवत्ता वाली साइकिल उपलब्ध थी तो उसे क्यों नहीं खरीदा गया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि टेंडर की शर्तें इतनी सख्त क्यों रखी गईं और प्री-बिड मीटिंग क्यों नहीं कराई गई। उन्होंने कहा कि सरकार को इन सभी सवालों का जवाब जनता के सामने देना चाहिए।
निष्पक्ष जांच की मांग
सौरभ भारद्वाज ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी अधिकारी या कंपनी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि छात्राओं के लिए चलाई जाने वाली योजनाएं समाज के हित में होती हैं। इसलिए इन योजनाओं में पूरी पारदर्शिता और ईमानदारी जरूरी है। अगर सरकारी धन का गलत इस्तेमाल हुआ है तो इसकी सच्चाई सामने आनी चाहिए और दोषियों को कानून के अनुसार सजा मिलनी चाहिए। आम आदमी पार्टी ने कहा कि वह इस मुद्दे को जनता के बीच भी उठाएगी और सरकार से पूरे मामले में जवाब मांगेगी।