
15 नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनेंगे, लाखों लोगों को मिलेगा लाभ
नई दिल्ली, 29 जुलाई।
दिल्ली सरकार ने यमुना नदी को साफ और प्रदूषणमुक्त बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली जल बोर्ड की 179वीं बैठक में लगभग ₹4,500 करोड़ की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। इन परियोजनाओं में 15 नए विकेन्द्रीकृत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (DSTPs) बनाना, सीवर नेटवर्क का विस्तार करना, पुराने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों का आधुनिकीकरण, स्लज प्रबंधन की नई सुविधाएं विकसित करना और कई नालों का इन-सीटू ट्रीटमेंट करना शामिल है। इन सभी योजनाओं का मुख्य उद्देश्य यह है कि बिना उपचारित गंदा पानी यमुना नदी में न पहुंचे और नदी को स्वच्छ बनाया जा सके।
जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने बताया सरकार का लक्ष्य
दिल्ली के जल मंत्री एवं दिल्ली जल बोर्ड के अध्यक्ष प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि सरकार यमुना की सफाई के लिए केवल वादे नहीं कर रही, बल्कि मजबूत बुनियादी ढांचा तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि जब तक शहर में निकलने वाली हर बूंद सीवेज का उपचार नहीं होगा, तब तक यमुना को पूरी तरह साफ नहीं किया जा सकता। इसलिए सरकार एक ऐसी व्यवस्था तैयार कर रही है, जिससे हर घर और हर इलाके का गंदा पानी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचे और उसका वैज्ञानिक तरीके से उपचार हो।
अब दिल्ली में कुल 28 विकेन्द्रीकृत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट होंगे
प्रवेश साहिब सिंह ने बताया कि इससे पहले 13 DSTPs को मंजूरी दी जा चुकी थी। अब 15 नए प्लांटों की स्वीकृति मिलने के बाद दिल्ली में ऐसे प्लांटों की कुल संख्या 28 हो जाएगी। उन्होंने कहा कि यह दिल्ली के इतिहास में सीवेज प्रबंधन को मजबूत बनाने की सबसे बड़ी पहलों में से एक है। इन प्लांटों के बनने से राजधानी में गंदे पानी के उपचार की क्षमता में बड़ा सुधार होगा।
सीवेज शोधन क्षमता पहली बार जरूरत से अधिक होगी
प्रवेश साहिब सिंह ने बताया कि वर्तमान में दिल्ली में हर दिन लगभग 1,000 एमजीडी सीवेज निकलता है। जब मौजूदा सरकार ने काम संभाला था, तब सीवेज शोधन की क्षमता केवल 749 एमजीडी थी। सरकार ने पुराने प्लांटों के उन्नयन के बाद इसे बढ़ाकर 814 एमजीडी कर दिया है। अब सभी 28 DSTPs के तैयार होने के बाद कुल क्षमता 1,041 एमजीडी हो जाएगी। उन्होंने कहा कि यह पहली बार होगा जब दिल्ली की सीवेज शोधन क्षमता, शहर में निकलने वाले कुल सीवेज से भी अधिक होगी। इससे यमुना में बिना उपचारित पानी जाने की समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।
करीब 20 लाख लोगों को मिलेगा सीधा फायदा
जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने बताया कि 15 नए DSTPs लगभग ₹2,000 करोड़ की लागत से बनाए जाएंगे। इनकी कुल क्षमता 103.5 एमजीडी होगी और इससे लगभग 20 लाख लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं का सबसे अधिक लाभ उन इलाकों को मिलेगा, जहां आज भी सीवर नेटवर्क नहीं है या अधूरा है। इन क्षेत्रों का गंदा पानी अब सीधे नालों में जाने के बजाय सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचेगा।
244 कॉलोनियों और 57 गांवों तक पहुंचेगा नया सीवर नेटवर्क
प्रवेश साहिब सिंह ने जानकारी दी कि लगभग 989 किलोमीटर लंबा नया सीवर नेटवर्क तैयार किया जाएगा। इस परियोजना पर करीब ₹1,600 करोड़ खर्च किए जाएंगे। इसके माध्यम से 244 कॉलोनियों और 57 गांवों के लाखों घरों को सीवर नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इससे लोगों को बेहतर सीवर सुविधा मिलेगी और यमुना में गंदे पानी का प्रवाह कम होगा।
21 महीने में पूरे होंगे सभी नए प्रोजेक्ट
जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि सरकार ने सभी 15 नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों को 21 महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। उन्होंने बताया कि भूमि चिन्हांकन, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर), डिजाइन, निविदा प्रक्रिया और परियोजनाओं के आवंटन जैसे सभी महत्वपूर्ण काम बहुत कम समय में पूरे कर लिए गए हैं। अब निर्माण कार्य भी तेजी से शुरू किया जाएगा।
पुराने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों का भी होगा आधुनिकीकरण
प्रवेश साहिब सिंह ने बताया कि सरकार केवल नए प्लांट नहीं बना रही, बल्कि पुराने प्लांटों को भी आधुनिक बनाया जा रहा है। मौजूदा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों की क्षमता 66 एमजीडी से बढ़ाकर 86.8 एमजीडी की जाएगी। इसके अलावा लगभग ₹918 करोड़ की लागत से 35 एमजीडी क्षमता का नया सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी बनाया जाएगा।
स्लज प्रबंधन और ड्रेनों की सफाई पर भी रहेगा विशेष ध्यान
जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने बताया कि कोरोनेशन पिलर, केशोपुर, रिठाला, नरेला और रोहिणी स्थित 10 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों में आधुनिक स्लज प्रबंधन सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इस परियोजना पर लगभग ₹274 करोड़ खर्च किए जाएंगे। वहीं दिल्ली गेट ड्रेन के इन-सीटू ट्रीटमेंट के लिए ₹65 करोड़ की परियोजना को भी मंजूरी दी गई है। इससे यमुना में पहुंचने वाले पानी की गुणवत्ता में सुधार होगा।
प्लांटों के कामकाज पर रहेगी सख्त निगरानी
प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि अब सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों में परफॉर्मेंस आधारित मॉनिटरिंग प्रणाली लागू की जाएगी। इसके तहत प्लांट संचालकों को भुगतान तभी किया जाएगा, जब उपचारित पानी निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार होगा। इससे सभी संयंत्र बेहतर तरीके से काम करेंगे और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।
यमुना को स्वच्छ बनाना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल
अंत में जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि यमुना की सफाई केवल एक योजना नहीं, बल्कि दिल्ली के भविष्य से जुड़ा एक बड़ा अभियान है। उन्होंने कहा कि हर घर को सीवर नेटवर्क से जोड़ना, हर बूंद सीवेज का उपचार करना और आधुनिक तकनीक के माध्यम से मजबूत सीवेज व्यवस्था तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद यमुना पहले की तुलना में अधिक स्वच्छ होगी और दिल्ली के लोगों को बेहतर पर्यावरण और आधुनिक सीवर सुविधाओं का लाभ मिलेगा।