
43 परियोजनाओं के शिलान्यास को बताया प्रचार का हिस्सा, बोले—यमुना की सफाई के लिए घोषणाएं नहीं, जमीन पर काम दिखाए सरकार
नई दिल्ली, 22 अक्टूबर 2026।
दिल्ली में यमुना नदी की सफाई को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने भाजपा की दिल्ली सरकार पर यमुना पुनरुद्धार के नाम पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा 8,941 करोड़ रुपये की 43 परियोजनाओं का शिलान्यास किए जाने के बावजूद यमुना की सफाई को लेकर ठोस परिणाम दिखाई नहीं दे रहे हैं। देवेंद्र यादव के अनुसार, इन परियोजनाओं में 29 विकेंद्रीकृत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (डीएसटीपी) और सीवेज पंपिंग स्टेशन से जुड़े कार्य शामिल हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब 29 में से 27 डीएसटीपी के लिए अप्रैल 2025 में ही फंड की मंजूरी मिल चुकी थी, तो अब इन परियोजनाओं को बड़े कार्यक्रम के रूप में पेश करने की जरूरत क्यों पड़ी? कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि दिल्ली की जनता को बड़ी घोषणाओं और विज्ञापनों के बजाय यमुना की सफाई के वास्तविक परिणाम चाहिए। उन्होंने सरकार से नदी में गिरने वाले गंदे पानी को रोकने और सीवर व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
43 परियोजनाओं और 8,941 करोड़ रुपये के खर्च पर उठाए सवाल
देवेंद्र यादव ने कहा कि भाजपा सरकार यमुना की सफाई के लिए बड़ी-बड़ी योजनाओं और करोड़ों रुपये के बजट की घोषणा कर रही है, लेकिन नदी की स्थिति में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। उनका आरोप है कि 43 परियोजनाओं की शुरुआत को बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश किया जा रहा है, जबकि कई कार्य अभी अधूरे हैं। उन्होंने कहा कि यमुना की सफाई के लिए केवल शिलान्यास और घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं। सरकार को यह भी बताना चाहिए कि परियोजनाओं का काम कब पूरा होगा और इससे नदी में प्रदूषण कितना कम होगा। देवेंद्र यादव ने कहा कि यमुना में प्रदूषण की समस्या वर्षों से बनी हुई है। इसके समाधान के लिए नालों के गंदे पानी को साफ करना, सीवर नेटवर्क का विस्तार करना और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को सही तरीके से चलाना जरूरी है।
12 वर्षों में नई सीवर और पानी की पाइपलाइन बिछाने में विफलता का आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने केंद्र की भाजपा सरकार, दिल्ली की पिछली आम आदमी पार्टी सरकार और मौजूदा भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में दिल्ली में नई सीवर और पानी की पाइपलाइन बिछाने के काम को पर्याप्त गति नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि दिल्ली की बढ़ती आबादी और नए विकसित हो रहे इलाकों की जरूरतों को देखते हुए सीवर व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है। यदि सीवर नेटवर्क पर्याप्त नहीं होगा, तो गंदे पानी को उचित तरीके से ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाना मुश्किल होगा। देवेंद्र यादव के मुताबिक, यमुना की सफाई का लक्ष्य तभी पूरा हो सकता है, जब दिल्ली के घरों, कॉलोनियों और गांवों से निकलने वाले गंदे पानी को व्यवस्थित तरीके से सीवर नेटवर्क से जोड़ा जाए और उसका उपचार किया जाए।
22 नालों का गंदा पानी यमुना में गिरने का मुद्दा उठाया
देवेंद्र यादव ने कहा कि यमुना की सफाई के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाना जरूरी है, लेकिन इसके साथ उन नालों को भी रोकना होगा, जिनका अनुपचारित गंदा पानी सीधे नदी में पहुंचता है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली के 22 नालों से गंदा पानी यमुना में गिरने की समस्या का प्रभावी समाधान अभी तक नहीं किया गया है। उनके अनुसार, जब तक नालों के पानी को साफ करने की व्यवस्था नहीं होगी, तब तक केवल नए एसटीपी बनाने से यमुना को पूरी तरह साफ करना मुश्किल होगा। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि जनता को विज्ञापनों और भाषणों के माध्यम से यह बताना पर्याप्त नहीं है कि यमुना की सफाई के लिए काम हो रहा है। सरकार को प्रदूषण कम होने के ठोस आंकड़े और परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी भी सार्वजनिक करनी चाहिए।
डेयरियों से निकलने वाले गोबर को लेकर अमित शाह के बयान पर सवाल
देवेंद्र यादव ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के उस बयान पर भी सवाल उठाए, जिसमें पिछले 30 वर्षों से डेयरियों का गोबर यमुना में डाले जाने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि वर्ष 1993 से 1998 के बीच दिल्ली में भाजपा की सरकार रही थी और वर्ष 2007 से नगर निगम में भी लंबे समय तक भाजपा का शासन रहा। ऐसे में भाजपा को बताना चाहिए कि यदि इतने वर्षों से डेयरियों का गोबर यमुना में डाला जा रहा था, तो इसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए? देवेंद्र यादव ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से भी इस मुद्दे पर जवाब मांगा। उन्होंने गोबर की मात्रा को लेकर किए गए दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस विषय पर वास्तविक आंकड़ों के आधार पर जानकारी दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यमुना में प्रदूषण के लिए जिम्मेदार सभी स्रोतों की पहचान करना और उन्हें नियंत्रित करना जरूरी है। इसमें डेयरियों से निकलने वाला पशु अपशिष्ट, घरेलू सीवेज और औद्योगिक गंदे पानी जैसे स्रोतों की उचित जांच और निगरानी होनी चाहिए।
हरित बजट में 6,485 करोड़ रुपये के प्रावधान पर भी सवाल
देवेंद्र यादव ने दिल्ली सरकार के वर्ष 2026-27 के हरित बजट का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने 22,236 करोड़ रुपये के हरित बजट में से 6,485 करोड़ रुपये दिल्ली जल बोर्ड के लिए निर्धारित किए हैं। उनके अनुसार, इस राशि का इस्तेमाल नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने, मौजूदा प्लांट को बेहतर करने, प्रमुख नालों के गंदे पानी को रोकने और नदी के किनारे के क्षेत्रों में सुधार करने जैसे कार्यों के लिए किया जाना है। कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि इन योजनाओं को लेकर घोषणाएं तो की गई हैं, लेकिन उनके क्रियान्वयन की स्थिति स्पष्ट नहीं है। उन्होंने सरकार से पूछा कि बजट में निर्धारित राशि के तहत अब तक कितने काम शुरू हुए हैं और कितनी परियोजनाएं पूरी की गई हैं। देवेंद्र यादव ने कहा कि बजट में राशि आवंटित करना एक शुरुआती कदम है। इसका वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब उस राशि का सही उपयोग हो और परियोजनाओं के परिणाम जनता के सामने आएं।
चंद्रावल जल शोधन संयंत्र और अन्य परियोजनाओं पर मांगा जवाब
देवेंद्र यादव ने चंद्रावल जल शोधन संयंत्र, 358 अनधिकृत कॉलोनियों और 113 गांवों में एसटीपी तथा सीवेज पंपिंग स्टेशन से जुड़ी योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सवाल किया कि जब इन योजनाओं की घोषणा पहले की जा चुकी थी, तो उन्हें यमुना पुनरुद्धार कार्यक्रम में दोबारा शामिल करने की जरूरत क्यों पड़ी? उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि पहले घोषित की गई परियोजनाओं पर कितना काम हुआ है और उनके पूरा होने की समय-सीमा क्या है। देवेंद्र यादव के अनुसार, दिल्ली में कई इलाकों को सीवर नेटवर्क से जोड़ना और गंदे पानी के उपचार की उचित व्यवस्था करना जरूरी है। गांवों और अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को भी बेहतर सीवर व्यवस्था उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि गंदा पानी खुले नालों के माध्यम से नदी तक न पहुंचे।
यमुना रिवर फ्रंट योजना को लेकर भी जताई चिंता
देवेंद्र यादव ने दिल्ली में लगभग 52 किलोमीटर लंबे यमुना रिवर फ्रंट की योजना को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यमुना के किनारे विकास कार्य करने से पहले नदी की वास्तविक स्थिति और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों को ध्यान में रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यमुना की सफाई केवल नदी के किनारे हरित क्षेत्र विकसित करने या सार्वजनिक सुविधाएं बनाने से नहीं होगी। इसके लिए नदी में प्रदूषण के स्रोतों को नियंत्रित करना और पानी की गुणवत्ता में सुधार करना सबसे जरूरी है। देवेंद्र यादव ने यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क जैसी परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि नदी के आसपास विकास करते समय जैव विविधता, हरित क्षेत्रों और प्राकृतिक जल व्यवस्था की रक्षा की जानी चाहिए।
साबरमती मॉडल की तर्ज पर यमुना को विकसित करने पर सवाल
देवेंद्र यादव ने यमुना को साबरमती नदी की तर्ज पर विकसित करने संबंधी भाजपा सरकार के विचार पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यमुना और साबरमती की भौगोलिक तथा पर्यावरणीय परिस्थितियां अलग-अलग हैं, इसलिए किसी भी मॉडल को अपनाने से पहले स्थानीय परिस्थितियों का अध्ययन करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यमुना की सफाई के लिए ऐसा मॉडल अपनाया जाना चाहिए, जो नदी के प्राकृतिक प्रवाह, पर्यावरण और जैव विविधता की रक्षा करे। देवेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार यमुना की सफाई को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन नए और संशोधित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से जुड़ी परियोजनाओं को पूरा करने में पर्याप्त प्रगति नहीं हुई है।
अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने की मांग
कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने कहा कि यमुना पुनरुद्धार से जुड़ी जिन 43 परियोजनाओं को लेकर कार्यक्रम आयोजित किया गया, उनमें कई कार्य अभी अधूरे बताए जा रहे हैं। उन्होंने सरकार से सभी परियोजनाओं की मौजूदा स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उनके अनुसार, सरकार को यह जानकारी देनी चाहिए कि किन परियोजनाओं पर काम शुरू हो चुका है, कितने कार्य पूरे हो गए हैं और किन योजनाओं को पूरा होने में अभी समय लगेगा। उन्होंने कहा कि यमुना की सफाई के लिए सीवर नेटवर्क को मजबूत करना, नालों के गंदे पानी का उपचार करना, एसटीपी की क्षमता बढ़ाना और डेयरियों से निकलने वाले अपशिष्ट का उचित प्रबंधन करना जरूरी है।
यमुना की सफाई पर कांग्रेस ने सरकार से मांगा जवाब
देवेंद्र यादव ने भाजपा की दिल्ली सरकार से यमुना पुनरुद्धार परियोजनाओं की प्रगति पर विस्तृत जानकारी देने की मांग की। उन्होंने कहा कि दिल्ली के लोगों को स्वच्छ नदी, बेहतर सीवर व्यवस्था और साफ पर्यावरण मिलना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार यमुना की सफाई को लेकर घोषणाओं और प्रचार पर अधिक ध्यान दे रही है, जबकि प्रदूषण कम करने के लिए जमीनी स्तर पर प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। देवेंद्र यादव ने कहा कि यमुना दिल्ली की जीवनरेखा है और इसकी सफाई केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि पर्यावरण तथा जनस्वास्थ्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। इसलिए सरकार को सभी संबंधित विभागों के साथ मिलकर प्रदूषण के स्रोतों को रोकने और परियोजनाओं को समय पर पूरा करने पर ध्यान देना चाहिए।