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मृत और निलंबित जेई का ट्रांसफर होने पर आम आदमी पार्टी ने भाजपा शासित एमसीडी पर साधा निशाना
दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) में जारी एक ट्रांसफर आदेश को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि भाजपा शासित एमसीडी ने एक ऐसे कर्मचारी का भी तबादला कर दिया जिसकी कई महीने पहले मृत्यु हो चुकी है। इसके अलावा एक निलंबित कर्मचारी का नाम भी ट्रांसफर सूची में शामिल किया गया है। इस मामले को लेकर आम आदमी पार्टी ने एमसीडी की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एमसीडी में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने कहा कि यह घटना भाजपा शासित एमसीडी की लापरवाही और अव्यवस्था को उजागर करती है। उन्होंने कहा कि यदि निगम को अपने कर्मचारियों की वर्तमान स्थिति तक की जानकारी नहीं है तो इससे प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

अंकुश नारंग ने कहा- सात महीने पहले मृत कर्मचारी का कर दिया ट्रांसफर
अंकुश नारंग ने बताया कि एमसीडी की ओर से जारी ट्रांसफर सूची में जूनियर इंजीनियर (जेई) अपूर्व भटनागर का नाम शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि अपूर्व भटनागर का लगभग सात महीने पहले निधन हो चुका है, इसके बावजूद उनका तबादला कर दिया गया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक गलती नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण है। किसी कर्मचारी की मृत्यु के कई महीने बाद उसका ट्रांसफर आदेश जारी होना यह दिखाता है कि संबंधित विभाग में रिकॉर्ड और सत्यापन की प्रक्रिया कितनी कमजोर है।

निलंबित अधिकारी का नाम भी ट्रांसफर सूची में शामिल
अंकुश नारंग ने कहा कि ट्रांसफर सूची में केवल मृत कर्मचारी का ही नहीं बल्कि एक निलंबित अधिकारी का नाम भी शामिल किया गया है। उन्होंने बताया कि जेई सिविल अतुल कुमार सुमन पिछले लगभग नौ महीने से निलंबित हैं, लेकिन इसके बावजूद उनका नाम भी ट्रांसफर आदेश में डाल दिया गया। उन्होंने कहा कि यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब कोई कर्मचारी निलंबित है तो उसका तबादला कैसे किया जा सकता है। इससे साफ पता चलता है कि ट्रांसफर सूची तैयार करते समय जरूरी जांच और सत्यापन नहीं किया गया।

ट्रांसफर आदेश की जांच की मांग
अंकुश नारंग ने मांग की कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि मृत और निलंबित कर्मचारियों के नाम सूची में किस अधिकारी ने शामिल किए। उन्होंने कहा कि जो अधिकारी इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की गलतियां दोबारा न हों।

एमसीडी की कार्यशैली पर उठे सवाल
अंकुश नारंग ने कहा कि इस घटना से यह सवाल खड़ा होता है कि क्या एमसीडी में बिना किसी जांच और सत्यापन के फाइलों पर हस्ताक्षर किए जा रहे हैं। उन्होंने पूछा कि क्या संबंधित अधिकारियों को अपने विभाग के कर्मचारियों की स्थिति की जानकारी भी नहीं है। उन्होंने कहा कि जब मृत और निलंबित कर्मचारियों के तबादले किए जा रहे हों तो इससे प्रशासनिक व्यवस्था की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। यह केवल एक तकनीकी गलती नहीं बल्कि व्यवस्था की गंभीर कमजोरी को दर्शाता है।

एडिशनल डिप्टी कमिश्नर के हस्ताक्षर पर भी उठाए सवाल
अंकुश नारंग ने बताया कि यह ट्रांसफर आदेश 5 जून 2026 को जारी किया गया था। इस आदेश पर इंजीनियरिंग विभाग के एडिशनल डिप्टी कमिश्नर के हस्ताक्षर भी मौजूद हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि आदेश जारी करने से पहले सूची की जांच की गई होती तो ऐसी स्थिति नहीं बनती। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों को इस मामले में जवाब देना चाहिए कि आखिर इतनी बड़ी चूक कैसे हुई।

डिजिटल सत्यापन प्रणाली लागू करने की मांग
आम आदमी पार्टी ने केवल जांच की मांग ही नहीं की बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नई व्यवस्था लागू करने की भी मांग की है। अंकुश नारंग ने कहा कि एमसीडी को डिजिटल सत्यापन प्रणाली शुरू करनी चाहिए। इसके तहत किसी भी ट्रांसफर, पदोन्नति या प्रशासनिक आदेश को जारी करने से पहले कर्मचारियों की वर्तमान स्थिति की ऑनलाइन जांच की जाए। इससे इस प्रकार की गलतियों को रोका जा सकेगा।

भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप
अंकुश नारंग ने आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व में एमसीडी की प्रशासनिक व्यवस्था लगातार कमजोर होती जा रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग में भी गलत वरिष्ठता सूची और पदोन्नति सूची तैयार होने के मामले सामने आते रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रांसफर प्रक्रिया में भी लगातार अनियमितताओं की शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा को यह बताना चाहिए कि आखिर प्रशासनिक व्यवस्था में बार-बार ऐसी गलतियां क्यों हो रही हैं।

आम आदमी पार्टी के खुलासे के बाद वापस लिया गया आदेश
अंकुश नारंग ने दावा किया कि जैसे ही आम आदमी पार्टी ने इस मामले को सार्वजनिक किया, एमसीडी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए ट्रांसफर आदेश वापस ले लिया। उन्होंने कहा कि यदि यह मामला सामने नहीं आता तो यह गंभीर गलती शायद अधिकारियों की नजर में भी नहीं आती। इससे यह स्पष्ट होता है कि प्रशासनिक स्तर पर निगरानी और जवाबदेही की कमी है।

महापौर प्रवेश वाही से भी मांगा जवाब
अंकुश नारंग ने इस मामले में एमसीडी के महापौर प्रवेश वाही से भी जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि जब इतनी बड़ी प्रशासनिक गलती हुई है तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता जानना चाहती है कि मृत और निलंबित कर्मचारियों के नाम ट्रांसफर सूची में कैसे शामिल हुए और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाएंगे।

जवाबदेही तय करने की मांग
आम आदमी पार्टी ने कहा है कि इस मामले में केवल आदेश वापस लेना पर्याप्त नहीं है। पार्टी का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। अंकुश नारंग ने कहा कि यदि इस तरह की गलतियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी तो भविष्य में भी प्रशासनिक लापरवाही जारी रहेगी। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की जांच कर सच्चाई जनता के सामने लाई जाए और जवाबदेही तय की जाए। उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता एक जिम्मेदार और पारदर्शी प्रशासन की अपेक्षा करती है। इसलिए एमसीडी को इस मामले में स्पष्ट जवाब देना चाहिए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।

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