
एमसीडी में भाषा विभागों की बदहाली पर आम आदमी पार्टी का भाजपा पर बड़ा हमला
नई दिल्ली, 29 मई 2026
दिल्ली नगर निगम में हिन्दी और उर्दू अनुवाद विभागों की लगातार हो रही अनदेखी को लेकर आम आदमी पार्टी ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एमसीडी में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने कहा कि भाजपा शासन में निगम का हिन्दी-उर्दू विभाग पूरी तरह उपेक्षा का शिकार हो गया है और अब यह विभाग बंद होने की कगार पर पहुंच चुका है। अंकुश नारंग ने कहा कि एक समय ऐसा था जब दिल्ली नगर निगम में हिन्दी और उर्दू विभाग काफी मजबूत हुआ करते थे। उस समय विभाग में 31 अनुवादक कार्यरत थे और सदन की कार्यवाही से लेकर निगम के एजेंडे तक तीनों भाषाओं — हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी — में तैयार किए जाते थे। लेकिन आज हालात बेहद खराब हो चुके हैं और पूरा विभाग सिमटकर लगभग खत्म होने की स्थिति में पहुंच गया है।
17 साल से नहीं हुई उर्दू अनुवादक की भर्ती
अंकुश नारंग ने बताया कि वर्ष 2009 के बाद से निगम में उर्दू अनुवादक पद के लिए कोई विभागीय परीक्षा आयोजित नहीं की गई। उन्होंने कहा कि पिछले 17 वर्षों से नई भर्ती न होना यह दिखाता है कि भाजपा प्रशासन इस विभाग को मजबूत करने के बजाय धीरे-धीरे खत्म करने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में निगम सचिव कार्यालय में केवल एक स्थायी उर्दू अनुवादक अफहाक हुसैन कार्यरत हैं और वे भी दिसंबर 2026 में सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। ऐसे में उनके रिटायर होने के बाद उर्दू अनुवाद विभाग पूरी तरह बंद होने की स्थिति में पहुंच सकता है।
हिंदी अनुवादक का पद भी दो साल से खाली
अंकुश नारंग ने कहा कि हिंदी अनुवादक का स्थायी पद भी पिछले दो वर्षों से खाली पड़ा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि निगम प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कोई ध्यान नहीं दे रहा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जो हिंदी अनुवादक काम कर रहे हैं, वे अधिकतर कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्त हैं। इतना ही नहीं, उन्हें नियमों के अनुसार पूरा वेतन और सुविधाएं भी नहीं दी जा रही हैं। इससे कर्मचारियों में भी असंतोष बढ़ रहा है।
तीनों भाषाओं में एजेंडा पेश करना निगम की जिम्मेदारी
अंकुश नारंग ने कहा कि निगम सचिव कार्यालय की जिम्मेदारी होती है कि सदन की कार्यवाही और एजेंडा हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी तीनों भाषाओं में उपलब्ध कराया जाए, ताकि सभी पार्षद और अधिकारी आसानी से काम कर सकें। लेकिन आज स्थिति ऐसी हो गई है कि विभाग में जरूरी स्टाफ तक मौजूद नहीं है। उन्होंने कहा कि भाषा विभाग को कमजोर करना केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने जैसा है। दिल्ली जैसे बहुभाषी शहर में हिंदी और उर्दू दोनों भाषाओं का विशेष महत्व है और इन विभागों को मजबूत किया जाना चाहिए।
भाजपा सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
अंकुश नारंग ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा केवल बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीन पर भाषा और कर्मचारियों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों की लगातार अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं की गई तो आने वाले समय में निगम का हिन्दी-उर्दू विभाग पूरी तरह समाप्त हो सकता है। उन्होंने कहा कि भाजपा प्रशासन की लापरवाही के कारण आज राजभाषा विभाग बदहाल स्थिति में पहुंच चुका है और कर्मचारियों की भारी कमी के कारण कामकाज प्रभावित हो रहा है।
आम आदमी पार्टी ने की यह मांग
अंकुश नारंग ने निगम प्रशासन से मांग की कि हिन्दी और उर्दू विभाग में सभी रिक्त पदों पर जल्द स्थायी भर्ती की जाए। साथ ही निगम के सभी एजेंडे हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी भाषा में पेश किए जाएं। उन्होंने कहा कि राजभाषा विभाग को मजबूत करने के लिए सरकार को तुरंत ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि यह केवल कर्मचारियों का मुद्दा नहीं, बल्कि भाषा, प्रशासन और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा बड़ा सवाल है। इसलिए निगम प्रशासन को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।