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भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को ढाका में पाकिस्तानी संसद के स्पीकर अयाज सादिक से शिष्टाचार के तहत हाथ मिलाया था। इसे लेकर अब पाकिस्तान खुद अपनी पीठ थपथपाने में जुट गया है। ऑपरेशन सिंदूर से मिले जख्मों की हताशा पाकिस्तान के बयानों में साफ नजर आई। पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व ने एस जयशंकर और अयाज सादिक के बीच हाथ मिलाने को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की भरपूर कोशिश की। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तानी संसद की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया कि यह हाथ मिलाना तब हुआ जब विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कार्यक्रम के दौरान अयाज सादिक से संपर्क किया। पाकिस्तानी संसद की ओर से जारी बयान में फर्जी दावा करते हुए कहा गया, ‘पहलगाम हमले के बाद से पाकिस्तान ने बिना उकसावे के आक्रामकता और तनाव बढ़ने से रोकने के लिए शांति वार्ता और संयुक्त जांच के प्रस्तावों सहित संवाद, संयम और सहयोगात्मक उपायों पर लगातार जोर दिया है।’

निशाना बनाकर किए गए हमलों के लिए जवाबदेही जरूरी
हालांकि, पूरी दुनिया के सामने पाकिस्तान की पोल पहले ही खुल चुकी है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद लगातार भड़काऊ बयानबाजी करने में पाकिस्तानी नेताओं ने कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी थी। वहीं, फर्जी दावों की बाढ़ लाने में भी पाकिस्तानी नेताओं और सेना का कोई सानी नहीं था। 2025 की शुरुआत में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान संबंधों में काफी तनाव आ गया था। इस हमले के बाद भारत ने राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए सुनियोजित राजनयिक और रणनीतिक उपाय किए। इनमें 1960 के ऐतिहासिक समझौते सिंधु जल संधि में भागीदारी का निलंबन भी शामिल था। भारत ने सीमा पार आवागमन और अन्य द्विपक्षीय गतिविधियों पर भी प्रतिबंध लगा दिया। भारत ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी प्रकार की गतिविधि के लिए आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई और नागरिकों को निशाना बनाकर किए गए हमलों के लिए जवाबदेही जरूरी है।

पाकिस्तान समर्थित आतंकी नेटवर्क का काम बताया
पहलगाम हमले के जवाब में भारत ने 7 मई, 2025 को ऑपरेशन सिंदूर शुरू चलाया। इसमें पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर में स्थित आतंकी शिविरों को निशाना बनाया गया। भारतीय सेना ने पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी शिविरों पर सटीक हमले किए। पहलगाम हमले के बाद इस साल की शुरुआत में दोनों देशों के बीच रिश्ते बिगड़ने के बाद से वरिष्ठ स्तर पर यह कुछ चुनिंदा मुलाकातों में से एक थी। पहलगाम हमले में 26 पर्यटक मारे गए थे, जिसे भारत ने पाकिस्तान समर्थित आतंकी नेटवर्क का काम बताया था।

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