ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने-न होने पर वैश्विक मतभेद, 30 देशों ने माना आमंत्रण, यूरोपीय कई देशों ने किया परहेज

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को लेकर वैश्विक स्तर पर तस्वीर धीरे-धीरे साफ हो रही है। कई देशों ने इस बोर्ड में शामिल होने की सहमति दे दी है, जबकि कुछ यूरोपीय देशों ने फिलहाल इससे दूरी बना ली है। वहीं बड़ी संख्या में देश ऐसे हैं, जिन्होंने अभी तक कोई स्पष्ट फैसला नहीं लिया है।डोनाल्ड ट्रंप की अध्यक्षता वाला यह बोर्ड शुरू में गाजा संघर्षविराम योजना की निगरानी के लिए एक छोटे समूह के रूप में सोचा गया था। लेकिन अब ट्रंप प्रशासन की महत्वाकांक्षाएं बढ़ गई हैं। बोर्ड को भविष्य में अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के समाधान और मध्यस्थता की भूमिका में देखने का संकेत दिया गया है। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के अनुसार करीब 50 देशों को आमंत्रण भेजा गया है, जिनमें से लगभग 30 देशों के शामिल होने की उम्मीद जताई गई है। एसोसिएटेड प्रेस द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार जानिए कौन सी लिस्ट में कौनसा देश शामिल है? अमेरिकी राष्ट्रपति के आह्वान का स्वागत कियाअब तक जिन देशों ने बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने की सहमति दी है, उनमें अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अजरबैजान, बहरीन, बेलारूस, मिस्र, हंगरी, इंडोनेशिया, जॉर्डन, कजाखस्तान, कोसोवो, मोरक्को, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, तुर्किये, संयुक्त अरब अमीरात, उज्बेकिस्तान, वियतनाम और इस्राइल जैसे देशों के नाम शामिल है।सऊदी अरब साम्राज्य के विदेश मंत्रालय ने ट्वीट करते हुए बताया कि सऊदी अरब, तुर्की, मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, कतर और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अपने नेताओं को शांति बोर्ड में शामिल होने के लिए दिए गए निमंत्रण का स्वागत करते हैं। कतर के विदेश मंत्रालय ने ट्वीट करते हुए बताया कि एक संयुक्त बयान में आठ अरब और इस्लामी देशों ने शांति परिषद में शामिल होने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति के आह्वान का स्वागत किया है। अब भी गैर-प्रतिबद्ध बनी हुईकुछ यूरोपीय देशों ने इस बोर्ड में शामिल होने से अभी इनकार किया है। इनमें फ्रांस, नॉर्वे, स्लोवेनिया और स्वीडन जैसे देश शामिल हैं। कई अहम देश और संस्थाएं अब भी गैर-प्रतिबद्ध बनी हुई हैं। इनमें भारत, ब्रिटेन, चीन, क्रोएशिया, जर्मनी, इटली, यूरोपीय संघ की कार्यकारी संस्था, पराग्वे, रूस, सिंगापुर और यूक्रेन शामिल हैं।कई देशों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शांति बोर्ड में शामिल होने की बात कही है, जबकि कुछ यूरोपीय देशों ने निमंत्रण अस्वीकार कर दिया है। कई देशों ने अभी तक ट्रम्प के निमंत्रण का जवाब नहीं दिया है।
पहलगाम हमले के बाद भी पाकिस्तान का भ्रम अभियान जारी, आतंक पर कार्रवाई से पहले कोई बातचीत नहीं

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को ढाका में पाकिस्तानी संसद के स्पीकर अयाज सादिक से शिष्टाचार के तहत हाथ मिलाया था। इसे लेकर अब पाकिस्तान खुद अपनी पीठ थपथपाने में जुट गया है। ऑपरेशन सिंदूर से मिले जख्मों की हताशा पाकिस्तान के बयानों में साफ नजर आई। पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व ने एस जयशंकर और अयाज सादिक के बीच हाथ मिलाने को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की भरपूर कोशिश की। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तानी संसद की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया कि यह हाथ मिलाना तब हुआ जब विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कार्यक्रम के दौरान अयाज सादिक से संपर्क किया। पाकिस्तानी संसद की ओर से जारी बयान में फर्जी दावा करते हुए कहा गया, ‘पहलगाम हमले के बाद से पाकिस्तान ने बिना उकसावे के आक्रामकता और तनाव बढ़ने से रोकने के लिए शांति वार्ता और संयुक्त जांच के प्रस्तावों सहित संवाद, संयम और सहयोगात्मक उपायों पर लगातार जोर दिया है।’ निशाना बनाकर किए गए हमलों के लिए जवाबदेही जरूरीहालांकि, पूरी दुनिया के सामने पाकिस्तान की पोल पहले ही खुल चुकी है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद लगातार भड़काऊ बयानबाजी करने में पाकिस्तानी नेताओं ने कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी थी। वहीं, फर्जी दावों की बाढ़ लाने में भी पाकिस्तानी नेताओं और सेना का कोई सानी नहीं था। 2025 की शुरुआत में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान संबंधों में काफी तनाव आ गया था। इस हमले के बाद भारत ने राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए सुनियोजित राजनयिक और रणनीतिक उपाय किए। इनमें 1960 के ऐतिहासिक समझौते सिंधु जल संधि में भागीदारी का निलंबन भी शामिल था। भारत ने सीमा पार आवागमन और अन्य द्विपक्षीय गतिविधियों पर भी प्रतिबंध लगा दिया। भारत ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी प्रकार की गतिविधि के लिए आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई और नागरिकों को निशाना बनाकर किए गए हमलों के लिए जवाबदेही जरूरी है। पाकिस्तान समर्थित आतंकी नेटवर्क का काम बतायापहलगाम हमले के जवाब में भारत ने 7 मई, 2025 को ऑपरेशन सिंदूर शुरू चलाया। इसमें पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर में स्थित आतंकी शिविरों को निशाना बनाया गया। भारतीय सेना ने पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी शिविरों पर सटीक हमले किए। पहलगाम हमले के बाद इस साल की शुरुआत में दोनों देशों के बीच रिश्ते बिगड़ने के बाद से वरिष्ठ स्तर पर यह कुछ चुनिंदा मुलाकातों में से एक थी। पहलगाम हमले में 26 पर्यटक मारे गए थे, जिसे भारत ने पाकिस्तान समर्थित आतंकी नेटवर्क का काम बताया था।