
नई दिल्ली, 11 अगस्त 2026।
आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में सामने आए कथित चावल घोटाले को लेकर भाजपा सरकार पर जोरदार हमला बोला है। पार्टी ने विधानसभा में इस मामले पर चर्चा नहीं होने देने का आरोप लगाते हुए खाद्य मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के इस्तीफे की मांग की है। AAP विधायक दल के चीफ व्हीप संजीव झा ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में मंत्री की महत्वपूर्ण भूमिका है और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को उनसे तत्काल इस्तीफा लेना चाहिए।
चावल घोटाले को लेकर संजीव झा ने लगाए गंभीर आरोप
दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के कार्यालय में प्रेसवार्ता करते हुए संजीव झा ने कहा कि विधानसभा में आम आदमी पार्टी ने नियम 55 के तहत चावल के इस मामले पर चर्चा कराने की मांग की थी। उनका कहना था कि यह कोई छोटा मामला नहीं है, बल्कि गरीबों और प्रवासी मजदूरों के राशन से जुड़ा बेहद गंभीर मामला है। संजीव झा के अनुसार, अगर इस योजना को पूरी तरह लागू कर दिया जाता और तीन साल तक राशन इसी तरह वितरित किया जाता, तो कथित तौर पर करीब 22 हजार करोड़ रुपये का घोटाला हो सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस चावल को गरीब और जरूरतमंद लोगों तक पहुंचना था, वह निजी व्यापारियों तक पहुंच गया।
गरीबों के लिए था चावल, व्यापारियों को बेचने का आरोप
संजीव झा ने कहा कि इस मामले में ऐसे लोगों के लिए चावल उपलब्ध कराने की योजना थी, जिनके पास राशन कार्ड नहीं हैं। इनमें बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर और गरीब लोग शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चावल गरीबों में बांटने के बजाय निजी व्यापारियों को बेच दिया गया। उनके अनुसार, हर सप्ताह बड़ी मात्रा में चावल खरीदा गया और बाद में उसके वितरण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए। संजीव झा ने कहा कि गरीबों के लिए आने वाले राशन की निगरानी और उसके सही वितरण की जिम्मेदारी सरकार की थी। इसलिए यह सवाल उठता है कि चावल कहां गया और किसे बांटा गया, इसकी जानकारी क्यों नहीं ली गई।
मंत्री ने पत्र आगे बढ़ाया, लेकिन आगे की जांच क्यों नहीं की?
संजीव झा ने आरोप लगाया कि मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा का कहना है कि उन्होंने केवल एक आवेदन को आगे भेजा था और इस पूरे मामले में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। इस पर संजीव झा ने सवाल उठाया कि अगर मंत्री की कोई भूमिका नहीं थी, तो फिर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई क्यों की गई? उन्होंने कहा कि नॉर्थ ईस्टर्न रीजनल एग्रीकल्चर मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी निरामक की ओर से मंत्री को पत्र भेजा गया था। आरोप है कि मंत्री ने इस पत्र को सीधे अतिरिक्त आयुक्त तक पहुंचाया। इसके बाद एफसीआई से चावल लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ी। संजीव झा का कहना है कि मंत्री को केवल चावल उपलब्ध कराने की चिंता नहीं करनी चाहिए थी, बल्कि यह भी देखना चाहिए था कि चावल दिल्ली में सही लोगों तक पहुंच रहा है या नहीं।
अप्रैल और मई में चावल जारी होने का दावा
संजीव झा ने प्रेसवार्ता में दावा किया कि अप्रैल में करीब 7,000 मीट्रिक टन और मई में करीब 9,900 मीट्रिक टन चावल जारी किया गया। उन्होंने कहा कि इस मामले में केंद्र सरकार के विजिलेंस विभाग की रिपोर्ट का भी हवाला सामने आया है। उनके अनुसार, राशन वितरण को लेकर राज्य के कॉरपोरेशन की भूमिका होती है और जिस कॉरपोरेशन को यह जिम्मेदारी दी गई, उसके अधिकार को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। संजीव झा ने कहा कि मंत्री को यह जांचना चाहिए था कि जिस संस्था को चावल वितरण का काम दिया जा रहा है, वह इसके लिए अधिकृत है या नहीं।
अधिकारी के जवाब का हवाला देकर मंत्री पर सवाल
संजीव झा ने कहा कि उन्होंने अतिरिक्त आयुक्त अरुण कुमार झा के कारण बताओ नोटिस के जवाब को पढ़ा है। उनके अनुसार, अधिकारी ने अपने जवाब में कहा कि खाद्य आपूर्ति मंत्री से चर्चा के बाद ही निरामक का पत्र एफसीआई को भेजा गया था। संजीव झा ने कहा कि अगर अधिकारी के जवाब में मंत्री से चर्चा का उल्लेख है, तो फिर मंत्री यह कैसे कह सकते हैं कि उन्होंने केवल पत्र आगे बढ़ाया और उनकी कोई भूमिका नहीं थी।
उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और सभी दस्तावेज जनता के सामने रखे जाने चाहिए।
विधानसभा में चर्चा नहीं होने देने का आरोप
संजीव झा ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी के विधायक इस मामले पर विधानसभा में चर्चा करना चाहते थे, लेकिन सदन को तीन बार स्थगित किया गया। इसके बाद AAP विधायकों को मार्शल आउट कर दिया गया। उन्होंने सवाल किया कि अगर सरकार के पास इस मामले में जवाब था, तो विपक्ष को सदन में अपनी बात रखने का मौका क्यों नहीं दिया गया। संजीव झा ने कहा कि जब AAP विधायक सदन से बाहर हो गए, उसके बाद मंत्री की ओर से जवाब दिया गया। उन्होंने कहा कि अगर सरकार इस मामले में पूरी तरह साफ है तो उसे विधानसभा में खुली चर्चा करानी चाहिए।
मुख्यमंत्री से मंत्री का इस्तीफा लेने की मांग
संजीव झा ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से मांग की कि वह खाद्य मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा का इस्तीफा लें। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले में पारदर्शिता दिखानी चाहिए और यह बताना चाहिए कि गरीबों के लिए आया चावल कहां गया। साथ ही, इस पूरी प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच होनी चाहिए। संजीव झा ने आरोप लगाया कि अगर मुख्यमंत्री मंत्री का इस्तीफा नहीं लेती हैं, तो इससे सरकार की जवाबदेही पर भी सवाल उठेंगे।
कुलदीप कुमार ने भी सरकार पर साधा निशाना
कोंडली विधायक कुलदीप कुमार ने भी चावल मामले को लेकर भाजपा सरकार पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और मंत्री ने योजना बनाकर भ्रष्टाचार किया। कुलदीप कुमार ने कहा कि जिन गरीब लोगों के लिए चावल उपलब्ध कराया जाना था, उन्हें इसका लाभ नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि गरीबों के राशन को निजी व्यापारियों तक पहुंचाने की कोशिश की गई। कुलदीप कुमार ने कहा कि AAP केवल आरोप नहीं लगा रही है, बल्कि उसके पास इस मामले से जुड़े दस्तावेज भी हैं। उन्होंने मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा को चुनौती देते हुए कहा कि वे सामने आकर यह बताएं कि जिन दस्तावेजों और नोटों पर उनके हस्ताक्षर हैं, वे उनके नहीं हैं।
असम के कॉरपोरेशन को लेकर भी उठाए सवाल
कुलदीप कुमार ने सवाल उठाया कि असम के एक कॉरपोरेशन को दिल्ली में चावल बांटने की जिम्मेदारी क्यों दी गई। उन्होंने कहा कि अगर चावल गरीबों में बांटने के लिए था, तो वह दिल्ली के जरूरतमंद लोगों तक पहुंचने के बजाय हरियाणा के खुले बाजार में बिकने की बात क्यों सामने आ रही है। उन्होंने मांग की कि सरकार इस पूरे मामले की जांच कराए और विधानसभा में विपक्ष को चर्चा का पूरा मौका दे।
सत्र बढ़ाकर चर्चा कराने की मांग
कुलदीप कुमार ने विधानसभा अध्यक्ष से मांग की कि जरूरत पड़ने पर विधानसभा का सत्र एक दिन और बढ़ाया जाए, ताकि इस मामले पर विस्तार से चर्चा हो सके। उन्होंने कहा कि AAP विधायक सदन में इस मुद्दे को उठाते रहेंगे। उनका कहना था कि विपक्ष को विधानसभा में बोलने से रोकने के बजाय सरकार को सवालों के जवाब देने चाहिए।
दवा और साइकिल घोटाले का भी जिक्र
कुलदीप कुमार ने इस दौरान दिल्ली में सामने आए दूसरे कथित घोटालों का भी जिक्र किया। उन्होंने दवा घोटाले और साइकिल टेंडर से जुड़े विवादों का उल्लेख करते हुए भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली की जनता से जुड़े मामलों में सरकार जवाब देने से बच रही है। AAP ने साफ किया कि वह विधानसभा के साथ-साथ सड़क पर भी इन मुद्दों को उठाती रहेगी।
AAP बोली- गरीबों के राशन का पूरा हिसाब देना होगा
आम आदमी पार्टी ने कहा कि गरीबों और प्रवासी मजदूरों के लिए रखे गए राशन का पूरा हिसाब जनता के सामने आना चाहिए। पार्टी ने मांग की कि चावल की खरीद, एफसीआई से जारी मात्रा, वितरण करने वाली संस्था और वास्तविक लाभार्थियों से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए। AAP नेताओं ने कहा कि इस मामले में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और अगर किसी स्तर पर भ्रष्टाचार या अनियमितता हुई है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। पार्टी ने यह भी कहा कि वह इस मुद्दे को विधानसभा और जनता के बीच लगातार उठाती रहेगी। संजीव झा और कुलदीप कुमार ने दोहराया कि गरीबों के राशन से जुड़े इस मामले में सरकार को हर सवाल का जवाब देना चाहिए और जनता के सामने पूरा सच रखना चाहिए।