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आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और मालवीय नगर से पूर्व विधायक सोमनाथ भारती ने एसआईआर के बहाने काटे जा रहे वोट को लेकर भाजपा और चुनाव आयोग पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि भाजपा, चुनाव आयोग के जरिए दिल्ली में 30 लाख वोट कटवाने का षड़यंत्र कर रही है। आयोग 2002 वोटर लिस्ट में वोटर या उसके पैरेंट्स का नाम होने की जानकारी मांग रहा है। जिससे लाखों लोग एसआईआर से वंचित हो रहे हैं। मैं खुद 2002 के बहुत पहले से दिल्ली में रह रहा हूं, लेकिन 2002 के वोटर लिस्ट में न मेरा और ना ही पैरेंट्स का नाम मिल रहा है। इसी तरह, दिल्ली का निवासी होने का कोई स्थायी प्रमाण नहीं होने के कारण बड़े पैमाने पर किराएदारों के भी वोट काटे जा रहे हैं।

सोमवार को “आप” मुख्यालय पर प्रेस वार्ता कर पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सोमनाथ भारती ने कहा कि दिल्ली में चल रहे एसआईआर की आखिरी तारीख 29 जुलाई से बढ़ाकर 8 अगस्त कर दी गई है। मेरी विधानसभा मालवीय नगर में रविवार तक केवल 47 फीसद वोटरों का ही वेरिफिकेशन हो सका था। ऐसे में अगले पांच दिन में बचे 53 फीसद वोटरों का सत्यापन कैसे संभव होगा?

सोमनाथ भारती ने बताया कि एसआईआर के फॉर्म में अजीबोगरीब डिटेल भरनी है कि अगर कोई 2002 की वोटर लिस्ट में है तो अपनी जानकारी भरे और अगर नहीं है तो अपने माता-पिता या दादा-दादी की डिटेल भरे। मैंने 2002 की वोटर लिस्ट में खूब सर्च किया, लेकिन ना तो मेरा नाम मिला, ना मेरी माताजी का और ना ही मेरे पिताजी का नाम मिला।

सोमनाथ भारती ने बताया कि मेरे पिताजी का 2016 में देहांत हो गया था, लेकिन मेरे पास उनका 1996 का दिल्ली का वोटर कार्ड है। मेरी माताजी 2005 के आसपास वीआरएस लेकर बिहार से दिल्ली शिफ्ट हो गईं, उनका भी 2004 का वोटर कार्ड है। मुझे ना तो उनका नाम बिहार की वोटर लिस्ट में मिल रहा है और ना ही पिताजी का दिल्ली की लिस्ट में। मेरा खुद का नाम भी उसमें नहीं है। मैंने 1997 में आईआईटी पास आउट किया, फिर दिल्ली यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई की जिसकी डिग्री 2008 की है। 2005 में मैं अपने वर्तमान घर में शिफ्ट हुआ, यानी मैं 2002 में भी दिल्ली में ही था। जब मेरे जैसे व्यक्ति को अपना और अपने माता-पिता का नाम 2002 की वोटर लिस्ट में ढूंढने में इतनी तकलीफ हो रही है, तो सोचिए कि और लोगों की क्या हालत होगी। ज्ञानेश कुमार के चुनाव आयोग से पूछना चाहता हूं कि मैं अब कहां से प्रमाण लाऊं और क्या करूं?

सोमनाथ भारती ने कहा कि मैं यह सोचकर हैरान हूं कि जब इतने सारे प्रमाण होने के बावजूद मैं खुद को साबित नहीं कर पा रहा हूं, तो फिर आम आदमी कहां जाएगा? जहां साक्षरता दर इतनी कम है और जहां शिक्षा संस्थान बंद करा दिए गए हैं, वहां का आम नागरिक कैसे साबित करेगा? क्या चुनाव आयोग ने यह ठान लिया है कि वह पूरी तरह से भाजपा का आयोग हो गया है? दिल्ली में 20 से 30 लाख वोट काटने का एक बहुत बड़ा षड्यंत्र चल रहा है। भाजपा के विधायकों के दफ्तरों में बीएलओ को बुलाकर बताया जा रहा है कि हर बूथ की लिस्ट में किन लोगों के नाम रखने हैं, जिन्हें कोई प्रमाण देने की जरूरत नहीं है।

सोमनाथ भारती ने कहा कि दिल्ली के अंदर किसी भी बूथ पर प्रोफाइलिंग करना बहुत आसान है। एक बूथ में अगर 1000 वोट हैं, तो वे लगभग 200 घरों में आ जाते हैं। 50 बिल्डिंगों में एक बूथ बन जाता है, जहां किसी पार्क में बैठकर आराम से प्रोफाइलिंग की जा सकती है कि कौन भाजपा और कौन आम आदमी पार्टी का वोटर हैं। इसी प्रोफाइलिंग के आधार पर आराम से 60-70 फीसद वोट सुरक्षित किए जा सकते हैं और अगर ठान लिया है कि आम आदमी पार्टी के वोट काटने हैं, तो बाकी 20 फीसद वोटरों से प्रमाण मांग कर उनके वोट काट दीजिए, क्योंकि वे खुद को साबित ही नहीं कर पाएंगे।

सोमनाथ भारती ने बताया कि दिल्ली में बहुत बड़ी संख्या में लोग किराएदार हैं। किराएदारों की सबसे बड़ी मुसीबत यह है कि जिस पते पर उनका आधार, वोटर या पासपोर्ट बनता है, मकान मालिक 11 महीने बाद उन्हें घर खाली करने या किराया बढ़ाने की धमकी देता है। गरीब तबकों में मकान मालिक किराएदार को अपने पते पर कोई पक्का प्रमाण नहीं बनाने देते। आज वे सारे किराएदार इस मुसीबत में हैं कि उनके वोट काटे जा रहे हैं। वे सभी असली भारतीय नागरिक हैं, कोई बांग्लादेशी नहीं हैं, जैसा भाजपा कहती है। एसआईआर के नाम पर जिस प्रकार से यह काम चल रहा है, वह लोकतंत्र के साथ सीधा खिलवाड़ है जो बहुत महंगा साबित होगा।

सोमनाथ भारती ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से कहा कि वे कान खोलकर सुन लें, जिस प्रकार जंतर-मंतर पर लोग एकत्रित हुए थे, अगर वे नहीं सुधरे तो हमारे पास सुधारने के और भी तरीके हैं। जनता का वोट काटकर, भाजपा के साथ षड्यंत्र रचकर और लोकतंत्र की हत्या करके चुनाव जिताने का जो प्रयत्न किया जा रहा है, वह बहुत गलत है। ज्ञानेश कुमार भाजपा को चुनाव तो जिता सकते हैं, लेकिन इससे जनता के दिलों में भाजपा के प्रति जो नफरत पैदा हो गई है, उसे वे कभी नहीं मिटा पाएंगे।

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