
2/6 ,नई दिल्ली।
दिल्ली सचिवालय में दिखी भारत की विविधता और सांस्कृतिक एकता की शानदार झलक
दिल्ली सचिवालय में गोवा दिवस और तेलंगाना दिवस के अवसर पर एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में दोनों राज्यों की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं, कला और विकास यात्रा को प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के दौरान रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया और पूरे वातावरण को उत्साह तथा उल्लास से भर दिया। इस अवसर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने गोवा और तेलंगाना के लोगों को शुभकामनाएं देते हुए दोनों राज्यों की उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता है और देश के विभिन्न राज्यों की संस्कृति, परंपराएं और विकास यात्रा भारत को और अधिक मजबूत बनाती हैं।
गोवा और तेलंगाना ने बढ़ाया देश का गौरव – रेखा गुप्ता
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि गोवा अपनी प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक विरासत और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। हर वर्ष लाखों पर्यटक गोवा की संस्कृति और सुंदरता का अनुभव करने के लिए वहां पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि दूसरी ओर तेलंगाना ने सूचना प्रौद्योगिकी, औषधि निर्माण, नवाचार और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। आज तेलंगाना देश के सबसे तेजी से विकसित होने वाले राज्यों में शामिल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों राज्यों की सफलता भारत की प्रतिभा, मेहनत और विकास क्षमता का शानदार उदाहरण है।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां, दर्शकों ने की जमकर सराहना
कार्यक्रम के दौरान गोवा की प्रसिद्ध समुद्री संस्कृति और पारंपरिक जीवनशैली को दर्शाने वाला फिशर डांस प्रस्तुत किया गया। कलाकारों ने मछुआरों के जीवन और उनकी परंपराओं को आकर्षक अंदाज में मंच पर उतारा। वहीं तेलंगाना के लोक कलाकारों ने देवी भक्ति और आधुनिक फ्यूजन शैली पर आधारित रंगारंग नृत्य प्रस्तुत किया। इन प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने कलाकारों की शानदार प्रस्तुति की जमकर सराहना की और तालियों से उनका उत्साह बढ़ाया।
‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को मजबूत कर रहे हैं ऐसे आयोजन कपिल मिश्रा
दिल्ली सरकार में कला, संस्कृति एवं भाषा मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को आगे बढ़ाने के लिए दिल्ली में विभिन्न राज्यों के स्थापना दिवस और राज्य दिवस नियमित रूप से मनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन आयोजनों का उद्देश्य देश के अलग-अलग राज्यों की संस्कृति, कला, भाषा, परंपराओं और उपलब्धियों को एक मंच पर लाना है। इससे लोगों को एक-दूसरे की सांस्कृतिक विशेषताओं को समझने का अवसर मिलता है और राष्ट्रीय एकता को मजबूती मिलती है।
गोवा की संस्कृति और पर्यटन को मिली नई पहचान
कपिल मिश्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में गोवा की लोक कलाओं, पारंपरिक संगीत, नृत्य और समुद्री संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए गए हैं। इसके साथ ही पर्यटन क्षेत्र को मजबूत करने और विरासत स्थलों को संरक्षित करने के लिए भी कई महत्वपूर्ण पहल की गई हैं।उन्होंने कहा कि इन प्रयासों के कारण गोवा की वैश्विक पहचान और अधिक मजबूत हुई है तथा यह राज्य देश के पर्यटन मानचित्र पर और अधिक महत्वपूर्ण स्थान हासिल कर रहा है।
तेलंगाना की लोक परंपराओं और विरासत को संरक्षण देने पर जोर
मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि तेलंगाना की सांस्कृतिक पहचान उसकी समृद्ध लोक परंपराओं, हस्तशिल्प, ऐतिहासिक धरोहरों और बथुकम्मा जैसे प्रसिद्ध उत्सवों से जुड़ी हुई है। राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न स्तरों पर अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि तेलंगाना ने आधुनिक विकास और पारंपरिक संस्कृति के बीच संतुलन स्थापित कर देश के सामने एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है।
भारत की विविधता और विकास का प्रतीक बने गोवा और तेलंगाना
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कपिल मिश्रा ने कहा कि गोवा और तेलंगाना दोनों ही राज्य आज भारत की विविधता, सांस्कृतिक समृद्धि और आधुनिक विकास के प्रतीक बन चुके हैं। एक ओर जहां ये राज्य अपनी परंपराओं को संजोए हुए हैं, वहीं दूसरी ओर विकास और नवाचार के क्षेत्र में भी नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन देशवासियों को एक-दूसरे की संस्कृति को जानने और समझने का अवसर प्रदान करते हैं तथा राष्ट्रीय एकता की भावना को और मजबूत बनाते हैं।
बड़ी संख्या में लोगों ने लिया कार्यक्रम का आनंद
गोवा दिवस और तेलंगाना दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम का आयोजन कला, संस्कृति एवं भाषा विभाग की ओर से साहित्य कला परिषद द्वारा किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे और दोनों राज्यों की संस्कृति तथा कला से परिचित हुए। यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि भारत की विविधता, एकता और साझा सांस्कृतिक विरासत का उत्सव भी था, जिसने उपस्थित लोगों को देश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं पर गर्व करने का अवसर प्रदान किया।