
तीन दिवसीय समागम में महिलाओं ने सुनाई अपने परिवारों पर हुए अत्याचारों की दर्द नाक कहानी, शहीदों को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि
नई दिल्ली, 03 नवंबर।
तिलक विहार स्थित गुरुद्वारा शहीद गंज साहिब में आयोजित तीन दिवसीय समागम में 1984 के सिख नरसंहार के पीड़ित परिवारों की महिलाओं ने अपनी दर्दभरी आपबीती सुनाई। महिलाओं ने उस समय अपने परिवारों के साथ हुई घटनाओं और अपने जीवन में आए दुखद बदलावों को याद किया। उनकी आपबीती सुनकर समागम में मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। पूरे कार्यक्रम में शहीदों को याद किया गया और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस तीन दिवसीय समागम का माहौल बेहद भावुक रहा। पीड़ित परिवारों की महिलाओं ने बताया कि 1984 के उस भयावह दौर में किस प्रकार उनके परिवारों को हिंसा और अत्याचारों का सामना करना पड़ा। किसी ने अपने परिवार के सदस्य को खोया, तो किसी का पूरा परिवार बिखर गया। किसी के घर की खुशियां छिन गईं, तो किसी को जीवनभर अपने प्रियजनों की यादों के सहारे जीना पड़ा।
पीड़ित महिलाओं ने एक-एक कर सुनाई अपनी आपबीती
समागम के दौरान माता भागी कौर, कुलजीत कौर, गंगा कौर, अतर कौर, लक्ष्मी कौर, ठाकरी कौर, प्रीति सिंह, जसवीर कौर, परमजीत कौर और मनप्रीत कौर सहित अनेक महिलाओं ने अपनी आपबीती सुनाई। इन महिलाओं ने बताया कि 1984 की हिंसा ने उनके परिवारों और जीवन को किस प्रकार प्रभावित किया। उन्होंने उस समय की घटनाओं को याद करते हुए कहा कि उनके परिवारों ने बहुत कठिन समय देखा। जिन लोगों के साथ उन्होंने अपना जीवन बिताने के सपने देखे थे, वे उनसे हमेशा के लिए बिछड़ गए। महिलाओं ने कहा कि उस समय उनके परिवारों को जो दुख और परेशानी झेलनी पड़ी, उसे शब्दों में पूरी तरह बयां करना आसान नहीं है। आज भी जब वे अपने परिवार के शहीद हुए सदस्यों को याद करती हैं, तो उनकी आंखें नम हो जाती हैं।
परिवार के सदस्यों को याद कर भावुक हुईं महिलाएं
कार्यक्रम में सबसे भावुक पल वह रहा, जब पीड़ित परिवारों की महिलाओं ने अपने घर के उन सदस्यों को याद किया, जिन्हें उन्होंने 1984 की हिंसा में खो दिया था। महिलाओं ने बताया कि किस प्रकार उपद्रवियों ने उनके परिवारों को निशाना बनाया, घरों को उजाड़ा और परिवार के सदस्यों की हत्या कर दी। उन्होंने तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर हिंसा रोकने में विफल रहने और पीड़ितों को पर्याप्त न्याय नहीं दिलाने का आरोप लगाया। महिलाओं की दर्दभरी बातें सुनकर वहां मौजूद लोगों को भी उस समय की भयावह घटनाओं का एहसास हुआ। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने पीड़ित परिवारों के दर्द को सुना और शहीदों को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
तस्वीरों ने याद दिलाया 1984 का भयावह दौर
गुरुद्वारा शहीद गंज साहिब में आयोजित समागम के दौरान 1984 की हिंसा से जुड़ी तस्वीरें भी प्रदर्शित की गईं। इन तस्वीरों में उस दौर की घटनाओं और पीड़ित परिवारों के दर्द की झलक दिखाई गई। तस्वीरें देखकर वहां आने वाले लोग भावुक हो गए। तस्वीरें इस बात की याद दिला रही थीं कि किस प्रकार हिंसा के कारण हजारों निर्दोष सिखों को अपनी जान गंवानी पड़ी और अनेक परिवारों की जिंदगी पूरी तरह बदल गई। समागम में मौजूद लोगों ने कहा कि 1984 की घटनाओं को कभी भुलाया नहीं जा सकता। यह इतिहास का ऐसा दुखद अध्याय है, जिसे आने वाली पीढ़ियों तक याद रखा जाना चाहिए, ताकि पीड़ित परिवारों के संघर्ष और उनके साथ हुए अन्याय को समझा जा सके।
हरीश ओबेरॉय और चरणजीत सिंह लवली ने भी दी श्रद्धांजलि
इस अवसर पर जोन चेयरमैन हरीश ओबेरॉय और पश्चिमी दिल्ली जिले के महामंत्री सरदार चरणजीत सिंह लवली भी गुरुद्वारा शहीद गंज साहिब पहुंचे। दोनों ने गुरुद्वारे में माथा टेककर 1984 के सिख नरसंहार में शहीद हुए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने शहीदों को याद किया और पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। इससे पहले रविवार को दिल्ली भाजपा अध्यक्ष श्री हर्ष मल्होत्रा ने भी गुरुद्वारा शहीद गंज साहिब में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की थी।
कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप, पीड़ित परिवारों ने मांगा जवाब
समागम में अपनी बात रखते हुए पीड़ित परिवारों की महिलाओं ने कांग्रेस पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 1984 का सिख नरसंहार भारतीय इतिहास का एक बेहद दुखद और काला अध्याय है। इसे केवल एक सामान्य दंगे के रूप में नहीं देखा जा सकता, क्योंकि उस समय निर्दोष सिख परिवारों को निशाना बनाया गया और हजारों लोगों की जिंदगी प्रभावित हुई। महिलाओं ने आरोप लगाया कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार हिंसा को रोकने में असफल रही। साथ ही, कांग्रेस के कुछ नेताओं पर हिंसा भड़काने और आरोपियों को राजनीतिक संरक्षण देने के गंभीर आरोप भी लगे थे। उन्होंने कहा कि आज कांग्रेस के नेता लोकतंत्र, संविधान और मानवाधिकारों की बात करते हैं, लेकिन उन्हें सबसे पहले 1984 में सिख समाज के साथ हुए अन्याय पर जवाब देना चाहिए।
राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व से पूछे सवाल
पीड़ित परिवारों की महिलाओं ने राहुल गांधी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेतृत्व से सवाल करते हुए कहा कि आखिर उन हजारों परिवारों को न्याय दिलाने के लिए कांग्रेस ने क्या प्रयास किए? उन्होंने पूछा कि इतने वर्षों तक पीड़ित परिवार न्याय के लिए क्यों भटकते रहे? जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया, उन्हें न्याय मिलने में इतनी लंबी देरी क्यों हुई? आखिर पीड़ित परिवारों की समस्याओं और उनकी मांगों को गंभीरता से क्यों नहीं सुना गया? महिलाओं ने कहा कि 1984 की घटनाओं से प्रभावित परिवार आज भी अपने साथ हुए अन्याय को याद करते हैं। उनके लिए यह केवल इतिहास की कोई पुरानी घटना नहीं है, बल्कि उनके जीवन से जुड़ा ऐसा दर्द है, जिसे वे आज भी महसूस करते हैं।
पीड़ित परिवारों को केवल संवेदना नहीं, न्याय और सम्मान चाहिए
महिलाओं ने कहा कि सिख समाज को केवल औपचारिक संवेदना देने से काम नहीं चलेगा। कांग्रेस को अपने अतीत की जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए और पीड़ित परिवारों के प्रति जवाबदेही दिखानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों ने अपने लोगों को खोया है, उनकी पीड़ा को समझना और उन्हें न्याय दिलाने के लिए गंभीर प्रयास करना जरूरी है। पीड़ित परिवारों को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि न्याय, सम्मान और उनकी मांगों का उचित जवाब मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि 1984 के पीड़ित परिवारों का दर्द आने वाली पीढ़ियों को भी जानना चाहिए, ताकि देश के इतिहास में हुई ऐसी घटनाओं को याद रखा जा सके और निर्दोष लोगों के साथ हुए अन्याय को कभी नजरअंदाज न किया जाए।
शहीदों की याद में आयोजित समागम ने दिया न्याय और इंसाफ का संदेश
गुरुद्वारा शहीद गंज साहिब में आयोजित तीन दिवसीय समागम ने एक बार फिर 1984 के पीड़ित परिवारों के दर्द और उनके लंबे संघर्ष को सामने रखा। इस कार्यक्रम में महिलाओं द्वारा सुनाई गई आपबीती ने सभी को भावुक कर दिया। समागम के माध्यम से शहीदों को याद किया गया और उनके परिवारों के संघर्ष को सम्मान दिया गया। कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि 1984 में जान गंवाने वाले निर्दोष लोगों को हमेशा याद रखा जाएगा और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग लगातार उठाई जाती रहेगी। गुरुद्वारा शहीद गंज साहिब में आयोजित यह समागम केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि उन महिलाओं की आवाज भी बना, जिन्होंने अपने परिवारों को खोने के बाद भी न्याय की उम्मीद नहीं छोड़ी है। उनकी आपबीती ने एक बार फिर याद दिलाया कि 1984 की घटनाओं का दर्द आज भी हजारों परिवारों के दिलों में जिंदा है।