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नई दिल्ली, 4 जून 2026।

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने दिल्ली राज्य कैंसर संस्थान में कैंसर के गंभीर और गरीब मरीजों के इलाज के लिए जरूरी कीमोथेरेपी दवाओं की भारी कमी पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने इस मामले को बेहद गंभीर बताते हुए दिल्ली के उपराज्यपाल को पत्र लिखकर पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने कहा कि कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रहे मरीजों को समय पर दवाएं न मिलना स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी विफलता है।

कैंसर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए
देवेंद्र यादव ने कहा कि दिल्ली राज्य कैंसर संस्थान में कई महत्वपूर्ण कीमोथेरेपी दवाएं उपलब्ध नहीं हैं, जिससे गरीब और जरूरतमंद मरीजों के इलाज पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि कैंसर का इलाज पहले से ही बेहद महंगा होता है और ऐसे में सरकारी अस्पतालों में दवाओं की कमी मरीजों और उनके परिवारों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। उन्होंने कहा कि जिन मरीजों को मुफ्त या रियायती इलाज की उम्मीद होती है, उन्हें अब बाहर से महंगी दवाएं खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है और सरकार को तुरंत इस पर कार्रवाई करनी चाहिए।

दिल्ली में लगातार बढ़ रहे हैं कैंसर के मामले
देवेंद्र यादव ने कहा कि दिल्ली में पिछले कई वर्षों से वायु प्रदूषण, धूल, दूषित यमुना जल और मिलावटी खाद्य पदार्थों के कारण लोगों का स्वास्थ्य लगातार प्रभावित हो रहा है। राजधानी के लोग सांस, फेफड़े, लीवर और पेट से जुड़ी बीमारियों के साथ-साथ कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का भी सामना कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि दिल्ली में हर साल हजारों नए कैंसर मरीज सामने आ रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2004 में दिल्ली में लगभग 28 हजार कैंसर मरीज थे, जबकि वर्तमान समय में यह संख्या लाखों तक पहुंच चुकी है। हर वर्ष लगभग 28 से 29 हजार नए कैंसर के मामले दर्ज किए जा रहे हैं। देवेंद्र यादव ने कहा कि दिल्ली में प्रति एक लाख आबादी पर पुरुषों में कैंसर की दर 146.70 और महिलाओं में 132.50 है। यह आंकड़े देश के अन्य बड़े शहरों जैसे मुंबई, कोलकाता और अहमदाबाद से भी अधिक हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति राजधानी के लिए खतरे की घंटी है और सरकार को इस दिशा में गंभीर कदम उठाने चाहिए।

22 प्रतिशत कीमोथेरेपी दवाएं अस्पताल में नहीं हैं उपलब्ध
देवेंद्र यादव ने अपने पत्र में बताया कि दिल्ली राज्य कैंसर संस्थान में कीमोथेरेपी से जुड़ी लगभग 22 प्रतिशत जरूरी दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। इन दवाओं की कमी के कारण मरीजों की जान खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि कई महत्वपूर्ण दवाओं की कीमत इतनी अधिक है कि गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार उन्हें खरीदने की स्थिति में नहीं होते। कुछ दवाओं की कीमत हजारों से लेकर लाखों रुपये तक पहुंच जाती है। उनके अनुसार बेवाकिजुमैब जैसी दवा की कीमत 3 हजार से 35 हजार रुपये तक है। सेटवसीमब की एक डोज की कीमत 20 हजार से 79 हजार रुपये तक पहुंच सकती है। एफटिनिब की एक स्ट्रिप 4 हजार से 12 हजार रुपये तक की है जबकि गोसेरेलिन इंजेक्शन की कीमत 21 हजार से 29 हजार रुपये तक है। ऐसी स्थिति में आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए इलाज जारी रखना बेहद मुश्किल हो जाता है।

जीवन रक्षक दवाओं की कमी से बढ़ रहा नकली दवाओं का खतरा
देवेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पतालों में जीवन रक्षक कैंसर दवाओं की कमी का फायदा उठाकर नकली दवाओं का कारोबार बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब मरीजों को अस्पतालों में दवाएं नहीं मिलतीं तो वे मजबूरी में निजी बाजार का रुख करते हैं, जहां नकली दवाओं का खतरा बढ़ जाता है।
उन्होंने कहा कि यह केवल स्वास्थ्य का मामला नहीं बल्कि लोगों की जिंदगी से जुड़ा विषय है। सरकार को इस पर तुरंत सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि मरीजों को सुरक्षित और असली दवाएं मिल सकें।

सामान्य चिकित्सा सामग्री की भी कमी
देवेंद्र यादव ने कहा कि दिल्ली राज्य कैंसर संस्थान में केवल कैंसर की दवाओं की ही कमी नहीं है, बल्कि रोजमर्रा की चिकित्सा सामग्री भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं है। उन्होंने बताया कि बीटाडीन, डिस्पोजेबल सिरिंज, सर्जिकल मास्क, नोजल प्रोंग कैनुला और राइल्स ट्यूब जैसी सामान्य और जरूरी वस्तुओं की भी कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति अस्पताल के प्रशासनिक प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

उपराज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग
देवेंद्र यादव ने उपराज्यपाल से अपील की कि वह स्वयं इस मामले में हस्तक्षेप करें और दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए तुरंत ठोस कदम उठाएं। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाए ताकि दवाओं की कमी के कारणों का पता लगाया जा सके और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय खरीद एजेंसी के माध्यम से जल्द से जल्द आवश्यक कीमोथेरेपी दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए ताकि गरीब कैंसर मरीजों का इलाज प्रभावित न हो और उनकी जान बचाई जा सके।

मरीजों की जिंदगी बचाना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी
देवेंद्र यादव ने कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़ रहे मरीजों को समय पर इलाज और दवाएं उपलब्ध कराना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही सीधे लोगों के जीवन को प्रभावित करती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि उपराज्यपाल इस गंभीर विषय पर तत्काल ध्यान देंगे और मरीजों को राहत दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि दिल्ली के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए ताकि किसी भी मरीज को दवाओं की कमी के कारण अपनी जान न गंवानी पड़े।

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