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भारतीय जनता पार्टी के लोकसभा सांसद एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. संबित पात्रा ने आज बुधवार को नई दिल्ली स्थित पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में मीडिया को संबोधित किया और कहा कि 20 जुलाई को दिल्ली में कोई गोलीबारी नहीं हुई थी और बच्चों के माध्यम से राजनीतिक नैरेटिव गढ़ना अनुचित है। डॉ. पात्रा ने झारखंड में कथित परीक्षा अनियमितताओं से प्रभावित छात्रों की समस्याओं का उल्लेख करते हुए राहुल गांधी पर चुनिंदा मुद्दे उठाने का आरोप लगाया। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने संसद की कार्यवाही बाधित करने के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया तथा सभी बच्चों को धर्म, जाति और राजनीति से ऊपर देश का भविष्य बताते हुए निडर होकर आगे बढ़ने का संदेश दिया।

डॉ. संबित पात्रा ने कहा कि कुछ समय पहले नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें उन्होंने कुछ बातें कहीं। उनके साथ वे युवा भी मौजूद थे, जिन्होंने 20 तारीख को दिल्ली में हुए प्रदर्शन में भाग लिया था। यह प्रेस कॉन्फ्रेंस या ब्रीफिंग उन बच्चों के लिए नहीं, बल्कि केवल राहुल गांधी के लिए है। बच्चे, बच्चे होते हैं। वे हम सभी के हैं और देश का भविष्य हैं। इसलिए हम बच्चों को नमस्कार और प्रणाम करते हैं, लेकिन यह प्रेस कॉन्फ्रेंस केवल और केवल राहुल गांधी के लिए की जा रही है।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि इससे पहले भी इसी मंच से, सदन के बाहर खड़े होकर भाजपा ने पूरी स्पष्टता के साथ कहा था कि 20 तारीख को दिल्ली में संसद चलो आंदोलन के दौरान कोई गोलीबारी नहीं हुई थी। मैं पार्टी के प्रवक्ता हूं और पार्टी मुझे पूरी जिम्मेदारी के साथ यहां भेजती है। भले ही हम यहां अकेले बैठे हों, लेकिन हमारे पीछे पूरी व्यवस्था शोध के बाद हमें सामग्री उपलब्ध कराती है। उस समय भी पूरी जिम्मेदारी के साथ यही बात कही गई थी और आज भी, क्योंकि यह अत्यंत संवेदनशील विषय है तथा किसी प्रकार का भटकाव या भ्रम न फैले, इसलिए पूरी स्पष्टता, शालीनता और ठहराव के साथ हम पुनः दोहराना चाहते हैं कि 20 तारीख को दिल्ली में संसद चलो आंदोलन के दौरान कोई गोली नहीं चली थी। मासूम बच्चों के कंधों पर बंदूक रखकर राजनीति करना एक गलत परंपरा है और राहुल गांधी को ऐसा नहीं करना चाहिए। बच्चे देश का भविष्य हैं और उनका कोई दोष नहीं होता। हम स्वयं भी कभी स्कूल और कॉलेज में थे तथा आंदोलनों में भाग ले चुके हैं। हम राहुल गांधी के साथ मौजूद बच्चों से बहुत प्यार से कहना चाहते हैं कि वे निडर रहें और बिल्कुल भी घबराएं नहीं।

डॉ. पात्रा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी हो सकती है, लेकिन देश के बच्चे सभी के हैं। प्रधानमंत्री भी उनके हैं और हम सभी उनके साथ हैं। राहुल गांधी जिस झूठे नैरेटिव और चुनिंदा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं, उसे भारतीय जनता पार्टी देश के सामने उजागर करना चाहती है। देश के बच्चों को निडर रहना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर आंदोलनों आदि से भी घबराना नहीं चाहिए। झारखंड के बच्चे भी बच्चे ही हैं और वे भी आंदोलन कर रहे हैं। राहुल गांधी को झारखंड के उन बच्चों से भी संवाद करना चाहिए तथा उनकी तकलीफ और दुख को भी समझना चाहिए। हम आज झारखंड से प्रकाशित एक बहुत ही जाने-माने मीडिया हाउस का, कुछ घंटे पहले प्रकाशित, एक लेख पढ़ रहे हैं। “मैं गोल्ड मेडलिस्ट हूँ, पर डिप्रेशन और पैनिक अटैक झेल रही हूँ। पेपर लीक पर बोली रांची प्रोटेस्ट में बैठी छात्रा।”

भाजपा सांसद ने कहा कि लेख में लिखा है कि अभ्यर्थी प्रतीक्षा बताती हैं कि इस अनिश्चितता ने उनकी मानसिक स्थिति को पूरी तरह तबाह कर दिया है। प्रतीक्षा कहती हैं, “मैं इस समय डिप्रेशन से जूझ रही हूँ। कई बार पैनिक अटैक आते हैं। पढ़ाई छोड़कर घर लौटने का मन करता है। खुद को परिवार पर बोझ महसूस करने लगी हूँ। बचपन से हर कक्षा में अव्वल रही, पोस्ट ग्रेजुएशन में यूनिवर्सिटी टॉप कर गोल्ड मेडल हासिल किया, बीएड पूरा किया, लेकिन आज अपनी ही दुर्दशा देखी नहीं जाती। रिश्तेदारों के ताने, शादी का दबाव और परीक्षा रद्द होने का डर, झारखंड के इस सिस्टम ने मुझे डिप्रेशन और पैनिक अटैक की मरीज बना दिया है।” झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी में हुई कथित धांधली के खिलाफ आवाज उठाते हुए अभ्यर्थी ने यह बात कही है। इस पूरी घटना से जुड़ी और भी जानकारी है, लेकिन समय की कमी के कारण हम पूरी कहानी नहीं बता रहे हैं, जिसे आज एक बहुत ही जाने-माने चैनल ने प्रकाशित किया है। यह जो चुनिंदा दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है, उसमें झारखंड के बच्चों पर हो रहे अत्याचार को राहुल गांधी सुविधानुसार दबा रहे हैं।

डॉ. संबित पात्रा ने कहा कि राहुल गांधी जी झारखंड नहीं जा रहे हैं क्योंकि वहाँ उनकी सरकार है। राहुल गांधी ने अपने वक्तव्य में कहा था कि माननीय गृह मंत्री सदन में नहीं आ रहे हैं। राहुल गांधी स्वयं सदन चलने कहां दे रहे हैं? हम सबके पहुंचने से पहले केंद्रीय गृह मंत्री सदन पहुंच जाते हैं तथा हम सबके लौटने के बाद भी वह सदन में बने रहते हैं। कई बार मैं स्वयं और अन्य सदस्य देख चुके हैं कि श्री अमित शाह देर रात, यहाँ तक कि रात 1 या 2 बजे तक भी सदन में रहते हैं। जब सदन 5 या 10 मिनट से अधिक चलने ही नहीं दिया जा रहा, तब यह कहना उचित नहीं है कि माननीय गृह मंत्री सदन में नहीं आते। सदन सुबह 11 बजे शुरू होता है, लेकिन राहुल गांधी और उनके सांसदों द्वारा ऐसा हंगामा किया जाता है कि कुछ ही मिनटों में सदन स्थगित करना पड़ता है। इसके बाद जब सदन दोबारा बैठता है, तब भी स्पीकर की डेस्क तक थपथपाई जाती है, तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया जाता है और उन्हें टीवी पर दिखाने का प्रयास किया जाता है। ऐसे में सदन चल ही नहीं पाता।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि जिस विभाग पर चर्चा होती है, उस विभाग के मंत्री सदन में अवश्य उपस्थित रहते हैं। केंद्रीय गृह मंत्री के विभाग पर चर्चा होगी तो वह भी निश्चित रूप से उपस्थित रहेंगे। श्री अमित शाह सदन में हैं, लेकिन राहुल गांधी किसी भी विषय पर चर्चा नहीं होने दे रहे हैं और सदन को चलने नहीं दे रहे हैं। देश यह सब देख रहा है। राहुल गांधी अपने दम पर आज कोई नैरेटिव स्थापित नहीं कर पा रहे हैं, इसलिए दूसरों के कंधे पर बंदूक रखकर नैरेटिव स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं, जो राजनीति में उचित नहीं है। यह प्रेस कॉन्फ्रेंस राहुल गांधी, कांग्रेस पार्टी और उसकी राजनीति के तौर-तरीकों पर केंद्रित है, बच्चों पर नहीं। आज मुस्कान ने भी अपना परिचय देते हुए कहा कि वह मुस्कान शर्मा हैं। मुस्कान शर्मा हों या मुस्कान खान, दोनों ही इस देश की बेटियां हैं। शर्मा हों या खान, वे हिंदुस्तान की बेटियां हैं।

डॉ. पात्रा ने कहा कि “सबका साथ, सबका विश्वास, सबका विकास और सबके प्रयास” से ही देश आगे बढ़ता है। इसलिए राहुल गांधी द्वारा विभाजनकारी एजेंडा स्थापित करने का प्रयास बहुत गलत है। इस देश का हृदय बहुत विशाल है। इस देश ने ऐसे दृश्य भी देखे हैं, जहाँ साधु के वेश में संसद के बाहर बैठे व्यक्ति को, त्रिपुंड लगाए और गेरुआ वस्त्र पहने होने के बावजूद, घसीटा गया और उसकी पिटाई की गई, फिर भी इस देश ने श्रावण मास में उस विष को भी धैर्यपूर्वक सह लिया और उफ तक नहीं की। बच्चों के माध्यम से देश में विभाजन के बीज बोने का प्रयास नहीं होना चाहिए। बच्चों, कभी यह मत सोचिए कि इस देश के बच्चों को धर्म के आधार पर विभाजित करने का प्रयास सफल हो सकता है। निडर होकर आगे बढ़िए। हम सब आपके साथ हैं, क्योंकि इस देश का हर बच्चा हमारा अपना है।

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