
भारतीय टीम के पूर्व स्पिनर अमित मिश्रा ने इस बात पर निराशा जताई है कि वह नियमित रूप से टीम में जगह नहीं बना पा रहे थे अमित ने गुरुवार को42 साल की उम्र में क्रिकेट के सभी प्रारूपों को अलविदा कहा 42 वर्षीय हरियाणा के इस गेंदबाज ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत साल2003 में की थी और 2017 तक भारत का प्रतिनिधित्व किया. लंबे समय से राष्ट्रीय टीम का हिस्सा रहे अमित ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरानदो अलग दौर का सामना किया. पहला दौर महान स्पिनर अनिल कुंबले की जगह लेने के साथ उनसे की जाने वाली अपेक्षाओं के भारी दबाव सेनिपटने में बीता तो दूसरा दौर रविचंद्रन अश्विन और रवींद्र जडेजा के आने से हुई प्रतिस्पर्धा से निपटने का रहा.
खीचा सबका ध्यान
इसमें से ऑफ स्पिनर अश्विन जहां महेंद्र सिंह धोनी की योजना का हिस्सा रहे तो वहीं जडेजा विराट कोहली की रणनीति के अनुकूल रहे। लेकिन लेगब्रेक गेंदबाजी करने वाले और शानदार गुगली फेंकने वाले मिश्रा को अश्विन और जडेजा के साथ तीसरे विकल्प के रूप में काफी कम इस्तेमाल कियाजाता. अमित मिश्रा ने साल 2008 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया था उन्होंने अपने पहले ही मैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए पहली पारीमें पांच विकेट झटके और दूसरी पारी में भी दो विकेट लेकर सबका ध्यान खींचा.
सकारात्मक बने रहने की कोशिश
अमित ने 22 टेस्ट में 76 विकेट लिए हैं उन्होंने प्रतिस्पर्धी क्रिकेट से संन्यास की घोषणा के बाद न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, यह बहुत निराशाजनकचीज थी कभी आप टीम में होते हैं, कभी बाहर। कभी आपको प्लेइंग-11 में खेलने का मौका मिलता, कभी नहीं. निश्चित रूप से यह निराशाजनक हैइसमें कोई शक नहीं कि मैं कई बार निराश हुआ. लेकिन आपका सपना तो भारत के लिए क्रिकेट खेलना होता है आप राष्ट्रीय टीम के साथ हो औरलाखों लोग टीम में जगह बनाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हो. आप भारतीय टीम के 15 खिलाड़ियों में से एक हो तो मैंने सकारात्मक बने रहने कीकोशिश की.