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आप नेता सत्येंद्र जैन के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में क्लोजर रिपोर्ट को मंजूरी मिलने के बाद आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया की पहलीप्रतिक्रिया आई है। जिसमें उन्होंने निशाना साधते हुए कहा कि आठ साल तक जांच चली. लेकिन भ्रष्टाचार का एक रुपया भी बरामद नहीं हुआ साथही उन्होंने भाजपा पर भी तंज कसा. आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया ने एक्स पर लिखा कि आठ साल तक जांच चली. सीबीआई-ईडी कीरेड और मीडिया ट्रायल हुआ. यहां तक कि बच्चों के कपड़े तक खंगाले गए. लेकिन कोर्ट में खुद सीबीआई ने कहा कि एक रुपये का भी भ्रष्टाचार नहींमिला. आगे लिखा कि तो जिन्होंने झूठा केस गढ़ा था. जिन्होंने सत्येंद्र जैन को विलेन बनाकर चैनलों पर चीख-चीखकर टीआरपी बटोरी गई. जिन्होंने“भ्रष्टाचार उजागर” की भाजपाई स्क्रिप्ट पढ़ पढ़कर सत्येंद्र को जेल भेजने का जश्न मनाया था. भाजपा पर तंज कसते हुए लिखा कि भाजपा औरउसकी झूठ फैलाने की नौकरी बजाकर जीने वाली जमात को अब माफी मांगनी चाहिए कि देश से, सच्चाई से और उस परिवार से जिसे आठ सालतक बदनाम किया गया. क्या झूठ फैलाने वालों की कोई जवाबदेही नहीं होती है.

विजेंद्र गुप्ता करते है झूठी शिकायत
आप नेता सौरभ भारद्वाज ने सत्येंद्र जैन पर केस क्लोज होने पर अपनी प्रतिक्रिया दी है एक्स पर भारद्वाज ने लिखा कि दिल्ली विधानसभा अध्यक्षविजेंद्र गुप्ता विजेंद्र गुप्ता झूठी शिकायत करते हैं. एलजी उसे सीबीआई को भेज देते हैं. शिकायत में कुछ होता नहीं, फिर भी सत्येंद्र जैन पर झूठा केसदर्ज होता है. बिना सबूत के सीबीआई जांच शुरू करती है और सत्येंद्र जैन और उनके परिवार और पार्टी को लगातार परेशान किया जाता है. क्या इसतरह के उत्पीड़न के लिए कानूनी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए?


लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में पेशेवरों की अनियमित नियुक्ति और असंबंधित परियोजना निधि से भुगतान के आरोपों से संबंधित एक मामले मेंकेंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) की तरफ से दायर क्लोजर रिपोर्ट को राउज एवेन्यू कोर्ट ने स्वीकार कर लिया. मामला दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्रीसत्येंद्र जैन और अन्य के खिलाफ था.
समर्थन करने के लिए नहीं मिला कोई सबूत
विशेष न्यायाधीश दिग्विनय सिंह ने कहा था कि कई वर्षों की जांच के बावजूद आरोपितों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम या किसी अन्यअपराध के तहत आरोपों का समर्थन करने के लिए कोई सुबूत नहीं मिला. कोर्ट ने कहा कि इतने लंबे समय बाद भी जांच एजेंसी को कोई सुबूत नहींमिला ऐसे में आगे की कार्यवाही का कोई औचित्य नहीं है। भ्रष्टाचार के प्रावधानों को लागू करने के लिए कुछ सामग्री तो होनी ही चाहिए. केवलकर्तव्य की उपेक्षा या कर्तव्य का अनुचित प्रयोग ही अधिनियम के तहत उल्लंघन नहीं माना जा सकता. दिल्ली सरकार के सतर्कता निदेशालय की एकशिकायत के आधार पर सत्येंद्र जैन और अन्य लोक निर्माण विभाग अधिकारियों के खिलाफ 2018 में प्राथमिकी की गई थी।
आरोप है कि जैन और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने भर्ती और वित्तीय नियमों का उल्लंघन करते हुए सलाहकारों की एक क्रिएटिव टीम कीअनियमित रूप से नियुक्ति की गई थी. यह भी आरोप लगाया गया था कि भर्ती प्रक्रिया में मानक भर्ती प्रक्रियाओं को दरकिनार कर दिया गया था औरवित्त विभाग की मंजूरी के बिना बारापुला फेज-तीन जैसी असंबंधित परियोजनाओं पर खर्च कर दिया गया था. लगभग चार वर्षों तक मामले की जांचकरने के बाद सीबीआई को कोई आपराधिक मामला या व्यक्तिगत लाभ, रिश्वतखोरी के सुबूत नहीं मिले.

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