वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को अहम सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, जस्टिस पी.वी. संजयकुमार और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने इस मामले में दाखिल करीब 70 याचिकाओं पर विचार किया। इन याचिकाओं में वक्फ संशोधनकानून की कई धाराओं को संविधान के विरुद्ध बताते हुए उन्हें रद्द करने की मांग की गई है।
प्रसिद्ध वकीलों की बहस, अंतरिम आदेश की संभावना
सुनवाई के दौरान असदुद्दीन ओवैसी, कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता जैसे नामचीन वकीलों ने पक्ष रखा।शुरुआत में चीफ जस्टिस ने संकेत दिया कि कोर्ट अंतरिम आदेश जारी करेगा जो “इक्विटी” को संतुलित करेगा। उन्होंने कहा कि जो संपत्तियां कोर्टद्वारा वक्फ घोषित की गई हैं, उन्हें फिलहाल गैर-वक्फ नहीं माना जाएगा और कलेक्टर की कार्रवाई जारी रह सकती है। हालांकि, अंत में कोर्ट ने इसपर कोई औपचारिक आदेश नहीं दिया और मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को तय की गई।
राज्य सरकारें कानून के समर्थन में उतरीं
वहीं दूसरी ओर, कई राज्य सरकारें इस कानून के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं। छत्तीसगढ़, असम, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा औरराजस्थान ने याचिकाकर्ताओं की मांगों का विरोध करते हुए मामले में पक्षकार बनने की अनुमति मांगी। इन राज्यों का कहना है कि वक्फ संशोधनकानून संविधान के अनुरूप है और इसे रद्द नहीं किया जाना चाहिए।
CJI की सिब्बल को सलाह – मुख्य बिंदु रखें
सुनवाई के दौरान जब वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने लंबी दलीलें पेश करनी शुरू कीं, तो मुख्य न्यायाधीश ने उन्हें संक्षिप्त रहने की सलाह दी।उन्होंने कहा कि दाखिले की शुरुआती सुनवाई के स्तर पर समय की कमी होती है, इसलिए 1, 2, 3 के बिंदुओं में अपना पक्ष रखें। साथ ही, कोर्ट नेयह स्पष्ट किया कि उन्हें केवल दो सवालों के जवाब चाहिए – क्या इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट को सुनवाई करनी चाहिए या इसे हाईकोर्ट भेजा जानाचाहिए, और याचिकाकर्ता किन मुद्दों पर बहस करना चाहते हैं।
केंद्र सरकार का रुख – कानून को खतरा नहीं
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में भरोसा जताया है कि यह कानून, जिसे संसद ने पारित किया है, उसे कोर्ट निरस्त नहीं करेगा। सरकार का मानना है किवक्फ संशोधन अधिनियम 2025 पूरी तरह से संवैधानिक है और समाजिक व कानूनी जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
फैसला सुप्रीम कोर्ट में ही होगा
सुनवाई के अंत में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस संवेदनशील मामले में अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा ही लिया जाएगा और अगली सुनवाई गुरुवारको होगी।