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बिहार की सियासत में दोस्ती-दुश्मनी की नई इबारत लिखी जा रही है। महागठबंधन की ‘युवा जोड़ी’ राहुल गांधी-तेजस्वी यादव टिकट बंटवारे के पहलेपायदान पर ही भिड़ गई। दोनों कुछ नहीं बोल रहे, लेकिन दोनों दलों के सूरमा एक- दूसरे को ज़ख़्मी कर गए। यूं कहें कि नेट प्रैक्टिस में हीमहागठबंधन के खिलाड़ी ऐसा भिड़े कि मुकाबले से पहले तमाम खिलाड़ी रिटायर्ड हर्ट होते दिख रहे हैं। वहीं, पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम नीतीशकुमार की जोड़ी और टीम काफी हद तक एकजुट दिख रही है। कांग्रेस-राजद के बीच सीट बंटवारे की खींचतान अब खुली जंग में बदल चुकी। करीबदर्जनभर सीटों पर दोनों दलों ने एक-दूसरे के खिलाफ उम्मीदवार उतार दिए। वैशाली से लालगंज, कहलगांव से राजापाकड़ तक ‘दोस्ती में कुश्ती’ कानजारा साफ। कांग्रेस के दलित नेता राजेश राम के मुकाबले राजद ने सुरेश पासवान को टिकट थमा दिया। पासवान ने साफ कहा, ‘कई सीटों परफ्रेंडली फाइट होगी।’ वहीं राजेश राम ने साफ कहा फाइट में फ्रेंडली कुछ नहीं होता। लड़ाई तो लड़ाई है।

जदयू-बीजेपी संगठन और बूथ प्रबंधन की कमान खुद थामी
कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी की रिपोर्ट को ठेंगा दिखाकर टिकट बंटवारे से असंतोष चरम पर है। वरिष्ठ नेता तारिक अनवर ने खुला सवाल उठाया कि“जो कल तक कांग्रेस को कोसते थे, उन्हें टिकट कैसे?” योगेंद्र यादव के करीबी अनुपम को टिकट मिलने से कार्यकर्ताओं में बगावत भड़क उठी है।राजद के भीतर भी कई सीटों पर नाराजगी, और कांग्रेस में नेतृत्व-संवाद की कमी से गठबंधन की ‘एकता’ पर खतरा मंडरा रहा। मौजूदा स्थिति से खिन्नबिहार कांग्रेस के प्रवक्ता और प्रदेश के शोध विभाग के अध्यक्ष आनंद माधव ने कहा कि ‘हम राहुल गांधी को प्रधानमंत्री देखना चाहते हैं, लेकिनवर्तमान व्यवस्था के खिलाफ आवाज नहीं उठाई तो ये कांग्रेस के लोकतांत्रिक मूल्यों और फासीवाद के खिलाफ हमारे संघर्ष को कमजोर करेगा।उन्होंने करीब 150 कांग्रेस के पूर्व विधायकों, जिलाध्यक्षों और पदाधिकारियों के साथ मीडिया से बात की और कहा कि हम आवाज उठा रहे हैं ताकिआलाकमान तक सच्चाई पहुंचे। इधर, शुरुआती रस्साकशी के बाद एनडीए में तालमेल बढ़िया दिख रहा है। गृह मंत्री अमित शाह ने जदयू-बीजेपीसंगठन और बूथ प्रबंधन की कमान खुद थामी। उन्होंने इसे ‘चुनावी अनुशासन’ का नया मॉडल बताया।

वहीं राहुल ने चुनाव से पहले वोट चोरी पर तो खूब बवाल काटा
गृह मंत्री अमित शाह ने पटना के होटल मौर्यालोक पहुंचते ही संगठन के ‘नट-बोल्ट’ कस दिए। पहले अलीनगर से पराजय की कगार पर खड़ी मैथिलीठाकुर के सामने बागी उम्मीदवार पप्पू सिंह को बिठाया और फिर औरंगाबाद सीट पर खड़े 2 निर्दलीय उम्मीदवारो को भी समझा लिया। शाह केमैनेजमेंट ने पार्टी को ‘रेस में वापसी’ का मौका दिया। पीएम मोदी बिहार में 12 मेगा रैलियां करेंगे। 23 अक्तूबर को सासाराम, भागलपुर, गया; 28 को पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा; 1 नवंबर को पूर्वी चंपारण, समस्तीपुर, छपरा; 3 को पश्चिम चंपारण, सहरसा, अररिया। इनसे NDA का प्रचारअभियान निर्णायक मोड़ लेगा। मोदी जब जाते हैं तो चुनावी चक्रवात पैदा करते हैं। वहीं राहुल ने चुनाव से पहले वोट चोरी पर तो खूब बवाल काटा, लेकिन अब बिहार से जैसे वह दूर हुए, कांग्रेस और महागठबंधन पर उसका प्रभाव ख़राब पड़ा है। बिहार का चुनाव विचारों से ज्यादा टीम मैनेजमेंट काहै। महागठबंधन सीटों पर उलझा, टिकटों पर बिखरा और प्रचार पर अटका। एनडीए एकजुट रणनीति से मैदान पर हावी दिख रहा है वहीं.. एक तरफफ्रेंडली फाइट की फिजा, दूसरी ओर नीतीश-मोदी की केमिस्ट्री..! दीवाली के बाद हवाएं कैसी चलेंगी, उससे ही तय होगा कि 14 नवंबर को बिहार मेंसत्ता की दीवाली कौन मनायेगा।

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