केंद्र सरकार ने दी यात्रा फिर से शुरू करने की मंजूरी
करीब पांच साल के लंबे अंतराल के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने का फैसला लिया गया है। केंद्र सरकार ने इसकीआधिकारिक घोषणा करते हुए बताया कि आगामी यात्रा सत्र से श्रद्धालु एक बार फिर कैलाश और मानसरोवर की पवित्र यात्रा कर सकेंगे।
कोविड-19 महामारी और भारत-चीन सीमा पर बढ़े तनाव के कारण 2020 से कैलाश मानसरोवर यात्रा स्थगित कर दी गई थी। अब हालात सामान्यहोने के बाद केंद्र ने इसे फिर से बहाल करने का निर्णय लिया है, जिससे देशभर में श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल है।
विदेश मंत्रालय करेगा यात्रा का संचालन
कैलाश मानसरोवर यात्रा का संचालन भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा किया जाएगा। मंत्रालय हर साल एक निर्धारित समय पर यात्रा आयोजितकरता है, जिसमें यात्रियों को सीमित बैचों में भेजा जाता है।
विदेश मंत्रालय ने कहा है कि यात्रा के लिए जल्द ही आवेदन प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इच्छुक यात्री मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम सेऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इसके साथ ही स्वास्थ्य जांच, पासपोर्ट, वीज़ा प्रक्रिया और अन्य नियमों की जानकारी भी समय रहते साझा कीजाएगी।
यात्रा के दो मार्ग
परंपरागत रूप से कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए दो मार्ग उपलब्ध हैं:
लिपुलेख दर्रा मार्ग (उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से होकर)
नाथू ला मार्ग (सिक्किम के रास्ते)
लिपुलेख मार्ग अपेक्षाकृत कठिन है, जिसमें यात्रियों को ट्रेकिंग करनी पड़ती है, जबकि नाथू ला मार्ग से वाहन द्वारा यात्रा संभव होती है, जो वरिष्ठनागरिकों के लिए सुविधाजनक है। दोनों मार्गों पर यात्रियों को चीन के तिब्बत ऑटोनॉमस रीजन (TAR) में प्रवेश करना होता है।
इस बार सरकार दोनों ही मार्गों के विकल्प खोलने पर विचार कर रही है, ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु यात्रा में शामिल हो सकें।
तीर्थयात्रियों के लिए नए दिशा-निर्देश
विदेश मंत्रालय ने यात्रियों के लिए कुछ नए दिशा-निर्देश जारी करने की योजना बनाई है। इन दिशा-निर्देशों में स्वास्थ्य प्रमाण पत्र अनिवार्य रहेगा, जिसमें उच्च ऊंचाई पर यात्रा करने के लिए शारीरिक रूप से फिट होने का प्रमाण देना होगा।
इसके अलावा कोविड-19 के बाद बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए यात्रियों को यात्रा बीमा और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं कालाभ उठाने की सलाह दी जाएगी। मंत्रालय यात्रियों की सुरक्षा के मद्देनजर विशेष व्यवस्थाएं करेगा, जिसमें मेडिकल टीम, आवश्यक उपकरण औरसंचार सुविधा शामिल होगी।
यात्रा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील हिंदू, बौद्ध, जैन और बोंग धर्मों के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र स्थल हैं। हिंदू मान्यता के अनुसार, कैलाशपर्वत भगवान शिव का निवास स्थान है और मानसरोवर झील को पवित्र जल का स्रोत माना जाता है।
हर साल हजारों श्रद्धालु इस कठिन यात्रा पर जाकर दर्शन करने का सपना देखते हैं। यात्रा न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्किआत्मानुशासन, धैर्य और साहस की भी परीक्षा है।
सीमा परिस्थितियों में सुधार के बाद लिया गया फैसला
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत-चीन सीमा पर हाल के महीनों में तनाव में आई कमी के चलते यह निर्णय संभव हो पाया है। दोनों देशों के बीच कई दौरकी सैन्य और कूटनीतिक बातचीत के बाद सीमावर्ती इलाकों में हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं।
सरकार का मानना है कि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कूटनीतिक सहमति और व्यवस्थाएं अब फिर से तैयार हो गई हैं।
श्रद्धालुओं में उत्साह
कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू होने की खबर से देशभर के श्रद्धालुओं में खुशी की लहर है। विभिन्न धार्मिक संगठनों ने सरकार के इस फैसले कास्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि अधिक से अधिक लोगों को इस पवित्र तीर्थ के दर्शन का अवसर मिलेगा।
कई तीर्थयात्रियों ने कहा कि वर्षों से यात्रा पर जाने का इंतजार कर रहे थे और अब अपने जीवन के सबसे बड़े आध्यात्मिक अनुभव को साकार करने कामौका मिलेगा।