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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को लेकर वैश्विक स्तर पर तस्वीर धीरे-धीरे साफ हो रही है। कई देशों ने इस बोर्ड में शामिल होने की सहमति दे दी है, जबकि कुछ यूरोपीय देशों ने फिलहाल इससे दूरी बना ली है। वहीं बड़ी संख्या में देश ऐसे हैं, जिन्होंने अभी तक कोई स्पष्ट फैसला नहीं लिया है।
डोनाल्ड ट्रंप की अध्यक्षता वाला यह बोर्ड शुरू में गाजा संघर्षविराम योजना की निगरानी के लिए एक छोटे समूह के रूप में सोचा गया था। लेकिन अब ट्रंप प्रशासन की महत्वाकांक्षाएं बढ़ गई हैं। बोर्ड को भविष्य में अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के समाधान और मध्यस्थता की भूमिका में देखने का संकेत दिया गया है। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के अनुसार करीब 50 देशों को आमंत्रण भेजा गया है, जिनमें से लगभग 30 देशों के शामिल होने की उम्मीद जताई गई है। एसोसिएटेड प्रेस द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार जानिए कौन सी लिस्ट में कौनसा देश शामिल है?

अमेरिकी राष्ट्रपति के आह्वान का स्वागत किया
अब तक जिन देशों ने बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने की सहमति दी है, उनमें अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अजरबैजान, बहरीन, बेलारूस, मिस्र, हंगरी, इंडोनेशिया, जॉर्डन, कजाखस्तान, कोसोवो, मोरक्को, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, तुर्किये, संयुक्त अरब अमीरात, उज्बेकिस्तान, वियतनाम और इस्राइल जैसे देशों के नाम शामिल है।
सऊदी अरब साम्राज्य के विदेश मंत्रालय ने ट्वीट करते हुए बताया कि सऊदी अरब, तुर्की, मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, कतर और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अपने नेताओं को शांति बोर्ड में शामिल होने के लिए दिए गए निमंत्रण का स्वागत करते हैं। कतर के विदेश मंत्रालय ने ट्वीट करते हुए बताया कि एक संयुक्त बयान में आठ अरब और इस्लामी देशों ने शांति परिषद में शामिल होने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति के आह्वान का स्वागत किया है।

अब भी गैर-प्रतिबद्ध बनी हुई
कुछ यूरोपीय देशों ने इस बोर्ड में शामिल होने से अभी इनकार किया है। इनमें फ्रांस, नॉर्वे, स्लोवेनिया और स्वीडन जैसे देश शामिल हैं। कई अहम देश और संस्थाएं अब भी गैर-प्रतिबद्ध बनी हुई हैं। इनमें भारत, ब्रिटेन, चीन, क्रोएशिया, जर्मनी, इटली, यूरोपीय संघ की कार्यकारी संस्था, पराग्वे, रूस, सिंगापुर और यूक्रेन शामिल हैं।
कई देशों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शांति बोर्ड में शामिल होने की बात कही है, जबकि कुछ यूरोपीय देशों ने निमंत्रण अस्वीकार कर दिया है। कई देशों ने अभी तक ट्रम्प के निमंत्रण का जवाब नहीं दिया है।

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