
कर्नाटक में धर्मस्थल पर कथित दुष्कर्म, हत्याएं और शवों को दफनाने के मामले में जांच तेज हो गई है. ऐसे में कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया नेरविवार को कहा कि धर्मस्थल में बीते 20 वर्षों में कथित दुष्कर्म, हत्याएं और शवों को दफनाने के गंभीर आरोपों की जांच के लिए एनआईए कीजरूरत नहीं है. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इस मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) को पूरी स्वतंत्रता दी गई है. सीएमसिद्धारमैया ने आगे कर्नाटक में विपक्षी दल जेडीएस और भाजप पर राजनीति करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि विपक्ष (जेडीएस और भाजपा) इस मुद्दे पर राजनीति कर रहा है दोनों दल धर्मस्थल में अलग-अलग रैलियां कर रहे हैं और सरकार की आलोचना कर रहे हैं. लेकिन धर्मस्थल केधर्माधिकारी वीरेंद्र हेगड़े ने खुद एसआईटी जांच का स्वागत किया है. मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि सच्चाई सामने आनी चाहिए. अगर जांच न हो, तोशक की तलवार हमेशा लटकी रहेगी.
एसआईटी की मांग
हमने एसआईटी इसीलिए बनाई है। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता ने मजिस्ट्रेट के सामने बयान दिया था और कई संगठनों ने एसआईटी की मांग कीथी. इसके साथ ही जब उनसे भाजपा की एनआईए जांच की मांग पर सवाल किया गया तो उन्होंने पलटकर पूछा कि जब भाजपा सत्ता में थी, तबक्या उन्होंने कोई मामला सीबीआई को सौंपा था? इसके अलावा सीएम ने स्पष्ट किया कि एसआईटी को जांच की पूरी छूट दी गई है और सरकारदखल नहीं दे रही. बता दें कि इस पूरे विवाद की शुरुआत सीएन चिन्नैया नामक शख्स के आरोपों से हुई, जिसे बाद में झूठे आरोप (झूठी गवाही) केमामले में गिरफ्तार किया गया.
राजनीति करने का लगा आरोप
उसने दावा किया था कि पिछले 20 वर्षों में धर्मस्थल के जंगलों में कई शव, जिनमें कुछ महिलाओं के भी थे, दफनाए गए हैं। मामले में एसआईटी नेचिन्नैया द्वारा बताए गए स्थानों पर खुदाई की, जहां दो जगहों पर हड्डियों के अवशेष मिले हैं. अब जांच चल रही है और रिपोर्ट का इंतजार है. कर्नाटकके मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने धर्मस्थल में कथित दुष्कर्म और हत्याओं की जांच एनआईए को सौंपने की बात पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि मामलेकी जांच के लिए SIT को पूरी स्वतंत्रता दी है. उन्होंने NIA जांच की मांग को खारिज करते हुए BJP-JDS पर राजनीति करने का आरोप लगाया.