प्रेस वार्ता में ‘आप’ का खुलासा:
आम आदमी पार्टी ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिल्ली की भाजपा सरकार और निजी स्कूलों के बीच गुप्त समझौते का खुलासा किया। पार्टी कीवरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने आरोप लगाया कि 6 अप्रैल को दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने अपने आवास पर बड़े प्राइवेट स्कूलों केसंचालकों के साथ गुप्त बैठक की। इस बैठक में स्कूल मालिकों को आश्वासन दिया गया कि उन्हें हर साल 10% फीस बढ़ाने की अनुमति देने काआदेश जल्द ही सरकार द्वारा जारी किया जाएगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में आतिशी के सवाल:
आतिशी ने इस बैठक को लेकर शिक्षा मंत्री से तीन अहम सवाल पूछे—पहला, क्या उनके आवास पर यह बैठक वाकई हुई थी? दूसरा, क्या निजीस्कूलों को फीस बढ़ोतरी का अधिकार देने का वादा किया गया? और तीसरा, क्या प्राइवेट स्कूल संचालकों से किसी तरह का आर्थिक लाभ लेकरमाता-पिता को धोखा दिया गया?
फीस वृद्धि से अभिभावकों में आक्रोश:
प्रेस वार्ता में आतिशी ने बताया कि हाल ही में कई निजी स्कूलों ने 30% से 80% तक फीस बढ़ाई है, जिससे अभिभावकों में भारी आक्रोश है। उन्होंनेकहा कि दिल्ली की भीषण गर्मी में हजारों अभिभावक सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन स्कूल प्रशासन ने उनकी बात सुनने से इनकार करदिया। कुछ स्कूलों ने तो विरोध के दौरान दरवाजे तक नहीं खोले।
भाजपा और निजी स्कूलों की सांठगांठ:
‘आप’ नेताओं का आरोप है कि भाजपा और निजी स्कूलों के बीच गहरा रिश्ता है। उन्होंने बताया कि प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष भरत अरोड़ाभाजपा के सक्रिय पदाधिकारी हैं और दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा के प्रचार में भी शामिल थे। इस आधार पर आम आदमी पार्टी का दावा हैकि भाजपा सरकार निजी स्कूलों के हित में काम कर रही है, न कि अभिभावकों के पक्ष में।
पूर्ववर्ती ‘आप’ सरकार की नीति:
आतिशी ने कहा कि आम आदमी पार्टी की पिछली सरकार ने निजी स्कूलों की मनमानी फीस बढ़ोतरी को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए थे। कईस्कूलों की ऑडिट कराई गई, गैरकानूनी रूप से वसूली गई फीस लौटाई गई और फीस नियंत्रण के लिए कोर्ट में भी लड़ा गया। लेकिन भाजपा सरकारअब इन स्कूलों को खुली छूट देने की तैयारी में है।
शिक्षा मंत्री से सीधा जवाब मांगा:
नेता प्रतिपक्ष ने शिक्षा मंत्री आशीष सूद से स्पष्ट जवाब देने की मांग की कि क्या उन्होंने प्राइवेट स्कूल मालिकों से मिलकर अभिभावकों के हितों केसाथ समझौता किया है? उन्होंने कहा कि इस तरह की सांठगांठ से दिल्ली के माता-पिता को भारी आर्थिक बोझ झेलना पड़ेगा और इसका राजनीतिकजवाब भी सरकार को देना होगा।