आय दोगुनी नहीं, अब ‘बहु-गुणित’ होगी मुख्यमंत्री योगी का नया कृषि मॉडल, गन्ने के साथ दलहन-तिलहन की खेती से मालामाल होंगे किसान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि उत्तर प्रदेश को कृषि क्षेत्र में नई छलांग दिलाने का सबसे प्रभावी तरीका ‘गन्ना के साथ तिलहनी एवं दलहनी अन्तः फसली खेती’ को बड़े पैमाने पर लागू करना है। उन्होंने कहा कि यह मॉडल गन्ना किसानों की आय को केवल दोगुना नहीं, बल्कि ‘बहु-गुणित’ करने की क्षमता रखता है। मुख्यमंत्री सोमवार को इस विषय पर आयोजित उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गन्ने के साथ सरसों, मसूर, उर्द और मूंग जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की अंतःफसल किसानों को अतिरिक्त उत्पादन, कम लागत और पूरे वर्ष स्थिर आय उपलब्ध कराती है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति अधिक मजबूत होती है। वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक आधार पर किया जाएमुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कृषि योग्य भूमि का क्षैतिज विस्तार अब संभव नहीं है, इसलिए ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के लक्ष्य के लिए उत्पादन बढ़ाने का एकमात्र रास्ता इकाई क्षेत्रफल से अधिक फसल उत्पादन है। उन्होंने कहा कि ‘गन्ना आधारित अंतःफसली खेती उत्तर प्रदेश के कृषि भविष्य का नया मॉडल है। यह किसानों को अधिक उत्पादन, अधिक कमाई और जोखिम से सुरक्षा तीनों प्रदान करती है। मुख्यमंत्री ने इस योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक मिशन मोड में लागू करने के निर्देश दिए। वर्तमान में प्रदेश में 29.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती होती है, जिसमें 14.64 लाख हेक्टेयर नया बोया गया क्षेत्र और 14.86 लाख हेक्टेयर पेड़ी शामिल है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े क्षेत्र में तिलहन और दलहन की अंतःफसल जोड़ने से उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और साथ ही प्रदेश एवं देश की तिलहन-दलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को नई मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि कृषि विज्ञान केंद्र एवं कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से क्रियान्वित करते हुए अंतःफसल का चयन वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक आधार पर किया जाए।
योगी आदित्यनाथ ने यूपी में परियोजनाओं की वित्तीय स्वीकृति प्रक्रिया तेज, सरल और पारदर्शी बनाने के दिए निर्देश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में परियोजनाओं की वित्तीय स्वीकृति प्रक्रिया को तेज, सरल और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि विभागीय मंत्री स्तर से मिलने वाली स्वीकृति की सीमा, जो अभी 10 करोड़ रुपये तक है, उसे बढ़ाकर 50 करोड़ रुपये किया जाए। 50 से 150 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं की मंजूरी वित्त मंत्री स्तर से और 150 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाओं की स्वीकृति मुख्यमंत्री स्तर से दी जाए, जिससे परियोजनाओं को समय पर वित्तीय मंजूरी मिले और काम तेजी से आगे बढ़े। मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को निर्देश दिया कि वे अपनी वार्षिक कार्ययोजना 15 अप्रैल तक हर हाल में स्वीकृत करा लें। समयसीमा का पालन न करने वाले विभागों की सूची मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी परियोजना की लागत में 15% से ज्यादा बढ़ोतरी होने पर विभाग कारण सहित पुनः अनुमोदन प्राप्त करे। उत्तर प्रदेश में राज्य गारंटी पॉलिसी लागू की जाएमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को वित्त विभाग की विस्तृत समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने राज्य की राजकोषीय स्थिति, बजट प्रबंधन, पूंजीगत व्यय, निर्माण कार्यों की व्यवस्था, एकमुश्त प्रावधान, डिजिटल वित्तीय सुधार, कोषागार प्रक्रियाएं, पेंशन व्यवस्था और विभागीय नवाचारों पर विस्तृत चर्चा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को सुदृढ़, पारदर्शी और रिजल्ट ओरिएंटेड वित्तीय प्रबंधन का आदर्श राज्य बनाना है। इसके लिए सभी विभाग समयबद्धता, गुणवत्ता, पारदर्शिता और डिजिटल प्रक्रियाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने निर्देश दिए कि केंद्र सरकार की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में राज्य गारंटी पॉलिसी लागू की जाए। राज्य फ्रंट रनर श्रेणी में पहले स्थान परमुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि यह सुनिश्चित किया जाए कि अल्प-वेतनभोगी कर्मियों, जैसे आशा बहनों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय हर माह तय तारीख को उनके बैंक खातों में पहुंच जाए। जिन योजनाओं में केंद्रांश मिलता है, वहां राज्य अपने मद से मानदेय समय पर जारी करे, ताकि किसी कर्मी को देरी न हो। यह व्यवस्था यथाशीघ्र लागू की जाए। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2023-24 में उत्तर प्रदेश का 1,10,555 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय देश में सबसे अधिक रहा। राज्य ने जितना शुद्ध लोक ऋण लिया, उससे भी ज्यादा राशि पूंजीगत कार्यों पर खर्च की, जो वित्तीय अनुशासन का मजबूत संकेत है। कुल व्यय का 9.39% निवेश पर खर्च कर उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर रहा। राजकोषीय घाटा, राजस्व घाटा और ऋण/जीएसडीपी अनुपात जैसे सभी संकेतक एफआरबीएम मानकों के अनुरूप रहे। वर्ष 2024-25 में राज्य की कुल देयताएं घटकर जीएसडीपी के 27% पर आ गईं। नीति आयोग के अनुसार उत्तर प्रदेश का कंपोजिट फिस्कल हेल्थ इंडेक्स 2014 में 37 से बढ़कर 2023 में 45.9 हो गया है और राज्य फ्रंट रनर श्रेणी में पहले स्थान पर है।
शंकराचार्य का ‘खूनी’ दर्द बिना स्नान किए छोड़ा माघ मेला, कहा ‘संगम तट पर हुई मेरी पीठ की हत्या’!

प्रयागराज में चल रहे माघ मेला से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दुखी मन से विदा लेने का ऐलान किया है। बुधवार सुबह आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि वह आस्था और श्रद्धा के साथ माघ मेला में आए थे, लेकिन परिस्थितियां ऐसी बन गईं कि बिना स्नान किए ही लौटना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रयागराज हमेशा से शांति, विश्वास और सनातन परंपराओं की भूमि रही है और यहां से इस तरह लौटना उनके लिए बेहद पीड़ादायक है। शंकराचार्य ने बताया कि एक ऐसी घटना घटी, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी, जिससे उनका मन व्यथित हो गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि माघ मेला में स्नान करना उनके लिए केवल एक धार्मिक कर्म नहीं, बल्कि आस्था का विषय था। बावजूद इसके, मौजूदा हालात में उन्होंने मेला छोड़ने का कठिन निर्णय लिया। उनके इस फैसले के बाद संत समाज और श्रद्धालुओं में चर्चा तेज हो गई है। पुष्प वर्षा करवा लेंगे तो उस दिन की बात अधूरी रह जाएगीशंकराचार्य ने कहा कि हमने अन्याय को अस्वीकार किया है और न्याय की प्रतीक्षा करेंगे। आज शब्द साथ नहीं दे रहे स्वर बोझिल है। प्रयागराज की धरती पर जो कुछ घटित हुआ उसने हमारी आत्मा को झकझोर दिया है। संगम में स्नान किए बिना विदा ले रहे हैं। आज हम यहां से जा रहे हैं, लेकिन अपने पीछे सत्य की गूंज छोड़कर जा रहे हैं। सब कुछ कहा जा चुका है। कल शाम और प्रातः काल प्रशासन की ओर से हमारे मुख्य कार्यधिकारी को एक प्रस्ताव प्रशासन की ओर से भेजा गया था। जिसमें कहा गया कि आप जब जाना चाहेंगे हम आपको ससम्मान स्नान कराने के लिए तैयार हैं। सभी अधिकारी मौजूद रहकर पुष्पवर्षा करेंगे, लेकिन इसमें उस दिन की घटना के लिए क्षमा याचना नहीं की गई थी। हमें लगा यदि हम स्नान कर लेंगे और पुष्प वर्षा करवा लेंगे तो उस दिन की बात अधूरी रह जाएगी। भौतिक हत्या का प्रयास किया गयाज्योतिर्मठ के पीठाधीश्वर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज ने कहा कि जो असली मुद्दा है, जिसके लिए दस दिन तक हम फुटपाथ पर बैठे रहे। इतना लंबा समय दिया, लेकिन दस ग्यारह दिन बीत जाने के बाद जब जाने का निर्णय लिया तब प्रशासन की ओर से ऐसा प्रस्ताव सामने आया। इसलिए हमने स्वीकार नहीं किया, अगर प्रशासन का आग्रह स्वीकार करके स्नान कर लेता तो अपने भक्तों के साथ न्याय नहीं कर पाता। शंकराचार्य ने कहा जो मुगलों के समय में हुआ वही आज हो रहा है। एक तरफ गृहमंत्री का बयान आया है कि संतों का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं माघ मेले में संतों को उनकी चोटी और शिखा पकड़कर घसीटा गया और पीटा गया। आज यहां जो अपमान हुआ ये सरकार का दोहरा चरित्र उजागर करता है। शंकराचार्य ने दो मिनट का मौन रखकर संतों का अपमान करने वालों को दंड मिले ऐसी भगवान से प्रार्थना की। संगम तट पर हमारी भौतिक हत्या का प्रयास किया गया। इन दिनों हमारी पीठ की हत्या का प्रयास हुआ वो सफल रहा। ये हत्या अगर यहां का प्रशासन कर रहा होता तो ठीक है, लेकिन इसके पीछे यूपी की सरकार का हाथ है।
योगी आदित्यनाथ ने रामानंदाचार्य उत्सव में विपक्ष पर हमला, जाति-धर्म के विभाजन को समाज के लिए खतरा बताया

धर्मनिर्पेक्षता के नाम का ठेका लेकर चलने वाले लोग जिन्होंने हिंदू समाज को तोड़ने में पूरी ताकत दी, उनके मुंह बांग्लादेश के नाम पर बंद हैं। ऐसा लगता है कि उनके मुंह पर किसी ने फेवीकोल या टेप लगा दिया है। विपक्ष पर हमलावर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को माघ मेला स्थित खाक चौक केशिविर में आयोजित जगद्गुरु रामानंदाचार्य जी महाराज के 726वें प्राकट्य उत्सव में यह बातें कहीं। रामानांदाचार्य जी महाराज के मूल मंत्र ‘जात-पात पूछे ना कोई, हरि को भजे सो हरि का होई’ को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जाति व धर्म के आधार पर विभाजन उसी तरह सर्वनाश का कारण बन जाएगा, जैसा कि बांग्लादेश में हो रहा है। उन्होंने आह्वान किया कि मत व संप्रदाय के आधार पर मत बंटो। भगवान रामानंदाचार्य जी हैं जिन्होंने एक नहीं द्वादश शिष्य बनाए और अलग-अलग जाति के बनाए। सोनकर समेत तमाम लोग मौजूद रहेमुख्यमंत्री ने कहा कि वह आज भी देखते हैं कि रामानंदाचार्य परंपरा से निकलीं अलग-अलग धाराएं समाज को अब भी जोड़ने का काम करती हैं। उन्होंने साधु-संतों से कहा कि यह आपका दायित्व है कि बांटने व तोड़ने वालों को कभी पनपने न दें। कमजोर करने वालों को किसी भी स्थिति में आगे नहीं बढ़ने देना है। अगर हम एकजुट होकर ऐसे ही आगे बढ़ते रहे तो आने वाला समय सनातन धर्म का हो जाएगा। तब बांग्लादेश में कोई निरीह व दलित हिंदू को काटने का काम नहीं कर पाएगा।मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जो लोग आज भी आपको बांट रहे हैं वे आपके हितैषी नहीं हो सकते। जब सत्ता में थे तो स्वयं अपने परिवार के बारे में सोचते थे। उससे बाहर उनकी दृष्टि नहीं थी। ये नारे देंगे, स्लोगन देंगे लेकिन जब भी मौका मिलेगा, यह वही करंगे जो पहले किया था। पहचान का संकट होगा, दंगों की आड़ में लोगों को झुलसाने का काम करेंगे। हमें इसकी पुनरावृत्ति नहीं होनी देनी चाहिए। कार्यक्रम में परमार्थ निकेतन आश्रम के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती, श्री बाघंबरी पीठ और श्री बड़े हनुमान मंदिर के महंत बलवीर गिरि जी महाराज, सतुआ बाबा पीठ काशी के पीठाधीश्वर संतोष दास उर्फ सतुआ बाबा, निर्मोही अखाड़े के राजेंद्र दास जी समेत कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, नंद गोपाल गुप्ता नंदी, सांसद प्रवीण पटेल, महापौर गणेश केसरवानी, विधायक सिद्धार्थनाथ सिंह, हर्षवर्धन बाजपेयी, दीपक पटेल, केपी सिंह, पीयूष रंजन निषाद, गुरु प्रसाद मौर्य, डॉ. वाचस्पति, पूर्व सांसद विनोद सोनकर समेत तमाम लोग मौजूद रहे। उत्तर भारत में रामभक्ति को जन-जन तक पहुंचायामुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि स्वामी रामानंदाचार्य ने काफी समय प्रयागराज में व्यतीत किया था। पता चला है कि दारागंज इलाके में कहीं पर उनका स्थान रहा है। सरकार उस स्थान का पता लगा रही है। इसके बाद रामानंदाचार्य के स्थान का जीर्णोद्धा और सुंदरीकरण कराकर उसको भव्य रूप प्रदान किया जाएगा। जाति-पाति पूछे नहीं कोई हरि को भे जो हरि का होई, यह अलख स्वामी रामानंदाचार्य ने प्रयागराज में ही जगाई थी। स्वामी रामानंदाचार्य भारत के महान संत, समाज-सुधारक और भक्ति आंदोलन के प्रमुख आचार्य थे। उन्होंने उत्तर भारत में रामभक्ति को जन-जन तक पहुंचाया और भक्ति को जाति-भेद से मुक्त किया। उनका जन्म लगभग 14वीं शताब्दी में माना जाता है। वे वैष्णव संप्रदाय रामानुजाचार्य की परंपरा से जुड़े थे। वह भगवान राम में भक्ति में लीन रहते थे। उन्होंने प्रयागराज में काफी समय व्यतीत किया। उनका मुख्य स्थान काशी था। स्वामी रामानंदाचार्य जी का मानना था कि भक्ति का मार्ग सबके लिए है। रामानंदाचार्य ने कहा कि ईश्वर-भक्ति पर किसी जाति, वर्ग या लिंग का बंधन नहीं होना चाहिए। कोई भी व्यक्ति रामभक्ति कर सकता है। जाति-पाति पूछे नहीं कोई जो हरि को भजे वह हरि का होई। उन्होंने संस्कृत के बजाय आम जनता की भाषा में उपदेश दिए ताकि हर व्यक्ति समझ सके।
मुख्यमंत्री योगी ने बजट व्यय की समीक्षा, विभागों को समय पर खर्च के निर्देश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार सुबह वित्तीय वर्ष 2025-26 में शासन द्वारा विभिन्न विभागों को जारी बजट के व्यय को लेकर वित्त विभाग की समीक्षा बैठक की। बैठक में वर्तमान वित्तीय वर्ष में विभागों के बजट प्राविधान के सापेक्ष शासन द्वारा जारी स्वीकृतियों, विभागाध्यक्ष द्वारा आवंटन, व्यय आदि की अद्धयावधिक प्रगति पर अधिक बजट प्राविधान वाले प्रमुख 20 विभागों का प्रस्तुतिकरण किया गया। देरी से समय से बजट व्यय नहीं हो पातामुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रमुख 20 विभागों के प्रस्तुतिकरण की समीक्षा की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने सभी प्रमुख विभाग के उच्च अधिकारियों को निर्देश दिये कि सभी विभाग समय से आवंटन बजट का इस्तेमाल करें ताकि परियोजनाएं और योजनाएं समय से पूरी हो सकें और प्रदेशवासी इन योजनाओं लाभ उठा सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट को समय से खर्च करने के लिए अधिकारी निर्णय लेने का सामर्थ्य विकसित करें। उन्होंने कहा कि जिन विभागों में बजट व्यय की प्रगति धीमी है, वह इसमें तेजी लाएं। साथ ही बजट को समय से खर्च करने के लिए हर स्तर पर एक-एक अधिकारी की जिम्मेदारी और जवाबदेही तय हो। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए सभी विभाग के अधिकारी तुंरत निर्णय लें। उन्होंने कहा कि निर्णय लेने में देरी से समय से बजट व्यय नहीं हो पाता है। ऐसे में निर्णय लेने में तेजी दिखाएं। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से पत्र जारी करेंमुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ विभागों में बजट व्यय की प्रगति धीमी है। इसमें तेजी लाने के लिए विभागीय मंत्री और अधिकारी आपस में समन्वय बनाकर हर माह बैठक करें। उन्होंने ने वित्त विभाग को निर्देश दिये कि जिन विभागों के आवंटन बजट के कुछ अंश को अभी तक किंहीं कारणों से जारी नहीं किया गया है, उन विभागों को तत्काल बजट आवंटित करें। उन्होंने सभी प्रमुख 20 विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिये कि जिन विभागों को विभिन्न योजनाओं के लिए केंद्र सरकार से बजट जारी किया जाता है। इसके लिए विभाग के मंत्री, अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव दिल्ली जाकर केंद्र सरकार से बजट जारी करने के लिए पैरवी करें। इसके साथ ही केंद्र सरकार को पत्र लिखें और फोन से फालोअप करें। इसको लेकर मुख्य सचिव भी पहल करें। उन्होंने अपने कार्यालय को निर्देश दिये कि जिन विभागों में बजट व्यय की प्रगति धीमी है, उनको चिह्नित करें और उनके विभाग के मंत्रियों को मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से पत्र जारी करें।
उत्तर प्रदेश में शीतलहर: स्कूल 1 जनवरी तक बंद, बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि! यूपी सरकार ने दिए निर्देश

उत्तर प्रदेश में कड़ाके की ठंड और भीषण शीतलहर के प्रकोप को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़े कदम उठाए हैं। सीएम ने प्रदेश के सभी बोर्डों (ICSE, CBSE और यूपी बोर्ड) के कक्षा 12वीं तक के स्कूलों को 1 जनवरी तक बंद करने का आदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि शीतलहर के दौरान बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है, इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस दौरान स्कूल पूरी तरह से बंद रखे जाएंगे। मुख्यमंत्री ने शासन और प्रशासन के आला अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे स्वयं क्षेत्रों में भ्रमणशील रहकर जमीनी हकीकत का जायजा लें। सीएम ने कहा कि भीषण ठंड को देखते हुए हर जिले के सार्वजनिक स्थलों पर अलाव और कंबलों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। सीएम ने दिए ये निर्देश प्रदेश में कोई भी व्यक्ति कड़ाके की ठंड में खुले में सोने को मजबूर न हो।सभी रैन बसेरों में बिछौने, कंबल और साफ-सफाई समेत सभी आवश्यक सुविधाएं पुख्ता की जाएं।अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि जरूरतमंदों को समय पर राहत सामग्री और आश्रय प्राप्त हो। प्राइमरी से 12 वीं तक के सभी विद्यालय 1 जनवरी तक बंद, डीएम लखनऊ ने दिए आदेश घना कोहरा, गलन और ताममान में लगातार गिरावट से बढ़ती ठंड को देखते हुए राजधानी में प्री प्राइमरी से कक्षा 12 वीं तक के सभी विद्यालय 1 जनवरी तक बंद रहेंगे। जिलाधिकारी विशाख जी ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी के अनुसार, राजधानी में शीतलहर, घना कोहरा होने एवं मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखते रखते हुए यह फैसला लिया गया है। कक्षा प्री-प्राइमरी से कक्षा-12 तक संचालित सभी परिषदीय, प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय,सहायता प्राप्त विद्यालय व सभी बोर्डो से मान्यता प्राप्त विद्यालयों,कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों, राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में 29 दिसंबर से 1 जनवरी 2026 तक अवकाश रहेगा। 37 जिलों में सोमवार को घने कोहरे का अलर्ट उत्तर प्रदेश में हो रही भीषण ठंड लोगों की कंपकंपी छुड़ा रही है। पहाड़ों पर हुई बर्फबारी और वहां से आ रही सर्द पछुआ हवाओं के साथ घना कोहरा लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। माैसम विभाग का कहना है कि प्रदेश में अगले तीन दिनों तक इस गलन और कोहरे से राहत की संभावना नहीं है। सोमवार के लिए प्रदेश के 37 जिलों में घने कोहरे का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। साथ ही प्रयागराज, वाराणसी, कानपुर समेत 12 जिलों में दिन के तापमान में भारी गिरावट यानी शीत दिवस की चेतावनी जारी किया गया है। रविवार को घने कोहरे की वजह से आगरा, प्रयागराज, कानपुर और सहारनपुर में दृश्यता शून्य हो गई। वहीं फतेहपुर में 10 मी., मेरठ में 15 मी. और हमीरपुर में 20 मीटर दृश्यता दर्ज हुई। 6.7 डिग्री न्यूनतम तापमान के साथ मेरठ और इटावा में सबसे ठंडी रात रही। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश में अगले तीन दिनों तक ठंड और कोहरे से राहत के आसार नहीं हैं। अगले तीन दिनों के लिए प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में कोहरे का प्रकोप रहेगा। इसके बाद दिन में हल्की धूप और पारे में मामूली बढ़त से राहत की परिस्थितियां बनेंगी।