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ईरान युद्ध के बीच चीन बना ‘स्थिरता का केंद्र’, वैश्विक संकट में भी मजबूत दिखी अर्थव्यवस्था

पश्चिम एशिया में अमेरिका और इस्राइल की ओर से ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू हुए एक महीने से अधिक का समय बीत चुका है। इस युद्ध के कारण अपूर्ति शृंखला इतनी बुरी तरह प्रभावित हुई कि पूरी दुनिया असमंजस में है। हालांकि, यह संकट चीन के लिए एक अलग ही तस्वीर पेश कर रहा है। जहां एक ओर डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों और ईरान पर हमलों से वैश्विक बाजार खस्ताहाल हो रहे हैं, वहीं चीन खुद को इस हालात में भी स्थिरता और निश्चितता का प्रतीक बता रहा है। इकोनॉमिस्ट की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस युद्ध से चीन की अर्थव्यवस्था को नुकसान तो होगा, लेकिन उसके प्रतिद्वंद्वियों और पड़ोसियों की तुलना में यह असर काफी कम रहेगा। ऊर्जा आपूर्ति के मोर्चे पर चीन अपनी बेहतर तैयारी के कारण काफी सुरक्षित स्थिति में है। जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश अपने कच्चे तेल का 70% से अधिक हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते मंगाते हैं, जबकि चीन की इस मार्ग पर निर्भरता केवल एक तिहाई है। इसके अलावा, चीन के कुल ऊर्जा उपयोग में कोयला, परमाणु ऊर्जा और तेजी से बढ़ती नवीकरणीय ऊर्जा की प्रमुख हिस्सेदारी है। आर्थिक वृद्धि में एक तिहाई का योगदान दियायदि आपूर्ति शृंखला बुरी तरह बाधित होती है, तो चीन के पास लगभग चार महीने का सुरक्षित समुद्री तेल भंडार मौजूद है, जिसे सरकार फिलहाल केवल सबसे खराब स्थिति के लिए बचाकर रखना चाहती है। हालांकि, 23 मार्च को चीन में पेट्रोल की कीमतों में 13% की बढ़ोतरी की गई है। अर्थशास्त्रियों के अनुसार कच्चे माल की यह बढ़ती लागत चीन को 41 महीनों से चले आ रहे ‘डिफ्लेशन’ (कीमतों में लगातार गिरावट) के खतरनाक दौर से बाहर निकालने में मदद कर सकती है, जो 2012-16 के बाद कीमतों में गिरावट का सबसे लंबा दौर है। वैश्विक स्तर पर आपूर्ति शृंखला बाधित होने के कारण ऊर्जा महंगी होने से लोगों का अन्य वस्तुओं पर खर्च घटेगा, जिसका सीधा असर चीनी कारखानों पर पड़ेगा। पिछले साल चीन ने 1.2 ट्रिलियन डॉलर का रिकॉर्ड व्यापार अधिशेष दर्ज किया था, जिसने उसकी आर्थिक वृद्धि में एक तिहाई का योगदान दिया था।

केरल की धरती से पीएम मोदी का हुंकार ‘कांग्रेस के राजकुमार’ युवाओं की सोच नहीं समझते, अब राज्य में बदलेगा सत्ता का रिवाज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोच्चि में एक जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने त्रिशूर लोकसभा सीट और तिरुवनंतपुरम कॉर्पोरेशन में भाजपा की जीत का जिक्र किया। उन्होंने भरोसा जताया कि भाजपा की यह सफलता अब पूरे केरल में फैलेगी। पीएम ने कहा कि केरल में एलडीएफ और यूडीएफ के बारी-बारी शासन करने के पुराने तरीके को बदलना अब बहुत जरूरी है। उन्होंने लोगों से अगले पांच साल एनडीए को सेवा का मौका देने की अपील की। उन्होंने जनता को ‘मोदी की गारंटी’ का भरोसा दिया। पीएम मोदी ने राहुल गांधी पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के राजकुमार केरल और भारत के युवाओं की सोच को नहीं समझते। उन्होंने केरल के भविष्य के लिए अपनी योजना साझा की। उन्होंने कहा कि हम केरल को एआई (एआई) और भविष्य की नई तकनीक का बड़ा केंद्र बनाने के लिए काम करेंगे। भारतीयों को सुरक्षा मिले, हरसंभव सुविधा मिलेप्रधानमंत्री ने विदेश में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा पर भी बात की। उन्होंने कहा कि आज का भारत अपने नागरिकों को कहीं भी मुसीबत में अकेला नहीं छोड़ता। पीएम मोदी ने कहा, “वेस्ट एशिया में जो कुछ हो रहा है, उससे आप सभी का चिंतित होना बहुत स्वाभाविक है। हमारे लाखों भाई-बहन वहां काम करते हैं। जब भी हमारा कोई देशवासी संकट में पड़ता है तो हमारी सरकार उसे सुरक्षित बचाने के लिए पूरी ताकत लगा देती है। आज का भारत अपने नागरिकों को संकट में अकेला नहीं छोड़ता है। आज भी हमारा प्रयास है कि युद्ध की हालत में फंसे भारतीयों को सुरक्षा मिले, हरसंभव सुविधा मिले।” इसके साथ ही पीएम ने खाड़ी देशों का भी आभार जताया जो विषम परिस्थिति में फंसे लोगों की मदद करने का प्रयास कर रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा, “मुझे संतोष है कि गल्फ के हमारे सभी मित्र देशों की सरकारें भी हमारे देश के नागरिकों का पूरा ध्यान रख रही हैं। मैं उन सभी सरकारों का आभारी हूं। वहां हर देश में हमारे जो दूतावास हैं, हमारे मिशन हैं, वे 24/7 उनकी मदद कर रहे हैं। किसी को भी खाना-पीना चाहिए, मेडिकल हेल्प चाहिए, रहने की जगह चाहिए या कानूनी मदद चाहिए, तो इसे सुनिश्चित किया जा रहा है। लेकिन यह बहुत बड़ा दुर्भाग्य है कि कांग्रेस इतने बड़े वैश्विक संकट में भी राजनीति ढूंढ रही है।”

समुद्र में भारत का मानवीय मिशन, ईरानी जहाज ‘IRIS लावन’ को कोच्चि में दी शरण

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत ने एक मानवीय कदम उठाते हुए ईरान के जहाज आईरिस लावन को केरल के कोच्चि बंदरगाह पर रुकने की अनुमति दी। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सोमवार को लोकसभा में बताया कि इस फैसले के लिए ईरान के विदेश मंत्री ने भारत का आभार भी जताया है। उन्होंने कहा कि इस समय ईरान के शीर्ष नेतृत्व से संपर्क करना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन भारत ने स्थिति को देखते हुए मानवीय आधार पर यह फैसला लिया। विदेश मंत्री ने संसद को बताया कि 28 फरवरी को ईरान ने अपने तीन जहाजों को भारतीय बंदरगाहों पर रुकने की अनुमति मांगी थी। भारत ने 1 मार्च को इसकी मंजूरी दे दी। इसके बाद आइरिस लावन 4 मार्च को कोच्चि पहुंचा। जहाज के चालक दल को फिलहाल भारतीय नौसेना की सुविधाओं में रखा गया है। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत को लगा कि ऐसा करना सही और मानवीय कदम था। भारतीय उपभोक्ताओं के हित को सबसे ऊपर रखा जाएगादरअसल, इससे पहले ईरान का एक और युद्धपोत आइरिस डेना डूब गया था। जानकारी के अनुसार यह जहाज श्रीलंका के गाले तट से लगभग 40 समुद्री मील दूर अमेरिकी पनडुब्बी के हमले में टॉरपीडो से नष्ट हो गया था। इस घटना के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। संसद में बोलते हुए डॉ. जयशंकर ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है, क्योंकि इस क्षेत्र से होकर गुजरने वाला हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार तेल की उपलब्धता, कीमत और जोखिम, तीनों बातों को ध्यान में रखकर फैसले ले रही है और भारतीय उपभोक्ताओं के हित को सबसे ऊपर रखा जाएगा।