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रफ़्तार का नया युग, पीएम मोदी ने देश को समर्पित किया दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर और मेरठ मेट्रो!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के पहले नमो भारत RRTS का उद्घाटन किया, पूरा दिल्ली-मेरठ नमो भारत पूरा कॉरिडोर और मेरठ मेट्रो (मेरठ साउथ-मोदीपुरम) देश को समर्पित किया। पीएम ने करीब 12,930 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स समर्पित किए। इससे पहले, पीएम मोदी ने नमो भारत और मेरठ मेट्रो को हरी झंडी दिखाई।इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शताब्दी नगर से मेरठ दक्षिण स्टेशन तक सफर भी किया। इसमें 17 लोग रहे जिनमें 5 स्कूली बच्चे, चार एमबीबीएस स्टूडेंट, पांच सफाईकर्मी और तीन दिल्ली के युवा उद्यमी थे। मेरठ दक्षिण स्टेशन से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री जनसभा स्थल पर मोहिउद्दीनपुर पहुंचे। परियोजनाएं पहले की तरह लटकती, भटकती नहींमेरठ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “बाबा औघड़नाथ की इस पावन धरती पर आज विकसित उत्तर प्रदेश, विकसित भारत के लिए नई क्रांति को ऊर्जा मिल रही है। आज पहली बार एक ही मंच से नमो भारत रैपिड रेल और मेट्रो सेवा का एक ही दिन शुभारंभ हो रहा है। विकसित भारत की कनेक्टिविटी कैसी होगी यह उसकी एक शानदार झांकी है। शहर के भीतर के लिए मेट्रो और ट्वीन सिटी के विजन को गति देने के लिए नमो भारत जैसी आधुनिक ट्रेन का काम हुआ है।” पीएम मोदी ने कहा कि आज पहली बार, एक ही मंच से नमो भारत रैपिड रेल और मेट्रो सेवा का एक ही दिन शुभारंभ हो रहा है। विकसित भारत की कनेक्टिविटी कैसी होगी, ये उसकी एक शानदार झांकी है। शहर के भीतर के लिए मेट्रो और twin city के विजन को गति देने के लिए नमो भारत जैसी आधुनिक ट्रेन… मुझे संतोष है कि ये काम उत्तर प्रदेश में हुआ है। पीएम मोदी ने काह कि हमारी कार्य संस्कृति है कि जिस काम का शिलान्यास किया जाए, उसे पूरा करने के लिए दिन-रात एक कर दिया जाए। इसलिए अब परियोजनाएं पहले की तरह लटकती, भटकती नहीं है।

चीन के ‘मैन्युफैक्चरिंग’ किले में सेंध लगाएगा भारत, बजट 2026-27 में दिखा विकसित भारत का रोडमैप

चीन और अमेरिका इस समय निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था के केंद्र बने हुए हैं। चीन सामान्य उपभोग की वस्तुओं के उत्पादन और निर्यात का वैश्विक केंद्र बना हुआ है तो अमेरिका और यूरोप के कुछ देश तकनीक, मशीन और युद्ध सामग्री के निर्यातक के रूप में अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे हैं। भारत अब तक अपनी आंतरिक खपत, खाद्यान्न प्रसंस्कृत उत्पादों और सेवाओं के निर्यात से एक मजबूत अर्थव्यवस्था बना हुआ है। लेकिन 2026-27 का बजट यह बताता है कि भारत अब मूलभूत वस्तुओं-सेवाओं के निर्यात के साथ-साथ उन्नत तकनीक पर आधारित वस्तुओं के उत्पादन-निर्यात पर आधारित व्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। निर्मला सीतारमण द्वारा पेश नौवां बजट उसी औद्योगिक ढांचे को विश्वसनीय मजबूती प्रदान करने की कोशिश करता हुआ दिखाई दे रहा है। महत्त्वपूर्ण सेक्टरों में देश को मजबूत करना चाहतीबजट में औद्योगिक उत्पादन के लिए आवश्यक वस्तुओं, मशीनों, कलपुर्जों और तकनीक के आयात पर इम्पोर्ट ड्यूटी शून्य से लेकर दस प्रतिशत के बीच कर दी गई है। सरकार का यह कदम देश में रक्षा उत्पादों, सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के उत्पादन के लिए सहायक होगा। केंद्र सरकार लगातार देश को रक्षा उत्पादों के एक वैश्विक निर्यातक के रूप में विकसित करने का प्रयास कर रही है। इससे यह समझ आता है कि सरकार का विजन ही बजट में कानूनी प्रावधानों के रूप में उभर कर सामने आया है। आज घरेलू उपभोग की छोटी-छोटी वस्तुओं से लेकर कारों-वायुयानों और उपग्रह निर्माण तक में जिस तरह सेमीकंडक्टर चिप्स का उपयोग बढ़ रहा है, कोई भी देश चिप्स के लिए चीन जैसे प्रतिद्वंदी देश पर निर्भर नहीं रह सकता। बजट में देश को इस सेक्टर में मजबूत बनाकर देश को रणनीतिक मजबूती देने की कोशिश की गई है। क्लाउड कंप्यूटिंग और डाटा सेंटरों के भारत में सेंटर निर्माण करने पर विदेशी कंपनियों को 2047 तक टैक्स हॉलीडे प्रदान करना भी सरकार की उसी नीयत को स्पष्ट करता है जिसके अंतर्गत वह महत्त्वपूर्ण सेक्टरों में देश को मजबूत करना चाहती है। बिना विकसित अर्थव्यवस्था नहीं बन सकताभाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और जर्मनी की ड्यूश बैंक की भारतीय इकाई के पूर्व प्रबंध निदेशक जफर इस्लाम ने अमर उजाला से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को 2047 में एक विकसित देश बनाने की बात करते रहे हैं। वर्तमान बजट देश को उसी दिशा में ले जाने का एक रोड मैप दिखाई देता है। लेकिन कोई भी देश औद्योगिक उत्पादन का केंद्र बने बिना विकसित अर्थव्यवस्था नहीं बन सकता। यह बजट देश को सभी महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में निर्माण की एक वैश्विक इकाई के रूप में विकसित करने का फ्रेम वर्क प्रदान करता है।