सांसद मनोज तिवारी के नाम पर ‘फेक’ खेल, दिल्ली पुलिस के पास पहुंचे भोजपुरी सुपरस्टार

भाजपा लोकसभा सांसद मनोज तिवारी ने अपने नाम पर बनाए गए फेक फेसबुक अकाउंट के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। पूर्वोत्तर दिल्ली के सांसद व भोजपुरी गायक और अभिनेता मनोज तिवारी ने शनिवार को एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने पहले ही फेक आईडी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, फिर भी यह आश्चर्यजनक रूप से सक्रिय है। मनोज तिवारी ने कहा कि उन्होंने यह शिकायत नई दिल्ली के मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई, क्योंकि उक्त फेसबुक आईडी से एक वीडियो पोस्ट किया गया था, जिसमें अब स्थगित यूजीसी नियमों की कड़ी आलोचना की गई थी और सांसद की फोटो भी थी। भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने अपने नाम का फेक फेसबुक अकाउंट चलाने वाले के खिलाफ मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि 22 जनवरी को शिकायत के बावजूद फेक आईडी सक्रिय है। अकाउंट से यूजीसी नियमों की आलोचना वाला वीडियो और उनकी फोटो पोस्ट की गई है। लोगों के खिलाफ दुरुपयोग हो सकतासांसद ने अपनी पोस्ट में कहा कि कुछ अज्ञात व्यक्ति साजिश के तहत मेरे नाम से एक फेक फेसबुक आईडी चला रहा है। मेरी असली फेसबुक आईडी पर ब्लू टिक है। मैंने 22 जनवरी को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, फिर भी फेक आईडी सक्रिय है और इसे चला रहे व्यक्ति को पकड़ा नहीं गया, और पुलिस से उस व्यक्ति को गिरफ्तार करने की मांग की। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नियमों को स्थगित किया था, जो उच्च शिक्षा संस्थानों में SC, ST और OBC छात्रों के साथ भेदभाव से संबंधित थे, और उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए थे क्योंकि यह आशंका जताई गई थी कि इनका सामान्य श्रेणी के लोगों के खिलाफ दुरुपयोग हो सकता है।
UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक SC बोला नियम अस्पष्ट, दुरुपयोग की आशंका, 19 मार्च को अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने) विनियम, 2026 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की। कोर्ट में इन विनियमों को सामान्य वर्गों के विरुद्ध भेदभावपूर्ण होने के आधार पर चुनौती दी गई है। ऐसे में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगी दी। अब नए आदेश तक 2012 के नियम ही लागू रहेंगे। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि नए नियम अस्पष्ट हैं। कोर्ट के कहा कि नए यूजीसी नियमों का दुरुपयोग हो सकता है। इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया और यूजीसी के नए नियमों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। अब इस मामले पर अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी। नियमों की भाषा को स्पष्ट करने के लिए विशेषज्ञों की जरूरतमुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने इन रिट याचिकाओं की सुनवाई की। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि हमें जातिविहीन समाज की ओर बढ़ना चाहिए या हम पीछे जा रह हैं। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि क्या हम उल्टी दिशा में जा रहे। जिन्हें सुरक्षा चाहिए, उनके लिए व्यवस्था होनी चाहिए। इसी के साथ उन्होंने केंद्र और यूजीसी से जवाब मांगा है। साथ ही कहा है कि एक विशेष कमेटी भी बनाई जा सकती है। इसी के साथ नए नियमों की भाषा को स्पष्ट करने के लिए विशेषज्ञों की जरूरत पर भी जोर दिया। वहीं याचिकाकर्ता विनीत जिंदल ने कहा, ‘आज, सीजेआई ने हमारी दलीलों की सराहना की। हमें कहना होगा कि यह हमारे लिए बहुत बड़ी जीत है। जैसा कि हम खास तौर पर तीन मुद्दों के बारे में बात कर रहे थे, एक है सेक्शन 3C जो जातिगत भेदभाव के बारे में बात करता है और उस खास सेक्शन में, सामान्य जाति को बाहर रखा गया है और बाकी सभी जातियों को शामिल किया गया है। तो, यह खास सेक्शन यह संदेश दे रहा है कि SC, ST और OBC के साथ सामान्य जाति द्वारा भेदभाव किया जा रहा है।’ 19 मार्च के लिए सूचीबद्धउन्होंने आगे कहा कि यह सीजेआई के सामने हमारी दलील थी और उन्होंने हमारी दलील की सराहना की और खास तौर पर कहा कि हम जो कह रहे हैं वह सही है और अगर ऐसे सेक्शन हैं, तो यह निश्चित रूप से सामान्य जाति के लिए बहुत कठोर और भेदभावपूर्ण होगा और इसमें संशोधन किया जाना चाहिए। दूसरा हिस्सा इक्विटी कमेटी के संबंध में है जो इन नए UGC सेक्शन के सेक्शन 18 के तहत बनाई गई है। इन खास नियमों में सामान्य समुदाय के लिए कोई खास प्रतिनिधित्व नहीं बताया गया है। CJI ने भी हमारी इस दलील को माना और सुझाव दिया कि एक खास कमेटी बनाई जानी चाहिए, जिसमें शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हों, जिन्हें इस खास विषय का ज्ञान हो और अब यह मामला 19 मार्च के लिए सूचीबद्ध है और उम्मीद है कि कुछ अच्छा होगा।