गुवाहाटी हाईकोर्ट के नए कॉम्प्लेक्स के विरोध पर CJI सूर्यकांत सख्त, बोले निजी हित विकास में बाधा नहीं बन सकते

गुवाहाटी हाईकोर्ट के नए कोर्ट कॉम्प्लेक्स को लेकर चल रहे विरोध को देखते हुए अब सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सीजेआई सूर्यकांत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा कि जो लोग इस नए कोर्ट परिसर का विरोध कर रहे हैं, वे पूरी जानकारी के बिना विरोध कर रहे हैं। सीजेआई ने गुवाहाटी हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के विरोध का जिक्र करते हुए कहा कि व्यक्तिगत हित या सुविधा किसी भी तरह से न्यायिक ढांचे के विकास में बाधा बनने का कारण नहीं हो सकते। दरअसल, गुवाहाटी हाईकोर्ट के लिए एक नया कोर्ट कॉम्प्लेक्स बनाए जाने की योजना है। इसे लेकर बार एसोसिएशन के कुछ वकील विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे उन्हें असुविधा हो सकती है। न्यायिक ढांचे के विकास में रुकावट नहीं बन सकतेमुख्य न्यायाधीश ने साफ शब्दों में कहा कि कोर्ट और न्याय व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आधुनिक और बेहतर बुनियादी ढांचे की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि केवल निजी सुविधा या व्यक्तिगत कारणों के आधार पर विकास कार्यों का विरोध सही नहीं है। सीजेआई ने कहा कि ऐसे विरोध से न्याय व्यवस्था के सुधार में रुकावट आती है। इस दौरान सीजेआई ने यह भी कहा कि नए कोर्ट कॉम्प्लेक्स से न्यायिक कामकाज ज्यादा सुचारु और प्रभावी होगा, जिससे आम लोगों को भी फायदा मिलेगा।गुवाहाटी हाईकोर्ट के नए कोर्ट कॉम्प्लेक्स के विरोध पर सीजेआई सूर्यकांत ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि विरोध करने वाले पूरी जानकारी के बिना ऐसा कर रहे हैं। सीजेआई ने स्पष्ट किया कि निजी सुविधा या व्यक्तिगत हित न्यायिक ढांचे के विकास में रुकावट नहीं बन सकते।
एसआईआर पर ममता बनर्जी का चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप, कहा– भाजपा आईटी सेल के ऐप से हो रहा है अवैध काम

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आयोग राज्य में एसआईआर अभ्यास को कराने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आईटी सेल के बनाए मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल कर रहा है। मुख्यमंत्री बनर्जी दक्षिण 24 परगना जिले के सागर द्वीप में गंगासागर मेले की तैयारियों का जायजा लेने के लिए दो दिन की यात्रा पूरी करने के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रही थीं। इस दौरान उन्होंने कहा, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान चुनाव आयोग ‘हर तरह के गलत तरीके’ अपना रहा है। मतदाताओं की परेशानियों को काफी बढ़ा दियाउन्होंने कंहा, एसआईआर कराने के लिए चुनाव आयोग हर तरह के गलत कदम उठा रहा है। वह योग्य मतदाताओं को मृत घोषित कर रहा है और बुजुर्ग, बीमार और असहाय लोगों को सुनवाई में आने के लिए मजबूर कर रहा है। वह इस काम के लिए भाजपा के आईटी सेल के बनाए मोबाइल एप का इस्तेमाल कर रहा है। यह अवैध, असांविधानिक और अलोकतांत्रिक है। ऐसे नहीं चल सकता। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सुप्रीमो की ओर से यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब उनकी पार्टी के सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में जारी एसआईआर को कराने के लिए आयोग ने मनमाने और प्रकिया के खिलाफ कदम उठाए हैं। टीएमसी ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया ने राज्य के योग्य और वास्तविक मतदाताओं की परेशानियों को काफी बढ़ा दिया है। एसआईआर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगीममता बनर्जी ने कहा, मैं जनता से अपील करती हूं कि एसआईआर में भाग लेते समय सतर्क रहें। जो लोग जरूरतमंद हैं, उनके साथ खड़े रहें। उन्हें मेरा समर्थन करने की जरूरत नहीं है, केवल लोगों का साथ दें, जो इस प्रक्रिया की वजह से परेशानी में हैं। मुख्यमंत्री ने सोमवार को कहा था कि वह राज्या में मतदाता सूची के एसआईआर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि डर, उत्पीड़न और प्रशासनिक मनमानी के कारण मौतें हो रही हैं और लोगों को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद घर वापसी, सोनाली खातून बनी मां, मानवता की जीत का पल

पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले की रहने वाली प्रवासी मजदूर सोनाली खातून ने सोमवार सुबह रामपुरहाट सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक बेटे को जन्म दिया। सोनाली को सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद 5 दिसंबर को बांग्लादेश से वापस भारत लाया गया था। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राज्यसभा सांसद समीरुल इस्लाम ने अस्पताल के डॉक्टरों से बातचीत के बाद पुष्टि की कि मां और नवजात दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। बीरभूम जिले के मुरारई की रहने वाली सोनाली को पिछले साल जून में दिल्ली पुलिस ने बांग्लादेशी नागरिक होने के संदेह में गिरफ्तार किया था और बाद में उन्हें पड़ोसी देश भेज दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी गर्भावस्था की उन्नत अवस्था को देखते हुए उन्हें वापस लाने का निर्देश दिया था। इसके बाद पिछले महीने उन्हें उनके नाबालिग बेटे साबिर के साथ मालदा सीमा के रास्ते भारत लाया गया। दुरुपयोग के बीच मानवता की जीत करारबांग्लादेश में सोनाली और उनके पति दानिश सहित पांच अन्य लोगों को 20 अगस्त से चपाई नवाबगंज सुधार गृह में कथित घुसपैठियों के रूप में रखा गया था। बाद में 1 दिसंबर को एक न्यायिक मजिस्ट्रेट ने उन्हें जमानत दी थी। हालांकि, दानिश और स्वीटी बीबी के परिवार के तीन सदस्यों की वापसी अभी बाकी है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने प्रवासी मजदूर सोनाली खातून के मां बनने पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने इस घटनाक्रम को दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार द्वारा सत्ता के दुरुपयोग के बीच मानवता की जीत करार दिया। अस्पताल जाकर सोनाली और उनके नवजात शिशु से मिलेंगेसोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बनर्जी ने लिखा, “मुझे यह जानकर अत्यंत खुशी हुई कि सोनाली खातून ने बीरभूम के रामपुरहाट मेडिकल कॉलेज में एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया है। जिस अन्याय का उसे सामना करना पड़ा उसके मुकाबले खुशी का यह पल और भी ज्यादा खास लगता है। उन्होंने कहा उसके साथ जो हुआ, वह इंसानियत का अपमान था। इसे किसी भी नागरिक को खासकर एक गर्भवती मां को कभी भी सहने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। फिर भी इन सब मुश्किलों के बावजूद सोनाली ने असाधारण हिम्मत और पक्का इरादा दिखाया।” बनर्जी ने घोषणा की कि वह मंगलवार को अपनी बीरभूम यात्रा के दौरान अस्पताल जाकर सोनाली और उनके नवजात शिशु से मिलेंगे। उन्होंने कहा कि सोनाली ने असाधारण साहस दिखाया है और उनकी प्रार्थनाएं परिवार के साथ हैं।
अरावली पर डबल इंजन सरकार का वार? कांग्रेस का आरोप, नई परिभाषा से 90% अरावली खतरे में, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

कांग्रेस ने सोमवार को केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार पर अरावली पर्वत श्रृंखला को नुकसान पहुंचाने का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी का दावा है कि सरकार की नीतियों के कारण अरावली का अस्तित्व खतरे में है। कांग्रेस का कहना है कि सिर्फ खनन ही नहीं, बल्कि जिस तरह से रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा दिया जा रहा है, वह अरावली के पहले से तबाह हो चुके पारिस्थितिकी तंत्र में और तबाही मचाएगा। इसको लेकर कांग्रेस महासचिव और पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में लिखा ‘ इस समय देश अरावली को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के ताजा निर्देशों का इंतजार कर रहा है। यहां इस बात के और सबूत हैं कि अरावली की नई परिभाषा पहले से ही बर्बाद हो चुके इस पारिस्थितिकी तंत्र में और ज्यादा तबाही मचाएगी। मुद्दा सिर्फ खनन का नहीं है-फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की सिफारिशों के खिलाफ, नई दिल्ली और जयपुर की डबल इंजन सरकार रियल एस्टेट डेवलपमेंट के दरवाजे भी खोल रही है।’ जमीन से 100 मीटर या उससे ज्यादा होमामले में कांग्रेस ने अरावली की नई परिभाषा का विरोध किया। कांग्रेस का आरोप है कि इस नई परिभाषा के लागू होने से अरावली का 90 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा कानूनी सुरक्षा के दायरे से बाहर हो जाएगा। इसका सीधा मतलब यह होगा कि इन इलाकों को खनन और अन्य निर्माण कार्यों के लिए खोलकर उन्हें नष्ट कर दिया जाएगा। हालांकि इस मुद्दे पर विवाद बढ़ने के बाद केंद्र सरकार ने राज्यों को निर्देश दिया था कि वे पर्वत श्रृंखला के अंदर नई खनन लीज न दें। वहीं, सर्वोच्च न्यायालय ने भी अरावली की परिभाषा को लेकर चल रहे विवाद पर खुद संज्ञान लिया है। इस मसले पर आज सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद न्यायालय ने पिछले फैसले पर रोक लगा दी है। इससे पहले 20 नवंबर को शीर्ष अदालत ने अरावली पहाड़ियों और श्रृंखलाओं की एक समान परिभाषा स्वीकार की थी। कोर्ट ने विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने तक दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में फैले अरावली क्षेत्र में नई खनन लीज देने पर रोक लगा दी थी। वहीं सर्वोच्च न्यायालय ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की एक समिति की सिफारिशों को स्वीकार किया था। समिति ने सिफारिश की थी कि अरावली जिलों में किसी भी ऐसी भू-आकृति को ‘अरावली पहाड़ी’ माना जाए जिसकी ऊंचाई आसपास की जमीन से 100 मीटर या उससे ज्यादा हो। वहीं, ‘अरावली श्रृंखला’ उसे माना जाएगा जहां 500 मीटर के दायरे में ऐसी दो या दो से अधिक पहाड़ियां मौजूद हों।