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समुद्र में भारत का मानवीय मिशन, ईरानी जहाज ‘IRIS लावन’ को कोच्चि में दी शरण

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत ने एक मानवीय कदम उठाते हुए ईरान के जहाज आईरिस लावन को केरल के कोच्चि बंदरगाह पर रुकने की अनुमति दी। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सोमवार को लोकसभा में बताया कि इस फैसले के लिए ईरान के विदेश मंत्री ने भारत का आभार भी जताया है। उन्होंने कहा कि इस समय ईरान के शीर्ष नेतृत्व से संपर्क करना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन भारत ने स्थिति को देखते हुए मानवीय आधार पर यह फैसला लिया। विदेश मंत्री ने संसद को बताया कि 28 फरवरी को ईरान ने अपने तीन जहाजों को भारतीय बंदरगाहों पर रुकने की अनुमति मांगी थी। भारत ने 1 मार्च को इसकी मंजूरी दे दी। इसके बाद आइरिस लावन 4 मार्च को कोच्चि पहुंचा। जहाज के चालक दल को फिलहाल भारतीय नौसेना की सुविधाओं में रखा गया है। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत को लगा कि ऐसा करना सही और मानवीय कदम था। भारतीय उपभोक्ताओं के हित को सबसे ऊपर रखा जाएगादरअसल, इससे पहले ईरान का एक और युद्धपोत आइरिस डेना डूब गया था। जानकारी के अनुसार यह जहाज श्रीलंका के गाले तट से लगभग 40 समुद्री मील दूर अमेरिकी पनडुब्बी के हमले में टॉरपीडो से नष्ट हो गया था। इस घटना के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। संसद में बोलते हुए डॉ. जयशंकर ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है, क्योंकि इस क्षेत्र से होकर गुजरने वाला हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार तेल की उपलब्धता, कीमत और जोखिम, तीनों बातों को ध्यान में रखकर फैसले ले रही है और भारतीय उपभोक्ताओं के हित को सबसे ऊपर रखा जाएगा।

दुनिया की अस्थिरता के बीच भारत का ‘दम’, डॉ. एस. जयशंकर ने बताया कैसे बदला देश का कद

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा है कि भारत आज दुनिया के देशों के साथ पहले से ज्यादा मजबूती के साथ जुड़ रहा है और यह भारत की बढ़ती ताकत को दिखाता है। मुंबई में आयोजित ग्लोबल इकोनॉमिक कोऑपरेशन कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए उन्होंने कहा कि हाल में हुए कई व्यापार समझौते इस बात का प्रमाण हैं कि भारत अब वैश्विक मंच पर मजबूत स्थिति में है। जयशंकर ने कहा कि आज दुनिया एक बहुत अनिश्चित और अस्थिर दौर में प्रवेश कर चुकी है। उनके मुताबिक वैश्विक व्यवस्था तेजी से बदल रही है और पुराने सिस्टम कमजोर पड़ रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि नई व्यवस्था बनने में समय लग रहा है और इस वजह से दुनिया एक ‘लंबे संक्रमण काल’ में जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि अब उत्पादन, वित्तीय ताकत, बाजार हिस्सेदारी और निर्यात नियंत्रण जैसे आर्थिक साधनों को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। व्यापारिक अवसरों का विस्तार कर रहाविदेश मंत्री ने इस मौके पर हाल में हुए दो अहम समझौतों का खास जिक्र किया। इसमें पहला भारत-अमेरिका समझौता- प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बातचीत के बाद बड़ा फैसला हुआ। इसमें अमेरिका ने भारतीय सामान पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया। इससे भारत के निर्यात को बड़ा फायदा मिलेगा। दूसरा भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) व्यापार समझौता – पिछले महीने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) पर बातचीत पूरी हुई। इससे दोनों के बीच व्यापार और आर्थिक रिश्ते मजबूत होंगे। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के मुताबिक भारत अब आत्मविश्वास के साथ वैश्विक साझेदारी कर रहा है, आर्थिक ताकत बढ़ा रहा है और व्यापारिक अवसरों का विस्तार कर रहा है। उनके अनुसार, भारत अब ‘कमजोर देश’ की तरह नहीं, बल्कि एक मजबूत और भरोसेमंद वैश्विक साझेदार की तरह दुनिया से जुड़ रहा है।