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अमित शाह: सोमनाथ मंदिर पर हुए हमले मिट गए, लेकिन यह आज भी गर्व से खड़ा

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि भारत के सनातन धर्म, संस्कृति, लोगों की आस्था को खत्म करना आसान नहीं है। अमित शाह ने सोमनाथ मंदिर के बीती सदियों में बार-बार तोड़े जाने और 16 बार पुनर्निर्माण का हवाला दिया। शाह ने कहा कि जिन लोगों ने सोमनाथ मंदिर पर हमले किए, वो मिट गए, लेकिन मंदिर आज भी उसी जगह पर पूरे गर्व के साथ खड़ा है। लोगों को जागरूक किया जाएगाबीती 11 जनवरी को पीएम मोदी ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का शुभारंभ किया था। यह पर्व सोमनाथ मंदिर पर महमूद गजनी के हमले और मंदिर के पुनर्निर्माण के 1000 हजार साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। महमूद गजनी ने साल 1026 में सोमनाथ मंदिर पर हमला किया था। केंद्रीय गृह मंत्री ने बताया कि पीएम मोदी के नेतृत्व में सोमनाथ मंदिर के भव्य कॉरिडोर का निर्माण किया जाएगा। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व पूरे सालभर देश में मनाया जाएगा। इस दौरान कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे और लोगों को जागरूक किया जाएगा। मंदिर आज भी पूरे गर्व के साथ खड़ाशाह ने कहा, ‘एक हजार साल पहले महमूद गजनी ने सोमनाथ मंदिर पर हमला किया और इसे तोड़ा। उसके बाद अन्य हमलावरों जैसे अलाउद्दीन खिलजी, अहमद शाह, महमूद बेगड़ा और औरंगजेब ने भी हमले किए, लेकिन हर हमले के बाद मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को गांधीनगर में कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास किया। इस दौरान शाह ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण और इस पर बार-बार हमले का जिक्र किया और कहा कि सोमनाथ मंदिर को मिटाने वाले मिट गए, लेकिन मंदिर आज भी पूरे गर्व के साथ खड़ा है।

सोमनाथ से पीएम मोदी का संदेश आक्रांताओं के नाम मिट गए, लेकिन आस्था और स्वाभिमान अमर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर पहुंचकर न केवल पूजा-अर्चना की, बल्कि देश के इतिहास, आस्था और आत्मसम्मान से जुड़ा एक सशक्त संदेश भी दिया। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अवसर पर पीएम मोदी ने कहा कि सोमनाथ को तोड़ने वाले आक्रांता आज इतिहास के पन्नों में सिमट गए हैं, लेकिन दुर्भाग्य से देश में आज भी ऐसी ताकतें मौजूद हैं, जो मंदिरों के पुनर्निर्माण का विरोध करती रही हैं। पीएम मोदी ने देशभर से जुड़े श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा आज देश के कोने-कोने से लाखों लोग हमारे साथ जुड़े हैं। ये समय अद्भुत है, ये वातावरण अद्भुत है। एक ओर महादेव, दूसरी ओर समुद्र की लहरें, मंत्रों की गूंज और भक्तों की उपस्थिति यह सब इस अवसर को दिव्य बना रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वे इसे अपना सौभाग्य मानते हैं कि उन्हें सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में इस ऐतिहासिक पर्व में सेवा का अवसर मिला। आक्रांता आते रहेपीएम मोदी ने कहा कि जब वे आज यहां खड़े होकर बोल रहे हैं, तो उनके मन में यह सवाल बार-बार आता है कि 1000 साल पहले इसी स्थान पर कैसा माहौल रहा होगा। उन्होंने कहा हमारे पुरखों ने अपनी आस्था और महादेव के लिए सब कुछ न्योछावर कर दिया। आक्रांताओं को लगा कि वे जीत गए, लेकिन 1000 साल बाद भी सोमनाथ की ध्वजा पूरी दुनिया को भारत की शक्ति का संदेश दे रही है। प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि सोमनाथ का इतिहास विनाश का नहीं, बल्कि विजय और पुनर्निर्माण का इतिहास है। उन्होंने कहा कि आक्रांता आते रहे, लेकिन हर युग में सोमनाथ फिर से खड़ा हुआ इतना धैर्य, संघर्ष और पुनर्निर्माण का उदाहरण दुनिया के इतिहास में दुर्लभ है। भारत के खिलाफ साजिशें की जा रहीपीएम मोदी ने कहा कि जो लोग अपने धर्म के प्रति सच्चे होते हैं, वे कभी कट्टरपंथी सोच का समर्थन नहीं करते। लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि तुष्टीकरण की राजनीति करने वालों ने हमेशा ऐसी सोच के आगे घुटने टेके। उन्होंने कहा कि जब आजादी के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया, तब भी उन्हें रोकने की कोशिश की गई। यहां तक कि 1951 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के मंदिर आने पर भी आपत्तियां जताई गई थीं। पीएम मोदी ने चेतावनी दी कि आज तलवारों की जगह नए और गुप्त तरीकों से भारत के खिलाफ साजिशें की जा रही हैं। ऐसे में देश को सतर्क, मजबूत और एकजुट रहने की जरूरत है।

योगी आदित्यनाथ ने रामानंदाचार्य उत्सव में विपक्ष पर हमला, जाति-धर्म के विभाजन को समाज के लिए खतरा बताया

धर्मनिर्पेक्षता के नाम का ठेका लेकर चलने वाले लोग जिन्होंने हिंदू समाज को तोड़ने में पूरी ताकत दी, उनके मुंह बांग्लादेश के नाम पर बंद हैं। ऐसा लगता है कि उनके मुंह पर किसी ने फेवीकोल या टेप लगा दिया है। विपक्ष पर हमलावर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को माघ मेला स्थित खाक चौक केशिविर में आयोजित जगद्गुरु रामानंदाचार्य जी महाराज के 726वें प्राकट्य उत्सव में यह बातें कहीं। रामानांदाचार्य जी महाराज के मूल मंत्र ‘जात-पात पूछे ना कोई, हरि को भजे सो हरि का होई’ को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जाति व धर्म के आधार पर विभाजन उसी तरह सर्वनाश का कारण बन जाएगा, जैसा कि बांग्लादेश में हो रहा है। उन्होंने आह्वान किया कि मत व संप्रदाय के आधार पर मत बंटो। भगवान रामानंदाचार्य जी हैं जिन्होंने एक नहीं द्वादश शिष्य बनाए और अलग-अलग जाति के बनाए। सोनकर समेत तमाम लोग मौजूद रहेमुख्यमंत्री ने कहा कि वह आज भी देखते हैं कि रामानंदाचार्य परंपरा से निकलीं अलग-अलग धाराएं समाज को अब भी जोड़ने का काम करती हैं। उन्होंने साधु-संतों से कहा कि यह आपका दायित्व है कि बांटने व तोड़ने वालों को कभी पनपने न दें। कमजोर करने वालों को किसी भी स्थिति में आगे नहीं बढ़ने देना है। अगर हम एकजुट होकर ऐसे ही आगे बढ़ते रहे तो आने वाला समय सनातन धर्म का हो जाएगा। तब बांग्लादेश में कोई निरीह व दलित हिंदू को काटने का काम नहीं कर पाएगा।मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जो लोग आज भी आपको बांट रहे हैं वे आपके हितैषी नहीं हो सकते। जब सत्ता में थे तो स्वयं अपने परिवार के बारे में सोचते थे। उससे बाहर उनकी दृष्टि नहीं थी। ये नारे देंगे, स्लोगन देंगे लेकिन जब भी मौका मिलेगा, यह वही करंगे जो पहले किया था। पहचान का संकट होगा, दंगों की आड़ में लोगों को झुलसाने का काम करेंगे। हमें इसकी पुनरावृत्ति नहीं होनी देनी चाहिए। कार्यक्रम में परमार्थ निकेतन आश्रम के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती, श्री बाघंबरी पीठ और श्री बड़े हनुमान मंदिर के महंत बलवीर गिरि जी महाराज, सतुआ बाबा पीठ काशी के पीठाधीश्वर संतोष दास उर्फ सतुआ बाबा, निर्मोही अखाड़े के राजेंद्र दास जी समेत कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, नंद गोपाल गुप्ता नंदी, सांसद प्रवीण पटेल, महापौर गणेश केसरवानी, विधायक सिद्धार्थनाथ सिंह, हर्षवर्धन बाजपेयी, दीपक पटेल, केपी सिंह, पीयूष रंजन निषाद, गुरु प्रसाद मौर्य, डॉ. वाचस्पति, पूर्व सांसद विनोद सोनकर समेत तमाम लोग मौजूद रहे। उत्तर भारत में रामभक्ति को जन-जन तक पहुंचायामुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि स्वामी रामानंदाचार्य ने काफी समय प्रयागराज में व्यतीत किया था। पता चला है कि दारागंज इलाके में कहीं पर उनका स्थान रहा है। सरकार उस स्थान का पता लगा रही है। इसके बाद रामानंदाचार्य के स्थान का जीर्णोद्धा और सुंदरीकरण कराकर उसको भव्य रूप प्रदान किया जाएगा। जाति-पाति पूछे नहीं कोई हरि को भे जो हरि का होई, यह अलख स्वामी रामानंदाचार्य ने प्रयागराज में ही जगाई थी। स्वामी रामानंदाचार्य भारत के महान संत, समाज-सुधारक और भक्ति आंदोलन के प्रमुख आचार्य थे। उन्होंने उत्तर भारत में रामभक्ति को जन-जन तक पहुंचाया और भक्ति को जाति-भेद से मुक्त किया। उनका जन्म लगभग 14वीं शताब्दी में माना जाता है। वे वैष्णव संप्रदाय रामानुजाचार्य की परंपरा से जुड़े थे। वह भगवान राम में भक्ति में लीन रहते थे। उन्होंने प्रयागराज में काफी समय व्यतीत किया। उनका मुख्य स्थान काशी था। स्वामी रामानंदाचार्य जी का मानना था कि भक्ति का मार्ग सबके लिए है। रामानंदाचार्य ने कहा कि ईश्वर-भक्ति पर किसी जाति, वर्ग या लिंग का बंधन नहीं होना चाहिए। कोई भी व्यक्ति रामभक्ति कर सकता है। जाति-पाति पूछे नहीं कोई जो हरि को भजे वह हरि का होई। उन्होंने संस्कृत के बजाय आम जनता की भाषा में उपदेश दिए ताकि हर व्यक्ति समझ सके।