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सोनम वांगचुक की एनएसए गिरफ्तारी पर बड़ा आरोप, पत्नी गीतांजलि बोलीं यह लोकतंत्र की परीक्षा

जलवायु कार्यकर्ता और मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित सोनम वांगचुक की एनएसए के तहत गिरफ्तारी को लेकर उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में कोई ठोस आधार नहीं है, इसी वजह से सरकार अदालत में तारीख पर तारीख मांग रही है। समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए एक साक्षात्कार में गीतांजलि अंगमो ने कहा कि सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी सिर्फ एक व्यक्ति का मामला नहीं, बल्कि यह देश में लोकतंत्र की स्थिति को दर्शाती है। गीतांजलि अंगमो ने कहा यह सिर्फ सोनम की बात नहीं है, यह उस शक्ति के दुरुपयोग की कहानी है जिसके तहत देश के लिए काम करने वाले लोगों को अवैध रूप से हिरासत में लिया जा रहा है। उन्होंने चिंता जताई कि इस मामले पर समाज और राजनीति से उतनी मजबूत प्रतिक्रिया नहीं आई, जितनी आनी चाहिए थी। सोनम वांगचुक का नाम तक नहींअंगमो ने बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत आरोपी को 5 से 10 दिनों के भीतर सभी दस्तावेज उपलब्ध कराए जाने चाहिए थे, लेकिन सोनम वांगचुक को अहम वीडियो 28वें दिन दिए गए। उन्होंने कहा कि यह सेक्शन 8 और सेक्शन 11 का स्पष्ट उल्लंघन है, जिसके चलते यह हिरासत आदेश शुरुआत से ही अवैध हो जाता है। गीतांजलि अंगमो का आरोप है कि जिला मजिस्ट्रेट का आदेश पुलिस द्वारा भेजे गए प्रस्ताव का कॉपी-पेस्ट है और उसमें स्वतंत्र रूप से दिमाग नहीं लगाया गया। उन्होंने कहा कि कई एफआईआर में सोनम वांगचुक का नाम तक नहीं है और जिन वीडियो का हवाला दिया गया है, वे एक से डेढ़ साल पुराने हैं। जिम्मेदार नागरिक की तरह सोचना चाहिएउन्होंने लद्दाख के सांसद मोहम्मद हनीफा समेत उन नेताओं का आभार जताया जिन्होंने संसद में यह मुद्दा उठाया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि यह मामला जितना उठना चाहिए था, उतना नहीं उठा। गीतांजलि अंगमो ने देश में बढ़ते ध्रुवीकरण पर चिंता जताते हुए कहा कि लोगों को पार्टी और विचारधाराओं से ऊपर उठकर एक जिम्मेदार नागरिक की तरह सोचना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस मामले के चलते एचआईएएल और SECMOL से जुड़े नए शैक्षणिक प्रोजेक्ट्स में देरी हुई है और कुछ फंडर्स पर दबाव भी बनाया जा रहा है। हालांकि उन्होंने इसे सिल्वर लाइनिंग बताते हुए कहा कि अब ज्यादा लोग उनके संस्थानों को जानने लगे हैं।

गुवाहाटी हाईकोर्ट के नए कॉम्प्लेक्स के विरोध पर CJI सूर्यकांत सख्त, बोले निजी हित विकास में बाधा नहीं बन सकते

गुवाहाटी हाईकोर्ट के नए कोर्ट कॉम्प्लेक्स को लेकर चल रहे विरोध को देखते हुए अब सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सीजेआई सूर्यकांत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा कि जो लोग इस नए कोर्ट परिसर का विरोध कर रहे हैं, वे पूरी जानकारी के बिना विरोध कर रहे हैं। सीजेआई ने गुवाहाटी हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के विरोध का जिक्र करते हुए कहा कि व्यक्तिगत हित या सुविधा किसी भी तरह से न्यायिक ढांचे के विकास में बाधा बनने का कारण नहीं हो सकते। दरअसल, गुवाहाटी हाईकोर्ट के लिए एक नया कोर्ट कॉम्प्लेक्स बनाए जाने की योजना है। इसे लेकर बार एसोसिएशन के कुछ वकील विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे उन्हें असुविधा हो सकती है। न्यायिक ढांचे के विकास में रुकावट नहीं बन सकतेमुख्य न्यायाधीश ने साफ शब्दों में कहा कि कोर्ट और न्याय व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आधुनिक और बेहतर बुनियादी ढांचे की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि केवल निजी सुविधा या व्यक्तिगत कारणों के आधार पर विकास कार्यों का विरोध सही नहीं है। सीजेआई ने कहा कि ऐसे विरोध से न्याय व्यवस्था के सुधार में रुकावट आती है। इस दौरान सीजेआई ने यह भी कहा कि नए कोर्ट कॉम्प्लेक्स से न्यायिक कामकाज ज्यादा सुचारु और प्रभावी होगा, जिससे आम लोगों को भी फायदा मिलेगा।गुवाहाटी हाईकोर्ट के नए कोर्ट कॉम्प्लेक्स के विरोध पर सीजेआई सूर्यकांत ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि विरोध करने वाले पूरी जानकारी के बिना ऐसा कर रहे हैं। सीजेआई ने स्पष्ट किया कि निजी सुविधा या व्यक्तिगत हित न्यायिक ढांचे के विकास में रुकावट नहीं बन सकते।