78वीं शहीदी दिवस पर बापू को नमन, नेताओं ने अहिंसा और सत्य की राह को याद किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 78वीं पुण्यतिथि पर उन्हें नमन किया और उनके महान विचारों को याद किया। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर बापू को श्रद्धांजलि देते हुए उनके सिद्धांत पर जोर दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से उन्होंने बापू को नमन करते हुए लिखा, “पूज्य बापू ने मानवता की रक्षा के लिए हमेशा अहिंसा पर बल दिया। इसमें वह शक्ति है जो बिना हथियार के दुनिया को बदल सकती है। ‘अहिंसा परमो धर्मस्तथाऽहिंसा परन्तपः। अहिंसा परमं सत्यं यतो धर्मः प्रवर्तते।’ (अहिंसा सबसे बड़ा धर्म है, अहिंसा ही सबसे बड़ा तप है और अहिंसा ही परम सत्य है, जिससे धर्म की स्थापना होती है।) शहीदी दिवस पर विनम्र श्रद्धांजलिवहीं नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने राष्ट्रपिता को याद करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ लिखा, “महात्मा गांधी एक व्यक्ति नहीं, एक सोच हैं। वह सोच जिसे कभी एक साम्राज्य ने, कभी एक नफरत की विचारधारा ने और कभी अहंकारी सत्ता ने मिटाने की असफल कोशिश की। मगर राष्ट्रपिता ने हमें आजादी के साथ यह मूलमंत्र दिया कि सत्ता की ताकत से बड़ी सत्य की शक्ति होती है। और हिंसा व भय से बड़े अहिंसा और साहस। यह सोच मिट नहीं सकती, क्योंकि गांधी भारत की आत्मा में अमर हैं। बापू को उनके शहीदी दिवस पर विनम्र श्रद्धांजलि। अहिंसा की ताकत, और प्रेम की करुणा।कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी बापू के पुण्यतिथि पर उन्हें याद किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “वैश्णव जन तो तेने कहिये जे, पीड़ परायी जाणे रे, पर-दुख्खे उपकार करे तोये, मन अभिमान ना आणे रे (सच्चा ईश्वर भक्त (वैष्णव) वही है, जो दूसरों के दुःख-दर्द को समझता है, दूसरों पर उपकार (भलाई) करता है, लेकिन अपने मन में किसी भी प्रकार का अहंकार (गर्व) नहीं आने देता है)” उन्होंने आगे लिखा, “जिस नफ़रत ने हमें बापू से जुदा किया, उसका तोड़ भी बापू की ही राह है… सत्य का उजाला, अहिंसा की ताकत, और प्रेम की करुणा।”
गांधी पुण्यतिथि पर राहुल गांधी, ‘बापू व्यक्ति नहीं, भारत की अमर आत्मा “जानें और क्या कुछ कहा”

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन किया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी केवल एक व्यक्ति का नाम नहीं है, बल्कि वे एक सोच और जीवन जीने का तरीका हैं। राहुल गांधी के अनुसार, इतिहास में कई बार साम्राज्यवादी ताकतों, नफरत की विचारधारा और सत्ता के घमंड ने इस सोच को मिटाने की कोशिश की, लेकिन वे हर बार नाकाम रहे। राहुल गांधी ने बापू को “भारत की अमर आत्मा” बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ एक पोस्ट में कहा, “महात्मा गांधी एक व्यक्ति नहीं, एक सोच हैं। वह सोच जिसे कभी एक साम्राज्य ने, कभी एक नफरत की विचारधारा ने और कभी अहंकारी सत्ता ने मिटाने की असफल कोशिश की। मगर राष्ट्रपिता ने हमें आजादी के साथ यह मूलमंत्र दिया कि सत्ता की ताकत से बड़ी सत्य की शक्ति होती है और हिंसा व भय से बड़े अहिंसा और साहस। यह सोच मिट नहीं सकती, क्योंकि गांधी भारत की आत्मा में अमर हैं। बापू को उनके शहीदी दिवस पर विनम्र श्रद्धांजलि। ड्रा ने भी बापू के बलिदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलिकांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इस मौके पर बापू को याद किया। उन्होंने कहा कि जिस नफरत ने बापू को हमसे अलग किया, उसका समाधान भी बापू के दिखाए रास्ते में ही मिलता है। उन्होंने सत्य की रोशनी, अहिंसा की शक्ति और प्रेम की करुणा को समाज के लिए सबसे जरूरी बताया। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी बापू के बलिदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। उनके मूल्य भारत की रग-रग में बसेइस अवसर पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इतिहास के कुछ दस्तावेजों का जिक्र किया। उन्होंने 1948 में जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल के उन पत्रों को याद किया, जिनमें उन्होंने हिंदू महासभा और आरएसएस की गतिविधियों की आलोचना की थी। रमेश ने वर्तमान राजनीति पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कुछ लोग आज भी बापू की विचारधारा को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने नेहरू के उस ऐतिहासिक भाषण को भी साझा किया जो उन्होंने बापू की हत्या के बाद रेडियो पर दिया था। कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल ने भी बापू को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि 1948 में आज ही के दिन दुनिया को रास्ता दिखाने वाली महान आत्मा को हमसे छीन लिया गया था। उन्होंने चेतावनी दी कि आज भी कुछ लोग गांधी जी को देश की यादों से मिटाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोग भले ही बापू को छोटा दिखाने की कोशिश करें, लेकिन उनके मूल्य भारत की रग-रग में बसे हैं।
राहुल गांधी से मुलाकात के बाद शशि थरूर ने तोड़ी चुप्पी, कांग्रेस में कलह की अटकलों पर लगा विराम

संसद में गुरुवार को कांग्रेस सांसद शशि थरूर और राहुल गांधी के बीच एक संक्षिप्त लेकिन महत्वपूर्ण मुलाकात हुई। इस बैठक के बाद थरूर ने मुस्कुराते हुए कहा, “सब ठीक है।” उनके इस बयान ने कांग्रेस के भीतर चल रहे मतभेदों और असंतोष की खबरों पर फिलहाल विराम लगा दिया है। थरूर ने राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के साथ हुई इस बातचीत को “बहुत ही रचनात्मक और सकारात्मक” बताया। उन्होंने साफ किया कि अब वे और पार्टी नेतृत्व एक ही बात पर सहमत हैं। पिछले कुछ महीनों से शशि थरूर और कांग्रेस नेतृत्व के बीच तनाव की खबरें आ रही थीं। थरूर ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि उनके कुछ मुद्दे हैं, जिन्हें वे पार्टी के मंच पर उठाना चाहते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा था कि वे 17 साल से कांग्रेस में हैं और उन्होंने कभी भी संसद में पार्टी के तय रुख का उल्लंघन नहीं किया है। भाजपा में जाने की अफवाहें उड़ने लगींविवाद की शुरुआत तब हुई जब थरूर पार्टी की एक अहम बैठक में शामिल नहीं हुए थे। हालांकि, उन्होंने बाद में स्पष्ट किया कि वे एक साहित्य उत्सव में गए थे और इसकी जानकारी नेतृत्व को पहले ही दे दी गई थी। इसके अलावा, कोच्चि में पार्टी के एक कार्यक्रम में उनके साथ हुए खराब व्यवहार की खबरों पर भी उन्होंने चुप्पी साधे रखी। पार्टी के भीतर असली बेचैनी तब बढ़ी जब पिछले साल अप्रैल में पहलगाम आतंकी हमले के बाद थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकट प्रबंधन की तारीफ की थी। कांग्रेस के कई नेताओं ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। इसके बाद भाजपा ने थरूर को एक अंतरदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने का न्योता दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। इस दल में कांग्रेस का कोई और नेता शामिल नहीं था, जिससे उनके भाजपा में जाने की अफवाहें उड़ने लगीं। वंशवादी राजनीति की आलोचना कीतनाव तब और बढ़ गया जब थरूर ने प्रधानमंत्री के एक भाषण की सोशल मीडिया पर सराहना की और “भारतीय राजनीति एक पारिवारिक व्यवसाय है” शीर्षक से एक लेख लिखा। इस लेख में उन्होंने वंशवादी राजनीति की आलोचना की थी, जिससे कांग्रेस नेतृत्व काफी नाराज हुआ था। हालांकि, थरूर ने हमेशा यही कहा कि उनकी टिप्पणियां किसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा नहीं, बल्कि राष्ट्रहित से प्रेरित थीं। उन्होंने साफ किया कि प्रधानमंत्री की तारीफ करने का मतलब यह नहीं है कि वे भाजपा में शामिल हो रहे हैं, बल्कि यह राष्ट्रीय एकता का संदेश है। अब राहुल गांधी से मुलाकात के बाद माना जा रहा है कि पार्टी के अंदरूनी मतभेद सुलझ गए हैं।
शशि थरूर बोले पार्टी लाइन नहीं तोड़ी, राष्ट्रीय हित में ऑपरेशन सिंदूर पर असहमति पर आज भी कायम

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शनिवार को कहा कि उन्होंने संसद में कभी भी पार्टी के रुख का उल्लंघन नहीं किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सैद्धांतिक रूप से उनकी एकमात्र सार्वजनिक असहमति ऑपरेशन सिंदूर को लेकर थी। थरूर केरल लिटरेचर फेस्टिवल में आयोजित एक सत्र के दौरान सवालों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर उन्होंने सख्त रुख अपनाया था और वह इस अब भी बिना किसी पछतावे के इस रुख पर कायम हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब इस तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं कि पार्टी नेतृत्व के साथ उनके मतभेद चल रहे हैं। इन अटकलों में यह भी शामिल है कि कोच्चि में हुए एक हालिया कार्यक्रम में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से उन्हें पर्याप्त महत्व न दिए जाने और राज्य के नेताओं की ओर से कई बार उन्हें किनारे लगाने की कोशिशों से वे नाराज हैं। भारत को सर्वोपरि रखना चाहिएअपने रुख को स्पष्ट करते हुए थरूर ने कहा कि एक पर्यवेक्षक और लेखक के रूप में उन्होंने पहलगाम की घटना के बाद एक अखबार में लेख लिखा था। उस लेख में उन्होंने कहा था कि बिना सजा दिए इस मामले को नहीं छोड़ा जाना चाहिए और इसके जवाब में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जवाहरलाल नेहरू ने ही वह प्रसिद्ध सवाल उठाया था- अगर भारत मर गया, तो कौन जिएगा? थरूर ने कहा, जब भारत की प्रतिष्ठा दांव पर हो, जब भारत की सुरक्षा और दुनिया में उसकी जगह का सवाल हो, तब भारत सबसे पहले आता है। उन्होंने यह भी कहा कि बेहतर भारत के निर्माण की प्रक्रिया में राजनीतिक दलों के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन जब राष्ट्रीय हितों की बात हो, तो भारत को सर्वोपरि रखना चाहिए।
मनरेगा पर केंद्र सरकार पर बरसे खरगे, “योजना खत्म करना गांधी जी और ग्राम स्वराज की सोच मिटाने की साजिश”

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मनरेगा योजना को लेकर केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मनरेगा को खत्म करना महात्मा गांधी का नाम और ग्राम स्वराज की सोच मिटाने की कोशिश है। इस दौरान उन्होंने पीएम मोदी के ‘चायवाले’ दावे पर भी जमकर निशाना साधा। जो कि खूब सुर्खियों में भी है। खरगे ने सरकार पर गरीब लोगों का हक छीनने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चार दिन आप भी मजदूरी कीजिए। मनरेगा का काम कीजिए तब पता चलेगा।बता दें कि खरगे ने यह बातें कांग्रेस द्वारा आयोजित राष्ट्रीय मनरेगा मजदूर सम्मेलन में बोलते हुए कही। इस सम्मेलन में देशभर से आए मजदूरों ने हिस्सा लिया। वे अपने-अपने काम के स्थान से एक मुट्ठी मिट्टी लेकर आए। इस मिट्टी को पौधों में डाला गया, जो मजदूरों के संघर्ष और उनके हक का प्रतीकात्मक संदेश था। इस मौके पर खरगे के साथ लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी मौजूद थे। इसके साथ ही खरगे ने आगे कहा कि सरकार ने मनरेगा को खत्म कर गरीबों और मजदूरों के हक पर हमला किया है। हम बजट सत्र में इस फैसले के खिलाफ पूरी ताकत से लड़ेंगे। संसद के बजट सत्र में जोर-शोर से उठाएगीखरगे ने कहा कि लोगों के वोट लेने के लिए ‘मैं चाय वाला हूं’ कहते रहे। कभी चाय बनाई या केतली लेकर हर आदमी को दिया क्या? केवल भाषण के सहारे लोगों के वोट हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। सब इनका नाटक है। गरीबों को दबाना इनकी आदत है। इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गुरुवार को सरकार पर बड़ा आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि मनरेगा कानून को खत्म करना महात्मा गांधी का नाम लोगों की यादों से हटाने की कोशिश है। साथ ही उन्होंने कहा कि इससे ग्राम स्वराज की सोच भी कमजोर होगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे एकजुट रहें और सरकार को नया कानून लागू न करने दें। खरगे ने साफ कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को संसद के बजट सत्र में जोर-शोर से उठाएगी। ग्रामीणों के काम के अधिकार को बनाए रखेगौरतलब है कि कांग्रेस ने 10 जनवरी से ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ नाम से 45 दिन का देशव्यापी आंदोलन शुरू किया है। यह आंदोलन यूपीए सरकार के समय बने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) को बचाने के लिए चलाया जा रहा है। इस संग्राम के माध्यम से कांग्रेस की सरकार से मांग है कि मनरेगा की जगह लाया गाया विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार आजीविका मिशन (ग्रामीण) कानून को वापस लिया जाए। इसके साथ ही मनरेगा को उसके मूल अधिकार आधारित स्वरूप में बहाल करे। ग्रामीणों के काम के अधिकार को बनाए रखे। पंचायतों की ताकत और अधिकार को फिर से मजबूत करे। कांग्रेस का कहना है कि मनरेगा सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि गरीबों और ग्रामीण मजदूरों के लिए जीवनरेखा है, जिसे खत्म नहीं होने दिया जाएगा।
राहुल गांधी का रायबरेली में जोरदार संदेश, मनरेगा बचाओ, मोदी-अंबानी के हाथों गरीबों का पैसा नहीं जाएगा

रायबरेली में सांसद राहुल गांधी ने मंगलवार को भुएमऊ गेस्ट हाउस में पार्टी पदाधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। इस दौरान उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि हमें लड़ते रहना है और डरना नहीं है। उन्होंने वर्तमान भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सरकार धर्म का आडंबर ओढ़े हुए है, जिसे बेनकाब करना आवश्यक है। बैठक में आगामी पंचायत चुनावों में उम्मीदवारों के चयन और पार्टी की रणनीति पर गहन विचार-विमर्श किया गया।राहुल गांधी ने कहा, हमारी तीन टर्म की सरकार में मनरेगा का जो कांसेप्ट था, उसमें पंचायतों को जिम्मेदारी देने की बात थी। उनको फाइनेंसियल रिस्पांसिबिलिटी दी जाए। उस दौरान दूसरा लक्ष्य था कि हिंदुस्तान के जो गरीब लोग हैं, उनके लिए मिनिमम वेज बने। जिससे कम कहीं भी किसी को वेज न मिले। अंबानी के साथ में चला जाएनरेंद्र मोदी यह नहीं चाहते हैं। वह पावर को पावर कांसेप्टेड करना चाहते हैं। वह पावर को अपने हाथों में लेना चाहते हैं और ब्यूरोक्रेसी के हाथों में डालना चाहते हैं। वह गरीबों को भूखा मारना चाहते हैं। मुख्य बात यह नहीं है कि मनरेगा का नाम बदला गया है,लेकिन नाम बदल कर गांधी जी का अपमान जरूर किया गया है। उससे बड़ी बात है कि जो गरीब जनता है, उससे प्रोटेक्शन हटा दिया गया है। हमारी थर्ड टर्म गर्वमेंट की जो सोच थी, उसकी जड़ को काटा गया है। कांग्रेस पार्टी पूरे देश में मनरेगा को बचाने के लिए संघर्ष कर रही है। जो मजदूरी करते हैं उनकी सुरक्षा में लगे हुए हैं। नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि देश का पूरा धन अदानी और अंबानी के साथ में चला जाए, एक तरफ हम जनता की रक्षा कर रहे हैं तो दूसरी तरफ नरेंद्र मोदी देश की जनता का पैसा खींच कर अदानी और अंबानी को देने में लगे हैं। राजनीतिक गलियारों में अहम माना जा रहाराहुल गांधी ने पार्टी की युवा शक्ति को आगे बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। इस संकेत से यह स्पष्ट होता है कि कांग्रेस आगामी पंचायत चुनावों में युवा चेहरों पर भरोसा जता सकती है। पार्टी का मानना है कि युवा जोश और नए विचारों से संगठन को मजबूती मिलेगी और जमीनी स्तर पर बेहतर प्रदर्शन किया जा सकेगा। इस अवसर पर, सांसद राहुल गांधी ने 31 विकास कार्यों का लोकार्पण किया और आठ नए कार्यों का शिलान्यास भी किया। इन विकास परियोजनाओं से क्षेत्र की जनता को लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके बाद, उन्होंने रायबरेली प्रीमियर लीग का उद्घाटन किया, जिससे स्थानीय खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन मिलेगा। विकास कार्यों के उद्घाटन और खेल आयोजन के पश्चात, राहुल गांधी नगर पालिका अध्यक्ष शत्रोहन सोनकर के आवास पर पहुंचे। उन्होंने वहां पालिका अध्यक्ष से मुलाकात की और स्थानीय मुद्दों पर चर्चा की। इस मुलाकात को राजनीतिक गलियारों में अहम माना जा रहा है।
विवादित बयान पर घिरे कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया, सीएम मोहन यादव ने राहुल गांधी से की सख्त कार्रवाई की मांग

कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया के हालिया बयान ने देश की राजनीति में तीखा विवाद खड़ा कर दिया है। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने विशेष वर्ग की महिलाओं के साथ होने वाले यौन अपराधों को धार्मिक ग्रंथों से जोड़कर अभद्र टिप्पणी कर दी। साथ ही उन्होंने अपने बयान में आपराधिक कार्यों को तीर्थ यात्रा से भी जोड़ते हुए पुण्य का बता दिया। राहुल गांधी के मध्यप्रदेश आगमन से पहले कांग्रेस की चुप्पी को बरैया के बयान का समर्थन माना जा रहा है, जिससे सियासी घमासान और तेज हो गया है। कांग्रेस विधायक के इस विवादित बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए खुद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राहुल गांधी से विधायक बरैया के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। बयान महिला-विरोधीमुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया का बयान महिला-विरोधी है। ऐसे नेता समाज में जहर घोलने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी इंदौर आ रहे हैं। उनसे वे मांग करते हैं कि ऐसे कांग्रेस नेता को निलंबित किया जाना चाहिए। कांग्रेस के विधायक फूल सिंह बरैया ने समाज में विद्वेष फैलाने का काम किया है। सीएम ने कहा कि राहुल गांधी से उम्मीद करता हूं कि वे विधायक को निलंबत करें, ताकि लगे कि उनके मन में सभी के प्रति समान भावना है। अपराधी मानसिकता पर चुपभाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष ऊषा अग्रवाल ने एक्स पर बयान की निंदा की है। उन्होंने कहा कि इंदौर में राहुल गांधी के साथ मंच पर कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया दिखे हैं। यह सहमति है या स्वीकारोक्ति है। अब स्पष्ट है कि महिलाओं के प्रति दूषित, विकृत और कुंठित मानसिकता सिर्फ़ बरैया की नहीं, बल्कि राहुल गांधी के नेतृत्व वाली पूरी कांग्रेस की सोच है। अगर आपत्ति होती, तो मंच साझा नहीं किया जाता। सोनिया गांधी व प्रियंका गांधी महिला सम्मान की बातें तो करती हैं, लेकिन अपनी ही पार्टी की अपराधी मानसिकता पर चुप हैं।
कांग्रेस ने शुरू किया ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’, केंद्र सरकार पर योजना कमजोर करने का आरोप

देशभर में बीते कुछ दिनों से ‘मनरेगा’ योजना के नाम को लेकर खूब चर्चा चल रही है। इसका बड़ा कारण केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा को हटाकर नई योजना विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड अजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी-जी राम जी) योजना लाना है। इसके बाद से कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दल सरकार के इस फैसले का जमकर विरोध कर रहे हैं। ऐसे में अब कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने का आरोप लगाया है। साथ ही कहा कि सरकार ने इस योजना पर बुलडोजर चला दिया है, जबकि यह योजना देश के करोड़ों गरीब और ग्रामीण लोगों की रोजी-रोटी का सहारा है। इतना ही नहीं अब कांग्रेस ने देशभर में ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ शुरू करने का भी एलान किया है। देशभर में जन आंदोलन बनाया जाएगाबात अगर मनरेगा बचाओ संग्राम की करें तो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी के संचार प्रभारी जयराम रमेश ने बताया कि यह अभियान देश की करीब 2.5 लाख ग्राम पंचायतों तक पहुंचेगा और इसमें करोड़ों लोग जुड़ेंगे। उनका कहना है कि यह आंदोलन लोगों के काम के अधिकार, मजदूरी के अधिकार और जवाबदेही को वापस दिलाने के लिए है। बता दें कि इस पूरे अभियान की निगरानी के लिए कांग्रेस ने एक समन्वय समिति बनाई है। इसके संयोजक अजय माकन हैं, जबकि जयराम रमेश, संदीप दीक्षित और प्रियंक खरगे जैसे वरिष्ठ नेता इसके सदस्य हैं।कांग्रेस का ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ 10 जनवरी से 25 फरवरी तक चलेगा। पार्टी का कहना है कि यह लड़ाई ग्रामीण गरीबों के हक और सम्मान के लिए है और इसे देशभर में जन आंदोलन बनाया जाएगा। मनरेगा की मूल भावना और उद्देश्य की रक्षा की जाएइस संग्राम को लेकर कांग्रेस ने लोगों से अपील की है कि वे इस अभियान से जुड़ें। इसके लिए पार्टी ने एक वेबसाइट भी शुरू की है, जहां लोग ऑनलाइन जुड़ सकते हैं और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजी जाने वाली याचिका पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। कांग्रेस की याचिका में कहा गया है कि मनरेगा एक संवैधानिक अधिकार है और इसे कमजोर नहीं किया जाना चाहिए। पार्टी की प्रमुख मांगें है कि इस योजना में काम की गारंटी को पूरी तरह बहाल किया जाए, न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन तय की जाए, पंचायतों को ज्यादा अधिकार दिए जाएं और मनरेगा की मूल भावना और उद्देश्य की रक्षा की जाए। कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को इस अभियान को लेकर विस्तृत निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि गांव स्तर पर होने वाले कार्यक्रमों में मनरेगा मजदूरों को सोनिया गांधी का वीडियो संदेश दिखाया जाएगा। इसके अलावा, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से एक पत्र भी जल्द जारी किया जाएगा। इसे स्थानीय भाषाओं में छपवाकर ग्राम प्रधानों, मनरेगा मजदूरों, रोजगार सहायकों और पूर्व प्रधानों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।
मनरेगा पर राजनीति कर रही कांग्रेस, चिराग पासवान बोले भ्रष्टाचार पर प्रहार से घबराया विपक्ष

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने सोमवार को पटना में आयोजित प्रेस वार्ता में विपक्ष पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि विपक्ष, खासकर कांग्रेस, ने जनता को झूठ बोलकर डराने की परंपरा शुरू की है। जो योजनाएं आम लोगों के हित में हैं, उन्हें नुकसानदेह बताकर भ्रम फैलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने 15 दिनों तक बेवजह हंगामा किया, लेकिन अगर वास्तव में कोई गड़बड़ी होती तो बिहार की जनता सड़कों पर उतरकर विरोध करती, जो नहीं हुआ। स्वरोजगार से जोड़ना एक सकारात्मक कदमराष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि विपक्ष भ्रम फैला रहा है। उन्होंने मनरेगा को लेकर कांग्रेस पर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में मनरेगा सिर्फ भ्रष्टाचार का अड्डा बनकर रह गया है और गरीब मजदूरों को उनका वाजिब हक नहीं मिला। अब जब केंद्र सरकार इस भ्रष्टाचार पर प्रहार कर रही है, तो कांग्रेस बेचैन हो रही है। उन्होंने कहा कि योजना के ढांचे में बदलाव से गरीब मजदूरों को फायदा मिलेगा। 125 दिन का रोजगार देना, मॉनिटरिंग शुरू करना और महिलाओं को आर्थिक मदद देना गलत कैसे हो सकता है? महिलाओं को पहले 10 हजार और फिर 1.90 लाख रुपये देकर स्वरोजगार से जोड़ना एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इस पर भी विपक्ष सवाल उठा रहा है। चुनाव में जाने से पहले सभी जिम्मेदारियों को पूरा किया जाएगाचिराग पासवान ने कहा कि कांग्रेस भावनात्मक मुद्दे उठाकर लोगों को गुमराह कर रही है। महात्मा गांधी के नाम को लेकर बेवजह विवाद खड़ा किया जा रहा है, जबकि समय-समय पर योजनाओं के स्वरूप में बदलाव होते रहे हैं। उन्होंने कहा कि राम नाम से इन्हें आपत्ति क्यों है, यह किसी से छिपा नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश में धर्म के आधार पर अत्याचार हो रहा है, लेकिन इस पर विपक्ष चुप्पी साधे हुए है। आगामी चुनावों को लेकर चिराग पासवान ने कहा कि पहले असम और फिर बंगाल में एनडीए अपनी जीत सुनिश्चित करेगा। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार की योजनाओं का ही असर है कि गठबंधन लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने बताया कि पार्टी संगठन में भी बदलाव किए जाएंगे और विधायकों की भूमिका को लेकर चर्चा होगी। आने वाले पांच साल को उन्होंने स्वर्णिम काल बताया और कहा कि चुनाव में जाने से पहले सभी जिम्मेदारियों को पूरा किया जाएगा।
इंदौर में पानी नहीं, जहर बंटा” 15 मौतों पर राहुल गांधी का तीखा हमला, PM की चुप्पी पर सवाल

मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी की वजह से हुई 15 मौतों के मामले में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने निशाना साधा। राहुल गांधी ने एक्स पर साझा पोस्ट में कहा, ‘इंदौर में पानी नहीं, जहर बंटा और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में रहा। घर-घर मातम है, गरीब बेबस हैं – और ऊपर से BJP नेताओं के अहंकारी बयान। जिनके घरों में चूल्हा बुझा है, उन्हें सांत्वना चाहिए थी; सरकार ने घमंड परोस दिया। लोगों ने बार-बार गंदे, बदबूदार पानी की शिकायत की – फिर भी सुनवाई क्यों नहीं हुई? राहुल गांधी ने सवाल उठाते हुए कहा, ‘सीवर पीने के पानी में कैसे मिला? समय रहते सप्लाई बंद क्यों नहीं हुई? जिम्मेदार अफसरों और नेताओं पर कार्रवाई कब होगी? ये ‘फोकट’ सवाल नहीं – ये जवाबदेही की मांग है। साफ पानी एहसान नहीं, जीवन का अधिकार है और इस अधिकार की हत्या के लिए BJP का डबल इंजन, उसका लापरवाह प्रशासन और संवेदनहीन नेतृत्व पूरी तरह ज़िम्मेदार है। मध्यप्रदेश अब कुप्रशासन का एपिसेंटर बन चुका है – कहीं खांसी की सिरप से मौतें, कहीं सरकारी अस्पताल में बच्चों की जान लेने वाले चूहे, और अब सीवर मिला पानी पीकर मौतें। और जब-जब गरीब मरते हैं, मोदी जी हमेशा की तरह खामोश रहते हैं।’ इस पूरे मामले पर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर भी सवाल उठाएकांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के मुद्दे पर भाजपा सरकार को घेरा। सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में खरगे ने लिखा, ‘जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत अभियान का ढिंढोरा पीटने वाली प्रधानमंत्री मोदी हमेशा की तरह इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों को लेकर मौन हैं।’ खरगे ने लिखा, ‘इंदौर के पास सबसे साफ शहर का खिताब है, लेकिन भाजपा के निकम्मेपन के चलते लोग साफ पानी के मोहताज हैं।’ खरगे ने बिफरते हुए लिखा, ‘देश 11 साल से खोखले दावे और डबन इंजन की डींगे सुन रहा है। जब मंत्री जी से सवाल पूछा जाता है तो वे गाली गलौज पर उतर आते हैं। उल्टा पत्रकार पर हावी हो जाते हैं। जल जीवन मिशन समेत हर योजना में भ्रष्टाचार और धांधली है। मोदी सरकार देश को न साफ पानी मुहैया करा पा रही है और न ही स्वच्छ हवा। आम जनता भुगत रही है।’ राहुल गांधी ने इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के मुद्दे पर भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने एमपी की सरकार पर संवेदनहीन होने का आरोप लगाया और साथ ही इस पूरे मामले पर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर भी सवाल उठाए।