तमिलनाडु में सरकार गठन पर सियासी संग्राम, विजय की राज्यपाल से तीसरी मुलाकात आज

तमिलनाडु में नई सरकार के गठन को लेकर सियासी खींचतान जारी है। इस बीच खबर सामने आई है कि तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) प्रमुख विजय शुक्रवार की शाम को राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मुलाकात करेंगे। यह मुलाकात सरकार के गठन को लेकर जारी गतिरोध को सुलझाने और बहुमत साबित करने के लिए होगी। सूत्रों के मुताबिक, टीवीके नेता विजय को आखिरकार बहुमत का दावा करने के लिए जरूरी सीटों का आंकड़ा पा लिया है। इसमें कांग्रेस की पांच और वीसीके, सीपीएम और सीपीआई की दो-दो सीटें शामिल हैं। इन दलों के समर्थन से विजय ने बहुमत के लिए 118 सीटों के जादुई आंकड़े को छू लिया है। चुनाव में शानदार जीत हासिल कीराज्यपाल आरवी आर्लेकर के साथ विजय की ये तीसरी मुलाकात होगी। इससे पहले दोनों की मुलाकात बुधवार और गुरुवार को भी हुई थी। दोनों बार आर्लेकर ने विजय के सरकार बनाने के दावे को खारिज करते हुए तर्क दिया कि टीवीके नेता को सदन में बहुमत के लिए जरूरी समर्थन प्राप्त नहीं है। विजय की तमिलगा वेट्री कझगम ने पिछले महीने के चुनाव में शानदार जीत हासिल की थी। पार्टी ने अपने पहले ही चुनावी मुकाबले में 234 में से 107 सीटें जीतकर द्रविड़ राजनीति की दिग्गज पार्टियों डीएमके और एआईएडीएमके के तमिलनाडु में 62 साल के वर्चस्व को तोड़ दिया।
तमिलनाडु में सत्ता की जंग तेज विजय की TVK ने पेश किया सरकार बनाने का दावा, बहुमत से अब भी दूर

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) ने राज्य में सरकार बनाने की कवायद शुरू कर दी है। टीवीके प्रमुख विजय ने बुधवार को राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से राजभवन में मुलाकात की। उन्होंने राज्य में सरकार बनाने का दावा पेश किया। सूत्रों के अनुसार, विजय ने राज्यपाल को विधायकों के समर्थन का जो पत्र सौंपा है, उसमें 112 विधायकों के समर्थन का दावा किया है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वहीं, राज्यपाल अभी तक टीवीके के दावे से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं क्योंकि पार्टी के पास बहुमत साबित करने के लिए पर्याप्त आधिकारिक आंकड़े नहीं हैं। सीपीएम जैसे दलों के साथ बातचीत शुरू कर दीतमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है। इस चुनाव में विजय की पार्टी टीवीके ने 108 सीटों पर जीत दर्ज की है। कांग्रेस पार्टी ने टीवीके को अपना समर्थन देने का एलान किया है। कांग्रेस के पास विधानसभा में 5 सीटें हैं। कांग्रेस के समर्थन के बाद विजय की पार्टी टीवीके के गठबंधन की संख्या 234 सदस्यीय विधानसभा में 113 तक पहुंच गई है। क्योंकि विजय ने दो सीटों से चुनाव लड़ा था और दोनों पर ही जीत हासिल की थी। ऐसे में अब उनको एक सीट छोड़नी होगी। इसके बाद टीवीके का आंकड़ा 112 विधायकों का ही रह जाता है। अब 118 के बहुमत के आंकड़े को पार करने के लिए पार्टी को कम से कम छह और विधायकों की आवश्यकता होगी। इसे लेकर विजय ने वीसीके, सीपीआई और सीपीएम जैसे दलों के साथ बातचीत शुरू कर दी है।
कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की आहट? डीके शिवकुमार बोले- ‘दिल्ली सिर्फ हवा खाने नहीं, राजनीति करने आया

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने दिल्ली में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा तेज हो गई है। सोनिया गांधी के आवास दस जनपथ से बाहर आने के बाद शिवकुमार ने मीडिया से बात की। उन्होंने कहा कि वह यहां सिर्फ दिल्ली की हवा में सांस लेने नहीं आए हैं, बल्कि राजनीति करने आए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाला समय ही हर बात का जवाब देगा। जब उनसे पूछा गया कि वह प्रियंका गांधी या राहुल गांधी में से किससे मिले, तो उन्होंने सीधा जवाब नहीं दिया। शिवकुमार ने कहा कि वह सड़क पर खड़े होकर राजनीति नहीं करना चाहते। उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व से उन सभी मुद्दों पर चर्चा कर ली है, जो जरूरी थे। शिवकुमार ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल से भी मुलाकात की। उन्होंने बताया कि दिल्ली आने पर उन्हें सभी मामलों की जानकारी देनी होती है और उन्होंने हर विषय पर विस्तार से बात की है। अपनी बात पर कायम रहेंगेशिवकुमार ने आगे कहा, हमने असम विधानसभा चुनाव और अन्य राजनीतिक मामलों पर चर्चा की है। उन्होंने वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल और अन्य नेताओं के साथ मिलकर असम में कांग्रेस की सरकार लाने की तैयारी पर चर्चा की। शिवकुमार के बयानों से कर्नाटक में सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी के भीतर हलचल मचने की संभावना है। कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी से मुलाकात के बाद शिवकुमार आत्मविश्वास से भरे नजर आ रहे हैं। शिवकुमार के समर्थक विधायक चाहते हैं कि पार्टी का आलाकमान दखल दे और नेतृत्व को लेकर चल रही उलझन को खत्म करे। इसी बीच उनके भाई और पूर्व सांसद डीके सुरेश ने एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी में बाहर से आए लोगों को ज्यादा महत्व मिल रहा है। इसे मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर सीधा निशाना माना जा रहा है। सिद्धारमैया पहले दूसरी पार्टी में थे और बाद में कांग्रेस में शामिल हुए थे। सुरेश ने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री अपनी बात पर कायम रहेंगे, जिसे सत्ता के बंटवारे के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।