गुजरात में AAP-BJP टकराव तेज, केजरीवाल का कार्यकर्ता सम्मेलन रद्द, AAP बोली—लोकतंत्र पर हमला

गुजरात में आम आदमी पार्टी (AAP) और भाजपा सरकार के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी ने गुजरात की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि अरविंद केजरीवाल के कार्यकर्ता सम्मेलन की अनुमति जानबूझकर रद्द करवाई गई। आम आदमी पार्टी गुजरात के विधायक गोपाल इटालिया ने कहा कि आज पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल का कार्यकर्ताओं के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित होना था। इसके लिए पार्टी ने पहले से एक निजी स्थल किराए पर लिया था और सभी तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। गोपाल इटालिया के मुताबिक कल रात से भाजपा ने तानाशाही और गुंडागर्दी शुरू कर दी। कार्यक्रम स्थल के मालिक को डराया गया और दबाव बनाकर कार्यक्रम रुकवा दिया गया। विधायक का आरोप है कि पार्टी के बढ़ते जनाधार से भाजपा घबरा गई है और इसी डर के चलते लोकतांत्रिक कार्यक्रमों को रोका जा रहा है। विधायक गोपाल इटालिया ने कहा कि इससे पहले भी पार्टी के नेताओं को जेल में डाला गया, लेकिन पार्टी नहीं रुकी। अब फिर वही काम किया जा रहा है, लेकिन आम आदमी पार्टी न रुकने वाली है और न झुकने वाली। उन्होंने इसे सीधे-सीधे लोकतंत्र पर हमला करार दिया है। पार्टी का कहना है कि शांतिपूर्ण राजनीतिक कार्यक्रम रोकना संविधान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ है। आम आदमी पार्टी की पकड़ लगातार मजबूत हो रहीगौरतलब है कि आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल 17 से 19 जनवरी तक तीन दिवसीय गुजरात दौरे पर है। दौरे के दौरान अरविंद केजरीवाल अहमदाबाद और वडोदरा में पार्टी के कार्यकर्ता सम्मेलनों में शामिल होकर करीब 20 हजार बूथ लेवल वॉलिंटियर्स को शपथ दिलाई जानी थी। 18 जनवरी को अहमदाबाद में सेंट्रल जोन के बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित होना था, जिसको अब रद्द कर दिया गया है। इसमें अहमदाबाद, गांधीनगर, खेड़ा और सुरेंद्रनगर लोकसभा क्षेत्रों के 9 हजार से अधिक बूथ वॉलिंटियर्स शपथ लेने वाले थे। इसके बाद 19 जनवरी को वडोदरा में ईस्ट जोन का बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन होगा। इस कार्यक्रम में आनंद, वडोदरा, दाहोद, छोटा उदेपुर और पंचमहल लोकसभा क्षेत्रों के 9 हजार से अधिक बूथ वॉलिंटियर्स को शपथ दिलाई जाएगी। इतनी बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की भागीदारी यह साफ संकेत देती है कि गुजरात में आम आदमी पार्टी की पकड़ लगातार मजबूत हो रही है।
अंबरनाथ नगर परिषद में सियासी संग्राम, उपाध्यक्ष चुनाव में भाजपा शिवसेना आमने-सामने

महाराष्ट्र के अंबरनाथ नगर परिषद की सामान्य सभा बैठक में सोमवार को उस समय हंगामा हो गया, जब परिषद के उपाध्यक्ष को लेकर चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई। बैठक के दौरान भाजपा और एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना के पार्षदों के बीच जोरदार बहस और नारेबाजी देखने को मिली। दरअसल, अंबरनाथ नगर परिषद में लंबे समय से भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के बीच सत्ता को लेकर खींचतान चल रही है। ऐसे में पिछले महीने हुए चुनाव में भाजपा की उम्मीदवार तेजश्री करंजुले पाटील को नगर परिषद अध्यक्ष चुना गया था। लेकिन अब उपाध्यक्ष पद का चुनाव नया विवाद बन गया है। बता दें कि 60 सदस्यीय नगर परिषद में फिलहाल शिवसेना (शिंदे गुट) के 27 पार्षद, भाजपा के 14, कांग्रेस के 12, एनसीपी के चार और दो निर्दलीय पार्षद हैं। शुरुआत में भाजपा ने कांग्रेस के 12 और एनसीपी के चार पार्षदों के समर्थन से ‘अंबरनाथ विकास आघाड़ी (एवीए)’ बनाई थी, जिससे उसके पास 32 का बहुमत हो गया था। एनसीपी के सदाशिव पाटील को उम्मीदवार बनायालेकिन बाद में कांग्रेस ने अपने 12 पार्षदों को पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते निलंबित कर दिया, जिन्होंने भाजपा का साथ दिया था। इसके बाद एनसीपी के चारों पार्षदों ने भाजपा से समर्थन वापस ले लिया और शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल हो गए। इससे शिवसेना की संख्या बढ़कर 32 हो गई और उन्हें सदन में बहुमत मिल गया। बात अगर अब बैठक में हुए हंगामा की करें तो सोमवार की बैठक में भाजपा ने एवीए के सभी सदस्यों को अपने उम्मीदवार प्रदीप पाटील के पक्ष में वोट देने का व्हिप जारी किया। लेकिन एनसीपी ने इस व्हिप को मानने से इनकार कर दिया। इस फैसले का समर्थन स्थानीय शिवसेना विधायक डॉ. बालाजी किणीकर ने किया और कहा कि अब एवीए का कोई अस्तित्व नहीं है। वहीं, शिवसेना ने उपाध्यक्ष पद के लिए एनसीपी के सदाशिव पाटील को उम्मीदवार बनाया। परिषद में सत्ता को लेकर तनाव बना हुआइतना ही नहीं जैसे ही चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ी, सदन का माहौल बिगड़ गया। दोनों पक्षों के पार्षदों के बीच तीखी बहस, आरोप-प्रत्यारोप और गाली-गलौज शुरू हो गई। गुस्से में आए भाजपा पार्षदों को चप्पल लहराते और शिवसेना उम्मीदवार के खिलाफ नारे लगाते भी देखा गया। गौरतलब है कि उपाध्यक्ष चुनाव का आधिकारिक नतीजा मतदान और मतगणना की प्रक्रिया पूरी होने के बाद घोषित किया जाएगा। फिलहाल नगर परिषद में सत्ता को लेकर तनाव बना हुआ है।