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78वीं शहीदी दिवस पर बापू को नमन, नेताओं ने अहिंसा और सत्य की राह को याद किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 78वीं पुण्यतिथि पर उन्हें नमन किया और उनके महान विचारों को याद किया। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर बापू को श्रद्धांजलि देते हुए उनके सिद्धांत पर जोर दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से उन्होंने बापू को नमन करते हुए लिखा, “पूज्य बापू ने मानवता की रक्षा के लिए हमेशा अहिंसा पर बल दिया। इसमें वह शक्ति है जो बिना हथियार के दुनिया को बदल सकती है। ‘अहिंसा परमो धर्मस्तथाऽहिंसा परन्तपः। अहिंसा परमं सत्यं यतो धर्मः प्रवर्तते।’ (अहिंसा सबसे बड़ा धर्म है, अहिंसा ही सबसे बड़ा तप है और अहिंसा ही परम सत्य है, जिससे धर्म की स्थापना होती है।) शहीदी दिवस पर विनम्र श्रद्धांजलिवहीं नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने राष्ट्रपिता को याद करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ लिखा, “महात्मा गांधी एक व्यक्ति नहीं, एक सोच हैं। वह सोच जिसे कभी एक साम्राज्य ने, कभी एक नफरत की विचारधारा ने और कभी अहंकारी सत्ता ने मिटाने की असफल कोशिश की। मगर राष्ट्रपिता ने हमें आजादी के साथ यह मूलमंत्र दिया कि सत्ता की ताकत से बड़ी सत्य की शक्ति होती है। और हिंसा व भय से बड़े अहिंसा और साहस। यह सोच मिट नहीं सकती, क्योंकि गांधी भारत की आत्मा में अमर हैं। बापू को उनके शहीदी दिवस पर विनम्र श्रद्धांजलि। अहिंसा की ताकत, और प्रेम की करुणा।कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी बापू के पुण्यतिथि पर उन्हें याद किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “वैश्णव जन तो तेने कहिये जे, पीड़ परायी जाणे रे, पर-दुख्खे उपकार करे तोये, मन अभिमान ना आणे रे (सच्चा ईश्वर भक्त (वैष्णव) वही है, जो दूसरों के दुःख-दर्द को समझता है, दूसरों पर उपकार (भलाई) करता है, लेकिन अपने मन में किसी भी प्रकार का अहंकार (गर्व) नहीं आने देता है)” उन्होंने आगे लिखा, “जिस नफ़रत ने हमें बापू से जुदा किया, उसका तोड़ भी बापू की ही राह है… सत्य का उजाला, अहिंसा की ताकत, और प्रेम की करुणा।”

राष्ट्र प्रथम – कर्तव्य निष्ठा युवा, एनसीसी कैडेट्स के बीच पहुँचे पीएम मोदी, दिया भविष्य का रोडमैप

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार (28 जनवरी) को राजधानी दिल्ली के करियप्पा परेड ग्राउंड में आयोजित वार्षिक नेशनल कैडेट कोर (एनसीसी) पीएम रैली में शामिल हुए। पीएम मोदी के साथ इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद रहे। इस दौरान पीएम मोदी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अपने विचार रख रहे हैं। यह आयोजन एक महीने तक चलने वाले वार्षिक एनसीसी गणतंत्र दिवस शिविर के समापन का प्रतीक है। जिसमें देश भर से 2406 कैडेट्स ने हिस्सा लिया है, जिसमें 898 लड़कियां भी शामिल थीं। प्रधानमंत्री की रैली का विषय ‘राष्ट्र प्रथम – कर्तव्य निष्ठा युवा’ है, जो भारत के युवाओं में कर्तव्य, अनुशासन और राष्ट्रीय प्रतिबद्धता की भावना को दर्शाता है। अंत में एक पुरुष मार्चिंग टुकड़ी शामिलदरअसल, यह रैली एनसीसी गणतंत्र दिवस शिविर 2026 के भव्य समापन का प्रतीक है, जिसका औपचारिक उद्घाटन 5 जनवरी को उप राष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने किया था। एनसीसी ने 3 जनवरी को घोषणा की थी कि इस वर्ष देश भर से 898 लड़कियों सहित 2,406 एनसीसी कैडेट वार्षिक शिविर में भाग ले रहे हैं। भूटान, श्रीलंका, ब्राजील, नेपाल और मलयेशिया सहित 20 से अधिक मित्र विदेशी देशों के 200 से अधिक कैडेट और अधिकारी भी इसमें भाग ले रहे हैं। एक महीने तक चलने वाले इस शिविर में कई अंतर-निदेशालय प्रतियोगिताएं और कार्यक्रम शामिल हैं, जैसे कि सर्वश्रेष्ठ कैडेट प्रतियोगिता, छोटे हथियारों से फायरिंग और ध्वज क्षेत्र डिजाइनिंग। राष्ट्रीय राजधानी के कर्तव्य पथ पर आयोजित 77वें गणतंत्र दिवस परेड में पहले एक महिला मार्चिंग टुकड़ी, फिर एक संयुक्त बैंड और अंत में एक पुरुष मार्चिंग टुकड़ी शामिल थी। एनसीसी गणतंत्र दिवस शिविर में कैडेटों को संबोधित कियापहली बार एनसीसी के दल के नेताओं ने सैन्य टुकड़ियों के सदस्यों के “समान” रूप से तलवार लेकर औपचारिक परेड में मार्च किया। इस अवसर पर, राष्ट्रीय रंगशाला और राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के सदस्यों, एनसीसी कैडेटों द्वारा एक जीवंत सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाएगा, जिसमें राष्ट्र निर्माण, सामाजिक सेवा और चरित्र विकास में उनकी भूमिका को प्रदर्शित किया जाएगा। बता दें कि पिछले एक महीने में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान और तीनों सेनाओं के प्रमुखों सहित सरकार और सेना के विभिन्न नेताओं ने एनसीसी गणतंत्र दिवस शिविर में कैडेटों को संबोधित किया है।

“इतिहास को तोड़-मरोड़ रहे हैं पीएम मोदी!” जयराम रमेश का बड़ा आरोप, बोले- ‘बापू की विरासत मिटाने की हो रही साजिश’

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर शुक्रवार को तीखा हमला बोला। कांग्रेस ने कहा कि प्रधानमंत्री इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने में सबसे माहिर हैं। कांग्रेस ने ये भी कहा कि राष्ट्रगान के इतिहास से भी छेड़छाड़ की कोशिश की गई और बीते महीने संसद में वंदे मातरम पर चर्चा के दौरान रवींद्रनाथ टैगोर का भी अपमान करने का प्रयास किया गया।कांग्रेस संचार प्रभारी और महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में आरोप लगाया कि पीएम मोदी व्यवस्थागत तरीके से महात्मा गांधी की यादों और विरासत को मिटाने की कोशिश कर रहे हैं। जयराम रमेश ने पोस्ट में लिखा, ‘बीते महीने संसद में राष्ट्रगीत पर चर्चा के दौरान पीएम मोदी और उनके सहयोगी बेनकाब हो गए। राष्ट्रगान के इतिहास से भी छेड़छाड़ की कोशिश की गई और इस दौरान गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर का भी अपमान का प्रयास किया गया।”आज 23 जनवरी 2026 के दिन देश नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती मना रहा है, जिन्होंने 1937 में वंदे मातरम की पंक्तियों को लेकर हुए विवाद को सुलझाने में मुख्य भूमिका निभाई, जिसका पीएम मोदी ने जानबूझकर जिक्र नहीं किया।’ दोबारा लिखने की कोशिश करने जैसे आरोप लगाएजयराम रमेश ने लिखा ‘नेताजी सुभाषचंद्र बोस के परपोते और इतिहासकार सुगत बोस ने लिखा कि नेताजी ने 2 नवंबर 1942 को बर्लिन में फ्री इंडिया सेंटर का उद्घाटन किया था और उस दौरान उन्होंने राष्ट्रगान के दौरान पर जन गण मन गाया था।”नेताजी ने ही 6 जुलाई 1944 को सिंगापुर से प्रसारित संदेश में पहली बार महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता कहकर संबोधित किया था। अब प्रधानमंत्री महात्मा गांधी की यादों और विरासत को व्यवस्थागत तरीके से मिटाने की कोशिश कर रहे हैं और इसका ताजा उदाहरण मनरेगा कानून वापस लेना है।’ बीते माह संसद में शीतकालीन सत्र के दौरान वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में चर्चा हुई। इस चर्चा के दौरान सत्ता और विपक्ष के बीच जमकर बहस हुई। प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि बंगाल में चुनाव होने के चलते वंदे मातरम पर विशेष चर्चा की जा रही है। कांग्रेस ने भाजपा पर वंदे मातरम के नाम पर राजनीति करने और इतिहास को दोबारा लिखने की कोशिश करने जैसे आरोप लगाए। इसके जवाब में सत्तापक्ष ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया।

“PM मोदी के दौरे से पहले स्टालिन का वार!” केंद्र पर लगाया विश्वासघात का आरोप, पूछे शिक्षा और फंड से जुड़े तीखे सवाल

प्रधानमंत्री मोदी के तमिलनाडु दौरे से ठीक पहले राज्य के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। स्टालिन ने भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर तमिलनाडु के साथ बार-बार विश्वासघात करने और राज्य की प्रमुख मांगों को लगातार नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री स्टालिन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक लंबी पोस्ट के जरिए केंद्र सरकार से कई सवाल पूछे। उन्होंने शिक्षा, परिसीमन, राज्यपाल की भूमिका, तमिल भाषा के लिए वित्तीय सहायता, कल्याणकारी योजनाओं, बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य परियोजनाओं में देरी जैसे मुद्दों को उठाया। महत्वपूर्ण परियोजनाओं को लंबे समय से लंबित रखास्टालिन ने पूछा कि तमिलनाडु के लिए लंबित 3,458 करोड़ रुपये की समग्र शिक्षा योजना की राशि कब जारी होगी। उन्होंने परिसीमन को लेकर चिंता जताते हुए सवाल किया कि राज्य की लोकसभा सीटें कम नहीं होंगी, इसकी स्पष्ट गारंटी केंद्र सरकार कब देगी। उन्होंने राज्यपाल की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य सरकार के कामकाज में लगातार हस्तक्षेप हो रहा है। इसके साथ ही उन्होंने तमिल भाषा के विकास के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता न मिलने का मुद्दा उठाया। मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने राज्य की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को लंबे समय से लंबित रखा है। इनमें मदुरै एम्स, होसुर एयरपोर्ट, कोयंबटूर और मदुरै मेट्रो परियोजनाएं शामिल हैं। उन्होंने आपदा राहत फंड, कीझड़ी रिपोर्ट जारी करने और नीट से छूट की मांग पर भी केंद्र को घेरा। शिक्षा फंड और नीट जैसे मुद्दों पर केंद्र को घेरास्टालिन ने कहा कि तमिलनाडु के लोग राज्य की उपेक्षा करने वाले भाजपा गठबंधन को चुनाव में जवाब देंगे। उन्होंने दावा किया कि राज्य की जनता केंद्र की नीतियों से नाराज है और आने वाले विधानसभा चुनावों में इसका असर साफ दिखाई देगा। इस बीच प्रधानमंत्री मोदी आज तमिलनाडु के चेंगलपट्टू जिले के मदुरंथकम में जनसभा को संबोधित करेंगे। यह जनसभा आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के लिए चुनावी अभियान की शुरुआत के तौर पर देखी जा रही है। मोदी के तमिलनाडु दौरे से पहले मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार पर राज्य की मांगों की अनदेखी, फंड में देरी और परियोजनाओं को लंबित रखने का आरोप लगाया। उन्होंने परिसीमन, शिक्षा फंड और नीट जैसे मुद्दों पर केंद्र को घेरा।

अमित शाह: सोमनाथ मंदिर पर हुए हमले मिट गए, लेकिन यह आज भी गर्व से खड़ा

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि भारत के सनातन धर्म, संस्कृति, लोगों की आस्था को खत्म करना आसान नहीं है। अमित शाह ने सोमनाथ मंदिर के बीती सदियों में बार-बार तोड़े जाने और 16 बार पुनर्निर्माण का हवाला दिया। शाह ने कहा कि जिन लोगों ने सोमनाथ मंदिर पर हमले किए, वो मिट गए, लेकिन मंदिर आज भी उसी जगह पर पूरे गर्व के साथ खड़ा है। लोगों को जागरूक किया जाएगाबीती 11 जनवरी को पीएम मोदी ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का शुभारंभ किया था। यह पर्व सोमनाथ मंदिर पर महमूद गजनी के हमले और मंदिर के पुनर्निर्माण के 1000 हजार साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। महमूद गजनी ने साल 1026 में सोमनाथ मंदिर पर हमला किया था। केंद्रीय गृह मंत्री ने बताया कि पीएम मोदी के नेतृत्व में सोमनाथ मंदिर के भव्य कॉरिडोर का निर्माण किया जाएगा। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व पूरे सालभर देश में मनाया जाएगा। इस दौरान कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे और लोगों को जागरूक किया जाएगा। मंदिर आज भी पूरे गर्व के साथ खड़ाशाह ने कहा, ‘एक हजार साल पहले महमूद गजनी ने सोमनाथ मंदिर पर हमला किया और इसे तोड़ा। उसके बाद अन्य हमलावरों जैसे अलाउद्दीन खिलजी, अहमद शाह, महमूद बेगड़ा और औरंगजेब ने भी हमले किए, लेकिन हर हमले के बाद मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को गांधीनगर में कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास किया। इस दौरान शाह ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण और इस पर बार-बार हमले का जिक्र किया और कहा कि सोमनाथ मंदिर को मिटाने वाले मिट गए, लेकिन मंदिर आज भी पूरे गर्व के साथ खड़ा है।

भारत–जर्मनी दोस्ती का संदेश, चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने साबरमती में दी गांधी को श्रद्धांजलि

जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज अपनी पहली भारत यात्रा पर सोमवार को गुजरात के अहमदाबाद पहुंचे। जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चांसलर मर्ज ने सुबह साबरमती आश्रम जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान मर्ज ने कहा कि महात्मा गांधी की विरासत भारतीयों और जर्मनों को दोस्त के रूप में जोड़ती है और आज की दुनिया को गांधीजी की शिक्षाओं की पहले से कहीं ज्यादा जरूरत है। बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी आश्रम में पहले ही पहुंच गए थे, जहां उन्होंने मर्ज का स्वागत किया। दोनों नेताओं ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर फूल चढ़ाए और इसके बाद ‘हृदय कुंज’ का दौरा किया। हृदय कुंज वह कमरा है जहां स्वतंत्रता आंदोलन के समय गांधीजी अपनी पत्नी कस्तूरबा गांधी के साथ रहते थे। आश्रम में चांसलर मर्ज ने चरखे पर खादी का सूत कातने की प्रक्रिया भी देखी। गांधीजी ने आजादी के आंदोलन के दौरान खादी और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए चरखे को प्रतीक बनाया था। महिला कारीगरों से बातचीत कीइसके साथ ही जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने साबरमती आश्रम की आगंतुका पुस्तिका में एक संदेश भी लिखा। मर्ज ने लिखा कि महात्मा गांधी का स्वतंत्रता और हर व्यक्ति की गरिमा में अटूट विश्वास आज भी हमें प्रेरित करता है। यह विरासत भारतीयों और जर्मनों को मित्र के रूप में जोड़ती है, खासकर ऐसे समय में जब दुनिया को गांधीजी की शिक्षाओं की सबसे ज्यादा जरूरत है। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर मर्ज साबरमती रिवरफ्रंट पहुंचे। यहां प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव-2026 का उद्घाटन किया। दोनों नेताओं ने महिला कारीगरों से बातचीत की और पतंग बनाने की प्रक्रिया को समझा। इसके बाद उन्होंने खुले वाहन में मैदान का चक्कर लगाया और खुद भी पतंग उड़ाया। यह महोत्सव 14 जनवरी तक चलेगागुजरात सरकार के अनुसार, इस साल के अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव में 50 देशों से 135 पतंगबाज और भारत से करीब 1,000 पतंग प्रेमी भाग ले रहे हैं। महोत्सव के तहत ये पतंगबाज पिछले दो दिनों में राजकोट, सूरत, धोलावीरा (कच्छ) और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (नर्मदा) जैसे स्थानों पर भी जा चुके हैं और लोगों का मनोरंजन किया है। अहमदाबाद में यह महोत्सव 14 जनवरी तक चलेगा। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज पहली भारत यात्रा पर अहमदाबाद पहुंचे। जहां पीएम मोदी के साथ उन्होंने साबरमती आश्रम में महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान मर्ज ने कहा कि गांधी की शिक्षाएं आज की दुनिया के लिए बेहद जरूरी हैं और उनकी विरासत भारत-जर्मनी को मित्रता के सूत्र में बांधती है।

सोमनाथ से पीएम मोदी का संदेश आक्रांताओं के नाम मिट गए, लेकिन आस्था और स्वाभिमान अमर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर पहुंचकर न केवल पूजा-अर्चना की, बल्कि देश के इतिहास, आस्था और आत्मसम्मान से जुड़ा एक सशक्त संदेश भी दिया। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अवसर पर पीएम मोदी ने कहा कि सोमनाथ को तोड़ने वाले आक्रांता आज इतिहास के पन्नों में सिमट गए हैं, लेकिन दुर्भाग्य से देश में आज भी ऐसी ताकतें मौजूद हैं, जो मंदिरों के पुनर्निर्माण का विरोध करती रही हैं। पीएम मोदी ने देशभर से जुड़े श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा आज देश के कोने-कोने से लाखों लोग हमारे साथ जुड़े हैं। ये समय अद्भुत है, ये वातावरण अद्भुत है। एक ओर महादेव, दूसरी ओर समुद्र की लहरें, मंत्रों की गूंज और भक्तों की उपस्थिति यह सब इस अवसर को दिव्य बना रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वे इसे अपना सौभाग्य मानते हैं कि उन्हें सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में इस ऐतिहासिक पर्व में सेवा का अवसर मिला। आक्रांता आते रहेपीएम मोदी ने कहा कि जब वे आज यहां खड़े होकर बोल रहे हैं, तो उनके मन में यह सवाल बार-बार आता है कि 1000 साल पहले इसी स्थान पर कैसा माहौल रहा होगा। उन्होंने कहा हमारे पुरखों ने अपनी आस्था और महादेव के लिए सब कुछ न्योछावर कर दिया। आक्रांताओं को लगा कि वे जीत गए, लेकिन 1000 साल बाद भी सोमनाथ की ध्वजा पूरी दुनिया को भारत की शक्ति का संदेश दे रही है। प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि सोमनाथ का इतिहास विनाश का नहीं, बल्कि विजय और पुनर्निर्माण का इतिहास है। उन्होंने कहा कि आक्रांता आते रहे, लेकिन हर युग में सोमनाथ फिर से खड़ा हुआ इतना धैर्य, संघर्ष और पुनर्निर्माण का उदाहरण दुनिया के इतिहास में दुर्लभ है। भारत के खिलाफ साजिशें की जा रहीपीएम मोदी ने कहा कि जो लोग अपने धर्म के प्रति सच्चे होते हैं, वे कभी कट्टरपंथी सोच का समर्थन नहीं करते। लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि तुष्टीकरण की राजनीति करने वालों ने हमेशा ऐसी सोच के आगे घुटने टेके। उन्होंने कहा कि जब आजादी के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया, तब भी उन्हें रोकने की कोशिश की गई। यहां तक कि 1951 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के मंदिर आने पर भी आपत्तियां जताई गई थीं। पीएम मोदी ने चेतावनी दी कि आज तलवारों की जगह नए और गुप्त तरीकों से भारत के खिलाफ साजिशें की जा रही हैं। ऐसे में देश को सतर्क, मजबूत और एकजुट रहने की जरूरत है।

वाराणसी में नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप का शुभारंभ, पीएम मोदी ने वर्चुअल रूप से किया उद्घाटन

वाराणसी के सिगरा स्थित डॉ. संपूर्णानंद स्पोर्ट्स स्टेडियम में रविवार को मुख्यमंत्री योगी की मौजूदगी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप का वर्चुअल रूप से उद्घाटन किया।दोपहर 12 बजे आयोजन में जब पीएम नरेंद्र मोदी वर्चुअल रूप से जुड़े तो पूरा स्टेडियम हर-हर महादेव के नारे से गूंज उठा। वहीं, पीएम मोदी ने नमः पार्वती पतये हर-हर महादेव के जयघोष के साथ स्टेडियम में मौजूद खिलाड़ियों, उनके कोच और कार्यकर्ताओं का अभिवादन किया। पीएम नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल रूप से खिलाड़ियों को संबोधित किया। उन्होंने वॉलीबॉल खिलाड़ियों से कहा कि एक कहावत है कि बनारस के जानल चाहत हउआ त बनारस आवे के पड़ी… अब आप सभी बनारस आ गए हैं तो यहां की संस्कृति को भी समझ जाएंगे। अन्य नेता मौजूद रहेआप सभी को यहां उत्साह बढ़ाने वाले दर्शक मिलेंगे। वॉलीबॉल हमें टीम फर्स्ट का संदेश देती है, सभी प्लेयर्स अपनी टीम के लिए खेलते हैं। यह खेल हमें सिखाता है कि कोई भी जीत हमारे अकेले की नहीं होती है। टीम की जीत से सभी जीतते हैं। हमारे देश में भी (इंडिया फर्स्ट) की भावना है। सुबह 11:00 बजे तक सिगरा स्टेडियम में वॉलीबाल खिलाड़ियों के साथ भाजपा नेता और कार्यकर्ता जुट गए थे। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ मंच पर शहर उत्तरी विधायक रवींद्र जायसवाल, कैंट विधायक सौरभ श्रीवास्तव, शहर दक्षिणी विधायक डा. नीलकंठ तिवारी, विधायक टी. राम जिलाध्यक्ष व एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा समेत अन्य नेता मौजूद रहे। सके बाद वंदे मातरम… गीत गया गयाइससे पहले, सीएम योगी के आगमन और वर्चुअल रूप से पीएम मोदी को देखने के लिए आतुर भाजपा कार्यकर्ता मोदी-योगी जल्दी आवा व हर हर महादेव के नारे लगा रहे थे। 11:22 बजे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब सिगरा स्टेडियम पहुंचे तो कार्यकर्ताओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। काशी में पहली बार इस तरह के वॉलीबॉल प्रतियोगिता का आयोजन हो रहा है। 72वीं सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप में देश भर से 58 टीमें भाग ले रही हैं। आयोजन के लिए स्टेडियम को रंग-बिरंगे फ्लैग, चैंपियनशिप के बैनर और होर्डिंग से सजाया गया है। 11:15 बजे तक स्टेडियम खिलाड़ियों से भर गया था। सीएम योगी ने मंच से पीएम मोदी का आभार कर अपना संबोधन शुरू किया। इससे पहले सीएम योगी का मंच पर डिप्टी सीएम बृजेश पाठक और महापौर अशोक तिवारी ने अंग वस्त्र और स्मृति चिन्ह देकर स्वागत किया। इसके बाद वंदे मातरम… गीत गया गया।

सवा सौ साल बाद लौटे भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष, PM मोदी ने कहा– भारत की विरासत लौटी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र पिपरहवा अवशेषों की भव्य अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। इस अवसर पर अपने संबोधन में उन्होंने कहा, सवा सौ साल के इंतजार के बाद भारत की विरासत लौटी है, भारत की धरोहर लौटी है। आज से भारतीय जनमानस, भगवान बुद्ध के इन पवित्र अवशेषों के दर्शन कर पाएगा, भगवान बुद्ध के आशीर्वाद ले पाएगा। मैं इस शुभ अवसर पर यहां मौजूद सभी अतिथियों का स्वागत और अभिनंदन करता हूं। उन्होंने आगे कहा, 2026 के शुरुआत में ही यह शुभ उत्सव बहुत प्रेरणादायी है और मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि 2026 का ये मेरा पहला सार्वजनिक कार्यक्रम है, जो भगवान बुद्ध की चरणों से शुरू हो रहा है। मेरी कामना है कि भगवान बुद्ध के आशीर्वाद से 2026 दुनिया के लिए शांति, समृद्धि और सद्भाव का नया दौर लेकर आए। जिस स्थान पर यह प्रदर्शनी लगी है वो भी अपने-आप में विशेष है। किला राय पिथौरा का यह स्थान भारत के गौरवशाली इतिहास की यशभूमि है। अवशेष को अपने बीच पाकर हम सभी धन्यउन्होंने कहा, भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष को अपने बीच पाकर हम सभी धन्य हैं। इनका भारत से बाहर जाना और लौटकर फिर भारत आना… ये दोनों ही पड़ाव अपने-आप में बहुत बड़ा सबक है। सबक ये है कि गुलामी कोई राजनीतिक और आर्थिक नहीं होती, गुलामी हमारी विरासत को भी तबाह कर देती है। भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष के साथ भी यही हुआ। गुलामी के कालखंड में इन्हें भारत से छीना गया। तब से करीब सवा सौ साल तक ये देश से बाहर ही रहे हैं। इसलिए उन्होंने इन पवित्र अवशेषों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नीलाम करने का प्रयास किया। भारत के लिए तो भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष… हमारे आराध्य का ही एक अंश है, हमारी सभ्यता का अभिन्न अंग है। प्रधानमंत्री ने कहा, भगवान बुद्ध सबके हैं… सबको जोड़ते हैं। मैं खुद को बहुत भाग्यशाली समझता हूं, क्योंकि भगवान बुद्ध का मेरे जीवन में बहुत ही गहरा स्थान रहा है। मेरा जन्म जिस वडनगर में हुआ, वो बौद्ध शिक्षा का बहुत बड़ा केंद्र था। जिस भूमि पर भगवान बुद्ध ने प्रथम उपदेश दिए, वो सारनाथ आज मेरी कर्मभूमि है। भारत केवल भगवान बुद्ध के पावन अवशेषों का संरक्षक नहीं है, बल्कि उनकी परंपरा का जीवंत वाहक भी है। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध से जुड़े अवशेष बुद्ध के संदेश की जीवित उपस्थिति है।

प्रधानमंत्री मोदी ने INSV कौंडिन्य की टीम को नए साल से पहले दी विशेष शुभकामनाएं, भारत की समुद्री विरासत को बनाया गौरव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए साल से पहले भारतीय नौसेना के ऐतिहासिक नौकायन पोत INSV कौंडिन्य की टीम का उत्साह बढ़ाया है। पीएम मोदी ने समुद्र में यात्रा कर रही टीम की एक तस्वीर सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा करते हुए उनके जोश और समर्पण की सराहना की। प्रधानमंत्री ने लिखा कि आईएनएसवी कौंडिन्य की टीम से यह तस्वीर पाकर उन्हें बेहद खुशी हुई है। उन्होंने कहा कि जैसे ही देश वर्ष 2026 में प्रवेश करने जा रहा है, समुद्र के बीच इस ऐतिहासिक अभियान पर निकली टीम को उनकी विशेष शुभकामनाएं हैं और आशा है कि आगे की यात्रा भी सफलता और आनंद से भरी होगी। आईएनएसवी कौंडिन्य को सोमवार को गुजरात के पोरबंदर से ओमान के लिए रवाना किया गया था। इस अवसर पर पश्चिमी नौसेना कमान के प्रमुख वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन मौजूद रहे। साथ ही भारत में ओमान के राजदूत ईसा सालेह अल शिबानी भी इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने। मिशन को और अधिक प्रेरणादायक बना दियारक्षा मंत्रालय के अनुसार, आईएनएसवी कौंडिन्य भारत की प्राचीन समुद्री परंपराओं से प्रेरित एक अनोखा पोत है। यह पूरी तरह लकड़ी से बना है और इसे पारंपरिक स्टिच्ड-प्लैंक तकनीक से तैयार किया गया है। आधुनिक जहाजों के विपरीत, इसके लकड़ी के तख्तों को नारियल की रस्सियों से सिला गया है और प्राकृतिक रेज़िन से सील किया गया है। यह तकनीक कभी भारत के तटीय क्षेत्रों और हिंद महासागर क्षेत्र में व्यापक रूप से प्रचलित थी। आईएनएसवी कौंडिन्य इतिहास, कारीगरी और आधुनिक नौसैनिक कौशल का दुर्लभ संगम है, जो भारत की समृद्ध समुद्री विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत करता है। आईएनएसवी कौंडिन्य की यह यात्रा केवल एक नौसैनिक अभियान नहीं, बल्कि भारत और ओमान के बीच ऐतिहासिक समुद्री संबंधों की भी याद दिलाती है। पीएम मोदी की शुभकामनाओं ने इस मिशन को और अधिक प्रेरणादायक बना दिया है, जो नए साल में भारत की सांस्कृतिक और समुद्री पहचान को वैश्विक मंच पर मजबूत करेगा।