अपनी सुरक्षा खुद करो! पेंटागन की नई रक्षा नीति से दुनिया में हड़कंप, अमेरिका ने सहयोगियों से खींचे हाथ

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के मुख्यालय पेंटागन ने शुक्रवार देर रात प्राथमिकताओं में बदलाव को दर्शाने वाली नई राष्ट्रीय रक्षा रणनीति जारी की। इसमें नाटो व अन्य सहयोगी देशों को अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद संभालने को कहा गया है। इसमें वो सभी राष्ट्र शामिल हैं, जिनसे अब तक अमेरिका के प्रगाढ़ संबंध रहे हैं। इस प्रकार का 34 पन्नों का दस्तावेज 2022 के बाद पहली बार जारी किया गया है, जो एक सैन्य नीति दस्तावेज होने के बावजूद काफी हद तक राजनीतिक है। इसमें यूरोप से एशिया तक के साझेदार देशों की आलोचना की गई है। दस्तावेज में हुई आलोचना के तहत यूरोप और एशियाई साझेदार देश अपनी रक्षा के लिए पूर्व अमेरिकी सरकारों पर निर्भर रहे। इसमें दृष्टिकोण, फोकस और लहजे में तीव्र बदलाव की बात कही गई है, जिसका मतलब है कि रूस से लेकर उत्तर कोरिया तक के खतरों से निपटने का ज्यादा बोझ अब सहयोगी देशों को उठाना होगा। समर्थन की बात कही गईयह दस्तावेज ऐसे समय आया है जब ट्रंप प्रशासन और यूरोप जैसे उसके पारंपरिक सहयोगियों के बीच तनाव है। इसमें रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के मंत्रालय की तरफ से ग्रीनलैंड और पनामा नहर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों तक अमेरिकी सैन्य और व्यावसायिक पहुंच सुनिश्चित करने के विश्वसनीय विकल्प देने की बात कही गई है। 34 पेज का यह दस्तावेज चीन के संदर्भ में कहता है कि बदलाव दर्शाने वाली नई राष्ट्रीय रक्षा नीति का उद्देश्य चीन पर प्रभुत्व जमाना या उसे अपमानित करना नहीं है। इसका मुख्य मकसद उसे अमेरिका और उसके सहयोगियों पर हावी होने से रोकना है। हालांकि, इस अहम रणनीतिक दस्तावेज में ताइवान का कोई स्पष्ट जिक्र नहीं है, जबकि 2022 की रणनीति में ताइवान की आत्मरक्षा के समर्थन की बात कही गई थी। कनाडा के लिए गंभीर खतरा साबित होगायूरोप के बारे में कहा गया है कि रूस उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के पूर्वी सदस्यों के लिए खतरा बना रहेगा, लेकिन नाटो सहयोगी यूरोप की पारंपरिक रक्षा की मुख्य जिम्मेदारी खुद संभालने में सक्षम हैं। मालूम हो कि अमेरिका पहले ही यूक्रेन सीमा के पास नाटो क्षेत्रों से अपने सैनिकों की संख्या घटाने की पुष्टि कर चुका है। वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के साथ संभावित व्यापार समझौते को लेकर कनाडा को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा कि अगर कनाडा ने चीन के साथ कोई व्यापारिक सौदा किया तो अमेरिका सभी कनाडाई वस्तुओं और उत्पादों पर तुरंत 100 प्रतिशत टैरिफ लगा देगा। उन्होंने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कॉर्नी को आगाह करते हुए कहा कि ऐसा कोई भी समझौता कनाडा के लिए गंभीर खतरा साबित होगा।
डेनमार्क की प्रधानमंत्री ने ट्रंप के ग्रीनलैंड कब्जे के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी, “नाटो और सुरक्षा खतरे में”

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड पर कब्जे को लेकर दिए गए बयान पर डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने सोमवार को करारा हमला बोला और उन्होंने कहा कि डेनमार्क को अमेरिका वेनेजुएला समझने की कोशिश न करे। हम पर हमला करना नाटो मिलिट्री गठबंधन का अंत होगा। वेनेजुएला में मिलिट्री ऑपरेशन के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को मीडिया से बात करते हुए कहा था कि अब अमेरिका ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की तैयारी में है। उनके इस बयान पर डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने सोमवार को तीखा पलटवार किया और कहा कि ग्रीनलैंड पर अमेरिका का कब्जा नाटो मिलिट्री गठबंधन का अंत होगा। बता दें कि काराकास में अमेरिकी सेना द्वारा नेता निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ने के लिए आधी रात को किए गए ऑपरेशन से पूरी दुनिया हैरान है। अमेरिका के इस कदम से डेनमार्क और ग्रीनलैंड की चिंता बढ़ गई, जो डेनिश साम्राज्य का एक अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है और इस तरह नाटो का हिस्सा है। ऐसी स्थिति स्वीकार नहीं करेंगेफ्रेडरिकसेन ने सोमवार को डेनिश ब्रॉडकास्टर से बात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति की ग्रीनलैंड को लेकर दिए गए बयान की कड़ी आलोचना की और विनाशकारी परिणामों की चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “अगर अमेरिका किसी दूसरे नाटो देश पर मिलिट्री हमला करने का फैसला करता है, तो सब कुछ रुक जाएगा। यानी, हमारे नाटो और इस तरह दूसरी दुनिया की जंग खत्म होने के बाद से मिली सुरक्षा भी खत्म हो जाएगी।” ट्रंप ने अपने राष्ट्रपति बनने के दौरान और अपने दूसरे कार्यकाल के शुरुआती महीनों में बार-बार ग्रीनलैंड पर अमेरिका के अधिकार की बात कही, और उन्होंने द्वीप पर कंट्रोल करने के लिए मिलिट्री फोर्स का इस्तेमाल करने से भी इनकार नहीं किया है। रविवार को उनकी टिप्पणियों, जिसमें उन्होंने रिपोर्टर्स से कहा, ‘आइए 20 दिनों में ग्रीनलैंड के बारे में बात करते हैं’ ने इस डर को और बढ़ा दिया कि अमेरिका भविष्य में ग्रीनलैंड में दखल देने की योजना बना रहा है। फ्रेडरिकसेन ने यह भी कहा कि जब ट्रंप कहते हैं कि वह ग्रीनलैंड चाहते हैं, तो उन्हें गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, “हम ऐसी स्थिति स्वीकार नहीं करेंगे जहां हमें और ग्रीनलैंड को इस तरह से धमकी दी जाए।” इस संभावना को मानना पड़ रहानीलसन ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ग्रीनलैंड की तुलना वेनेजुएला से नहीं की जा सकती है। उन्होंने अपने समर्थकों से शांत और एकजुट रहने के लिए कहा। उन्होंने कहा, ‘हम ऐसी स्थिति में नहीं हैं जहां हमें लगता है कि रातों-रात देश पर कब्जा हो सकता है और इसीलिए हम इस बात पर जोर दे रहे हैं कि हम अच्छा सहयोग चाहते हैं।’ नीलसन ने आगे कहा, हमारी स्थिति ऐसी नहीं है कि अमेरिका आसानी से ग्रीनलैंड पर कब्जा कर ले। वहीं, डेनिश ब्रॉडकास्टर के राजनीतिक पत्रकार आस्क रोस्ट्रुप ने सोमवार को स्टेशन के लाइव ब्लॉग पर लिखा कि मेटे ने पहले ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जे के विचार को साफ तौर पर खारिज कर दिया होता। लेकिन अब बयानबाजी इतनी बढ़ गई है कि उन्हें इस संभावना को मानना पड़ रहा है।