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एनएसए अजीत डोभाल का युवाओं को संदेश: निर्णय लेने की क्षमता ही भविष्य तय करेगी, भारत हमेशा विकसित होगा

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल शनिवार को ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’ (वीबीवाईएलडी) के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए। इस दौरान अजीत डोभाल ने युवाओं से संवाद किया। डोभाल ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस देश को ऐसे मुकाम पर ले गए हैं कि अगर यह ऑटोपायलट पर भी चलता रहे, तो भी यह विकसित भारत बन जाएगा। एनएसए डोभाल ने युवाओं से संवाद करते हुए कहा, ‘मेरा कार्यक्षेत्र अलग है, मेरा अनुभव अलग है, और युवाओं के साथ उम्र का बहुत बड़ा अंतर है। आपमें से अधिकांश मुझसे 60 वर्ष से अधिक छोटे हैं, इसलिए मैं थोड़ा असमंजस में था कि आऊं या नहीं। मेरा जन्म स्वतंत्र भारत में नहीं, बल्कि स्वतंत्रता-पूर्व भारत में हुआ था। मेरी जवानी तो कब की बीत चुकी है।’ अपनी पूरी शक्ति का इस्तेमाल कर रहेअजीत डोभाल ने कहा, ‘आज इतना कुछ बदल गया है कि मुझे सब कुछ पता नहीं है। लेकिन एक बात समान है, चाहे आप इसे महसूस करें या न करें – एक छोटी सी बात जो आपके जीवन की दिशा तय करती है: निर्णय लेने की क्षमता। आप सभी हर दिन छोटे-बड़े फैसले लेते हैं, और जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ेगी, आपको हर कदम पर फैसले लेने होंगे। भारत विकसित होगा, यह निश्चित है।’ उन्होंने कहा, ‘दुनिया भर में चल रहे सभी संघर्ष और युद्ध इसलिए हैं क्योंकि कुछ देश दूसरों पर अपनी इच्छा थोपना चाहते हैं और इसके लिए अपनी पूरी शक्ति का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन अगर आप शक्तिशाली हैं, तो आप स्वतंत्र रहेंगे। अगर आत्मविश्वास नहीं है, तो सारी शक्ति और हथियार बेकार हैं। आज हमारे देश में ऐसा नेतृत्व होना हमारे लिए सौभाग्य की बात है। उनकी प्रतिबद्धता, समर्पण और कड़ी मेहनत हम सभी के लिए प्रेरणा है। जैसा कि नेपोलियन ने एक बार कहा था कि मैं एक भेड़ के नेतृत्व में 1000 शेरों से नहीं डरता, बल्कि एक शेर के नेतृत्व में 1000 भेड़ों से डरता हूं।’ यह संघर्ष कभी समाप्त नहीं होताविकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग में अजीत डोभाल ने कहा, ‘आप सभी उस भारत को देखेंगे जिसकी हम कल्पना कर रहे हैं। लेकिन भारत के साथ ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। जब जापान का उदय हो रहा था, तब पश्चिम में इस बात पर चर्चा शुरू हुई कि क्या कोई एशियाई देश पश्चिम से आगे निकल सकता है। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर को इस पर अध्ययन करने के लिए कहा गया और बाद में उन्होंने ‘विश्व अर्थव्यवस्था का इतिहास’ नामक पुस्तक लिखी, जिसमें पहली से उन्नीसवीं शताब्दी तक का इतिहास शामिल है।’ एनएसए ने युवाओं को बताया कि इस किताब में उन्होंने कहा कि 1700 वर्षों तक अधिकांश समय भारत, और कभी-कभी चीन, विश्व अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करते रहे, और दोनों मिलकर इसका 55-60 प्रतिशत हिस्सा बनाते थे। भारत ने कई सफलताएं देखी हैं। हम कभी विज्ञान, अर्थव्यवस्था और प्रौद्योगिकी के शिखर पर थे, लेकिन हमारा पतन हुआ क्योंकि कुछ भी स्थायी नहीं है। यह एक निरंतर संघर्ष है। राष्ट्रवाद और स्वयं राष्ट्र को मजबूत बने रहने के लिए निरंतर कोशिश की जरूरत होती है, और यह संघर्ष कभी समाप्त नहीं होता।’

तटरक्षक बल को मिलेगी बड़ी ताकत, स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ 5 जनवरी को होगा कमीशन

भारतीय तटरक्षक बल की ताकत में जल्द ही बड़ा इजाफा होने जा रहा है। अधिकारियों ने रविवार को जानकारी दी कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 5 जनवरी को तटरक्षक बल के पहले स्वदेशी रूप से तैयार प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ को बेड़े में शामिल करेंगे। इस 114.5 मीटर लंबे विशाल पोत के निर्माण में 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग हुआ है। 4,200 टन वजनी इस जहाज की गति 22 समुद्री मील से अधिक है और यह बिना रुके 6,000 समुद्री मील तक का सफर तय करने में सक्षम है। यह पोत समुद्री प्रदूषण नियमों को लागू करने, समुद्री कानूनों के पालन, खोज और बचाव कार्यों तथा भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाएगा। आर्थिक क्षेत्र की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगागोवा शिपयार्ड लिमिटेड ने दिसंबर में औपचारिक रूप से इसे तटरक्षक बल को सौंपा था। तटरक्षक बल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में बताया कि यह दो प्रदूषण नियंत्रण पोतों में से पहला है। उन्होंने जहाज का एक वीडियो भी साझा किया, जिसे इसे आईजीसी का सबसे बड़ा और उन्नत पोत बताया गया है। तटरक्षक बल के अनुसार, यह पोत तेल के रिसाव की जांच करने वाली मशीनों और रासायनिक डिटेक्टरों से लैस है। इसमें 30 मिमी की सीआरएन-91 तोप, एकीकृत अग्नि नियंत्रण प्रणाली वाली दो रिमोट-संचालित बंदूकें, स्वदेशी एकीकृत ब्रिज प्रणाली और स्वचालित बिजली प्रबंधन प्रणाली जैसी अत्याधुनिक तकनीक मौजूद है। साथ ही, इसमें आग बुझाने की उच्च क्षमता वाली बाहरी प्रणाली भी लगी है। अधिकारियों का कहना है कि इस जहाज के शामिल होने से भारत की समुद्री प्रदूषण से निपटने की क्षमता बढ़ेगी और रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशा में देश मजबूत होगा। भारतीय तटरक्षक बल का पहला स्वदेशी रूप से निर्मित प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ 5 जनवरी को कमीशन किया जाएगा। गोवा शिपयार्ड में निर्मित यह उन्नत जहाज समुद्री प्रदूषण से निपटने, खोज और बचाव कार्यों तथा विशेष आर्थिक क्षेत्र की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

आतंकवाद पर भारत का साफ संदेश: आत्मरक्षा में क्या करना है, यह भारत तय करेगा बोले एस. जयशंकर

भारतीय विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने शुक्रवार को अपने एक बयान में कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत आत्मरक्षा के अधिकार का इस्तेमाल करेगा और कोई भी दूसरा देश ये तय नहीं कर सकता कि भारत अपने बचाव में क्या करेगा और क्या नहीं। आईआईटी मद्रास में आयोजित ‘शस्त्र 2026- आईआईटी मद्रास टेक्नो-एंटरटेनमेंट फेस्ट’ के उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने ये बात कही। उन्होंने कहा कि भारत की सुरक्षा के लिए वो सबकुछ किया जाएगा, जो भी करने की जरूरत होगी। कार्यक्रम के दौरान डॉ. जयशंकर से भारत की विदेश नीति को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, ‘आपके पड़ोसी बुरे भी हो सकते हैं। अगर हम पश्चिम की तरफ देखें तो पता चलता है कि दुर्भाग्य से हमारे साथ भी ऐसा है। अगर कोई देश जानबूझकर और लगातार आतंकवाद फैलाता है तो हमारे पास भी आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा का अधिकार मौजूद है और हम उसका इस्तेमाल भी करेंगे, लेकिन ये हम पर है कि हम इसका कैसे इस्तेमाल करते हैं। कोई हमें ये नहीं बता सकता कि क्या करना चाहिए या क्या नहीं। अपनी सुरक्षा के लिए हम वो सबकुछ करेंगे, जो हमें करना चाहिए।’ पड़ोसी भी हमारे साथ आगे बढ़ेंगेविदेश मंत्री ने कहा, ‘कई साल पहले हम जल बंटवारा समझौते पर सहमत हुए थे, लेकिन अगर आप दशकों तक आतंकवाद फैलाते हैं तो ये अच्छे पड़ोस वाली बात नहीं है और अगर आप अच्छे पड़ोसी नहीं है तो आप को इसके फायदे भी नहीं मिलेंगे। आप ये नहीं कह सकते कि कृपया हमारे साथ पानी साझा करें, लेकिन हम आतंकवाद जारी रखेंगे। ये नहीं हो सकता।’ भारतीय विदेश मंत्री ने कहा, ‘जब हम अपने पड़ोसी देशों को देखते हैं, तो जो भी हमारे अच्छे पड़ोसी देश हैं, हम वहां निवेश करते हैं, उन देशों की मदद करते हैं। कोरोना के समय में भी हमारे पड़ोसियों को सबसे पहले वैक्सीन की मदद हमने ही की थी। श्रीलंका भी जब आर्थिक संकट से घिरा तो भारत ने ही उसकी मदद की और उसे चार अरब डॉलर की आर्थिक मदद दी। हमारे अधिकतर पड़ोसी देश ये मानते हैं कि भारत का विकास उनके लिए अच्छा है। अगर भारत विकास करेगा तो हमारे सभी पड़ोसी भी हमारे साथ आगे बढ़ेंगे। यही बात मैं बांग्लादेश के लिए कहना चाहता हूं।’

₹80 हजार करोड़ की रक्षा खरीद को मंजूरी, भारतीय सेना की ताकत और निगरानी क्षमता होगी कई गुना मजबूत

2025 भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की युद्धक क्षमता और निगरानी तंत्र को अभूतपूर्व मजबूती देने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद) ने करीब ₹80,000 करोड़ की लागत वाले सैन्य उपकरणों और हथियारों की खरीद के लिए ‘एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी’ प्रदान कर दी है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी सीमाओं पर सुरक्षा चुनौतियों के बीच स्वदेशी रक्षा इकोसिस्टम को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने पर जोर दे रहा है। इस मंजूरी का एक बड़ा हिस्सा आपातकालीन खरीद फ्रेमवर्क के तहत है, जिसका उद्देश्य सेना की तत्काल परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करना है। रिपोर्टों के अनुसार, इस निवेश का उपयोग कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जाएगा: इसमें एम्ब्रेयर आधारित एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम की खरीद और स्वदेशी ‘नेत्रा’ सिस्टम का एकीकरण शामिल है। इससे हवाई सीमाओं की निगरानी क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। T-90 टैंकों के ओवरहॉल और आधुनिकीकरण के प्रस्तावों को हरी झंडी मिली है, जो जमीनी युद्ध क्षमता के लिए रीढ़ की हड्डी माने जाते हैं। निवेशकों के भरोसे को और मजबूत कर रहा है ₹79,000 करोड़ का आवंटन केवल सैन्य मजबूती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय रक्षा विनिर्माण क्षेत्र के लिए एक बड़े उत्प्रेरक ) के रूप में कार्य करेगा। ‘बाय (इंडियन-IDDM)’ श्रेणी के तहत इन प्रस्तावों को प्राथमिकता मिलने से भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड भारत डायनेमिक्स लिमिटेड और मझगांव डॉक जैसे सार्वजनिक उपक्रमों के साथ-साथ निजी क्षेत्र की कंपनियों और स्टार्टअप्स को बड़े ऑर्डर मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्तर के निवेश से डिफेंस सप्लाई चेन में शामिल हजारों सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को रोजगार और तकनीकी विकास के नए अवसर प्राप्त होंगे। DAC की इस बैठक और संभावित मंजूरी की खबरों के बीच सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में रक्षा क्षेत्र के शेयरों में जोरदार तेजी देखी गई। मिश्रा धातु निगम के शेयरों में लगभग 11% का उछाल आया, जबकि मझगांव डॉक, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स और के शेयर भी 2-3% की बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, सरकार द्वारा रक्षा क्षेत्र में निरंतर पूंजीगत व्यय निवेशकों के भरोसे को और मजबूत कर रहा है।