ममता सरकार का बड़ा एक्शन, राजीव कुमार के रिटायर होते ही पुलिस महकमे में भारी फेरबदल

पश्चिम बंगाल सरकार ने पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल किया है। सरकार ने एक साथ 22 आईपीएस अधिकारियों का तबादला कर उन्हें नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। इस फेरबदल में कोलकाता के पुलिस कमिश्नर से लेकर कई जिलों के पुलिस अधीक्षक (एसपी) तक बदल दिए गए हैं। सबसे बड़ा बदलाव राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) पद पर हुआ है। राजीव कुमार के रिटायर होने के बाद वरिष्ठ अधिकारी पीयूष पांडे को कार्यवाहक डीजीपी बनाया गया है। वहीं, सुप्रतिम सरकार अब कोलकाता के नए पुलिस कमिश्नर होंगे। इससे पहले वह दक्षिण बंगाल के एडीजी पद पर तैनात थे। कोलकाता के पूर्व पुलिस कमिश्नर मनोज कुमार वर्मा को अब राज्य का सुरक्षा निदेशक नियुक्त किया गया है। धृतिमान सरकार मुर्शिदाबाद के नए एसपी होंगेएसटीएफ के एडीजी विनीत कुमार गोयल को अब एडीजी (कानून-व्यवस्था) बनाया गया है। उन्हें भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो का अतिरिक्त प्रभार भी मिला है। दूसरी ओर, जावेद शमीम अब एसटीएफ के एडीजी होंगे और उनके पास इंटेलिजेंस ब्यूरो का अतिरिक्त जिम्मा भी रहेगा। रेंज स्तर पर भी कई बदलाव हुए हैं। अमित पी जावलगी अब बारासात रेंज के आईजीपी होंगे। आलोक राजोरिया को बर्दवान रेंज का डीआईजी बनाया गया है। हाल ही में हिंसा का सामना करने वाले मुर्शिदाबाद जिले के एसपी कुमार सन्नी राज को हटाकर इंटेलिजेंस ब्यूरो में भेज दिया गया है। उनकी जगह धृतिमान सरकार मुर्शिदाबाद के नए एसपी होंगे। व्यवस्था को और मजबूत करने की कोशिश कीअन्य तबादलों में प्रतीक्षा झरखरिया को दार्जिलिंग का एसपी और दिनेश कुमार को कोलकाता पुलिस के नॉर्थ डिवीजन का डीसी बनाया गया है। दीपक सरकार अब डीसी साउथ की जिम्मेदारी संभालेंगे। प्रियब्रत रॉय को डीसी नॉर्थ और अरिश बिलाल को इंटेलिजेंस ब्यूरो में विशेष अधीक्षक नियुक्त किया गया है। देबजानी दत्ता अब सियालदह की रेलवे पुलिस अधीक्षक (एसआरपी) होंगी। सरकार ने इन तबादलों के जरिए प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत करने की कोशिश की है।
महाराष्ट्र की राजनीति में महा-शोक विमान हादसे में डिप्टी सीएम अजित पवार का निधन, बारामती के पास हुई दुर्घटना मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने की जांच की मांग

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का आज सुबह विमान हादसे में निधन हो गया। इस घटना ने देश के राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। इस मामले को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है। मीडिया से बातचीत में ममता बनर्जी ने कहा कि वह सामने आई खबरों से स्तब्ध हैं और इसे देश के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि अगर ऐसी घटनाएं सच साबित होती हैं, तो यह राजनीतिक नेतृत्व की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती हैं। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर वायरल उन दावों का भी उल्लेख किया, जिनमें कहा जा रहा था कि अजित पवार राजनीतिक रूप से अलग राह अपनाने पर विचार कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इन दावों के कारण कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। घटना की उचित जांच की जानी चाहिएममता बनर्जी ने जोर देते हुए कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष और विश्वसनीय जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठ रहे हैं, इसलिए इस मामले में पारदर्शी जांच बेहद जरूरी है। इससे पहले ममता ने एक्स पर इस घटना को लेकर संवेदन व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अजित पवार के अचानक निधन से मैं गहरे सदमे और स्तब्ध हूं। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और उनके सहयात्रियों की आज सुबह बरामती में हुए भीषण विमान हादसे में मौत हो गई। इस खबर से मुझे गहरा दुख महसूस हो रहा है। मैं उनके परिवार, उनके चाचा शरद पवार जी, और दिवंगत अजित जी के सभी मित्रों और समर्थकों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करती हूं। इस घटना की उचित जांच की जानी चाहिए। कठिन समय में संबल मिलने की कामनाजम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी इस घटना को लेकर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि एक प्रभावशाली नेता का इस तरह जाना देश के लिए बड़ी क्षति है। उन्होंने पूरे मामले में पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की मांग की, ताकि विमान हादसे के कारणों का स्पष्ट पता चल सके। अब्दुल्ला ने याद किया कि बॉम्बे में अपने कॉलेज के दिनों से मैं अजित दा को जानता हूं, जब मैं शरद पवार साहब और उनके परिवार के साथ वर्षा में रहता था। अजित दा एक सक्षम प्रशासक और कुशल राजनीतिक संगठनकर्ता थे, जिनकी कमी बहुत महसूस की जाएगी। मैं अपने पिता के साथ मिलकर शरद पवार साहब, सुप्रिया और पूरे परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि खबर बेहद दुखद है और इस मामले की गंभीरता से जांच होनी चाहिए। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और परिवार को इस कठिन समय में संबल मिलने की कामना की।
ममता बनर्जी से मिले अखिलेश यादव, बोले“भाजपा के हमलों का डटकर मुकाबला सिर्फ दीदी ही कर सकती

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की। यह मुलाकात कोलकाता में राज्य सचिवालय ‘नबन्ना’ में हुई। अखिलेश यादव अपनी पत्नी और सांसद डिंपल यादव के साथ एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने कोलकाता आए थे। दोपहर करीब 1:40 बजे उन्होंने मुख्यमंत्री से उनके दफ्तर में बातचीत की। मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने ममता बनर्जी की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि इस देश में सिर्फ दीदी ही भाजपा के हमलों का डटकर मुकाबला कर सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ममता बनर्जी ने जांच एजेंसी ईडी (ईडी) को हरा दिया है और वह आने वाले समय में भाजपा को भी हराएंगी। अखिलेश कहा, BJP अभी तक पेन ड्राइव खोने का दर्द नहीं भूल पाई है, यह कथित तौर पर उन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के संदर्भ में था जिन्हें सीएम छापे के दौरान एजेंसी के तलाशी अभियान परिसर से बाहर लाई थीं। चुनाव में धांधली का आरोप लगायाअखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि वह समाज में फूट डालने की राजनीति करती है। उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभ्यास पर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा इसके जरिए अपने वोट बढ़ाने के बजाय विरोधियों के वोट कम करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। अखिलेश ने कहा कि बंगाल, बिहार और यूपी जैसे राज्यों में यह अभ्यास सिर्फ विपक्ष को कमजोर करने का एक जरिया बन गया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कोलकाता में ममता बनर्जी से मुलाकात कर उनकी तारीफ की। उन्होंने कहा कि देश में सिर्फ दीदी ही भाजपा का मुकाबला कर सकती हैं। अखिलेश ने भाजपा पर जांच एजेंसियों के गलत इस्तेमाल और चुनाव में धांधली का आरोप लगाया।
“भाजपा में ‘नितिन नवीन’ युग की शुरुआत!” पद संभालते ही अपनों के निशाने पर अध्यक्ष, उम्र और अनुभव पर छिड़ी जंग

भाजपा के नव निर्वाचित अध्यक्ष नितिन नवीन ने जिम्मेदारी संभाल ली है। पद ग्रहण करने से पहले उन्होंने सभी बड़े नेताओं का आशीर्वाद लिया। इन सबके बीच उनका कुर्सी संभालना कुछ नेताओं को रास नहीं आया है। इस तरह के नेता नितिन नवीन उम्र और अनुभव को लेकर बातें कर रहे हैं। एक नेता जी नितिन नवीन के बारे में चर्चा पर इतना बिदक गए कि बोले वह क्या कर लेंगे? भाजपा के भीतर एक चर्चा यह भी है कि नितिन नवीन के बहाने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भाजपा अध्यक्ष पद को लेकर चले आ रहे संकट को बड़ी चतुराई से टाल दिया है। हालांकि दूसरे गुट की उम्मीद अभी भी कायम है। बोलते नहीं। बस धीरे से काम कर देतेपश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 2 फरवरी को राज्य का अंतरिम बजट पेश करेंगी। इस बार के बजट पर चुनावी चुनौतियों को देखकर ममता बनर्जी का खास ध्यान है। वह युवा वर्ग को खास तौर पर ध्यान में रख सकती हैं। हालांकि भाजपा की अग्निमित्रा पॉल कहती हैं कि ममता बनर्जी अब चाहे जो कर लें। इस बार वह बंगाल का मिजाज भांपने में चूक गई हैं। ममता ने इस बार तृणमूल के दूसरे नेताओं को काफी अहम जिम्मेदारी दी है। उन्होंने पार्टी के नेताओं से भी बयान पर नियंत्रण रखने और सोच समझकर बोलने के लिए कहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जदयू के सुप्रीम लीडर हैं, लेकिन अब थोड़ा शांत रहते हैं। केन्द्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह कांटा सहित मछली को निगल जाने की राजनीति में पारंगत माने जाते हैं। वहीं, नीतीश कुमार के दूसरे वफादार भी हैं। कुछ हाशिए पर धकेल दिए हैं। उनमें मुख्य धारा में लौटने की छटपटाहट है। इस छटपटाहट के पीछे आगामी राज्यसभा चुनाव भी है। ऐसे में कई दौर का शीतयुद्ध चल रहा है। आरसीपी सिंह भी पार्टी में आने के लिए बेताब हैं। श्याम रजक ने यह कहकर मुश्किलें पैदा कर दी हैं कि आरसीपी पार्टी से गए ही कब थे? इधर दिल्ली में ललन सिंह की टीम ने केसी त्यागी का पत्ता काटने की कोशिश की है। हालांकि नीतीश कुमार राजनीति के चतुर खिलाड़ी हैं। बोलते नहीं। बस धीरे से काम कर देते हैं। ऐसे में सब समय की धार देख रहे हैं। रणनीतिकारों को हैरत में डाल दियाअसम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने केन्द्रीय भाजपा को भरोसा दिया है कि राज्य में पार्टी की 80 से अधिक सीटें आएंगी। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और भंवर जितेन्द्र सिंह की टीम इस बार बड़े दावे कर रही है। कांग्रेस के सांसद गौरव गगोई को कोच-राजबोंगशी, ताई-अहोम, चुटिया, मटक, मोरान और चाय जनतजातियों की नाराजगी से काफी उम्मीदें हैं। तृणमूल की एक राज्यसभा सांसद का कहना है कि सीएए-एनआरसी को लेकर जनता के एक बड़े वर्ग में बड़ी नाराजगी है। इन सबके बीच भाजपा के ही एक नेता ने अपनी पार्टी के रणनीतिकारों को हैरत में डाल दिया। उन्होंने साफ कहा कि बिस्वा सरमा जितने अच्छे नेता हैं, उससे बड़े शो-मैन। इसलिए सावधानी हटी तो दुर्घटना हटी।
वोटर लिस्ट विवाद पर ममता बनर्जी का EC पर बड़ा हमला, लिखा पांचवां पत्र

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर एक बार फिर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा, ‘आयोग अपने ही 20 वर्षों के वैधानिक सुधारों की अनदेखी कर रहा है, जिससे मतदाताओं को अपनी पहचान दोबारा स्थापित करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।’ बता दें कि मुख्यमंत्री ने इससे पहले भी एक अन्य पत्र में निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के समक्ष कई गंभीर मुद्दे उठाए थे। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को सोमवार को एक और पत्र लिखा है। यह उनका पांचवां पत्र है। इसमें उन्होंने वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (एसआईआर) प्रक्रिया में हो रही गड़बड़ियों पर चिंता जताई है। संविधान की भावना के खिलाफ बतायाममता बनर्जी का दावा है कि 2002 की वोटर लिस्ट को डिजिटल बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल किया गया, जिससे गंभीर गलतियां हुई हैं। उनका कहना है कि इन तकनीकी खामियों की वजह से असली वोटरों को गलत तरीके से ‘विसंगति’ वाली श्रेणी में डाल दिया गया है। इससे आम लोगों को भारी परेशानी हो रही है।मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि वह अपनी ही पुरानी प्रक्रियाओं की अनदेखी कर रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों में जो सुधार हुए थे, उन्हें दरकिनार कर वोटरों को फिर से अपनी पहचान साबित करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने इसे मनमाना और संविधान की भावना के खिलाफ बताया। सुधारों की अनदेखी करने के आरोप लगाएबनर्जी ने यह भी कहा कि एसआईआर के दौरान जमा किए गए दस्तावेजों की कोई रसीद नहीं दी जा रही है। उन्होंने सुनवाई प्रक्रिया को पूरी तरह मशीनी और संवेदनहीन बताया। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया मानवीय संवेदनाओं से खाली है और लोकतंत्र की नींव को कमजोर कर रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को नया पत्र लिखा है। उन्होंने निर्वाचन आयोग पर सुधारों की अनदेखी करने के आरोप लगाए हैं। सीएम ममता ने कहा कि आयोग के रूख के कारण मतदाताओं को अपनी पहचान दोबारा सिद्ध करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
चुनाव आते ही ईडी सक्रिय क्यों? कपिल सिब्बल का केंद्र पर हमला, बोले विपक्ष को डराने का हथियार बनी एजेंसी

पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कार्रवाई को लेकर राज्य से लेकर देशभर की राजनीति में गर्माहट तेज है। इसी बीच इस कार्रवाई को लेकर राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि चुनाव आते ही जांच एजेंसियों को अचानक दस्तावेजों की याद आ जाती है और इसका मकसद सिर्फ विपक्षी नेताओं को परेशान करना होता है। पत्रकारों से बातचीत के दौरान सिब्बल ने पश्चिम बंगाल में ईडी की कार्रवाई का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में जहां भाजपा चुनाव नहीं जीत सकती, वहां ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को परेशान करने के लिए ईडी का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि कोई भी जांच एजेंसी किसी दफ्तर में जाकर सभी फाइलें कैसे ले जा सकती है। अगर कोयला घोटाले की जांच करनी है तो उससे जुड़ी फाइलें लें, लेकिन हर फाइल ले जाना किस अधिकार में है? किसी भी जांच एजेंसी को ऐसा करने का हक नहीं है। यूपीए सरकार ने ईडी को इतनी खुली छूट नहीं दीकपिल सिब्बल ने ईडी को एक सर्वव्यापी एजेंसी की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य कानून लागू करना नहीं, बल्कि विपक्षी नेताओं को डराना और परेशान करना है। उन्होंने केंद्र और राज्य के बीच बढ़ते टकराव का जिक्र करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में राज्य और केंद्र के बीच जानबूझकर विवाद पैदा किया जा रहा है। सिब्बल ने आगे कहा कि चुनाव के समय ही ऐसी कार्रवाइयां क्यों तेज हो जाती हैं। कोयला घोटाला कोई नया मामला नहीं है, यह कई वर्षों से चल रहा है। फिर अब ही अचानक कार्रवाई क्यों? राज्यसभा सांसद ने यूपीए सरकार के कार्यकाल (2004 से 2014) को याद करते हुए कहा कि उस समय इस तरह की खबरें अखबारों में नहीं आती थीं। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार ने ईडी को इतनी खुली छूट नहीं दी थी। उस दौर में किसी भी राजनीतिक पार्टी या नेता के खिलाफ झूठी जानकारी के आधार पर कार्रवाई नहीं की गई। केंद्र सरकार पर निशाना साधासिब्बल ने आरोप लगाते हुए कहा कि आज ईडी एक ऐसी एजेंसी बन गई है जो देश में कहीं भी, कभी भी पहुंच जाती है। उन्होंने कहा कि जब भी कहीं कोई एफआईआर दर्ज होती है, ईडी वहां पहुंच जाती है और खासतौर पर चुनाव के समय उसकी सक्रियता बढ़ जाती है। इससे देश की संघीय व्यवस्था (फेडरल स्ट्रक्चर) को नुकसान पहुंच रहा है। ईडी की कार्रवाई को लेकर जहां एक ओर पश्चिम बंगाल की राजनीति में गर्माहट तेज है। वहीं दूसरी ओर अब राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने ईडी की कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय ही जांच एजेंसियां सक्रिय होती हैं और इसका मकसद विपक्षी नेताओं को परेशान करना है।
पश्चिम बंगाल में BJP का चुनावी शंखनाद, दो दिवसीय दौरे पर जेपी नड्डा ” बैठकों से तेज होगी चुनावी रणनीति”

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा गुरुवार को पश्चिम बंगाल के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे। इस दौरान जेपी नड्डा कई बैठकों में हिस्सा लेंगे। इसके साथ ही टीएमसी शासित राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी की तैयारियों को तेज करेंगे। पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य, केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार और पार्टी की राज्य इकाई के अन्य नेताओं ने कोलकाता हवाई अड्डे पर नड्डा का स्वागत किया। अपनी यात्रा के दौरान नड्डा भाजपा के जिला अध्यक्षों, पार्टी के विभिन्न विभागों के संयोजकों और ‘प्रवासी कार्यकर्ताओं’ को संबोधित करने वाले हैं। वायवीय ट्यूब प्रणाली का भी उद्घाटन करेंगेपार्टी ने बताया कि नड्डा पश्चिम बंगाल भाजपा की कोर टीम के साथ भी बैठक करेंगे। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा अध्यक्ष गुरुवार शाम कोलकाता के तंगरा इलाके में पार्टी की ओर से आयोजित ‘डॉक्टर्स मीट’ में हिस्सा लेंगे। नड्डा शुक्रवार को कोलकाता के चित्तरंजन राष्ट्रीय कैंसर संस्थान (सीएनसीआई) का दौरा करेंगे। वे नादिया जिले के एम्स-कल्याणी में विकिरण ऑन्कोलॉजी, ट्रॉमा और आपातकालीन चिकित्सा विभाग और वायवीय ट्यूब प्रणाली का भी उद्घाटन करेंगे। अन्य के खाते में 4 सीटें गईआगामी चुनावों के लिए भाजपा की तैयारियां पूरे जोर-शोर से चल रही हैं। इसे लेकर पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह राज्य में ममता बनर्जी सरकार को सत्ता से बेदखल करने के लिए पार्टी के चुनावी अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल की अपनी हालिया यात्रा के दौरान अमित शाह ने तृणमूल कांग्रेस शासन के तहत भ्रष्टाचार, कुशासन और घुसपैठियों के मुद्दों को उठाकर विधानसभा चुनावों का माहौल तैयार किया था। उन्होंने यह भी दावा किया था कि भाजपा दो-तिहाई बहुमत से विजयी होगी। गौरतलब है कि 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को 213 सीटों पर जीत हासिल करने के साथ स्पष्ट बहुमत मिला था। वहीं, भाजपा 77 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी पार्टी बनी थी। कांग्रेस और वाम दलों का गठबंधन एक भी सीट नहीं जीत सका था। वहीं, अन्य के खाते में 4 सीटें गई थीं।
एसआईआर पर ममता बनर्जी का चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप, कहा– भाजपा आईटी सेल के ऐप से हो रहा है अवैध काम

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आयोग राज्य में एसआईआर अभ्यास को कराने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आईटी सेल के बनाए मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल कर रहा है। मुख्यमंत्री बनर्जी दक्षिण 24 परगना जिले के सागर द्वीप में गंगासागर मेले की तैयारियों का जायजा लेने के लिए दो दिन की यात्रा पूरी करने के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रही थीं। इस दौरान उन्होंने कहा, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान चुनाव आयोग ‘हर तरह के गलत तरीके’ अपना रहा है। मतदाताओं की परेशानियों को काफी बढ़ा दियाउन्होंने कंहा, एसआईआर कराने के लिए चुनाव आयोग हर तरह के गलत कदम उठा रहा है। वह योग्य मतदाताओं को मृत घोषित कर रहा है और बुजुर्ग, बीमार और असहाय लोगों को सुनवाई में आने के लिए मजबूर कर रहा है। वह इस काम के लिए भाजपा के आईटी सेल के बनाए मोबाइल एप का इस्तेमाल कर रहा है। यह अवैध, असांविधानिक और अलोकतांत्रिक है। ऐसे नहीं चल सकता। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सुप्रीमो की ओर से यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब उनकी पार्टी के सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में जारी एसआईआर को कराने के लिए आयोग ने मनमाने और प्रकिया के खिलाफ कदम उठाए हैं। टीएमसी ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया ने राज्य के योग्य और वास्तविक मतदाताओं की परेशानियों को काफी बढ़ा दिया है। एसआईआर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगीममता बनर्जी ने कहा, मैं जनता से अपील करती हूं कि एसआईआर में भाग लेते समय सतर्क रहें। जो लोग जरूरतमंद हैं, उनके साथ खड़े रहें। उन्हें मेरा समर्थन करने की जरूरत नहीं है, केवल लोगों का साथ दें, जो इस प्रक्रिया की वजह से परेशानी में हैं। मुख्यमंत्री ने सोमवार को कहा था कि वह राज्या में मतदाता सूची के एसआईआर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि डर, उत्पीड़न और प्रशासनिक मनमानी के कारण मौतें हो रही हैं और लोगों को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा है।
सागर द्वीप से ममता का बड़ा हमला, SIR को बताया अमानवीय, भाजपा पर झूठ और वोटर उत्पीड़न का आरोप

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को सागर द्वीप के लिए 1670 करोड़ की लागत वाले पुल की नींव रखी। इस दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर जमकर हमले किए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा किसी भी धर्म में विश्वास नहीं करती है, वह केवल झूठ फैलाने में विश्वास रखती है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान गंभीर रूप से बीमार लोगों को भी अपने वैध मतदाता होने का प्रमाण देने के लिए कतारों में खड़ा होने के लिए मजबूर किया गया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को कहा कि वह राज्य में एसआईआर के दौरान अपनाए गए ‘अमानवीय’ तरीके के खिलाफ अदालत का रुख करेंगी। दक्षिण 24 परगना जिले के सागर द्वीप में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया से जुड़ी चिंताओं, परेशानियों और प्रशासन की मनमानी के कारण कई लोगों की मौत हुई है और कई लोग अस्पताल में भर्ती हुए हैं। विधानसभा चुनावों से पहले चिंता का कारण बन गईउन्होंने कहा, एसआईआर के कारण लोगों के साथ किए गए अमानवीय व्यवहार और इतनी मौतों के खिलाफ हम कल अदालत जा रहे हैं। ममता बनर्जी ने कहा, अगर जरूरत पड़ी तो मैं सुप्रीम कोर्ट भी जाऊंगी और एक आम नागरिक के तौर पर इस अमानवीय प्रक्रिया के खिलाफ गुहार लगाऊंगी। मैं खुद एक प्रशिक्षित वकील भी हूं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी ठोस वजह के मतदाता सूची से नाम मनमाने तरीके से हटाए जा रहे हैं, जिससे एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया विधानसभा चुनावों से पहले चिंता का कारण बन गई है। ममता बनर्जी ने यह भी दावा किया किमुख्यमंत्री ने दावा किया कि गंभीर रूप से बीमार लोगों और वरिष्ठ नागरिकों को भी अपने सही मतदाता होने का सबूत देने के लिए लंबी कतारों में खड़ा होने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने पूछा, अगर किसी ने भाजपा नेताओं के बूढ़े माता-पिता को अपनी पहचान साबित करने के लिए लाइन में खड़ा कर दिया, तो उन्हें कैसा लगेगा। ममता बनर्जी ने यह भी दावा किया कि एसआईआर शुरू होने के बाद से डर के कारण कई लोगों की मौत हो चुकी है और कई अन्य लोग अस्पताल में भर्ती हैं। पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा पर हमले किए। उन्होंने एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि बीमार और वरिष्ठ नागरिकों को कतार में खड़ा होने को मजबूर किया जा रहा है।